दोस्तो, कुछ गलतियाँ इंसान जान-बूझकर करता है। और कुछ गलतियाँ ऐसी होती हैं जो हालात खुद बना देते हैं। आज जो कहानी लिखने जा रहा हूँ, वह दोनों का मिश्रण है। शर्म भी आती है लिखते हुए, लेकिन सच है।
मैं एक मल्टीनेशनल कंपनी में काम करता हूँ। बॉस का नाम राजेश खन्ना। सख्त, पैसे वाला, और बात-बात पर गुस्सा करने वाला आदमी। उनकी बीवी सोनल मैडम। उम्र करीब छत्तीस। गोरी, सुंदर, और ऐसी अदाएँ कि ऑफिस की किसी भी पार्टी में सबकी निगाहें उन्हीं पर ठहर जाएँ। मैंने कई बार सोचा था उनके बारे में, लेकिन हमेशा खुद को डांट देता था। बॉस की बीवी है। लाइन क्रॉस करना खतरनाक था।
फिर उनकी शादी की दसवीं सालगिरह आई।
बॉस ने घर पर छोटी सी पार्टी रखी। सिर्फ नजदीकी लोग। मुझे भी बुलावा आया। मैंने सोचा सामान्य डिनर होगा, जल्दी चल आएंगे। लेकिन किस्मत को कुछ और मंजूर था।
शाम को उनके बंगले पहुँचा। घर सजा हुआ था। सोनल मैडम ने गहरी लाल साड़ी पहनी थी। ब्लाउज काफी कम था। जब वह मुस्कुरातीं तो डिंपल दिखाई देते थे। मैंने नजरें झुका लीं, लेकिन बार-बार उठ जाती थीं। पार्टी में खाना-पीना चला। बॉस ने काफी शराब पी ली थी। ग्यारह बजे के बाद ज्यादातर मेहमान निकल गए। मैं भी उठने ही वाला था कि बॉस ने लड़खड़ाते हुए कहा, “एक गिलास और। सोनल अकेली हो जाएगी।”
मैं बैठ गया। बॉस सोफे पर ही सो गए। खर्राटे भरने लगे। सोनल मैडम किचन से पानी लेकर आईं। उन्होंने मेरी तरफ देखा और धीमे से कहा, “आप लोग भी चले जाइए। मैं संभाल लूँगी।”
मैंने कहा, “थोड़ी मदद कर दूँ बर्तन की।”
दोनों किचन में चले गए। रोशनी कम थी। साया एक-दूसरे पर पड़ रहा था। सोनल मैडम ने गिलास धोते हुए कहा, “राजेश हमेशा ऐसे ही रहते हैं। एनिवर्सरी पर भी काम और शराब। कभी लगता है जैसे मैं अकेली हूँ इस घर में।”
मैं चुप रहा। उन्होंने तौलिया रखा और मेरी तरफ मुड़ीं। दूरी बहुत कम रह गई थी। उनकी साँस में हल्की शराब की महक थी। “आप मुझे अक्सर देखते हो पार्टियों में। मैंने नोटिस किया है।”
मैंने इनकार में सिर हिलाया। “नहीं… मतलब… आप खूबसूरत हैं, नजर चली जाती है।”
वह हल्के से मुस्कुराईं। “खूबसूरत। बस इतना ही?”
