मैंने कभी सोचा भी नहीं था कि मेरी जिंदगी का सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट इतनी गंदी और मजबूरन रात से होकर गुजरेगा।
वह रात आज भी जब याद आती है तो शरीर में एक अजीब सी जलन पैदा हो जाती है। शर्म भी आती है, गुस्सा भी आता है, लेकिन सबसे ज्यादा वह मजबूरन वाला अहसास याद आता है जो उस रात मेरे और मेरी बीवी दोनों के अंदर समाया हुआ था।
मेरी शादी को तीन साल हो चुके थे। बीवी का नाम थी अंजलि। साधारण घर की लड़की, शांत स्वभाव, थोड़ी सी शर्मीली। शरीर से भरपूर थी। गोरी त्वचा, भारी स्तन, पतली कमर और गोल गाँड। शादी के बाद भी उसका बदन वैसा ही कसा हुआ था। मैं उससे प्यार करता था। हमारे रिश्ते में अब तक कोई खटास नहीं आई थी।
मैं एक प्राइवेट कंपनी में असिस्टेंट मैनेजर था। बॉस का नाम था विक्रम मल्होत्रा। उम्र पैंतालीस के आसपास, दबंग, पैसे वाला और बहुत ज्यादा प्रभावशाली। कंपनी में उसकी चलती थी। जो कह देता, वो हो जाता। मुझे पता था कि मेरा प्रमोशन उसके हाथ में है। पिछले डेढ़ साल से मैं उसी का इंतजार कर रहा था।
शुरुआत में सब सामान्य था। फिर धीरे-धीरे बॉस की नजरें बदलने लगीं। ऑफिस पार्टी में अंजलि को देखकर उसने ज्यादा देर तक घूरा। एक दिन बोला, “रोहित, तुम्हारी बीवी बहुत खूबसूरत है। संभाल के रखना।” उस समय मैंने हँसी में टाल दिया था।
फिर दबाव शुरू हुआ।
मेरे प्रोजेक्ट में जानबूझकर गलतियाँ निकाली जाने लगीं। मीटिंग में मुझे बार-बार अपमानित किया जाने लगा। एक दिन सीधा कह दिया, “रोहित, तुम्हारा प्रमोशन अटक सकता है। कुछ समझदार फैसले लेने होंगे।”
मैं समझ गया था। लेकिन मानने को तैयार नहीं था।
फिर वह शाम आई।
बॉस ने मुझे अपने बंगले पर बुलाया। कहा काम से जुड़ी कुछ जरूरी बात है। अंजलि भी साथ थी क्योंकि हम दोनों बाहर खाना खाने वाले थे। बंगला बड़ा था, शानदार। अंदर जाते ही माहौल भारी लगने लगा।
बॉस ने शराब रखी। अंजलि ने मना कर दिया। मैंने भी एक-दो घूंट ही लिए। बातचीत सामान्य रखनी की कोशिश की। लेकिन बॉस की नजरें बार-बार अंजलि के स्तनों और जाँघों पर जा रही थीं। अंजलि असहज हो रही थी। उसने मुझे इशारा किया कि चलें।
तभी बॉस ने टेबल पर एक फाइल रख दी।
“रोहित, यह तुम्हारे खिलाफ शिकायत है। अगर मैं चाहूँ तो कल तुम्हारी नौकरी चली जाए। प्रमोशन तो दूर की बात है।”
मैं सन्न रह गया। अंजलि का चेहरा सफेद पड़ गया।
बॉस ने गिलास घुमाते हुए कहा, “एक रात। सिर्फ एक रात। तुम्हारी बीवी मेरे साथ रहेगी। सुबह तक। उसके बाद न सिर्फ शिकायत फाड़ दूंगा, बल्कि तुम्हें मैनेजर बना दूंगा। सैलरी भी डबल।”
कमरे में सन्नाटा छा गया।
अंजलि ने तुरंत कहा, “नहीं। यह असंभव है। रोहित, चलो यहाँ से।”
मैं उठा। लेकिन बॉस हंसा। “सोच लो। नौकरी जाएगी तो घर कैसे चलेगा? लोन कैसे चुकाओगे? अंजलि को बताओ हकीकत।”
मैं बोल नहीं पाया। अंदर कुछ टूट रहा था। अंजलि मेरे चेहरे को देख रही थी। उसकी आँखों में डर था, और एक सवाल भी – क्या तुम मुझे बेचोगे?
मैंने धीमे से कहा, “अंजलि… हमारे पास और कोई रास्ता नहीं है।”
वह फूट-फूट कर रोने लगी। “तुम पागल हो गए हो? मैं तुम्हारी बीवी हूँ!”
