सिसी पति बनकर देखा बीवी की चुदाई | क्रीमपाई क्लीनअप

ये हमारे पाठक की असली कहानी है |

मैं बेडरूम में खड़ा था। मेरा दिल जोर-जोर से धड़क रहा था। मेरी प्यारी पत्नी रिया, 34 साल की वो बेहद सरल, निर्दोष और करियर-ओरिएंटेड महिला, मेरे चारों ओर मंद-मंद मुस्कुराते हुए घूम रही थीं। लंबे, घने, काले लहरदार बाल उनके चेहरे पर बिखरे हुए थे, गहरी भूरी आँखें नरम और seductive थीं, गोल-मटोल चेहरा प्राकृतिक ग्लो के साथ और होंठ स्वाभाविक रूप से गुलाबी। हमारी शादी को 18 साल हो चुके थे, लेकिन इन 18 सालों में मैंने कभी रिया को मेरे साथ ज्यादा रोमांटिक होते नहीं देखा था। वो हमेशा अपनी नौकरी, ऑफिस के काम और करियर में इतनी डूबी रहती थीं कि घर में प्यार-मोहब्बत के लिए समय ही नहीं मिलता था। फिर भी मुझे उनसे बेहद प्यार था।
आज घर पूरी तरह खाली था। हमारी बेटी (14) और बेटा (10) दोनों हॉस्टल में रहते थे। रिया ने मुझे अपने गले में भर लिया, मेरे कान में बहुत धीरे से फुसफुसाया,
“अजीत… तुम मेरे सबसे अच्छे और भरोसेमंद पति हो। प्रोफेसर अजीत, 41 साल के मेरे निर्दोष पति। मैं तुमसे बहुत प्यार करती हूँ, लेकिन तुम जानते हो ना, मेरे पास ऑफिस का काम इतना ज्यादा है कि कभी-कभी मुझे थोड़ी मदद की जरूरत पड़ जाती है। आज बहुत सारा काम पूरा करना है, समय कम है। इसलिए मैंने अपने बॉस जितेन को घर बुला लिया है। वो 35 साल के हैं, बोल्ड शरीर वाले, अच्छे स्वभाव के और महिलाओं का बहुत सम्मान करते हैं। पहले तो वो आने से मना कर रहे थे, बोले — ‘रिया, तुम्हारे पति को बुरा लग सकता है।’ मैंने उन्हें समझाया कि मेरे पति बहुत ओपन-माइंडेड हैं, मुझे पूरी तरह ट्रस्ट करते हैं और बहुत प्यार करते हैं। वो तो केरल में यूनिवर्सिटी के काम से टूर पर गए हुए हैं, वापस आने में अभी तीन दिन हैं। बच्चे भी हॉस्टल में हैं, कोई डिस्टर्ब नहीं करेगा। आखिरकार वो मान गए। लेकिन वो यह नहीं जानेंगे कि तुम मेरे पति हो। आज तुम मेरी ‘रानी’ बनकर मदद करोगे… ठीक है ना, मेरी प्यारी रानी?”