मेरा गला सूख गया। मैंने पीछे कदम बढ़ाया। “मैडम, यह ठीक नहीं। बॉस सो रहे हैं।”
“बॉस सो रहे हैं,” उन्होंने दोहराया। “और मैं जाग रही हूँ। तीन साल हो गए… किसी ने मुझे इस तरह नहीं छुआ जैसे औरत को छूना चाहिए।”
मैंने साफ कहा, “मैं नहीं कर सकता। यह गलत है।”
सोनल मैडम ने मेरा हाथ पकड़ लिया। उनकी हथेली गरम थी। “गलत है। मुझे पता है। लेकिन आज एनिवर्सरी है। और मैं थक चुकी हूँ अकेली रहने से।”
मैंने हाथ छुड़ाने की कोशिश की, लेकिन उन्होंने जोर से पकड़ रखा था। आँखों में एक अजीब सी बेचैनी थी। “एक बार। सिर्फ एक बार। कोई नहीं जानेगा।”
मैं झिझक रहा था। दिल जोर-जोर से धड़क रहा था। दिमाग कह रहा था भाग जाओ, लेकिन शरीर नहीं मान रहा था। सोनल मैडम ने मेरा हाथ अपनी कमर पर रख दिया। साड़ी के नीचे उनकी त्वचा गर्म थी। मैंने धीरे से दबाया। उन्होंने आँखें बंद कर लीं।
“ऊपर चलो,” उन्होंने फुसफुसाया। “नीचे वह सो रहा है।”
मैंने एक बार फिर मना किया। “मैडम, बाद में पछतावा होगा।”
“पछतावा तो अकेले सोने में भी होता है,” उन्होंने जवाब दिया।
हम दोनों चुपके से ऊपर मास्टर बेडरूम में चले गए। दरवाजा बंद करते समय मेरे हाथ काँप रहे थे। सोनल मैडम ने खुद अपनी साड़ी का पल्लू हटाया। ब्लाउज के हुक खोलने में उनके हाथ भी काँप रहे थे। मैंने आगे बढ़कर मदद की। ब्लाउज खुला तो उनके स्तन बाहर आ गए। बड़े, भारी, और निप्पल पहले से कड़े। मैंने हाथ बढ़ाया तो रोका।
“धीरे… सालों बाद किसी ने छुआ है।”
मैंने एक स्तन को हल्के से थामा। वजन महसूस हुआ। फिर मुँह में लिया और धीरे-धीरे चूसने लगा। सोनल मैडम की कमर लचक गई। उन्होंने मेरा सिर पकड़ रखा था। “हल्के… अब थोड़ा जोर से… हाँ…”
मैंने दोनों स्तनों को बारी-बारी से चूसा। जीभ से निप्पल को घुमाया, हल्का काटा। सोनल मैडम की साँसें तेज हो रही थीं। मैंने हाथ नीचे किया तो उन्होंने फिर रोका।
“रुक जा… मैं तैयार नहीं हूँ इतनी जल्दी।”
मैं रुक गया। दोनों साँसें गिन रहे थे। फिर सोनल मैडम ने खुद मेरा हाथ अपनी साड़ी के नीचे ले जाकर रखा। पेटीकोट के अंदर पैंटी गीली हो चुकी थी। मैंने उंगली से हल्के से दबाया। वह सहम गईं।
“आह… धीरे…”
मैंने पैंटी साइड में की और एक उंगली अंदर डाली। चूत बहुत तंग और गरम थी। सोनल मैडम ने मेरे कंधे दबा दिए। “और अंदर… धीरे-धीरे…”
मैंने उंगली पूरी अंदर तक ली और धीरे-धीरे हिलाने लगा। उनकी कमर अपने आप मूव होने लगी। मैंने दूसरी उंगली भी डाली। अब थोड़ा तेज। सोनल मैडम की आँखें बंद थीं, होंठ काँप रहे थे।
“बेडरूम की लाइट बंद कर दो,” उन्होंने कहा।
मैंने लाइट बंद की। अंधेरे में सिर्फ खिड़की से हल्की रोशनी आ रही थी। सोनल मैडम ने खुद पेटीकोट और पैंटी उतार दी। मैंने भी कपड़े उतारे। लंड पूरी तरह खड़ा था। उन्होंने उसे हाथ में लिया और हल्के से सहलाया। फिर मुँह के करीब ले गईं, लेकिन रुक गईं।
“मैं… पहले कभी किसी और का… नहीं…”
मैंने उनका सिर सहलाया। “जबरदस्ती नहीं है।”
उन्होंने आँखें बंद कीं और लंड को मुँह में ले लिया। पहले सिर्फ नोक, फिर धीरे-धीरे गहरा। मैंने उनके बाल संभाले रखे। वह गहरी लेने की कोशिश कर रही थीं, लेकिन कभी-कभी रुक जातीं। आवाजें हल्की और गीली थीं।
थोड़ी देर बाद मैंने उन्हें बिस्तर पर लिटाया। टाँगें फैलाईं और चूत के करीब मुँह ले गया। सोनल मैडम ने मेरा सिर दबाया। “वहाँ… हल्के से चाटो… हाँ… अब थोड़ा ऊपर…”
