पड़ोस की प्रिया भाभी को रंडी बनाकर चोदा

मेरा नाम आदित्य है। उम्र तेईस। कोचिंग के लिए शहर आया था और किराए के कमरे में रहता था। मेरे कमरे के ठीक सामने वाली मंजिल पर प्रिया भाभी रहती थीं। उम्र लगभग बत्तीस। गोरी, गोल मटोल चेहरा, भारी स्तन और चलते समय लहराती हुई गाँड। पति बैंक में मैनेजर थे और हफ्ते में चार-पाँच दिन दूसरे शहर में ही रहते थे।

पहले-पहले सिर्फ नमस्ते होती थी। फिर धीरे-धीरे बातें बढ़ीं। कभी दाल माँगने आ जातीं, कभी मैं उनके यहाँ खाना खा लेता। प्रिया भाभी अकेली थीं। बात करने वाली। हँसती बहुत थीं। हँसते समय उनकी चुचियाँ हिलती थीं और मेरा लंड बिना पूछे खड़ा हो जाता था।

एक शनिवार की रात की बात है। बारिश हो रही थी। मैंने देखा उनके घर का दरवाजा थोड़ा खुला है। अंदर जाकर आवाज लगाई। “भाभी, कोई है?”

“आ जा आदित्य… दरवाजा बंद कर दे।”

अंदर घुसा तो प्रिया भाभी सोफे पर बैठी थीं। पतली नाइटी पहने। नाइटी इतनी पतली थी कि उनके निप्पल साफ दिख रहे थे। बाल खुले थे। हाथ में वाइन का गिलास था।

“पति नहीं आए?” मैंने पूछा।

“नहीं। फिर तीन दिन बाद आएंगे।” वह मुस्कुराई। “तू भी बैठ। अकेला क्या करेगा।”

मैंने उनके पास जगह बनाई। नाइटी की स्लिट से उनकी जाँघ का बड़ा हिस्सा दिख रहा था। गोरी चिकनी जाँघ। मैं बार-बार देख रहा था। प्रिया भाभी ने भी नोटिस किया। लेकिन कुछ नहीं बोलीं। गिलास आगे बढ़ाया। “पी ले। आज मौसम ही ऐसा है।”

दो-तीन घूँट पीए होंगे कि उनकी जाँघ मेरी जाँघ से छू गई। मैंने हटाई नहीं। उन्होंने भी नहीं हटाई। कमरे में सिर्फ पंखे की आवाज थी और बाहर बारिश की।

“आदित्य…” उन्होंने धीरे से कहा। “तू मुझे ऐसे क्यों देखता है रोज?”

मैंने साहस जुटाया। “क्योंकि आप बहुत हसीन हो भाभी।”

वह हँसीं। “शादीशुदा औरत को ऐसे नहीं बोलते।”

“बोल देता हूँ।”

उसने गिलास टेबल पर रखा और मेरी तरफ मुड़ी। आँखों में नशा था और कुछ और भी। मैंने आगे बढ़कर उनके होंठों को चूम लिया। पहले तो वह सहम गईं, फिर धीरे से जवाब देने लगीं। जीभ अंदर आई। मैंने उनकी कमर पकड़ ली। नाइटी के अंदर हाथ डाल दिया। नंगी पीठ। ब्रा नहीं पहनी थी।

मेरा हाथ आगे बढ़कर उनके स्तन पर चला गया। भारी, मुलायम और गर्म। निप्पल पहले से सख्त था। मैंने मसला तो वह हल्के से कराह उठीं। “आह्ह… धीरे…”

मैंने नाइटी ऊपर उठाई। उनके दोनों स्तन बाहर आ गए। मैंने मुँह में एक निप्पल ले लिया और जोर से चूसने लगा। प्रिया भाभी का सिर पीछे झुक गया। उनके हाथ मेरे बालों में थे। “साले… कितना जोर से चूस रहा है…”

मैंने उन्हें सोफे पर लिटा दिया। नाइटी पूरी उतार दी। अब वह पूरी नंगी थीं। चिकनी मुंडी चूत, थोड़ी गीली चमक रही थी। मैंने जाँघें चौड़ी कीं और जीभ रख दी। प्रिया भाभी की कमर उछल गई।

“आह्ह्ह… आदित्य… क्या कर रहा है…”

मैं उनकी चूत चाट रहा था जैसे भूखा होऊँ। जीभ अंदर तक घुसा रहा था, क्लिटोरिस चूस रहा था। उनकी जाँघें मेरे सिर को जकड़ रही थीं। थोड़ी देर में वह काँपने लगीं। “रुक… मैं… मैं जाने वाली हूँ…”

मैं रुका नहीं। उनकी चूत मेरे मुँह पर और दब गई। वह जोर से काँपीं और गीलापन बढ़ गया। मैंने उठाकर देखा। उनकी आँखें धुंधली थीं।

मैंने जल्दी से कपड़े उतारे। मेरा लंड पूरी तरह खड़ा था। प्रिया भाभी ने हाथ बढ़ाकर पकड़ लिया। “इतना सख्त… इतना मोटा…”

मैं उनके ऊपर आ गया। लंड उनकी चूत पर रगड़ा। फिर धीरे से धक्का दिया। आधा अंदर गया। वह दर्द से भौंहें सिकोड़ गईं। “आह्ह… बड़ा है तेरा…”

