मजबूरी में बीवी को एक रात के लिए बेच दिया | बीवी की चुदाई

Hello दोस्तों, मेरा नाम विकास है, मैं 32 साल का हूँ, लखनऊ का रहने वाला हूँ। मेरी शादी को 5 साल हो चुके हैं, मेरी बीवी का नाम सोनिया है, 28 साल की, गोरी, 5’4″ कद, चूचियाँ 34B की कसी हुई, कमर 30 की, और गांड 36 की गोल। वो दिखने में साधारण है, पर जब साड़ी पहनती है, तो लोग घूरते हैं। मैं एक छोटी सी दुकान चलाता हूँ, किराने की, और कमाता हूँ महीने के 15-20 हज़ार। हमारी ज़िंदगी ठीक चल रही थी, जब तक वो दिन नहीं आया।

मेरी दुकान का किराया बढ़ गया, मालिक ने 10,000 रुपये माँगे, एक महीने के। मेरे पास थे 2000। सोनिया ने अपने गहने बेचने की सोची, पर वो भी सिर्फ 3000 के थे। हम फँस गए। दुकान बंद होती, तो घर कैसे चलता?

मैंने दोस्तों से उधार माँगा, कोई नहीं देता। ससुराल गया, साले ने मुँह फेर लिया। रात को, सोनिया रो रही थी, मैं सोच रहा था। फिर मुझे एक आदमी याद आया।

रमेश। मेरा पुराना दोस्त, अब बड़ा आदमी बन गया था। रियल एस्टेट का धंधा, पैसा, गाड़ी, बंगला। और एक बात और… वो हमेशा सोनिया को घूरता था। हर मिलने पर, उसकी आँखें सोनिया की चूचियों पर, उसकी गांड पर, उसकी जाँघों पर। मैंने नोटिस किया था, पर कभी कुछ नहीं बोला। वो मेरा दोस्त था, और सोनिया मेरी बीवी।

पर आज… आज मुझे पैसे चाहिए थे।

मैंने उसे फोन किया, मिलने बुलाया। एक चाय की दुकान पर बैठे। उसने मेरी हालत देखी, मुस्कुराया, “क्या बात है विकास? इतना उदास क्यों?”

मैंने सब बताया, किराया, पैसे, सब। वो सुनता रहा, आँखों में कुछ था, कुछ जो मैंने पहले भी देखा था।

“10,000?” उसने पूछा, “इतने में क्या होगा?”

“बस दुकान बच जाए…” मैंने कहा।

वो चुप रहा, फिर बोला, “मैं दे सकता हूँ… पर…”

“पर क्या?” मैंने पूछा।

उसने मेरी आँखों में देखा, सीधा, बिना झिझके, “तुम्हारी बीवी… सोनिया…”

मेरा दिल रुका, “क्या?”

“मैंने हमेशा उसे चाहा है विकास…” उसने कहा, आवाज़ में कोई शर्म नहीं, “उसकी चूचियाँ, उसकी गांड… मैंने सोचा है, कैसे चोदूँगा उसे…”

“रमेश…” मैंने कहा, गुस्से में, “ये मेरी बीवी है…”

“हाँ…” उसने कहा, “और तुम्हें उसकी कीमत पता है… 10,000… एक रात… मैं दूँगा… तुम्हारी दुकान बच जाएगी…”

मैंने उसे मारने की सोची, पर हाथ नहीं उठा। मैं सोचने लगा, 10,000, एक रात, सोनिया की चूत… मेरी दुकान… मेरा घर…

“सोच लो…” रमेश ने कहा, उठकर, “कल तक का वक्त है… फोन करना…”

वो चला गया, और मैं… मैं वहीं बैठा रहा, सोचता रहा।

रात को, सोनिया सो रही थी, मैं उसके पास लेटा, सोच रहा था। फिर मैंने उसे जगाया।

“सोनिया…” मैंने कहा, “मुझे कुछ बताना है…”

वो उठी, आँखें मलते हुए, “क्या हुआ?”

मैंने सब बताया, रमेश, 10,000, एक रात… वो सुनती रही, चुप, आँखें बड़ी होती गईं।

“तुम… तुम पागल हो गए हो?” उसने कहा, “मैं तुम्हारी बीवी हूँ… और तुम मुझे… मुझे बेच रहे हो?”

