मेरा नाम रोहन है। उम्र २८ साल। मैं एक प्राइवेट कंपनी में मार्केटिंग मैनेजर हूँ और मुंबई की एक साधारण सोसाइटी में रहता हूँ। पिछले चार साल से उसी फ्लैट में हूँ। मेरी ज़िंदगी बिल्कुल सामान्य थी, जब तक पिछले महीने मेरी बगल वाली फ्लैट में नया परिवार शिफ्ट नहीं हुआ।
वह परिवार लगभग मेरी ही उम्र का था। पति का नाम अमित, उम्र तीस के आसपास, और उनकी पत्नी… प्रिया भाभी। प्रिया भाभी को देखते ही मेरी साँस रुक गई थी। उनकी उम्र छब्बीस-सत्ताईस होगी। गोरी चमकदार त्वचा, गोल-गोल चेहरा, बड़े-बड़े काले नयन, पतली कमर और इतनी भरी-भरकम गाँड कि कपड़ों के अंदर से भी दो अलग-अलग गेंदियाँ साफ नज़र आती थीं। छाती पर छत्तीस डी के गोल, नरम स्तन जो उनके टाइट टॉप में धक्के खाते रहते थे। उनकी कमर इतनी पतली थी कि हाथ में समा जाए, लेकिन नीचे से गाँड और जाँघें इतनी मोटी और नरम थीं कि देखते ही लंड खड़ा हो जाता था।
पहले दिन जब वे शिफ्ट हुए थे, मैं उनकी मदद करने गया था। प्रिया भाभी ने पीले रंग का छोटा कुर्ता पहना था और नीचे काली लेगिंग। जब वे झुककर सामान उठाती थीं तो उनकी गाँड लेगिंग में इतनी टाइट हो जाती थी कि बीच की रेखा साफ दिखती। मैं उनके पीछे से देख रहा था और मेरा लंड पैंट में फूलने लगा था। उन्होंने एक बार पीछे मुड़कर देखा और मुस्कुरा दीं। उस मुस्कान में कुछ अलग था।
उसके बाद से हर दिन तनाव बढ़ता गया।
सुबह-सुबह जब मैं ऑफिस निकलता तो उन्हें बालकनी में मिलता। कभी वे सिर्फ नाइटी में खड़ी होतीं, नाइटी इतनी पतली कि उनके निप्पलों का आकार साफ दिखता। कभी वे योगा करतीं तो उनकी गाँड ऊपर-नीचे होती। मैं उन्हें देख-देखकर बाथरूम में जाकर मुठ मारता। एक दिन उन्होंने खुद नोटिस कर लिया। मैं उन्हें देख रहा था, उन्होंने आँख मारी और धीरे से अपनी नाइटी का स्ट्रैप थोड़ा नीचे सरका दिया। उस दिन मैं ऑफिस नहीं गया, पूरे दिन उनके बारे में सोचता रहा।
रात को कभी-कभी उनके फ्लैट से हँसी-मज़ाक की आवाज़ आती। अमित अक्सर लेट आते थे। कभी-कभी प्रिया भाभी रात के ग्यारह-बारह बजे तक बालकनी में खड़ी रहतीं। एक रात मैं भी बाहर गया। उन्होंने कहा, “रोहन, आप भी नहीं सो रहे?” मैं उनके पास गया। दूरी थोड़ी कम थी। उनके शरीर से हल्की परफ्यूम की खुशबू आ रही थी। उन्होंने कहा, “अमित लेट आते हैं ना… अकेला फील होता है।” मैं उनकी आँखों में देख रहा था। उनकी नज़र मेरे होंठों पर गई, फिर नीचे। उस रात कुछ नहीं हुआ, लेकिन उन्होंने जाते-जाते मेरा हाथ हल्का सा दबाया।