उनकी आँखों में निर्दोषता और थोड़ी शरारत दोनों थीं।
रिया ने अलमारी से अपना पुराना लाल कुर्ता-सलवार निकाला। जैसे ही मैंने पहना, कुर्ता मेरी छाती पर टाइट चिपक गया। कढ़ाई वाली आस्तीनें और गहरा गला मुझे पूरी तरह एक नाजुक, सुंदर गृहिणी में बदलने लगा। सलवार मेरी जांघों और गोल-मटोल गांड़ पर सटी हुई थी। दुपट्टा को उन्होंने कोमलता से कंधों पर लपेट दिया। फिर उन्होंने बीस मिनट तक मेरा चेहरा बड़े प्यार से सजाया — फाउंडेशन, गुलाबी ब्लश, चमकदार लाल लिपस्टिक, मोटी काजल की लाइनें, लंबी झूठी पलकें और माथे पर बड़ा सा लाल बिंदी। गले में छोटा मंगलसूत्र भी डाल दिया।
जब मैंने आईने में खुद को देखा तो सांस रुक गई। एक शर्मीली, निर्दोष सी गृहिणी मुझे घूर रही थी। मेरी छोटी-सी 4.6 इंच की पतली लिंग सलवार के अंदर बेकार ही हिल रही थी।
रिया ने मेरे गाल पर एक हल्का-सा किस किया और मुस्कुराते हुए बोलीं,
“आज तुम बहुत प्यारी लग रही हो, मेरी रानी… अब किचन में जाओ और हमें अच्छे से सर्व करो। काम के बीच चाय-नाश्ता भी चाहिए।”
तभी डोरबेल बजी। चूड़ियों की छन-छन और नंगे पैरों की हल्की आहट के साथ मैं दरवाजा खोलने गया। जितेन अंदर आए — 35 साल के, बोल्ड और मजबूत शरीर वाले, लेकिन चेहरे से ज्यादा हैंडसम नहीं। फिर भी उनकी नजर में महिलाओं के प्रति बहुत सम्मान था। उनकी नजर मुझ पर पड़ी और चेहरे पर एक सौम्य मुस्कान फैल गई।
“नमस्ते रिया… ये कौन सी खूबसूरत मेहमान है?”
रिया तुरंत आगे बढ़ीं, “सर, ये मेरी दूर की बहन रानी है। आज मदद करने आई है। मेरे पति प्रोफेसर अजीत केरल टूर पर हैं, इसलिए घर खाली है। रानी, सर को चाय और नाश्ता सर्व करो ना।”
मैंने सिर झुकाकर नरम, औरतों जैसी मीठी आवाज में कहा, “जी मैडम… सर जी।”
जितेन सर ने मुझे ऊपर से नीचे तक देखा, आँखों में सिर्फ तारीफ थी। “रानी जी, आप तो बहुत सुंदर लग रही हैं। ये कुर्ता-सलवार आप पर जादू सा कर रहा है।”
रिया हंस पड़ीं, “सर, रानी थोड़ी शर्मीली है।”
अगले दो घंटे मैं उनका परफेक्ट ‘मेड’ बना रहा। चाय, समोसे, पकौड़े… हर बार झुककर ट्रे रखते वक्त मेरा दुपट्टा फिसल जाता और सर सौम्य मुस्कान के साथ मुझे देखते।
जब काम का वो हिस्सा पूरा हो गया, रिया ने मुझे आदेश दिया, “रानी, अब किचन में जाकर बर्तन और किचन साफ कर दो।”
मैं किचन में बर्तन धोने लगा। तभी रिया आईं — उनके गाल हल्के लाल थे, सांसें थोड़ी तेज। उन्होंने मेरे कान में फुसफुसाया, “रानी, तुम बर्तनों से बहुत शोर कर रही हो। मैं दरवाजा बाहर से बंद कर देती हूँ ताकि तुम शांति से काम कर सको। जब काम पूरा हो जाए तो मुझे आवाज देना, मैं खोल दूंगी।”
बाहर से बोल्ट चढ़ा दिया। क्लिक!
और फिर शुरू हो गईं वो जादुई, उन्मत्त आवाजें…
सोफा चरमराया। रिया की मीठी, कामुक कराहटें गूंजीं — “आह्ह्ह… जितेन सर… हां… बहुत अच्छा लग रहा है… और गहरा… और जोर से…” जितेन सर की भारी, रसीली सांसें। मांस-मांस की पच-पच… रिया की चीखें धीरे-धीरे तेज होती गईं, “जोर से सर… मुझे बहुत मजा आ रहा है… आह्ह्ह! हां… यही… यही चाहिए!”
फिर सब बेडरूम की तरफ शिफ्ट हो गया। हेडबोर्ड दीवार से जोर-जोर से टकरा रहा था। रिया पूरी तरह चीख रही थीं, “सर… हां… और जोर से… मैं आज बहुत जोर से आने वाली हूं!” पूरे चालीस मिनट तक वो जंगली, उन्माद भरी आवाजें घर में गूंजती रहीं।
आखिरकार बोल्ट खुला। रिया बाहर आईं — बाल बिखरे हुए, साड़ी आधी खुली, चेहरा चमकदार, होंठ सूजे हुए और आँखों में वो तृप्ति जो देखकर दिल पिघल जाता है। वो बेहद खुश और संतुष्ट लग रही थीं।
“रानी… बेडरूम में आओ। मुझे थोड़ी सफाई की जरूरत है।”
रिया बेड पर लेट गईं। टांगें पूरी तरह फैला दीं। उनकी चूत सूजी हुई, लाल और चमकदार गीली थी। उसमें से मोटा, सफेद, चिपचिपा रस धीरे-धीरे रिस रहा था, गांड़ तक बह रहा था। रिया ने मेरा दुपट्टा पकड़कर मेरा चेहरा अपनी चूत पर दबाया और मीठे, निर्दोष स्वर में बोलीं,
“चाटो रानी… सब कुछ साफ कर दो। मैं आज बहुत जोर से आई थी… बहुत सारा रस निकला है मेरी चूत से।”
मैं निर्दोष था। मुझे लगा कि ये रिया का अपना चूत का रस है — उनकी चरम सुख की ऊंचाई से निकला गाढ़ा, मीठा पानी। मैंने सोचा, “वाह… सर ने रिया को इतना मजा दिया कि उनकी चूत से इतना सारा रस बह रहा है।” मैं चुपचाप, बिना किसी शक के चाटने लगा। स्वाद थोड़ा खारा था, लेकिन मैंने समझा कि इतनी तेज और जंगली चुदाई में रिया का अपना रस ही इतना गाढ़ा निकला होगा।
रिया मेरे बालों में उंगलियां फेर रही थीं, मीठे-मीठे स्वर में कराह रही थीं, “हां रानी… अच्छे से चाटो… सब निकाल लो… सर ने मुझे इतना खुश किया कि मेरा पूरा पानी बह रहा है।”
वो चीखते हुए फिर से कांप उठीं और मेरे मुंह में और ज्यादा गर्म, चिपचिपा तरल भर गया। रिया ने मेरे माथे पर प्यार से किस किया और फुसफुसाई,
“तुम बहुत अच्छी बहन हो रानी… मेरी छोटी सी सिसी। मैं तुमसे बहुत प्यार करती हूं, लेकिन… काम के साथ थोड़ा मजा तो चाहिए ना।”
वो मुस्कुरा रही थीं — अपनी चोरी का पूरा आनंद लेते हुए, लेकिन मुझे हमेशा निर्दोष और प्यारा बनाए रखते हुए।
मैं चुपचाप चाटता रहा। मुझे कुछ भी शक नहीं हुआ।

बारह दिन बाद…
रिया सुबह उठकर मेरे पास आईं। उनकी आँखों में वही पुरानी मासूमियत थी, लेकिन आवाज में एक गहरी, प्यार भरी नरमी। उन्होंने मुझे गले लगा लिया और धीरे से फुसफुसाया,
“अजीत… मेरे प्यारे, मेरा सब कुछ… तुम जानते हो ना, मैं तुमसे कितना प्यार करती हूँ। तुम मेरे सबसे भरोसेमंद साथी हो। लेकिन आज ऑफिस का काम फिर से बहुत ज्यादा है, समय बिल्कुल कम है। मैंने जितेन सर को बुला लिया है। मैंने उन्हें बता दिया कि तुम बिहार गांव चले गए हो, परिवार से मिलने। तुम फिर से मेरी प्यारी ‘रानी’ बन जाओ ना… किचन में मदद करोगे? प्लीज… मेरे लिए?”
