नवीन शर्मा की उम्र बत्तीस साल थी। एक बड़ी मार्केटिंग कंपनी में हेड ऑफ सेल्स। लंबा, गोरा, कंधे चौड़े, हमेशा शार्प सूट में। ऑफिस में उसका डरावना रुतबा था। उसकी पर्सनल असिस्टेंट पल्लवी मेहता थी। उम्र उनतीस साल। दो साल पहले तलाक हो चुका था। गोरा चिकना चेहरा, बड़े-बड़े गदराए स्तन, पतली कमर, गोल कूल्हे और साड़ी या फॉर्मल स्कर्ट में जो बदन झलकता था वो पूरे ऑफिस के मर्दों को पागल कर देता था। बाल लंबे, अक्सर जूड़े में बंधे। नवीन और पल्लवी के बीच सिर्फ ऑफिसियल बातें होती थीं। लेकिन दोनों की निगाहें अक्सर एक-दूसरे के शरीर पर ठहर जाती थीं।
ऑडिट के दिन पूरे ऑफिस में हड़कंप मचा था। शाम को छह बजे ज्यादातर कर्मचारी चले गए। नवीन और पल्लवी केबिन में अकेले रह गए। बड़ी सी काँच की दीवारों वाली केबिन। बाहर कॉरिडोर सूना पड़ा था। पल्लवी फाइल्स लेकर केबिन में घुसी। काली फॉर्मल स्कर्ट, सफेद शर्ट, ऊपर से हल्का ब्लाउज। स्कर्ट घुटनों से थोड़ी ऊपर। झुकते ही उसकी गोल गांड और जाँघों की गोलाई साफ दिख रही थी। नवीन की निगाहें वहीं अटक गईं।
पल्लवी ने फाइल टेबल पर रखी और मुड़ी। “सर, आप देख रहे हैं…”
नवीन ने कुर्सी से उठे बिना कहा, “हाँ। देख रहा हूँ।”
पल्लवी ने दरवाजे का लॉक घुमा दिया। “तो फिर सिर्फ देखते क्यों हो? हाथ भी लगा लो। मैं मना नहीं करूँगी।”
नवीन की आँखों में एक जंगली चमक आ गई। उसने पल्लवी को टेबल की तरफ खींचा और स्कर्ट एक झटके में कमर तक उठा दी। नीचे काली लेस वाली पैंटी थी। पैंटी के बीच में पहले से गीला धब्बा चमक रहा था। नवीन ने पैंटी को एक तरफ सरकाया और दो उँगलियाँ सीधे उसकी चूत में डाल दीं। पल्लवी जोर से कराह उठी। “आह्ह… सर… इतनी जल्दी…” नवीन की उँगलियाँ अंदर तक घुस गईं। चूत गरम, तंग और पानी से लबालब थी। उसने उँगलियाँ जोर-जोर से अंदर-बाहर करनी शुरू कीं। अंगूठे से क्लिटोरिस रगड़ने लगा। पल्लवी टेबल के किनारे पकड़कर खड़ी थी। जाँघें काँप रही थीं।
नवीन घुटनों के बल बैठ गया। उसने पैंटी फाड़ कर फेंक दी और जीभ सीधे चूत पर रख दी। पहले बाहर की फाँक चाटी, फिर क्लिटोरिस को मुँह में लेकर जोर से चूसा। पल्लवी के हाथ नवीन के बालों में चले गए। “आह्ह्ह… जीभ और अंदर डालो सर…” नवीन ने जीभ अंदर तक घुसा दी। अंदर-बाहर, क्लिट चूसना, कभी दो उँगलियाँ डालकर जीभ से क्लिट चाटना। पल्लवी की चूत से पानी टपकने लगा। नवीन ने बीस मिनट तक सिर्फ मुँह और उँगलियों से उसकी चूत चखा। पल्लवी एक बार जोर से काँपते हुए झड़ गई। पानी नवीन के मुँह और ठुड्डी पर लग गया। उसने सब चाट लिया।