“नहीं सोनिया…” मैंने कहा, आँखों में आँसू, “मजबूरी है… दुकान बंद हो जाएगी… घर कैसे चलेगा?”

“तो और रास्ते निकालो…” उसने कहा, “मैं किसी और के साथ… कभी नहीं…”

“सोनिया…” मैंने उसका हाथ पकड़ा, “रमेश ने हमेशा तुम्हें चाहा है… वो तुम्हें अच्छे से रखेगा… एक रात… बस एक रात… और हमारी ज़िंदगी बच जाएगी…”

वो रोने लगी, मैं भी रोने लगा। हम दोनों रोते रहे, फिर वो चुप हुई, मेरी आँखों में देखा।

“तुम… तुम सच में ये चाहते हो?” उसने पूछा, आवाज़ काँप रही थी।

“मजबूरी है सोनिया…” मैंने कहा, “मैं तुम्हें कभी नहीं बेचना चाहता… पर…”

वो चुप रही, बहुत देर तक। फिर… उसने सिर हिलाया, धीरे, हाँ में।

“ठीक है…” उसने कहा, आँखों में आँसू, “एक रात… बस एक रात… तुम्हारे लिए…”

मैंने उसे पकड़ा, कसकर, “थैंक यू सोनिया… थैंक यू…”

अगले दिन, मैंने रमेश को फोन किया। उसने कहा, “आज रात, 9 बजे, मेरा फ्लैट, शहर के बाहर। तुम दोनों आना।”

मैंने सोनिया को बताया, वो चुप रही, साड़ी पहनी, लाल रंग की, जो मैंने शादी में दी थी। उसने मेकअप किया, हल्का, और जब वो तैयार हुई, मैंने देखा, वो कितनी खूबसूरत लग रही थी, और कितनी दुखी।

हम निकले, गाड़ी में, चुपचाप। मैंने सोनिया का हाथ पकड़ा, वो काँप रही थी।

“डरो मत…” मैंने कहा, “मैं हूँ ना…”

“तुम कहाँ रहोगे?” उसने पूछा।

“बाहर… दरवाज़े के पास…” मैंने कहा, “अगर कुछ हो… तो मैं आ जाऊँगा…”

वो चुप रही, और हम पहुँचे।

रमेश का फ्लैट, बड़ा, आलीशान। वो दरवाज़े पर खड़ा था, शर्टलेस, शराब का गिलास हाथ में। उसने सोनिया को देखा, आँखें बड़ी, होठ खुले, और एक शरारती मुस्कान।

“आ गई मेरी रानी…” उसने कहा, सोनिया का हाथ पकड़ा, अंदर ले गया।

मैं रुक गया, दरवाज़े के पास। रमेश ने मुझे देखा, “तुम भी आ सकते हो विकास… अंदर… देख सकते हो…”

मैंने सिर हिलाया, ना में। वो मुस्कुराया, और दरवाज़ा बंद कर दिया।

मैं बाहर खड़ा रहा, सुनता रहा। पहले चुप्पी, फिर हल्की आवाज़ें, फिर… सोनिया की चीख, “आह्ह… धीरे…”

मैंने दरवाज़े पर हाथ रखा, खोलने की सोची, पर नहीं खोला। मैंने सोचा, 10,000, दुकान, घर, सब…

अंदर से आवाज़ें आती रहीं, सोनिया की कराह, रमेश की गर्जना, बेड की चरमराहट। मैं बाहर खड़ा रहा, सुनता रहा, और मेरा लंड… वो खड़ा हो गया, अपनी बीवी की चुदाई सुनकर।

मैं बाहर खड़ा था, कान दरवाज़े से लगाए। अंदर से आवाज़ आई, रमेश की गाढ़ी आवाज़, “आ जाओ अंदर विकास… तुम्हारी बीवी तुम्हें बुला रही है…”

मैंने सोचा, नहीं जाऊँगा, पर पैर खुद चल पड़े। दरवाज़ा खोला, अंदर गया, और रुक गया।

सोनिया, बेड के किनारे बैठी, पैर लटकाए, रमेश के बीच में खड़ा था, शर्टलेस, उसकी पैंट खुली, और अंदर से… वो लंड बाहर निकला हुआ था, 9 इंच लम्बा, काला, मोटा, नसों से भरा हुआ, टिप से पानी टपक रहा था। सोनिया की आँखें उस पर टिकी थीं, होठ खुले, साँसें तेज़।

“देखो विकास…” रमेश ने कहा, सोनिया का चेहरा पकड़कर अपने लंड की तरफ किया, “तुम्हारी बीवी मेरे लंड को देखकर पागल हो रही है…”

“मैं… मैं नहीं…” सोनिया ने कहा, पर आँखें नहीं हटाईं।

“झूठ मत बोलो रांड…” रमेश ने उसके बाल पकड़े, “बोलो, तुम्हें ये चाहिए?”