मैंने जीभ से उनकी चूत को धीरे-धीरे चाटा। क्लिट को चूसा। उंगलियाँ अंदर-बाहर करने लगा। सोनल मैडम की जाँघें काँप रही थीं। वह तकिया मुँह में दबाए हुए कराह रही थीं ताकि आवाज नीचे न जाए।
“मैं… आने वाली हूँ… रुको मत…”
उनका शरीर अकड़ गया। चूत ने उंगलियों को कस लिया और पानी निकल आया। मैंने सब साफ किया।
फिर मैं उनके ऊपर चढ़ गया। लंड चूत पर रखा। सोनल मैडम ने मेरी आँखों में देखा। “धीरे से डालना… दर्द होगा।”
मैंने धीरे दबाव दिया। नोक अंदर गई। वह सहम गईं। और गहरा। आधा। फिर एक झटके में पूरा। सोनल मैडम ने मेरे पीठ में नाखून गाड़ दिए।
“आह्ह… रुक… रुक जा… बहुत गहरा है…”
मैं रुका रहा। उनकी साँस सामान्य होने दी। फिर धीरे-धीरे हिलना शुरू किया। चूत इतनी तंग थी कि हर धक्के पर प्रतिरोध महसूस होता था। सोनल मैडम की आँखें बंद थीं, होंठ काटे हुए।
“अब… थोड़ा तेज… हाँ… ऐसे…”
मैंने रफ्तार बढ़ाई। बिस्तर हल्के से चरमरा रहा था। उनकी गाँड मेरे हाथों में थी। मैंने उन्हें पलट दिया। घोड़ी की पोजीशन में। पीछे से फिर डाला। इस बार और गहरा गया। सोनल मैडम ने तकिया दबा लिया।
“चोदो… अब मत रोको… आज रात… मुझे याद दिलाना है…”
मैंने उनकी कमर पकड़कर जोर-जोर से पेलना शुरू किया। थप-थप की आवाज दबी-दबी आ रही थी। कभी मैं उनकी गाँड पर हल्का थप्पड़ मारता, कभी स्तनों को नीचे से मसलता। सोनल मैडम की कराहें अब ज्यादा खुल रही थीं।
फिर मैंने लंड निकाला। थूक लगाकर उनके गाँड के छेद पर रखा। सोनल मैडम ने पीछे मुड़कर देखा। आँखों में डर था।
“वहाँ… मत… दर्द होगा बहुत…”
“बोलोगी तो रुक जाऊँगा,” मैंने कहा।
वह कुछ पल चुप रही। फिर सिर हिलाया। “धीरे से… बहुत धीरे…”
मैंने नोक से दबाव दिया। छेद ने प्रतिरोध किया। और थूक। फिर धीरे-धीरे नोक अंदर गई। सोनल मैडम ने तकिया जोर से दबाया। आवाज दब गई। मैं और अंदर गया। आधा। फिर पूरा। उनकी गाँड ने लंड को इतना कस लिया कि मैं लगभग झड़ने वाला था।
“आह्ह… निकाल मत… अब… हिल… धीरे…”
मैंने बहुत धीरे हिलना शुरू किया। हर धक्का सावधानी से। सोनल मैडम की साँसें उखड़ रही थीं। कभी “दर्द” कहतीं, कभी “और”। मैंने उनकी चूत पर उंगली रखी और साथ-साथ सहलाने लगा। धीरे-धीरे दर्द की आवाजें मजे में बदलने लगीं।
“तेज… अब थोड़ा तेज… हाँ… ऐसे… गाँड में ही छोड़ना…”
मैंने रफ्तार बढ़ाई। दोनों हाथों से उनकी गाँड फैलाए हुए जोर-जोर से पेलने लगा। सोनल मैडम अब खुलेआम कराह रही थीं। बिस्तर चरमरा रहा था। मैंने आखिरी धक्कों में पूरा लंड अंदर तक धँसा दिया और झड़ गया। वीर्य की धार उनकी गाँड के अंदर छूटती रही। सोनल मैडम भी उसी समय काँप उठीं।
हम दोनों पसीने से भीगे बिस्तर पर गिरे पड़े। लंबी चुप्पी रही। फिर सोनल मैडम ने धीमे से कहा, “यह रात कभी किसी को नहीं बताना। खासकर राजेश को।”
मैंने उनकी पीठ पर हाथ फेरा। “एनिवर्सरी तो याद रहेगी।”
वह हँसी नहीं। बस मेरे सीने पर सिर रख दिया। “अगली बार जब अकेली हूँ, तो आना। लेकिन धीरे से… हमेशा।”
नीचे जाकर देखा, बॉस अभी भी सो रहे थे। मैं चुपके से घर निकल आया।
उस रात के बाद ऑफिस में जब भी सोनल मैडम से नजरें मिलतीं, दोनों जानते थे कि बीच में एक रात है जो कभी मिटने वाली नहीं। बॉस की एनिवर्सरी मैंने अपनी तरह से मनाई थी… उनकी बीवी की चूत और गाँड दोनों में।
दोस्तो, यह कहानी लिखते हुए आज भी अंदर अजीब सा गुनाह का अहसास होता है। लेकिन सच है। और सच कभी आसान नहीं होता।