फिर एक दिन लिफ्ट में दोनों अकेले मिल गए। लिफ्ट धीमी थी। उन्होंने काली साड़ी पहनी थी, ब्लाउज गहरा गला। मैं उनके स्तन देख रहा था। उन्होंने नोटिस किया लेकिन नज़र नहीं हटाई। लिफ्ट के अंदर उनका हाथ मेरे हाथ से टकराया। मैं उनकी कमर पर हाथ रखने ही वाला था कि लिफ्ट रुक गई। उन्होंने मुस्कुराकर कहा, “आप बहुत देखते हो मुझे… पता है ना?” मैं चुप रहा। उन्होंने आगे बढ़कर मेरे कान में कहा, “देखते रहो… मज़ा आता है।”
उसके बाद से हर छोटी-छोटी चीज़ में यौन तनाव बढ़ गया। कभी वे अपने फ्लैट के दरवाज़े पर खड़ी होकर बात करतीं, कभी मेरी मदद माँगतीं। एक दिन उन्होंने कहा कि उनका वाईफाई नहीं चल रहा, मैं उनके फ्लैट गया। अमित नहीं थे। वे छोटे शॉर्ट्स और टाइट टॉप में थीं। जब मैं राउटर चेक कर रहा था, वे मेरे पीछे आकर खड़ी हो गईं। उनके नरम स्तन मेरी पीठ से छू गए। मैं मुड़ गया। उन्होंने कहा, “सॉरी… जगह कम है।” लेकिन उनकी आँखों में मज़ा था। उस दिन मैं उनके फ्लैट से निकलते समय उनकी गाँड पर हल्का सा हाथ फेर गया। उन्होंने कुछ नहीं कहा, बस अधर काट लिए।
फिर वह दिन आ गया।
शाम के सात बजे मेरे दरवाज़े पर नॉक हुआ। मैंने खोला तो प्रिया भाभी खड़ी थीं। उनके चेहरे पर तनाव था। “रोहन… मेरी चाभी गुम हो गई। पर्स में नहीं मिल रही। अमित ऑफिस में हैं, लेट आएंगे। मैं अंदर नहीं जा सकती। क्या मैं थोड़ी देर आपके यहाँ रुक सकती हूँ?”
मैंने उन्हें अंदर बुला लिया। उन्होंने हल्के गुलाबी रंग का कुर्ता पहना था और नीचे सफेद लेगिंग। कुर्ता थोड़ा टाइट था, उनके स्तन साफ उभर रहे थे। गाँड लेगिंग में बिल्कुल गोल-गोल दिख रही थी। मैंने उन्हें सोफे पर बैठाया और पानी दिया। बातचीत शुरू हुई। पहले सामान्य, फिर धीरे-धीरे निजी।
उन्होंने कहा, “आप अकेले रहते हो ना? कभी अकेलापन फील नहीं होता?” मैं मुस्कुराया, “होता है। आपको भी होता होगा।” उन्होंने नज़र झुकाई। “हाँ… अमित बहुत बिज़ी रहते हैं। कभी-कभी लगता है कोई छू ले तो अच्छा लगे।”
मैं उनके पास बैठ गया। दूरी कम कर दी। उनकी जाँघें मेरी जाँघों से छू रही थीं। मैंने उनका हाथ पकड़ लिया। उन्होंने नहीं छुड़ाया। मैं धीरे से उनकी उंगलियों पर उंगली फेरने लगा। उनकी साँस तेज़ होने लगी। मैं उनकी तरफ़ मुड़कर उनके होंठों के क़रीब गया। उन्होंने आँखें बंद कर लीं। मैंने उनके होंठों पर अपने होंठ रख दिए।
पहला चुंबन नरम था। फिर उन्होंने मेरे होंठों को ज़ोर से दबाया। उनकी जीभ मेरी जीभ से मिल गई। मैंने उनकी कमर पकड़ ली। उनका शरीर गर्म था। मैंने उनके कुर्ते के अंदर हाथ डालकर उनकी पीठ पर फेरने लगा। उन्होंने मेरी टी-शर्ट ऊपर उठा दी। मैंने उनका कुर्ता ऊपर खींचकर उतार दिया। नीचे सिर्फ काली ब्रा। ब्रा के ऊपर से उनके नरम, बड़े स्तन दबाने लगा। उन्होंने ब्रा का हुक खोल दिया। उनके गोल-गोल, सफेद स्तन बाहर निकल आए। निप्पल गहरे गुलाबी थे और खड़े।
