plot : Bhai behen sex story – भैया ने बहन की चूत चोदी और डंडा अंदर तक डाल दिया। Complete desi jawan behen ki chudai. Bhai ne jawan behen ki chut mein danda dala. Parents away, phone sex sunke full desi bhai behen sex story. Complete behen ki chudai kahani.
विवान को घर लौटे हुए तीन दिन हो चुके थे। दो साल बाद। बैंगलोर की नौकरी छोड़कर वह वापस अपने छोटे से शहर आया था। कारण था पिताजी की तबीयत। लेकिन डॉक्टरों ने अब हरी झंडी दे दी थी और माता-पिता दोनों नानी के यहाँ चले गए थे एक हफ्ते के लिए। घर में सिर्फ वह और उसकी बहन अनन्या रह गए थे।
अनन्या बाईस साल की हो चुकी थी। जब वह गया था तब वह कॉलेज की पहली साल की छात्रा थी—पतली, शर्मीली, बालों को हमेशा बाँधकर रखने वाली। अब जब दरवाजे पर खड़ी उसे देखी तो लगा जैसे कोई और लड़की खड़ी हो। लंबे खुले बाल, गोल चेहरा, और जीन्स-टॉप में जो अदा थी वह पहले नहीं थी। उसने गले लगाया तो विवान को उसके स्तनों का हल्का दबाव महसूस हुआ। वह जल्दी से पीछे हट गया।ये antarvasana family sex story आप pranaykatha पर पढ़ रहें है।
“भैया आ गए!” अनन्या की आँखों में खुशी थी। “मैंने सोचा था तुम बस फोन पर ही रहोगे अब।”
विवान मुस्कुराया। “अब तो आ गया न। तू कैसी है? पढ़ाई कैसी चल रही है?”
“ठीक है। परीक्षा दो महीने बाद है।” वह बैग लेकर अंदर चली गई। विवान ने उसके पीछे जाते हुए कमर की लकीर और जाँघों की गोलाई पर नजर पड़ने दी। फिर खुद को डांटा।
पहले दो दिन बिल्कुल सामान्य बीते। दोनों साथ नाश्ता करते, वह ऑफिस के काम लैपटॉप पर निपटाता, अनन्या अपने कमरे में किताबें खोलकर बैठ जाती। शाम को कभी-कभी साथ टीवी देखते। लेकिन घर की खामोशी में कुछ बदल रहा था।
तीसरे दिन की शाम को अनन्या नहाने गई। बाथरूम का दरवाजा अंदर से ठीक से बंद नहीं हुआ। हवा से थोड़ा खुल गया। विवान पानी लेने गया तो रुक गया। अनन्या की पीठ दिख रही थी। पानी की धार उसके बालों से होती हुई कमर तक जा रही थी। साबुन की झाग उसकी गांड की गोलाई पर फिसल रही थी। वह मुड़ी नहीं थी, लेकिन विवान की साँस रुक गई। उसने चुपचाप कदम पीछे खींचे और अपने कमरे में जाकर दरवाजा बंद कर लिया। दिल जोर-जोर से धड़क रहा था। लंड तन चुका था। उसने खुद को रोका। “ये अनन्या है… तेरी बहन।”
रात को खाना खाते समय अनन्या ने पूछा, “भैया, तुम इतने चुप क्यों हो? कुछ गड़बड़ है क्या?”