मैंने और धक्का मारा। पूरा लंड उनकी चूत में समा गया। दोनों रुक गए। फिर मैं हिलने लगा। धीरे-धीरे, फिर तेज। प्रिया भाभी की चुचियाँ मेरे चेहरे पर उछल रही थीं। मैंने एक को मुँह में ले लिया और नीचे धक्के जारी रखे।

“चोदो… जोर से चोदो आदित्य… आज पूरी रात चोदना…”

मैंने उनकी टाँगें कंधों पर रख लीं। और गहराई तक जाने लगा। हर धक्के पर उनकी गाँड सोफे से टकरा रही थी। आवाज आ रही थी – चप-चप-चप। प्रिया भाभी के मुँह से सिर्फ अश्लील शब्द निकल रहे थे।

“और… और अंदर… मेरी चूत फाड़ दे…”

मैंने उन्हें उलटा कर दिया। घोड़ी बना दिया। उनकी गोल गाँड मेरे सामने थी। दोनों हाथों से फैलाकर लंड फिर से चूत में डाल दिया। इस बार और जोरदार धक्के लगे। एक हाथ से उनकी गाँड पर थप्पड़ भी मार रहा था। लाल निशान पड़ गए।

“मार… और मार… आह्ह भाभी की गाँड मार…”

मैंने थूककर उँगली उनकी गाँड के छेद में डाली। प्रिया भाभी सहम गईं लेकिन पीछे हटने की बजाय और धक्का देने लगीं। थोड़ी देर बाद मैंने लंड निकाला और गाँड पर लगाया। धीरे-धीरे दबाव दिया।

“आह्ह्ह्ह… दर्द… लेकिन मत रोक…”

मैंने धीरे-धीरे पूरा लंड उनकी गाँड में धकेल दिया। फिर धक्के मारने लगा। प्रिया भाभी का चेहरा तकिए में धँसा था। उनकी आवाजें दबी हुई आ रही थीं। मैं उनकी कमर पकड़े हुए जोर-जोर से गाँड चोद रहा था।

“ले भाभी… ले मेरा लंड अपनी गाँड में… कैसी लग रही है?”

“बहुत… बहुत मस्त… फाड़ दे पूरी…”

मैं लगभग पंद्रह-बीस मिनट तक उनकी गाँड चोदता रहा। फिर निकाला और वापस चूत में डाल दिया। अब दोनों जगह ढीली और गीली हो चुकी थीं। प्रिया भाभी बार-बार झड़ रही थीं। उनकी चूत बार-बार मेरे लंड को जकड़ लेती थी।

आखिर में मैंने उन्हें फिर सीधा किया। चेहरा पास लाकर चूमा। नीचे लंड पागलों की तरह चल रहा था। “भाभी… झड़ने वाला हूँ…”

“अंदर झाड़… मेरी चूत में भर दे अपना माल…”

मैंने आखिरी जोरदार धक्के मारे और रुक गया। गरम माल की धार उनकी चूत में छूटने लगी। एक के बाद एक। इतना झाड़ा कि बाहर भी निकल आया। दोनों हांफ रहे थे।

मैं उनके ऊपर गिरा रहा। प्रिया भाभी मेरे बाल सहला रही थीं। “साले… कितना चोदा तूने… पति ने कभी इतनी जोर से नहीं चोदा।”

मैंने सिर उठाया। “अब रोज़ चोदूँगा। जब तक वह नहीं आता।”

वह मुस्कुराईं। “रोज़ आना। मैं तेरी रखैल बन गई हूँ।”

उस रात हमने दो बार और किया। एक बार नहाते हुए। बाथरूम की दीवार से सटाकर खड़े-खड़े। दूसरी बार सुबह चार बजे। उस बार उसने खुद मेरे ऊपर बैठकर कमर हिलाई। उसकी भारी चुचियाँ मेरे चेहरे पर लटकी थीं। मैं दोनों को चूस रहा था और वह मेरे लंड पर बैठकर अपनी चूत को चोद रही थी।

सुबह जब मैं उनके घर से निकला तो शरीर में कोई ताकत नहीं बची थी। लेकिन मन हल्का था। प्रिया भाभी दरवाजे तक आईं। नाइटी पहने, बाल बिखरे, गर्दन पर मेरे किए हुए निशान।

“शाम को आ जाना,” उन्होंने धीरे से कहा। “आज खाना मैं बनाऊँगी… और फिर तू मुझे बना लेना।”

मैंने सिर्फ मुस्कुराकर जवाब दिया।

उस दिन के बाद प्रिया भाभी की रातें मेरी हो गईं। पति जब शहर में नहीं होते, मैं उनके बिस्तर पर होता। कभी सोफे पर, कभी रसोई की प्लेटफॉर्म पर, कभी छत पर अंधेरे में। हर बार नई भूख, नई गंदगी।

और प्रिया भाभी हर बार पहले से ज्यादा खुलती गईं।

अब वह खुद आकर मेरा लंड निकालतीं। खुद मुँह में लेतीं। खुद गाँड फैलातीं।

एक शादीशुदा औरत पूरी तरह मेरी रंडी बन चुकी थी। और मुझे इससे बढ़कर कुछ नहीं चाहिए था।

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