नवीन खड़ा हुआ। पैंट और अंडरवियर एक साथ नीचे सरका दिए। उसकी मोटी, लंबी, नसों वाली लंड बाहर छलाँग लगाकर निकल आई। सिरे से पहले ही पानी टपक रहा था। पल्लवी की आँखें लंड पर जम गईं। “क्या मस्त मोटी लंड है सर की…” वह खुद घुटनों के बल बैठ गई और लंड दोनों हाथों में ले ली। पहले सिरे को चाटा, जीभ से गोल-गोल घुमाया, फिर मुँह में ले लिया। गहराई तक। गला तक। थूक की लार लंड पर टपकने लगी। पल्लवी लंड को मुँह से निकालती, पूरी लंबाई चाटती, गोलों को मुँह में लेकर चूसती, फिर फिर से गला तक निगल जाती। नवीन के हाथ उसके जूड़े में थे। उसने जूड़ा खोल दिया। लंबे बाल बिखर गए। नवीन कमर आगे की तरफ धकेलने लगा। पल्लवी की आँखों से आँसू आ गए लेकिन वह लंड को गले तक लेती रही। पंद्रह मिनट तक लगातार चुसाई के बाद नवीन ने उसके बाल पकड़कर लंड मुँह से निकाली।
उसने पल्लवी को टेबल पर पेट के बल झुका दिया। स्कर्ट कमर तक उठी हुई थी। गोल गांड और चमकती गीली चूत बिल्कुल सामने। नवीन ने लंड का सिरा चूत पर रखा और एक जोरदार धक्के में पूरा अंदर तक घुसा दिया। पल्लवी जोर से चिल्लाई। “आह्ह्ह… इतनी मोटी… चूत फट गई…” नवीन ने कमर पकड़कर जोर-जोर से धक्के लगाने शुरू कर दिए। थप्पड़-थप्पड़ की आवाज केबिन में गूंज रही थी। पल्लवी की चूड़ियाँ खनक रही थीं। “और जोर से चोदो सर… फाड़ दो मेरी चूत…” नवीन ने धक्के और तेज कर दिए। उसने एक हाथ से पल्लवी के बाल पकड़कर जोर से खींचे। गर्दन पीछे मुड़ गई। दूसरे हाथ से उसकी गांड पर जोरदार थप्पड़ मारे। लाल निशान पड़ गए।
नवीन ने एक उँगली पल्लवी की गांड के छेद पर रखी और हल्का दबाया। पल्लवी और जोर से कराह उठी। “हाँ… गांड में भी डालो…” नवीन ने थूक लगाकर उँगली गांड में अंदर तक डाल दी। अब चूत में मोटी लंड और गांड में उँगली। दोनों साथ-साथ अंदर-बाहर हो रहे थे। पल्लवी का पूरा शरीर काँपने लगा। वह जोर-जोर से चिल्लाते हुए झड़ गई। चूत से पानी की धार छूट गई। नवीन ने भी चार-पाँच तेज धक्के मारकर अंदर ही पूरा वीर्य छोड़ दिया। गर्म वीर्य की धार पल्लवी की चूत में भर गई। दोनों पसीने से भीगे हुए थे।
दस मिनट बाद नवीन ने पल्लवी को कुर्सी पर बिठाया। खुद सामने खड़ा रहा। पल्लवी ने फिर से लंड मुँह में ले ली और बाकी बचे वीर्य को चूस-चूस कर साफ किया। फिर नवीन ने उसे कुर्सी पर ही बैठाकर टाँगें फैलाईं और फिर से लंड चूत में डाल दी। इस बार आमने-सामने। पल्लवी के स्तन शर्ट के अंदर से बाहर आ रहे थे। नवीन ने शर्ट के बटन खोले, ब्रा ऊपर सरकाई और दोनों भारी स्तनों को मुँह में भर लिया। निप्पल काट-काट कर चोदता रहा। पल्लवी की टाँगें उसकी कमर पर लिपटी थीं। “सर… और गहरा… पूरी लंड चूत में ठोक दो…” नवीन ने कुर्सी समेत पल्लवी को उठाया और दीवार से सटा दिया। खड़े-खड़े जोरदार चुदाई। काँच की दीवार पर पल्लवी की पीठ रगड़ खा रही थी। वह फिर से झड़ गई। नवीन ने लंड निकाली और उसके मुँह में ठूंस कर दूसरा वीर्य गले में छोड़ दिया। पल्लवी ने गले तक निगल लिया।