“नहीं। बस थकान है।” उसने जल्दी से नजरें प्लेट में गड़ा दीं।
चौथे दिन दोपहर की बात है। अनन्या अपने कमरे में पढ़ रही थी। दरवाजा आधा खुला था। विवान चाय लेकर गया। उसने देखा अनन्या बिस्तर पर पेट के बल लेटी है। टी-शर्ट ऊपर खिसक गई है और उसकी कमर की नंगी त्वचा दिख रही है। शॉर्ट्स इतनी छोटी थी कि जाँघों का बड़ा हिस्सा बाहर था। विवान की निगाह वहीं अटक गई। अनन्या ने सिर उठाया।
“चाय लाए हो? रख दो वहाँ।” उसने कोई संकोच नहीं दिखाया। विवान ने कप रखा और निकल आया। लेकिन दिमाग में वह नजारा घूमता रहा—उसकी कमर, उसकी जाँघें, शॉर्ट्स के अंदर छिपी चीज।
शाम को दोनों छत पर बैठे थे। गर्मी कम हो रही थी। अनन्या ने अचानक कहा, “भैया, तुम्हें याद है बचपन में तुम मुझे स्कूटर पर बिठाकर घुमाते थे? मैं कितना डरती थी।”
विवान हँसा। “हाँ। तू पीछे से कमर में हाथ डालकर चिपकी रहती थी।”
अनन्या भी हँसी। “अब तो मैं बड़ी हो गई हूँ। अब नहीं डरती।” उसने बात को हल्के में लिया लेकिन विवान के मन में वह छुअन याद आ गई—बचपन की निर्दोष छुअन, जो अब निर्दोष नहीं लग रही थी। ये antarvasana bhai behen sex story आप pranaykatha पर पढ़ रहें है।
पाँचवें दिन रात को एक अजीब वाकया हो गया। बिजली चली गई। घर में अंधेरा छा गया। विवान मोमबत्ती खोजने निकला। अनन्या के कमरे के पास से गुजरा तो सुना वह किसी से फोन पर बात कर रही है। आवाज धीमी थी लेकिन साफ सुनाई दी—
“नहीं… अभी नहीं भेज सकती… भैया घर पर हैं… हाँ, गीली हो रही हूँ… तू बता ना कैसे…”
विवान वहीं रुक गया। साँस रुक गई। अनन्या… फोन सेक्स? उसकी छोटी बहन? वह चुपचाप अपने कमरे में लौट आया। दिल में गुस्सा था, लेकिन उसके नीचे एक गहरी जलन भी थी। नींद उस रात नहीं आई। दिमाग में सिर्फ एक बात घूमती रही—अनन्या की आवाज, “गीली हो रही हूँ”।
छठे दिन सुबह अनन्या किचन में नाश्ता बना रही थी। विवान ने पीछे से जाकर कहा, “रात को किससे बात कर रही थी?”
अनन्या का हाथ रुक गया। उसने धीरे से मुड़कर देखा। “कोई दोस्त।”
“दोस्त जिसके साथ तू अपनी गीली चूत की बातें करती है?”
अनन्या का चेहरा पहले सफेद पड़ा, फिर गहरा लाल हो गया। “भैया… आपने…”
“हाँ। सुना सब।” विवान की आवाज शांत थी लेकिन उसमें एक कठोरता थी। “तुम इतनी… कच्ची लगती हो अभी भी। और फोन पर ऐसे…”
अनन्या की आँखों में आँसू आ गए। “माफ़ करना भैया… मैं… मैं अकेली पड़ गई थी… तुम गए हुए थे… माँ-पापा भी…”
विवान ने उसका हाथ पकड़ लिया। “देखो अनन्या। तुम मेरी बहन हो। लेकिन कल रात से मैं सोच रहा हूँ… जो तुम किसी अजनबी से बात करती हो, वह अगर…” वह रुक गया। बात अधूरी रह गई।
अनन्या ने धीरे से पूछा, “अगर क्या भैया?”
विवान ने जवाब नहीं दिया। वह हाथ छोड़कर चला गया। लेकिन दोनों के बीच अब एक अजीब तनाव छा गया था। नजरें मिलते ही हट जातीं। बातें कम हो गईं।
सातवें दिन शाम को बारिश शुरू हो गई। दोनों हॉल में बैठे टीवी देख रहे थे। अनन्या ने अचानक कहा, “भैया, क्या तुमने कभी सोचा है कि हम भाई-बहन होकर भी… कभी-कभी बहुत दूर लगते हैं?”
