मेरा नाम राहुल है। उम्र तेईस साल। पुणे में इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी करके एक प्राइवेट कंपनी में काम करता हूँ। घर में माँ और मैं रहते हैं। पापा पाँच साल पहले ही चल बसे। माँ का नाम कविता है। उम्र पैंतालीस साल। गोरी, सुडौल शरीर, भारी चूचियाँ, गोल गांड और जब साड़ी पहनती हैं तो पूरा बदन निखर आता है। पापा के जाने के बाद माँ ने खुद को बहुत संभाला, लेकिन रात के अकेलेपन में उनकी प्यास साफ झलकती थी।
मेरी गर्लफ्रेंड का नाम प्रिया है। उम्र बाईस साल। कॉलेज टाइम से साथ हैं। छोटी, गोरी, टाइट बॉडी, छोटी-छोटी चूचियाँ और गोल गांड। प्रिया बहुत ओपन मिंडेड है। हम दोनों नियमित रूप से सेक्स करते थे। कभी उसके पीजी में, कभी मेरे घर पर जब माँ बाहर होतीं।
प्रिया मेरे घर आने-जाने लगी थी। माँ उसे अच्छे से जानती थीं। एक दिन प्रिया ने हँसते हुए कहा, “तेरी मम्मी कितनी हॉट हैं यार। कभी-कभी लगता है कि तू मुझसे ज्यादा उन्हें देखता है।” मैं शर्मा गया था। लेकिन प्रिया ने बात आगे बढ़ाई। “सच बता… कभी सोचा है अपनी माँ के बारे में?”
मैंने मना किया, लेकिन प्रिया ने छोड़ना नहीं। धीरे-धीरे वह माँ के बारे में गंदी बातें करने लगी। “तेरी मम्मी की गांड देख कर मेरी भी चूत गीली हो जाती है। काश तू एक दिन उन्हें चोद दे।” पहले मुझे गुस्सा आया, फिर अजीब उत्तेजना होने लगी।
एक हफ्ते बाद प्रिया मेरे घर आई जब माँ किराने के सामान लेने गई हुई थीं। हम दोनों मेरे कमरे में थे। प्रिया ने अचानक कहा, “आज रात मैं तेरी मम्मी को तैयार करूँगी। तू तैयार रह।”
मैंने सोचा वह मजाक कर रही है। लेकिन शाम को माँ लौटीं तो प्रिया ने बहुत नॉर्मल तरीके से बातें कीं। खाने के बाद प्रिया ने माँ से कहा, “आंटी, राहुल को तो मैं संभाल लेती हूँ। आप आराम से सो जाइए।” माँ मुस्कुरा दीं और अपने कमरे में चली गईं।
रात के करीब बारह बजे प्रिया मेरे कमरे में आई। उसने दरवाजा बंद किया और धीरे से बोली, “उठ… आज तेरी रंडी माँ की चूत तुझे मिलने वाली है।”
मैंने पूछा, “तू पागल हो गई है क्या?”
प्रिया ने मेरी लंड पैंट के ऊपर से पकड़ ली। “मैंने तुझसे कहा था न… मैंने माँ से बात कर ली है। वह तैयार हैं। बस तू हिम्मत कर।”
मेरा दिल जोर-जोर से धड़कने लगा। प्रिया ने मेरा हाथ पकड़ा और माँ के कमरे की तरफ ले गई। दरवाजा आधा खुला था। अंदर हल्की रोशनी थी। माँ बिस्तर पर बैठी थीं। साया पहना हुआ था। प्रिया ने अंदर धकेल दिया।
माँ ने हमें देखा। उनकी आँखों में शर्म थी, लेकिन इंकार नहीं। प्रिया ने साफ कहा, “आंटी, राहुल आपकी प्यास बुझाने के लिए तैयार है। आप भी तैयार हैं न?”