सोनिया ने मेरी तरफ देखा, आँखों में शर्म, और कुछ और भी, फिर धीरे से सिर हिलाया, हाँ में।

“क्या? सुनाई नहीं दिया…” रमेश ने कहा।

“हाँ…” सोनिया ने कहा, आवाज़ काँप रही थी, “मुझे… मुझे चाहिए…”

“क्या चाहिए?”

“आपका… आपका लंड…”

“पूरा बोलो…”

“मुझे आपका मोटा काला लंड चाहिए…” सोनिया ने कहा, आँखें बंद करके, “मेरी चूत में… मेरे मुँह में… हर जगह…”

मैंने सुना, मेरा दिल तेज़ धड़का, पर लंड भी खड़ा हो गया। रमेश ने मुझे देखा, मुस्कुराया, “सुन रहे हो विकास? तुम्हारी बीवी क्या बोल रही है?”

मैंने कुछ नहीं कहा। रमेश ने सोनिया का चेहरा अपने लंड पर रगड़ा, “चाटो… अपने पति के सामने… दिखाओ कितनी बड़ी रांड हो…”

सोनिया ने जीभ निकाली, पहले टिप पर लगाई, चाटा, फिर पूरा मुँह में लिया, गहरा, और चूसने लगी। चप चप की आवाज़, और वो आँखें ऊपर करके रमेश को देख रही थी, मुस्कुरा रही थी, जैसे कभी मुझसे नहीं मुस्कुराई।

“ऊह्ह… क्या चूसती है…” रमेश ने कहा, मेरी तरफ देखते हुए, “तुमने कभी सिखाया नहीं विकास? तुम्हारी बीवी तो एक्सपर्ट है…”

मैंने कुछ नहीं कहा, बस देखता रहा। सोनिया चूसती रही, गहरा, बार-बार, और रमेश का लंड और मोटा होता गया, और मोटा।

फिर रमेश ने उसे उठाया, बेड पर पटका, साड़ी ऊपर की, पैंटी नीचे की। सोनिया की चूत सामने, गोरी, गीली, भूरी बालों से भरी, चूत के होठ फूले हुए, प्यासे। रमेश ने उँगली फेराई, सोनिया काँप उठी, “आह्ह… वहाँ… वहीं…”

“कितनी गीली है…” रमेश ने कहा, उँगली अंदर डाली, “तुम्हारे पति ने कभी इतनी गीली की?”

“नहीं…” सोनिया ने कहा, मेरी तरफ देखते हुए, “वो… वो कभी नहीं कर पाते… वो तो छूते ही झड़ जाते हैं…”

मैंने सुना, शर्म आई, पर हाथ अपने लंड पर चला गया, बाहर से ही सहलाने लगा।

“देखो विकास…” रमेश ने कहा, “तुम्हारी बीवी तुम्हें बेकार बता रही है… आज देखो, असली मर्द कैसे चोदता है…”

उसने सोनिया के पैर कंधे पर रखे, लंड हाथ में लिया, और चूत के मुँह पर रखा। सोनिया काँप रही थी, आँखें बंद, होठ कटे हुए। रमेश ने धक्का दिया, आधा अंदर गया, और सोनिया की चीख निकली, “आह्ह्ह… मेरी माँ… इतना मोटा… फट जाऊँगी…”

“फटने दो रांड…” रमेश ने कहा, और और धक्का दिया, पूरा अंदर, एक ही बार में।

सोनिया का मुँह खुला, आँखें बड़ी, साँसें रुकीं, फिर… एक लंबी सिसकी निकली, “ऊउउह्ह्ह… ये… ये क्या है… मेरी चूत… मेरी चूत जल रही है…”