मैंने उनके एक स्तन को मुँह में लेकर चूसने लगा। दूसरे हाथ से दूसरा मसलने लगा। उन्होंने मेरा सर दबाया। “हाँ… ऐसे ही… ज़ोर से चूसो।” मैं उनके निप्पलों को दाँतों से हल्का काटने लगा। उनकी आवाज़ निकलने लगी। मैंने उन्हें सोफे पर लिटा दिया। उनकी लेगिंग नीचे खींच दी। नीचे काली पैंटी। पैंटी गीली थी। मैंने पैंटी साइड में खींचकर उनकी चूत पर उंगली फेरने लगा। चूत बिल्कुल गीली और गर्म थी। मैंने उंगली अंदर डाल दी। उन्होंने कमर उठाई। “रोहन… अंदर… और अंदर।”
मैंने उनकी पैंटी भी उतार दी। उनकी चूत के बाल थोड़े ट्रिम किए हुए थे। मैंने उनकी टाँगें फैलाकर उनकी चूत पर जीभ रख दी। उनका स्वाद मीठा-सा था। मैं उनकी चूत को चाटने लगा, क्लिट को चूसने लगा। उन्होंने मेरे बाल पकड़ लिए। “आह्ह… मादरचोद… ऐसे मत चाटो… मैं झड़ जाऊँगी।” मैंने दो उंगलियाँ अंदर डालकर उनकी चूत को चोदने लगा जबकि जीभ से क्लिट चूस रहा था। उनकी टाँगें काँपने लगीं। एक ज़ोर का झटका लगा और उन्होंने मेरे मुँह पर झड़ दिया। उनका पानी मेरे मुँह पर लग गया।
मैं उठकर अपना पैंट खोला। मेरा लंड पूरा खड़ा था, नसों वाला, सात इंच का। उन्होंने मेरे लंड को देखकर आँखें बड़ी कर लीं। “इतना मोटा… धीरे से लेना।” मैंने उनकी टाँगें कंधों पर रखकर उनकी चूत पर लंड का सिरा रखा। धीरे से धक्का दिया। उनकी चूत ने मेरे लंड को कसकर पकड़ लिया। मैं पूरा अंदर तक घुसा दिया। उन्होंने ज़ोर से चीख मारी। “आह्ह्ह… फट गई… रोहन… पूरा मत डालो।”
मैं रुक गया। फिर धीरे-धीरे पेलने लगा। उनकी चूत गर्म और गीली थी। हर धक्के पर उनकी गाँड सोफे से टकरा रही थी। मैं उनके स्तन दबाता रहा। उन्होंने मेरा चेहरा पकड़कर चुंबन किया। मैंने रफ़्तार बढ़ा दी। अब ज़ोर-ज़ोर से पेल रहा था। थप-थप की आवाज़ निकलने लगी। उनकी चूत से पानी निकल रहा था। “चोद… ज़ोर से चोद… मेरी चूत फाड़ दे।”
मैंने उन्हें उल्टा कर दिया। डॉगी बना दिया। उनकी बड़ी, गोल गाँड मेरे सामने थी। मैंने उनकी गाँड के दोनों हिस्से फैलाकर उनकी चूत में फिर से लंड डाल दिया। इस पोज़ीशन में और गहरा जा रहा था। मैंने उनकी गाँड पर थप्पड़ मारने लगा। “भाभी की इतनी बड़ी गाँड… देखकर लंड और खड़ा हो रहा है।” उन्होंने पीछे से कहा, “मार… और मार… गाँड पर थप्पड़ मारकर चोद।”
मैं उनकी गाँड पर हाथ फेरते हुए उनके गाँड के छेद पर उंगली रखी। उन्होंने शरीर सख्त कर लिया। “वहाँ मत… पहले कभी नहीं किया।” मैंने थूक लगाकर उंगली धीरे से उनकी गाँड में डाल दी। उनकी गाँड बहुत टाइट थी। मैं उंगली अंदर-बाहर करने लगा जबकि लंड उनकी चूत में पेल रहा था। उनकी आवाज़ें बढ़ने लगीं। “आह्ह… दोनों जगह… पागल कर दिया तूने।”
मैंने लंड निकालकर उनकी गाँड पर रख दिया। थूक लगाकर धीरे से धक्का दिया। सिर्फ टिप अंदर गई। उन्होंने तकिया दबाया। “दर्द हो रहा है… निकाल।” मैं रुका नहीं। धीरे-धीरे आधा लंड उनकी गाँड में घुसा दिया। उनकी गाँड ने मेरे लंड को इतना कसकर पकड़ा कि मैं लगभग झड़ने वाला था। मैंने पूरा लंड उनकी गाँड में डाल दिया। उनकी चीख निकल गई। “मादरचोद… गाँड फट गई… निकाल मत… अब अंदर ही रख।”
मैंने उनकी कमर पकड़कर उनकी गाँड चोदने लगा। पहले धीरे, फिर तेज़। उनकी बड़ी गाँड मेरे पेट से टकरा रही थी। हर धक्के पर उनकी गाँड हिल रही थी। मैंने उनके बाल पकड़कर पीछे खींच रहा था। “भाभी की गाँड इतनी टाइट है… जैसे वर्जिन।” उन्होंने कहा, “चुप चाप चोद… और गहरा… पूरे लंड से।”
मैं दस-पंद्रह मिनट उनकी गाँड चोदता रहा। उनका गाँड का छेद लाल हो गया था। मैंने लंड निकालकर उनकी चूत में डाला, फिर गाँड में, फिर चूत में। उन्हें बिल्कुल पागल कर दिया। उन्होंने खुद अपनी गाँड फैलाई और कहा, “आज पूरी रात चोदो… अमित नहीं आएगा जल्दी।”
मैंने उन्हें उठाकर बेडरूम ले गया। बिस्तर पर उन्हें लिटाया। उनकी टाँगें कंधों तक दबाईं और उनकी चूत में पूरे ज़ोर से पेलने लगा। उनके स्तन हिल रहे थे। मैं उनके निप्पलों को काट-काट कर चूस रहा था। उन्होंने मेरा लंड निकालकर मुँह में ले लिया। मेरी गाँड तक लंड उनके गले में चला गया। उन्होंने रुका नहीं, चूसती रहीं। मैं उनके मुँह में ही झड़ने वाला था लेकिन निकाल लिया।
फिर मैंने उनकी गाँड में वापस डाल दिया। इस बार फुल स्पीड। उनकी गाँड से थप-थप की आवाज़ आ रही थी। उनका पानी चूत से निकलकर उनकी गाँड तक आ रहा था। मैं उनकी गाँड में ही झड़ गया। गर्म वीर्य की धार उनकी गाँड के अंदर छूट गई। मैं दबाए रखा। उनकी गाँड ने मेरे लंड को निचोड़ लिया।
मैं निकालकर उनके बगल में लेट गया। उनकी गाँड से मेरा वीर्य निकल रहा था। उन्होंने मेरी तरफ़ मुड़कर कहा, “आज से जब भी चाभी गुमेगी… मैं यहीं रुकूँगी।” मैं उनकी गाँड दबाते हुए मुस्कुराया। “चाभी रोज़ गुमाया करो भाभी।”
उस रात हमने तीन बार किया। सुबह चार बजे अमित ने कॉल किया कि वह आ रहा है। प्रिया भाभी ने जल्दी कपड़े पहने और मेरी चाभी से अपना फ्लैट खोल लिया (मैंने स्पेयर की भी बना ली थी)। जाते-जाते उन्होंने मेरा लंड एक बार और दबाया और कहा, “कल रात फिर आना… आज गाँड और चूत दोनों सूजी हुई हैं।”
उस दिन के बाद से प्रिया भाभी मेरी नियमित भाभी बन गईं। कभी चाभी के बहाने, कभी वाईफाई के बहाने, कभी सिर्फ “अकेला फील हो रहा है” कहकर। और हर बार मैं उनकी बड़ी गाँड और गीली चूत को बिल्कुल गंदी तरह से चोदता।
यही थी मेरी पड़ोसन भाभी की पहली और सबसे गंदी चुदाई की कहानी।