उनकी आवाज में इतना प्यार था कि मैं बिना कुछ कहे तैयार हो गया।
मैंने फिर वही लाल कुर्ता-सलवार पहना, मेकअप किया, मंगलसूत्र डाला और रानी बन गया। डोरबेल बजी। जितेन सर आए। रिया ने मुझे दूर की बहन बता दिया। मैंने चाय-नाश्ता सर्व किया। फिर रिया ने मुझे किचन में भेज दिया और बहुत प्यार से बोलीं,
“रानी… मेरी जान, बर्तन और किचन साफ कर दो। मैं दरवाजा बाहर से बंद कर देती हूँ ताकि तुम्हें कोई शोर न हो। जब काम पूरा हो जाए तो मुझे प्यार से आवाज देना, मैं तुरंत खोल दूंगी। तुम मेरी सबसे अच्छी बहन हो… मैं तुमसे बहुत प्यार करती हूँ।”
क्लिक! बोल्ट बंद।
पहले तो सब शांत था। लेकिन कुछ ही मिनट बाद अंदर से कुछ अनोखी-सी आवाजें आने लगीं — हल्की सांसें, कपड़ों की सरसराहट, फिर रिया की बहुत धीमी, मीठी कराहट। मैंने सोचा शायद काम का शोर है। मैं रिया को डिस्टर्ब नहीं करना चाहता था, लेकिन दिल में बेचैनी बढ़ गई। किचन के दरवाजे में एक छोटा-सा छेद था। मैंने झुककर उसमें से झांका।
दृश्य देखकर मेरी सांस रुक गई।
रिया पूरी तरह नंगी खड़ी थीं — फर्श पर, लाइट की नरम रोशनी में। उन्होंने खुद अपने बड़े-बड़े स्तनों को दोनों हाथों से दबाया, निप्पल्स को मुंह में लेकर चूसते हुए कराह उठीं, “आह्ह्ह… सर… देखिए ना… ये सब आपके लिए ही है…” उनकी चूत पहली बार मुझे इतनी बड़ी, गुलाबी और भरी हुई दिखी। गांड़ इतनी बोल्ड, गोल और आकर्षक थी कि मेरा दिल जोर से धड़कने लगा। जितेन सर सोफे पर नंगे बैठे थे। उनका लिंग… भगवान! कम से कम साढ़े सात इंच लंबा और बहुत मोटा — मेरी 38 mm मोटाई उसके सामने बेकार सी लग रही थी। वो लिंग इतना सख्त, शक्तिशाली और खड़ा था कि मैं कल्पना करने लगा कि ये मेरी प्यारी रिया के अंदर क्या-क्या कर सकता है।
रिया ने सर की तरफ देखा, आँखों में शरारत और प्यार भरा, और बोलीं, “सर… आज मुझे बहुत जरूरत है… प्लीज… मुझे अपना बनाइए।” वे घुटनों के बल बैठ गईं, डॉगी स्टाइल में मुंह आगे किया और सर का लिंग मुंह में ले लिया। पूरे बारह मिनट तक उन्होंने प्यार से चूसा — जीभ से नोक चाटी, गेंदों को चूम लिया, गला भरकर चूसते हुए कराहती रहीं, “मम्म्म… सर… आपका स्वाद… कितना अच्छा है… मैं बिना इसके नहीं रह सकती…”
सर का लिंग बिल्कुल भी नहीं ढीला हुआ। मेरी छोटी-सी लिंग सलवार के अंदर बिना छुए ही लड़की की तरह बहने लगी।
फिर सर ने रिया को उठाया। अगले सैंतीस मिनट तक उन्होंने अलग-अलग पोजीशन में जंगली चुदाई की। हर बार रिया की आवाज गहरी और भावुक निकल रही थी — “सर… हां… और गहरा… मुझे पूरा भर दीजिए… मैं आपकी हूँ आज… आह्ह्ह… इतना मजा… मैं पहले कभी नहीं आई थी…” मैं घड़ी देखता रहा, दिल में एक अनोखा दर्द और रोमांच दोनों।
आखिर में सर ने हांफते हुए पूछा,
