आंटी को मुँह में लंड लेने का एक्सरसाइज सिखाया

मेरा नाम रिशभ है। उम्र उनतीस साल।

जिम का हेड ट्रेनर हूँ। बॉडी मेरी पहचान है। चौड़े कंधे, बाँहों पर मोटी-मोटी नसें, सख्त छाती और पेट पर साफ कट। यहाँ आने वाली लड़कियाँ, नई-नवेली भाभियाँ और अकेली आंटी… सब मेरी तरफ देखती हैं। और मैंने कई को सिर्फ़ वेट नहीं उठवाया। कई को रात में लिटाया भी है। अनुभव है। औरत की आँखों में छुपी भूख, उसके चलने का अंदाज, पसीने की गंध, साँसें तेज होना… सब कुछ पढ़ लेता हूँ।

फिर राधिका आई।

पहली नज़र में ही मेरी आँखें उसकी गाँड पर जाकर अटक गईं। छत्तीस साल की है। लेकिन बॉडी ऐसी जैसे कोई प्यासी, पकी हुई माल हो। गेहुँआ चमकदार रंग। लंबे घने बाल। भरे हुए होंठ। गहरी आँखें। और शरीर… भारी-भारी गोल स्तन जो स्पोर्ट्स ब्रा में भी पूरी तरह दबे नहीं थे। हर कदम पर हिल रहे थे। कमर पतली और सुडौल। और गाँड… कमबख्त इतनी गोल, भारी और उठी हुई कि ट्रैक पैंट में भी साफ नक्शा दिख रहा था। जाँघें मोटी और मुलायम। चलते समय गाँड का धीरे-धीरे लचकीला हिलना देखकर मेरे लंड में हल्का सा जोर आ गया।

वह मेरे पास आई। थोड़ी हिचकिचाहट के साथ। “नमस्ते। मैं राधिका। नई जॉइन किया है।” “रिशभ। आपका ट्रेनर। बॉडी अच्छी है। मजे की बॉडी है। सही से ट्रेन किया तो और निखर जाएगी। स्तन, गाँड सब जगह परफेक्ट है।”

मैंने आँखें नहीं हटाईं। जानबूझकर स्तनों पर, पतली कमर पर, फिर उस भारी गाँड पर नज़र घुमाई। वह शरमा गई लेकिन नज़रें बचाते-बचाते मेरी तरफ देख रही थी। गालों पर लालिमा आ गई।


पहले हफ्ते में मैंने जानबूझकर टच और गंदी बातें बढ़ा दीं।

स्क्वाट करवाते समय मैं ठीक उसके पीछे खड़ा होता। दोनों हाथ उसके कूल्हे पर रखकर फॉर्म सुधारता। “और नीचे बैठ… गाँड पीछे निकाल… पूरी निकाल राधिका। ऐसी गोल गाँड छुपाने वाली नहीं होती। वजन एड़ी पर ले।”

एक दिन वह फ्लैट बेंच पर लेटी चेस्ट प्रेस कर रही थी। उसके भारी स्तन हर रेप के साथ जोर-जोर से उछल रहे थे। स्पोर्ट्स ब्रा के ऊपर से गोलाई साफ नजर आ रही थी। मैं ऊपर झुककर बोला, “साँस कंट्रोल से ले… नहीं तो ये और भारी हो जाएँगे। फिर पकड़ने में मजा आएगा। मुँह में लेने लायक स्तन हैं।” वह मेरी तरफ देखकर बोली, “रिशभ सर… आप बहुत गंदा बोलते हो।” “गंदा नहीं। सीधा बोलता हूँ। तुम्हारे स्तन देखकर मुँह में पानी आ जाए ऐसा है। पति रोज चूसता होगा इन्हें।”

दूसरी बार डेडलिफ्ट के दौरान मैंने पीछे से आकर उसकी कमर पकड़ ली। उँगलियाँ गाँड की दरार तक सरका दीं। “बॉडी सीधी रख… गाँड पर फोकस कर। इतनी गोल और नरम गाँड पर हाथ रखने का मन करता है राधिका।” उसकी साँसें तेज हो गईं। गर्दन लाल हो गई। कुछ नहीं बोली।