विवान ने उसकी तरफ देखा। उसकी आँखों में एक अजीब सी चमक थी। “क्या मतलब?”
“कुछ नहीं।” वह मुस्कुराई। “बस ऐसे ही।”
रात को दो बजे विवान को प्यास लगी। पानी लेने उठा। अनन्या का कमरा खुला था। हल्की रोशनी जल रही थी। वह बिस्तर पर लेटी थी। एक हाथ उसकी टी-शर्ट के अंदर था, दूसरा शॉर्ट्स के। उसकी उंगलियाँ धीरे-धीरे हिल रही थीं। आँखें बंद थीं। होठों से हल्की कराहें निकल रही थीं।
विवान वहाँ खड़ा रह गया। इस बार वह नहीं हटा। अनन्या की उंगलियाँ तेज हुईं। उसकी कमर उठने लगी। “आह… भैया…” अचानक उसके मुँह से निकला।
विवान का दिल धड़क उठा। उसने उसका नाम लिया? अनन्या की आँखें खुलीं। उसने विवान को देखा। दोनों की निगाहें मिलीं। अनन्या का चेहरा शर्म से लाल हो गया लेकिन उसने हाथ नहीं हटाया।
विवान ने कमरे में प्रवेश किया। दरवाजा बंद कर दिया। “तू… मेरा नाम लेकर…”
अनन्या की आवाज काँप रही थी। “भैया… जाओ… कृपया…”
विवान उसके बिस्तर के पास जाकर बैठ गया। “कल रात फोन पर जो बातें कर रही थी… आज मेरा नाम लेकर हिला रही है। अनन्या… सच बता।” ये antarvasana bhai bahan ki chudai आप pranaykatha पर पढ़ रहें है।
अनन्या की आँखों से आँसू बहने लगे। “मुझे नहीं पता भैया… तुम लौटे हो… और मैं… मैं खुद को रोक नहीं पा रही…”
विवान ने उसका हाथ पकड़कर शॉर्ट्स से बाहर निकाला। उंगलियाँ चमक रही थीं। उसने उन्हें अपने होठों के पास ले जाकर सूँघा। फिर धीरे से कहा, “अब किसी और से बात नहीं करेगी। न फोन पर, न सपनों में। अगर इतनी जरूरत है तो…”
अनन्या ने आँखें बंद कर लीं। “भैया… ये गलत है…”
“गलत तो तू बहुत दिन से कर रही है।” विवान ने उसकी टी-शर्ट ऊपर कर दी। ब्रा नहीं पहनी थी। गोल स्तन बाहर आ गए। उसने एक निप्पल को अंगूठे से सहलाया। अनन्या की साँस तेज हो गई।
“देख… शरीर झूठ नहीं बोलता।” विवान ने शॉर्ट्स और पैंटी एक साथ नीचे खींच दी। अनन्या की चूत चमक रही थी। उसने दो उंगलियाँ अंदर डालीं। अनन्या की कमर उठ गई।
“आह… भैया…”
विवान ने उंगलियाँ अंदर-बाहर करनी शुरू कीं। साथ में अंगूठे से क्लिट रगड़ा। अनन्या के नाखून चादर में गड़ गए। “भैया… धीरे… अह्ह…”
वह झुककर उसकी चूत पर मुँह लगा दिया। जीभ की गर्माहट से अनन्या का शरीर सिहर उठा। विवान ने लंबी-लंबी चाटें लगाईं। कभी क्लिट को चूसा, कभी जीभ अंदर तक डाली। अनन्या की टाँगें काँप रही थीं। कुछ देर बाद उसका शरीर अकड़ गया। पानी विवान के मुँह में भर गया।
विवान उठा। अपनी पैंट खोली। लंड बाहर आया। अनन्या ने आँखें खोलीं। उसकी निगाह लंड पर ठहर गई। विवान ने आगे बढ़कर लंड उसके होठों के पास ले गया। “मुँह खोल।”