“रिया… बताओ, मेरा सारा वीर्य कहां छोड़ूं — तुम्हारी चूत के अंदर या चेहरे पर? सिर्फ दो ऑप्शन।”
रिया ने उनकी आँखों में देखते हुए, प्यार भरी आवाज में कहा, “अंदर… चूत के अंदर ही सर… चेहरे पर मेकअप खराब हो जाएगा और… मुझे आपके वीर्य को अंदर महसूस करना बहुत पसंद है। प्लीज… मुझे भर दीजिए।”
सर ने जोर से धक्का मारा और रिया की चूत भर दी। बहुत सारा गाढ़ा, सफेद, गर्म वीर्य उनके अंदर उड़ेल दिया।
कुछ देर बाद सब शांत हो गया। जितेन सर चले गए, लेकिन अपनी अंडरवियर भूल गए। रिया ने जल्दी से अपनी ब्लैक मैक्सी, ब्रा और पैंटी पहनी, मेकअप ठीक किया, जैसे कुछ हुआ ही न हो। फिर उन्होंने किचन का दरवाजा खोला।
“रानी… मेरी प्यारी… तुमने आज भी किचन का काम बहुत अच्छे से किया। थैंक यू सो मच। मैं बहुत थक गई हूँ काम से… अब मैं सोने जा रही हूँ। तुम भी आराम करो।”
वे बेडरूम में चली गईं। लाइट ऑफ कर दी।
मैं बाहर आया। काम अधूरा पड़ा था, लेकिन मेरे दिमाग में तूफान चल रहा था। मैं सोच रहा था — मेरी प्यारी, निर्दोष लगने वाली रिया… इतनी सेक्सी और खुली हैं कि बॉस के साथ ये सब कर रही हैं। मैंने अपनी आँखों से देख लिया था। पहली बार मुझे सच में सिसी ककोल्ड महसूस हुआ। मेरी लिंग बिना छुए ही पूरी तरह बह गई थी।
मैं बेडरूम गया। रिया लेटी थीं। मैंने बहुत प्यार से कहा, “रिया… मेरी जान… आज बहुत दिन बाद… थोड़ा प्यार करें? मैं तुम्हें बहुत मिस कर रहा हूँ।”
वे मुंह फेरकर बोलीं, “नहीं अजीत… आज बहुत थकान है… प्लीज सोने दो।”
मैंने फिर विनती की, आँखों में आंसू आ गए, “बस एक बार… मैं तुम्हारी चूत को चूमना चाहता हूँ… प्लीज।”
वे झुंझलाकर, लेकिन थोड़ी हिचक के साथ बोलीं, “अगर ज्यादा तंग करोगे तो… ठीक है… तुम्हारा पसंदीदा पोजीशन दे सकती हूँ। लेकिन याद रखना… मैं सिर्फ तुम्हारे लिए ही ये कर रही हूँ।”
मेरा दिल जोर से धड़का। मैं लेट गया। रिया ऊपर आईं। उन्होंने अपनी मैक्सी ऊपर की, पैंटी हटाई और अपनी चूत सीधे मेरे मुंह और नाक पर रख दी। फिर धीरे-धीरे रगड़ने लगीं। बहुत सारा गाढ़ा, मोटा, सफेद वीर्य मेरे चेहरे पर, मुंह में, नाक पर बहने लगा — बिल्कुल पुरुष का वीर्य जैसा, गर्म और भरा हुआ।
मैं हांफते हुए बोला, “रिया… प्लीज… मुझे ब्लोजॉब दे दो… मैं तुम्हारे लिए सब कर सकता हूँ।”
वे हल्के से हंस पड़ीं, लेकिन आवाज में थकान और प्यार दोनों थे, “नहीं मेरे प्यारे… मैं अभी ड्रेन कर रही हूँ। मुझे उसका स्वाद पसंद नहीं… तुम बस चुपचाप चाटो… और मुझे आराम करने दो।”
वे अपनी चूत को मेरे मुंह पर और जोर से रगड़ती रहीं। मैं चुपचाप सब चाटता रहा — गाढ़ा वीर्य, उनका स्वाद… पहली बार सच में समझ आया कि मैं अब सिर्फ उनकी छोटी सी सिसी, उनका प्यारा हूँ। 

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