तीसरी बार कार्डियो के बाद वह पूरी तरह पसीने से तर थी। टाइट टॉप शरीर से चिपक रहा था। निप्पल हल्के से उभर आए थे। पसीने की चमक से बॉडी और सेक्सी लग रही थी। मैंने तौलिया देते हुए कहा, “पसीना तुम्हें और सेक्सी बना रहा है। टॉप पूरी तरह चिपक गया है। निप्पल तक साफ दिख रहे हैं। मन कर रहा है यहीं चूस लूँ।” “रिशभ सर!” वह आवाज में शरमाहट और हल्की उत्तेजना लेकर बोली। “क्या? सच तो सच है। छत्तीस की हो लेकिन ये बॉडी तो किसी रंडी वाली है। गोल स्तन, पतली कमर, भारी गाँड… पति रोज दोनों होल फाड़ता होगा।”

चौथी बार जिम में भीड़ कम थी तो मैंने उसके कान के बहुत पास जाकर धीमे लेकिन साफ स्वर में कहा, “जब तुम स्क्वाट करती हो तो पीछे से देखता हूँ तो लंड खड़ा हो जाता है। इतनी मजेदार और गोल गाँड कभी नहीं देखी। चोदने लायक गाँड है।” वह लाल हो गई। “यहाँ जिम है… ऐसे मत बोला करो। कोई सुन लेगा।” “सुनने वाला कोई है नहीं। और लंड तो तुम्हारी गाँड देखकर खुद ही खड़ा हो जाता है।”

पाँचवीं बार मैंने और खुलकर बोला, “तुम्हारे पति को इतनी गरम और पकी आंटी मिल गई है घर में। रोज गाँड और चूत दोनों फाड़ता होगा। मुँह में भी लेता होगा।” इस बार वह चुप रही। लेकिन गाल पूरी तरह लाल थे। साँसें तेज चल रही थीं। टॉप के अंदर निप्पल सख्त हो गए थे।


एक दिन वह काफी लेट आई। शाम के आठ बज रहे थे। जिम पूरी तरह खाली। लाइट्स आधी बंद। सिर्फ़ हम दोनों। मैंने सेशन में हिप थ्रस्ट ज्यादा करवाए। वह लेटी थी और हर रेप के साथ उसकी भारी गाँड मेरे चेहरे के सामने जोर-जोर से ऊपर उठ रही थी। मैं जानबूझकर उसकी आँखों में देखकर बोला, “और ऊपर उठा… ऐसी गाँड तो चोदने लायक होती है राधिका। मुँह में लंड लेने लायक मुँह है तुम्हारा।”

सेशन खत्म होने के बाद वह थककर बेंच पर बैठ गई। पसीने से पूरी तर। टॉप चिपक रहा था। भारी स्तनों का पूरा शेप और निप्पल साफ दिख रहे थे। मैं पास जाकर बैठ गया। हमारे घुटने छू रहे थे। मेरा लंड पहले से ही आधा तना हुआ था।

“आज बहुत थक गई लग रही हो।” “हाँ… बॉडी दर्द कर रही है।”

थोड़ी देर सन्नाटा रहा। फिर उसने आँखें झुकाकर बहुत धीमे स्वर में कहा, “घर में भी दर्द रहता है रिशभ। लेकिन वह दर्द अलग किस्म का है।”

“पति चोदता नहीं क्या?” मैंने सीधा और गंदा पूछा।

वह हल्की मुस्कान के साथ बोली। आँखें नम हो आईं। “बारह साल हो गए शादी को। अब तो छूता तक नहीं सही से। जब कभी करता है तो पाँच मिनट में पानी छोड़कर सो जाता है। कोई भूख नहीं, कोई गंदगी नहीं, कोई गाली नहीं। चूत तड़पती रहती है रात भर… लेकिन अब मांगना भी शर्म आने लगा है।”

मैंने उसका हाथ पकड़ लिया और हल्के से अपनी जाँघ पर रख लिया। “छत्तीस की हो। बॉडी अभी जवान और बहुत प्यासी है। इतनी गोल गाँड, भारी स्तन और मुलायम चूत लेकर तड़पना गलत है। दबाने से और जलन बढ़ती है।”

मैं उसके और करीब गया। उसने नहीं रोका। अगले ही पल मैंने उसके भरे होंठ पकड़ लिए। जोर से चूमा। जीभ उसके मुँह में घुस दी। वह काँप रही थी लेकिन चूम रही थी। मेरे हाथ उसकी पतली कमर से होते हुए दोनों हाथों से उसकी गाँड पर चले गए। पैंट के ऊपर से जोर से मसला और फैलाया।

“इतनी नरम और भारी गाँड… पति इससे खेलता भी नहीं?” “नहीं… कभी नहीं…”

मैंने टॉप के अंदर हाथ डाल दिया। स्पोर्ट्स ब्रा के ऊपर से उसके भारी गरम स्तन जोर से मसले। निप्पल को उँगली से मरोड़ा और दबाया। वह मेरे मुँह में ही कराह उठी।

“आह्ह… रिशभ… मत…” “यहीं चोदूँ क्या? बेंच पर ही लंड मार दूँ?” “नहीं… कैमरे हैं… घर चलो। पति आज लेट ही आएगा।”

मैंने उसके कान में गरम साँस छोड़ते हुए कहा, “ठीक है। घर चल। आज तेरी चूत और मुँह दोनों ट्रेन करूँगा। खासकर मुँह में लंड लेने का एक्सरसाइज। सिखाऊँगा कैसे चूसना है, कैसे गले तक लेना है। पूरी रंडी बनाकर छोड़ूँगा।”

वह शरमा गई लेकिन सिर हिला दिया। आँखों में शर्म के साथ भूख साफ थी।

हम जिम से निकले। मेरे लंड में पूरा जोर था। पैंट तंग हो रही थी। आज इस प्यासी, पकी हुई आंटी को पूरी तरह इस्तेमाल करने वाला था।

राधिका के घर पहुँचते ही उसने दरवाजा बंद करके लॉक लगा दिया। अंदर आते ही मैंने उसे दीवार से लगा लिया और जोर से चूमने लगा। इस बार कोई रुकने वाला नहीं था। उसके भारी स्तन मेरे सीने से दब रहे थे। मैंने उसके टॉप को ऊपर उठाकर स्पोर्ट्स ब्रा समेत उतार फेंका। उसके गोल भारी स्तन बाहर आ गए। निप्पल सख्त और काले। मैंने दोनों को हाथों में लेकर जोर से मसला और एक निप्पल मुँह में लेकर चूसने लगा।

“आह्ह… रिशभ… जोर से चूसो…”

मैंने उसे बेडरूम में धकेल दिया। ट्रैक पैंट और पैंटी एक साथ नीचे खींच ली। वह पूरी नंगी हो गई। छत्तीस साल की आंटी बिल्कुल नंगी मेरे सामने खड़ी थी। गोल स्तन, पतली कमर, भारी गाँड और मुलायम चूत। मैंने भी कपड़े उतारे। मेरा 6 इंच का मोटा लंड तना हुआ खड़ा था।

राधिका ने उसे देखा और आँखें बड़ी कर लीं। “इतना मोटा… मेरे पति का तो इससे आधा भी नहीं…”

मैंने उसे बिस्तर पर बैठाया और अपना लंड उसके मुँह के सामने कर दिया। “अब एक्सरसाइज शुरू करते हैं। मुँह खोलो।”

वह हिचकिचाई। “मैंने कभी मुँह में नहीं लिया… पता नहीं कैसे करते हैं…”

“इसीलिए तो सिखाने लाया हूँ। बोलो ‘आह’ और मुँह खोलो।”

उसने शर्म से मुँह खोला। मैंने अपना मोटा लंड उसके होंठों पर रगदा और धीरे-धीरे अंदर धकेलने लगा। “जीभ बाहर निकाल… हाँ ऐसे… अब चूस। गोल-गोल घुमा।”

वह अजीब तरीके से चूसने लगी। दाँत लग रहे थे। “दाँत मत लगा… सिर्फ़ होंठ और जीभ से। और गहरा ले। गले तक ले जाने की कोशिश कर।”