अनन्या ने हिचकिचाते हुए होठ खोले। विवान ने धीरे से अंदर धकेला। अनन्या की जीभ पहले झिझक रही थी, फिर उसने लंड को चाटना शुरू कर दिया। अनुभव कम था लेकिन कोशिश पूरी। विवान ने उसके बाल पकड़कर धीरे-धीरे सर हिलाया। “हाँ… ऐसे… गहरा ले…”
कुछ देर बाद उसने लंड निकाला। अनन्या को पेट के बल लिटा दिया। पीछे से उसकी चूत में लंड का सिरा रखा। धीरे-धीरे दबाव दिया। अनन्या की चूत टाइट थी। आधा अंदर जाने पर उसने तकिया दबा लिया। “आह्ह्ह… भैया… दर्द…”
“सह ले।” विवान ने और अंदर धकेला। पूरा। फिर धीमे धक्के शुरू किए। हर धक्के के साथ अनन्या की गांड उसके पेट से टकराती। विवान ने दोनों हाथों से उसके कूल्हे पकड़ रखे थे। “बहन की चूत में डंडा डाल रहा हूँ… कैसा लग रहा है?”
अनन्या जवाब में सिर्फ कराह रही थी। “आह… अह… जोर से… भैया… और जोर से…”
विवान ने रफ्तार बढ़ा दी। धक्के तेज हो गए। अनन्या की आवाजें दबाने के बावजूद निकल रही थीं। उसने अनन्या के बाल पकड़कर सिर पीछे खींचा। कमर और गहरी झुक गई। लंड हर बार जड़ तक जा रहा था। ये antarvasana behen ki chudai आप pranaykatha पर पढ़ रहें है।
फिर उसने अनन्या को पलट दिया। टाँगें कंधों पर रखीं। फिर से अंदर घुसा। इस कोण से और गहरा लग रहा था। अनन्या की आँखें पीछे पलटने लगीं। “भैया… मैं… मैं आ… आ रही हूँ…”
विवान ने क्लिट पर अंगूठा रखा और रगड़ते हुए धक्के लगाए। अनन्या का दूसरा ऑर्गेज्म आया। उसकी चूत ने लंड को जकड़ लिया। विवान रुका नहीं। वह चोदता रहा। अनन्या की आवाज अब बैठ चुकी थी।
अंत में जब विवान आने वाला था तो उसने लंड बाहर निकाला। अनन्या के स्तनों और पेट पर वीर्य की धार छोड़ दी। सफेद-सफेद धब्बे उसके शरीर पर फैल गए। दोनों हांफ रहे थे।
विवान उसके पास लेट गया। अनन्या ने धीरे से अपना चेहरा उसकी छाती पर रख दिया। कुछ देर की खामोशी के बाद वह बोली, “भैया… आज के बाद…”
विवान ने उसके बाल सहलाए। “आज के बाद घर में जब भी अकेले होंगे… तेरी चूत सिर्फ मेरे डंडे के लिए रहेगी। कोई फोन, कोई सपना नहीं। समझी?”
अनन्या ने हल्के से सिर हिलाया। उसकी उंगलियाँ विवान के लंड पर वापस चली गईं। “फिर से… करोगे?”
विवान मुस्कुराया। “पूरी रात पड़ी है।”
उस रात उन्होंने दो बार और किया। एक बार अनन्या ऊपर बैठकर, और एक बार खड़े होकर। सुबह होते-होते अनन्या की चाल में हल्की तकलीफ थी। लेकिन जब विवान की नजर उससे मिलती तो वह नजर झुका लेती और हल्के से मुस्कुरा देती।
माता-पिता के लौटने में अभी चार दिन बाकी थे। और हर रात, अनन्या का कमरे का दरवाजा आधा खुला रहता।
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