माँ ने धीरे से सिर हिलाया। “प्रिया… यह गलत है बेटा…”
प्रिया ने कहा, “गलत कुछ नहीं आंटी। आप अकेली हैं। राहुल जवान है। आज रात सब सही होगा।”
प्रिया ने माँ का साया धीरे से ऊपर किया। माँ की भारी चूचियाँ बाहर आ गईं। निप्पल सख्त थे। प्रिया ने मेरा हाथ पकड़कर माँ की चूची पर रख दिया। “छू… अपनी माँ की चूची छू।”
मेरा हाथ काँप रहा था। मैंने चूची मसल दी। माँ की साँस तेज हो गई। प्रिया ने खुद माँ की दूसरी चूची मुँह में ले ली और चूसने लगी। माँ कराह उठीं। “आह्ह… प्रिया… यह क्या कर रही हो…”
प्रिया ने माँ को लिटा दिया। साया पूरी तरह हटा दिया। माँ नंगी थीं। घनी झाड़ी वाली चूत, मोटी फाँक। प्रिया ने मेरी तरफ देखा। “अब तू चाट… अपनी माँ की चूत चाट।”
मैं घुटनों के बल बैठा और जीभ माँ की चूत पर रख दी। गरम और पहले से गीली। मैंने क्लिटोरिस चूसा, जीभ अंदर डाली। माँ की टाँगें फैल गईं। प्रिया उनके बगल में लेटकर उनकी चूचियाँ चूस रही थी और गंदी बातें कह रही थी, “देखो आंटी… आपका बेटा आपकी चूत चाट रहा है। कैसा लग रहा है?”
माँ शर्म से कराह रही थीं। “आह्ह… राहुल… बेटा… मत…” लेकिन उनकी कमर मेरे मुँह की तरफ उठ रही थी। मैंने बीस मिनट तक उनकी चूत चाटी। माँ एक बार जोर से झड़ गईं। पानी मेरे मुँह पर लग गया।
प्रिया ने मेरी पैंट खोली। मेरी लंड बाहर निकली। उसने लंड पकड़कर माँ की चूत के मुँह पर लगा दी। “अब डाल… अपनी रंडी माँ की चूत में डाल।”
मैंने धीरे से धक्का दिया। माँ की चूत तंग थी। आधा अंदर गया। माँ ने नाखून मेरे कंधे में गाड़ दिए। “आह्ह्ह… बड़ा है… धीरे…” प्रिया उनके होठों पर चुंबन कर रही थी और कह रही थी, “पूरा ले लो आंटी… अपने बेटे की पूरी लंड ले लो।”
मैंने पूरी लंड अंदर डाल दी। फिर धीरे-धीरे पेलना शुरू किया। माँ की चूचियाँ उछल रही थीं। प्रिया ने एक चूची मुँह में ले ली और दूसरी को मसल रही थी। “जोर से चोद राहुल… अपनी माँ को रंडी की तरह चोद।”
मैंने गति तेज कर दी। थप्पड़ की आवाज गूंजने लगी। माँ अब खुलकर कराह रही थीं। “हाँ… चोद… अपनी माँ को चोद… फाड़ दे चूत…” प्रिया उनके मुँह में उँगलियाँ डाल रही थी। मैंने माँ की टाँगें कंधों पर रखीं और गहराई तक ठोकने लगा। माँ दो बार झड़ गईं। मैंने भी अंदर ही वीर्य छोड़ दिया।
थोड़ी देर बाद प्रिया ने कहा, “अब माँ को कुत्ते की पोजीशन में कर।” मैंने माँ को घुटनों के बल कर दिया। प्रिया उनके सामने बैठ गईं और उनकी चूचियाँ चूसने लगीं। मैंने पीछे से लंड चूत में डाली और जोर-जोर से पेलने लगा। प्रिया माँ से कह रही थी, “बोलो आंटी… मैं रंडी माँ हूँ… अपने बेटे से चुदवा रही हूँ।” माँ ने शर्म के मारे आँखें बंद कर लीं लेकिन मुँह से निकल गया, “हाँ… मैं रंडी माँ हूँ… अपने बेटे की लंड ले रही हूँ…”
उस रात हमने माँ को तीन बार चोदा। प्रिया बीच-बीच में माँ की चूत चाटती, उनकी चूचियाँ चूसती और मुझे उकसाती रहती। आखिर में प्रिया ने खुद माँ की चूत से मेरा वीर्य साफ किया और माँ से चुमवाया।
सुबह होते-होते माँ थककर सो गईं। प्रिया मेरे कान में बोली, “देखा… मैंने तुझे तेरी रंडी माँ की चूत दिलवा दी। अब जब चाहे लेना। मैं व्यवस्था कर दूँगी।”
उस रात के बाद प्रिया नियमित रूप से माँ को तैयार करने लगी। कभी वह माँ को मेरे कमरे में ले आती, कभी खुद माँ के कमरे में हमें छोड़ देती। माँ अब खुलकर “रंडी माँ” बन चुकी थीं। और प्रिया… वह गर्लफ्रेंड जो अपनी बॉयफ्रेंड की माँ की चूत अपने यार को दिलवाती थी।