रात के लगभग ग्यारह बजे दोनों फर्श पर लेटे हुए थे। पल्लवी ने कहा, “सर, आज मेरी गांड भी ले लो।” नवीन की लंड फिर तन गई। उसने पल्लवी को कुत्ते की पोजीशन में किया। पहले चूत में लंड डालकर अच्छी तरह गीला किया। फिर थूक और चूत के पानी से गांड को चिकना किया। एक उँगली, दो उँगलियाँ… फिर लंड का सिरा गांड पर रखा। धीरे-धीरे धक्का दिया। पल्लवी दर्द से जोर से कराह रही थी। “आह्ह्ह… दर्द हो रहा है… लेकिन डालते रहो…” नवीन ने धीरे-धीरे आधी लंड गांड में डाल दी। पल्लवी के नाखून फर्श में गड़ गए। फिर पूरी लंड। गांड पूरी तरह फैल गई। नवीन ने बहुत धीरे-धीरे धक्के शुरू किए। पल्लवी की आँखों से आँसू बह रहे थे लेकिन वह बार-बार कह रही थी, “और अंदर… पूरी गांड फाड़ दो सर…” नवीन ने गति तेज कर दी। एक हाथ से उसकी चूत में उँगलियाँ डाल रखी थीं। दोनों छेद साथ-साथ भरे हुए थे। पल्लवी पागलों की तरह चिल्लाते हुए झड़ गई। नवीन ने भी गांड में ही पूरा वीर्य छोड़ दिया।
अगले दिन ऑफिस में दोनों सामान्य बने रहे। लेकिन शाम को फिर से केबिन का लॉक लग गया। इस बार पल्लवी ने खुद नवीन की पैंट खोली और लंड मुँह में ले ली। फिर टेबल पर लेट गई। नवीन ने उसकी दोनों टाँगें कंधों पर रखीं और इतनी जोर से चोदा कि टेबल हिलने लगी। पल्लवी की आवाज दबाने के लिए नवीन ने अपना हाथ उसके मुँह पर रख दिया। वह काटने लगी। नवीन ने और जोर से ठोका। पल्लवी तीन बार झड़ गई। नवीन ने आखिर में उसके स्तनों पर वीर्य छोड़ा। सफेद गाढ़ा वीर्य उसके निप्पलों पर फैल गया। पल्लवी ने उँगलियों से वीर्य उठाकर मुँह में लिया और चाटा।
तीसरे दिन पल्लवी ने केबिन में एक छोटी सी बोतल लुब्रिकेंट की लाई। इस बार नवीन ने सिर्फ उसकी गांड ली। पहले उँगलियों से खोला, फिर लंड धीरे-धीरे अंदर तक डाल दी। पल्लवी को कुर्सी के सहारे खड़ा करके पीछे से गांड में इतनी जोर से चोदा कि उसकी आवाज दबाने के बावजूद हल्की सिसकियाँ बाहर तक जा रही थीं। नवीन ने बाल पकड़कर खींचे, गांड पर थप्पड़ मारे, चूत में उँगलियाँ डालीं। पल्लवी लगातार दो बार झड़ गई। नवीन ने गांड में ही वीर्य छोड़ा।
हर देर रात यही सिलसिला चलने लगा। कभी टेबल पर, कभी कुर्सी पर, कभी फर्श पर, कभी काँच की दीवार से लगाकर। कभी सिर्फ मुँह से, कभी सिर्फ चूत, कभी सिर्फ गांड, कभी तीनों। पल्लवी अब खुद केबिन का लॉक लगाती और कहती, “सर, आज मेरी चूत और गांड दोनों तैयार हैं।” नवीन कुछ नहीं बोलता, बस अपनी मोटी लंड निकालकर जहाँ चाहे ठोक देता।
एक रात पल्लवी ने नवीन को कुर्सी पर बिठाया और खुद उल्टी सवारी पर बैठ गई। गांड में लंड डालकर जोर-जोर से कूल्हे पटके। नवीन उसके मोटे कूल्हों को मसलता रहा, थप्पड़ मारता रहा। पल्लवी खुद अपनी क्लिटोरिस रगड़ती रही। वह तीन बार झड़ गई। नवीन ने आखिर में उसके मुँह में लंड डालकर वीर्य गले में छोड़ा। पल्लवी ने सब निगल लिया और जीभ निकालकर लंड साफ चाटी।
केबिन की वो देर रातें अब दोनों की जिंदगी का हिस्सा बन चुकी थीं। पल्लवी की चूत और गांड अब सिर्फ नवीन की लंड के लिए ही बची थीं।