“ये जलन नहीं…” रमेश ने कहा, धीरे-धीरे अंदर-बाहर करते हुए, “ये प्यास बुझ रही है… तुम्हारी चूत की प्यास… जो तुम्हारे पति ने कभी नहीं बुझाई…”

सोनिया ने मेरी तरफ देखा, आँखों में आँसू, और कुछ और भी, “विकास… मुझे… मुझे माफ़ करो… पर ये… ये बहुत…”

“क्या बहुत?” मैंने पूछा, आवाज़ काँप रही थी।

“बहुत अच्छा…” उसने कहा, फिर रमेश ने एक ज़ोर का धक्का मारा, वो चीखी, “आह्ह्ह… और… और ज़ोर से… मेरी चूत का भोसड़ा बना दो…”

रमेश ने चोदना शुरू किया, धीरे, फिर तेज़, फिर ज़ोर से। चप चप, पच पच, सोनिया की चूत से पानी निकल रहा था, गीली होती जा रही थी। रमेश ने उसकी चूचियाँ पकड़ी, नोची, काटा, और चोदता रहा।

“उठो…” रमेश ने कहा, सोनिया को घुमाया, कुत्ते की तरह घुटनों पर लाया। उसकी गांड सामने, गोरी, गोल, और चूत पीछे से दिख रही थी, लाल, फैली हुई, गीली। रमेश ने पीछे से डाला, एक ही धक्के में पूरा अंदर, और सोनिया का सिर ऊपर उठा, आँखें बड़ी, मुँह खुला, “ऊउउह्ह्ह… मेरी गांड… मेरी गांड फट रही है…”

“ये गांड मेरी है…” रमेश ने कहा, उसकी गांड पर थप्पड़ मारा, लाल निशान छोड़ दिया, “ये चूत मेरी है… ये चूचियाँ मेरी हैं… तुम मेरी रांड हो…”

“हाँ…” सोनिया ने कहा, मेरी तरफ देखते हुए, “मैं… मैं रमेश की रांड हूँ… मेरा पति… वो… वो कुछ नहीं कर सकता…”

मैंने सुना, और अपना लंड निकाला, सहलाने लगा। रमेश ने देखा, हँसा, “देखो रांड, तुम्हारा पति हिला रहा है… अपनी बीवी की चुदाई देखकर… कितना बेकार है…”

सोनिया ने देखा, मुस्कुराई, “हाँ… वो… वो हमेशा हिलाता है… मुझे कभी पूरा नहीं करता… आप… आप मुझे पूरा करो…”

रमेश ने और तेज़ चोदा, सोनिया चिल्लाती रही, “आह्ह… आह्ह… मैं झड़ने वाली हूँ… पहली बार… पहली बार किसी से झड़ूँगी…”

“झड़ो रांड…” रमेश ने कहा, “मेरे लंड पर झड़ो… अपने पति के सामने…”

और वो झड़ी, पूरी तरह, काँपती हुई, चीखती हुई, “आह्ह्ह… रमेश… मैं झड़ गई… आपकी रांड झड़ गई…”

रमेश ने भी निकाला, सोनिया की गांड पर। सोनिया ने लिया, चाटा, मुस्कुराई, और मेरी तरफ देखा, “थैंक यू विकास… थैंक यू… मुझे ये दिया…”

मैंने भी झड़ दिया, अपने हाथ में, खड़े-खड़े, अपनी बीवी की चुदाई देखकर।


रमेश ने 10,000 दिए, मैंने लिए। पर सोनिया अब वैसी नहीं रही। रात को, जब मैं छूता, वो मुड़ जाती, “थकी हूँ… रमेश से थकी हूँ…”

एक महीने बाद, रमेश का फोन आया, “और 10,000?”

मैंने मना किया, पर सोनिया ने सुना, उसकी आँखों में वो प्यास थी।

“दे दो…” उसने कहा, “एक और रात… बस…”

मैंने दिया, और वो गई, फिर से, और फिर से। अब वो रमेश के साथ रहती है, मैं अकेला हूँ, अपनी दुकान में, अपने घर में, और सोचता हूँ, क्या सही था, क्या गलत। पर एक बात तय है, मेरी बीवी की चूत, जो कभी मेरी थी, आज किसी और की रांड बन चुकी है, और मैं… मैं बस एक दर्शक हूँ, अपनी ही कहानी का।

6 Comments

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *