सुबह की रोशनी जब खिड़की से अंदर आई तो प्रिया की आँखें पहले से खुली हुई थीं। बगल में राजेश गहरी नींद में सो रहे थे। उनकी साँसें नियमित थीं। प्रिया ने धीरे से चादर हटाई और अपने जाँघों के बीच उंगली फेरकर देखा।
कल राकेश का छोड़ा हुआ गाढ़ा माल अभी भी हल्का-हल्का चिपचिपा महसूस हो रहा था। उसने उंगली को नाक के पास ले जाकर सूँघा। एक अजीब सी खुशबू थी – पराए मर्द की।
“मैंने सच में कर लिया…” उसने मन ही मन कहा।
राजेश की आँखें खुल गईं। उन्होंने मुस्कुराते हुए पूछा, “इतनी जल्दी जाग गई?”
प्रिया ने सामान्य स्वर में जवाब दिया, “हाँ… चाय बना दूँ?”
वह उठकर किचन में चली गई। चाय बनाते हुए उसके दिमाग में बार-बार कल की सारी तस्वीरें घूम रही थीं। राकेश का मोटा लंड, उसकी गांड में घुसते वक्त का दर्द और फिर मजा, उसके मुँह से निकली गंदी गालियाँ।
राजेश जब तैयार होकर ऑफिस जाने लगे तो प्रिया ने अचानक उनका हाथ पकड़ लिया।
“आज जल्दी आना… रात को बात करनी है।”
राजेश ने हल्के से माथा चूमा, “ठीक है। तुम भी आराम करना।”
दरवाजा बंद होते ही प्रिया का चेहरा बदल गया। उसने फोन उठाया और राकेश को मैसेज किया –
“आज दोपहर मत आना। शाम को साढ़े छह बजे पार्क के पीछे वाली बेंच पर मिल। और अकेला आ।”
जवाब तुरंत आया – “ठीक है। कुछ नया सोच रही हो?”
प्रिया ने जवाब नहीं दिया। वह खुद भी नहीं जानती थी कि वह क्या सोच रही है। बस इतना तय था कि अब घर की चारदीवारी काफी नहीं।
शाम को साढ़े पाँच बजे प्रिया ने हल्की जींस और ढीला टॉप पहना। नीचे कोई ब्रा नहीं, कोई पैंटी नहीं। सिर्फ कपड़े। उसने बाल खोले और हल्की लिपस्टिक लगाई। आईने में खुद को देखा तो एक अजीब सी मुस्कान चेहरे पर तैर गई।
“मिश्रा की बीवी अब मिश्रा की बीवी नहीं रही।”
पार्क के पीछे वाली बेंच पर राकेश पहले से बैठा था। प्रिया पास जाकर उसके बगल में बैठ गई। चारों तरफ पेड़ थे। थोड़ी दूर बच्चों के खेलने की आवाजें आ रही थीं, लेकिन यह कोना काफी अंधेरा और सुनसान था।
राकेश ने उसकी जाँघ पर हाथ रखा, “घर पर मना क्यों किया?”
प्रिया ने उसकी ओर देखा। आँखों में एक नई चमक थी।
“क्योंकि अब मुझे डर भी महसूस करना है। घर में तो सब सुरक्षित था। यहाँ… अगर कोई देख ले तो?”
राकेश की साँसें तेज हो गईं। प्रिया ने खुद ही उसका हाथ अपनी जींस के अंदर सरका दिया। उसकी चूत पहले से गीली थी। राकेश की उंगलियाँ अंदर घुसते ही प्रिया की कमर लचक गई।
“यहीं…?” राकेश ने धीरे से पूछा।
प्रिया ने जींस का बटन खोला और खींचकर नीचे कर ली। फिर राकेश की पैंट की जिप खोली। उसका लंड पहले से तना हुआ था। प्रिया ने बेंच पर घुटने टेक दिए और झुककर लंड को मुँह में ले लिया।
रात के अंधेरे में सिर्फ चूसने की आवाज गूंज रही थी। प्रिया ने गहराई तक लिया। गले तक। लार टपक रही थी। राकेश ने उसके बाल पकड़ रखे थे।
थोड़ी देर बाद प्रिया उठी और बेंच पर बैठकर अपनी दोनों टाँगें फैला दीं।
“अब डाल… जल्दी।”
राकेश ने लंड को उसकी चूत पर लगाया और एक झटके में पूरा अंदर धकेल दिया। प्रिया ने अपना मुँह उसके कंधे में दबा लिया ताकि चीख बाहर न जाए।
“आह्ह… इतना जोर से… यहाँ… कोई आ सकता है…”
राकेश ने उसके चूतड़ पकड़कर जोर-जोर से ठोकरें मारनी शुरू कर दीं। हर ठोकर पर प्रिया की साँसें रुक रही थीं। जींस उसके घुटनों तक लटकी हुई थी। टॉप ऊपर खिसक चुका था। स्तन खुले आकाश के नीचे कांप रहे थे।
“बोल… किसकी रांड बन गई है तू?” राकेश ने दाँत भींचकर पूछा।
“तेरी… सिर्फ तेरी… मिश्रा की बीवी नहीं… तेरी चुदक्कड़ रांड…”
अचानक दूर से कुत्ते के भौंकने की आवाज आई। दोनों एक पल के लिए रुक गए। फिर राकेश ने और तेज गति से चोदना शुरू कर दिया। प्रिया की चूत से पानी की आवाज साफ सुनाई दे रही थी।
वह अपने होंठ काट रही थी। अचानक उसकी बॉडी अकड़ गई और जोरदार पानी निकल गया। राकेश ने भी उसी पल अंदर ही माल छोड़ दिया। गर्म धार उसके गर्भ तक पहुँच गई।
दोनों हाँफते हुए बेंच पर बैठे रहे। प्रिया की जींस अभी भी घुटनों तक थी। उसने राकेश के लंड से टपकते हुए माल को उंगली से उठाकर चख लिया।
“अब घर चल… लेकिन आज रात राजेश के सोने के बाद तू फिर आना। खिड़की के रास्ते।”
राकेश ने उसकी ओर देखा, “खिड़की?”
प्रिया ने मुस्कुराया, “हाँ। अब मुझे घर के अंदर भी खतरा महसूस करना है।”
रात के बारह बज रहे थे। राजेश गहरी नींद में थे। प्रिया ने हल्के से खिड़की खोली। राकेश चुपचाप अंदर आ गया। दोनों ने बिना एक शब्द कहे कपड़े उतारे।
इस बार प्रिया ने खुद राकेश को बिस्तर पर लिटाया – ठीक राजेश के बगल में।
“यहीं चोद… मेरे पति के बगल में।”
राकेश की आँखें फैल गईं। लेकिन प्रिया ने उसका लंड पकड़कर अपनी चूत में डाल लिया और ऊपर बैठ गई। धीरे-धीरे कमर घुमाने लगी। बिस्तर हल्का-हल्का हिल रहा था। राजेश करवट लेकर सोए रहे।
प्रिया ने झुककर राकेश के कान में फुसफुसाया, “आज से मैं सच में चुदक्कड़ हो गई हूँ… और अब मैं रुकने वाली नहीं।”
वह तेजी से उछलने लगी। स्तन राकेश के चेहरे पर बार-बार लग रहे थे। अचानक राजेश की साँसें बदलीं। दोनों एक पल के लिए पत्थर की तरह हो गए।
राजेश ने आँखें नहीं खोलीं। बस करवट बदल ली।
प्रिया की आँखों में एक जंगली चमक आ गई। उसने और जोर से कमर पटकनी शुरू कर दी। राकेश के मुँह पर हाथ रख दिया ताकि कोई आवाज न निकले।
जब दोनों झड़ चुके तो प्रिया ने राकेश को खिड़की से बाहर भेज दिया। फिर राजेश के बगल में लेट गई। उसके अंदर अभी भी पराए मर्द का माल भरा हुआ था।
उसने धीरे से राजेश की पीठ पर हाथ फेरा और मुस्कुराई।
“अब देखती हूँ… आगे क्या होता है।”
फोन पर राकेश का मैसेज पहले से आ चुका था –
“कल मेरे दोस्त को भी लाऊँ? तूने खुद कहा था।”
प्रिया ने जवाब लिखा –
“ला… लेकिन इस बार घर पर नहीं। किसी होटल में। और हाँ… वीडियो भी बनाना। मैं देखना चाहती हूँ कि मिश्रा की बीवी कितनी गिरी जा चुकी है।”
मैसेज भेजते ही उसकी चूत फिर से गीली हो गई।