मैंने उसके बाल पकड़कर धीरे-धीरे धक्के देने शुरू किए। लंड उसके मुँह में अंदर-बाहर हो रहा था। आँखों से पानी आने लगा। थूक लंड पर गिर रहा था।

“हाँ… ऐसे ही… आंटी बनके लंड चूस रही हो… मजा आ रहा है? पति को कभी चूसा था?” “नहीं… कभी नहीं… उम्मम्म…”

“अब रोज़ चूसेगी। मेरा लंड। गले तक ले। और गहरा…”

मैंने थोड़ी देर उसके मुँह का इस्तेमाल किया। फिर लंड निकालकर कहा, “अब लेट जा। पैर फैला।”

वह लेट गई। मैं उसके ऊपर चढ़ गया। अपना मोटा लंड उसकी गीली चूत पर रखा और एक झटके में अंदर तक डाल दिया।

“आह्ह्ह… रिशभ… बहुत मोटा… धीरे…”

“धीरे नहीं चलेगा आज। सालों से तड़प रही हो। आज पूरी चूत फाड़ूँगा।”

मैं जोर-जोर से चोदने लगा। उसके भारी स्तन मेरे हर धक्के के साथ उछल रहे थे। मैंने दोनों स्तनों को मसलते हुए निप्पल काटे।

“बोल… कैसा लग रहा है मेरा लंड?” “बहुत मोटा… और गहरा जा रहा है… पति का तो महसूस ही नहीं होता था… तू फाड़ रहा है…” “साली आंटी… जिम में गाँड हिलाती थी… अब लंड ले रही है… मजा आ रहा है?” “हाँ… आ रहा है… और जोर से चोदो… गाली दो…”

मैंने उसकी टाँगें कंधों पर रख लीं और और गहराई तक मारने लगा। फिर उसे पलटा और कुत्ते की पोजीशन में कर दिया। पीछे से जोर-जोर से चोदा। गाँड पर थप्पड़ मारे।

“गाँड कितनी गोल है… थप्पड़ खाने लायक… बोल रंडी…” “हाँ… रंडी हूँ… चोद मुझे… जोर से… आahh…”

फिर मैंने लंड निकालकर उसकी गाँड पर रखा। “यहाँ भी डालूँ?” “डाल… दर्द होगा लेकिन डाल… आज सब कुछ ले लो…”

मैंने थूक लगाकर धीरे-धीरे गाँड में धकेला। वह चीख रही थी। जब पूरा अंदर गया तो मैंने जोर के धक्के लगाए।

“आह्ह… गाँड फट रही है… रिशभ… धीरे… नहीं… जोर से ही चोदो…” “आंटी की गाँड फाड़ रहा हूँ… मजा आ रहा है साले को…”

मैं बारी-बारी से चूत और गाँड में लंड मारता रहा। गालियाँ बरसाने लगा। वह भी गंदी बातें करने लगी।

“चोद मुझे… आंटी को चोद… रंडी बना दे… मुँह में भी डाल… गले तक…”

मैंने फिर से उसका मुँह पकड़कर लंड ठूंस दी। इस बार वह बेहतर चूस रही थी। मैंने गले तक धक्के मारे। आँखों से आँसू बह रहे थे लेकिन वह रोक नहीं रही थी।

आखिर में मैंने उसे लिटाया और बहुत जोर से चूत में धक्के मारते हुए झड़ गया। गर्म पानी उसकी चूत में भर गया। वह भी काँपते हुए झड़ गई।

मैं उसके ऊपर गिर पड़ा। दोनों पसीने से तर थे।

थोड़ी देर बाद मैंने उसके मुँह के पास लंड लाकर कहा, “साफ कर। जीभ से चाट।”

वह शरमाते हुए मेरे लंड को चाटने लगी।

मैंने उसके बाल सहलाते हुए कहा, “अब से जब भी जिम आएगी, सेशन के बाद ये एक्सरसाइज भी होगी। मुँह में लंड लेना सीख गई ना आंटी?”

वह आँखें झुकाकर बोली, “हाँ… सीख गई…”

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