मैंने उसका हाथ पकड़ा। आवाज काँप रही थी। “मैं मजबूर हूँ। एक रात… सिर्फ एक रात। इसके बाद सब खत्म।”
अंजलि ने मेरा हाथ झटक दिया। लेकिन बॉस पहले ही खड़ा हो चुका था। उसने अंजलि का हाथ पकड़ लिया। “रोहित, तुम नीचे वेटिंग रूम में जाकर बैठो। सुबह तक इंतजार करो।”
मैं बाहर निकला। दरवाजा बंद हो गया।
अंदर से आवाजें आने लगीं। पहले अंजलि का विरोध। “मत छुओ… छोड़ो… मैं नहीं चाहती…”
फिर कपड़ों के फटने की आवाज।
बॉस की भारी आवाज – “शांत हो जा। मजा आएगा।”
मैं वेटिंग रूम में बैठा रहा। हाथ काँप रहे थे। गुस्सा था, लाचारी थी, और एक गंदी उत्तेजना भी जो मैं दबाना चाहता था लेकिन दब नहीं पा रहा था।
करीब बीस मिनट बाद अंजलि की चीख निकली।
“आह्ह… निकाल… दर्द हो रहा है…”
बॉस हँस रहा था। “इतनी टाइट चूत… रोहित अच्छी तरह चोदता नहीं होगा तभी तो इतनी कसौटी हुई है।”
धक्कों की आवाज आने लगी। थप-थप… थप-थप। अंजलि की मuffled चीखें। कभी “नहीं… छोड़ो”, कभी सिर्फ कराह।
मैंने दरवाजे के पास जाकर सुना।
बॉस बोल रहा था, “गाँड भी चोदूँगा आज। पूरी रात। जब तक मेरा मन न भर जाए।”
अंजलि रो रही थी। “रोहित… बचाओ…”
लेकिन मैं कुछ नहीं कर सकता था।
रात लंबी खिंचती गई।
कभी अंजलि की तेज चीख आती, कभी बॉस के गंदे शब्द। “रंडी की तरह चिल्ला… जोर से… हाँ… ऐसी ही… चूत फाड़ दूंगा।”
एक बार तो लगा कि अंजलि ने हार मान ली है। उसकी आवाज बदल गई थी। कराह में दर्द कम और मजबूरन मजा ज्यादा लग रहा था।
“आह्ह… धीरे… बहुत गहरा… बस… मत रोको…”
मैं दीवार के सहारे खड़ा रह गया। लंड अकड़ा हुआ था। खुद से घृणा हो रही थी।
सुबह पाँच बजे दरवाजा खुला।
अंजलि निकली। नाइटी फटी हुई, बाल बिखरे, आँखें सूजी हुई, गर्दन और स्तनों पर लाल निशान। जाँघों के अंदर से सफेद द्रव रिस रहा था। वह मुझसे आँखें नहीं मिला पाई।
बॉस पीछे खड़ा था। केवल लोअर पहने। छाती पर पसीना चमक रहा था। उसने मेरे कंधे पर हाथ रखा।
“प्रमोशन लेटर कल ऑफिस में मिल जाएगा। जा, अपनी बीवी को लेकर घर जा। और हाँ… कभी-कभी फिर लाना। मजा आ गया।”
मैं अंजलि को लेकर निकला। गाड़ी में वह कोने में सिकुड़ी बैठी रही। एक शब्द नहीं बोला।
घर पहुँचकर उसने नहाया। बहुत देर तक। जब बाहर निकली तो बिस्तर पर लेट गई और दूसरी तरफ मुँह कर लिया।
मैं पास बैठ गया। “अंजलि…”
उसने सिर्फ इतना कहा, “तुमने मुझे बेच दिया। अब कभी मत छूना।”
लेकिन जिंदगी ऐसे ही नहीं रुकती।
प्रमोशन मिल गया। सैलरी लगभग दोगुनी हो गई। लोग बधाई देने लगे। अंजलि घर का काम करती रही, लेकिन हमारे बीच बातें कम हो गईं। सेक्स तो जैसे खत्म ही हो गया।
फिर एक रात, शराब के नशे में, अंजलि ने खुद मुझसे कहा, “उस रात… उसने मुझे तीन बार गाँड में चोदा। इतनी जोर से कि मैं चल नहीं पा रही थी। और तुम नीचे बैठे रहे।”
मैं चुप रहा।
उसने मेरा चेहरा पकड़ा। आँखों में आँसू थे। “अब तुम चोदो। वैसा ही। गंदा। जोर से। ताकि वह याद धुंधली हो जाए।”
उस रात मैंने अंजलि को वैसा ही चोदा जैसे बॉस ने चोदा होगा। घोड़ी बनाकर, बाल पकड़कर, गाँड में, मुँह में। वह रोती रही और कराहती रही।
अगली सुबह उसने कहा, “प्रमोशन का मजा तो तुमने ले लिया। अब मेरा भी कुछ बचाना।”
दोस्तो, यह कहानी मैंने इसलिए लिखी क्योंकि आज भी जब मैं ऑफिस में बॉस को देखता हूँ, तो वही रात आँखों के सामने घूम जाती है। बॉस ने रातभर मेरी बीवी को चोदा और मुझे प्रमोशन दे दिया।
और सबसे बड़ी सच्चाई यह है कि अंजलि अब कभी-कभी खुद बोलती है – “बॉस को फिर बुला ले। मुझे उसकी जरूरत है।”
मैं मना कर देता हूँ। लेकिन अंदर ही अंदर जानता हूँ कि एक दिन फिर वह रात दोहरानी पड़ेगी।
क्योंकि मजबूरियाँ कभी खत्म नहीं होतीं।
