दोपहर के तीन बज रहे थे। कमरे में पंखा धीरे-धीरे घूम रहा था और खिड़की से आती धूप ने सफेद चादर पर सुनहरी धारियाँ बना रखी थीं। प्रिया मिश्रा बिस्तर पर लेटी हुई थी। उसकी साड़ी का पल्लू कंधे से खिसक चुका था। सफेद ब्लाउज के नीचे उसके बड़े-बड़े स्तन उभरे हुए थे। निप्पल इतने सख्त हो चुके थे कि कपड़े के ऊपर से साफ दिख रहे थे।
उसने अपनी आँखें बंद कर लीं। उंगलियाँ धीरे-धीरे साड़ी के नीचे चली गईं। पैंटी गीली हो चुकी थी। उसने दो उंगलियाँ अंदर डाली और धीरे-धीरे आगे-पीछे करने लगी।
“आह्ह… मिश्रा… आज फिर लेट आओगे… फिर वही बहाना… ऑफिस का काम…”
उसकी साँसें तेज हो गईं। उंगलियाँ तेज घूमने लगीं। चूत की दीवारें सिकुड़ रही थीं। पानी की आवाज साफ सुनाई दे रही थी। उसने दूसरी हाथ से अपने बाएँ स्तन को दबाया और निप्पल को उंगली से मरोड़ा।
“चोदो मुझे… जोर से… जैसे कोई पराया मर्द चोदे…”
अचानक उसकी कमर उछली। पानी की तेज धार निकली। उसने मुँह दबा लिया ताकि आवाज बाहर न जाए। शरीर काँप रहा था। पैंटी पूरी तरह भीग चुकी थी।
प्रिया ने आँखें खोलीं। छत को देखते हुए मुस्कुराई। तीस साल की उम्र में भी उसका जिस्म ऐसा था कि कोई भी मर्द पहली नजर में गरम हो जाए। गोरा रंग, लंबे काले बाल, भारी स्तन, पतली कमर और गोल-गोल चूतड़। पति राजेश मिश्रा पिछले तीन साल से सिर्फ हफ्ते में एक-दो बार ही छूते थे। और वो भी जल्दी-जल्दी। दस मिनट में खत्म।
आज उसने फैसला कर लिया था।
शाम को राजेश घर आए तो प्रिया किचन में खड़ी थी। उसने जानबूझकर पतली सफेद साड़ी पहनी थी। ब्लाउज इतना टाइट था कि स्तन बाहर निकलने को तैयार लग रहे थे। राजेश ने बैग रखा और पानी माँगा।
प्रिया ने गिलास देते हुए जानबूझकर अपना हाथ उसके हाथ से रगड़ा।
“आज ऑफिस में बहुत थकान हो गई?”
राजेश ने बिना देखे कहा, “हाँ… मीटिंग्स… कल भी अर्ली जाना है।”
प्रिया ने साड़ी का पल्लू गिरा दिया। स्तन साफ दिखने लगे। उसने राजेश के पास आकर उसके कंधे पर हाथ रखा।
“तो आज रात… थोड़ी देर तो निकाल सकते हो न?”
राजेश ने मुस्कुरा कर उसका हाथ हटा दिया। “बाद में… अभी नहाता हूँ।”
प्रिया की आँखों में कुछ चमक गया। उसने कुछ नहीं कहा। रात के खाने के बाद राजेश टीवी देखने बैठ गए। प्रिया बाथरूम गई। उसने पैंटी उतार दी। चूत अभी भी गीली थी। उसने दो उंगलियाँ अंदर डाली और खुद को फिर से गरम कर लिया। फिर बाहर आकर राजेश के बगल में बैठ गई।
उसने अपना सिर उनके कंधे पर रखा। हाथ धीरे-धीरे उनकी जांघ पर चला गया। ऊपर की तरफ।
राजेश ने टीवी से नजर हटाई। “क्या कर रही हो?”
प्रिया ने धीरे से कहा, “छू रही हूँ… बहुत दिनों बाद… लग रहा है कुछ है अंदर।”
उसकी हथेली ने पैंट के ऊपर से लंड को दबाया। थोड़ा सा कड़ा हो रहा था। उसने जिप खोल दी और हाथ अंदर डाल दिया। गरम लंड उसकी मुट्ठी में आ गया। उसने ऊपर-नीचे करना शुरू कर दिया।
राजेश की साँसें बदलीं। “प्रिया… टीवी…”
“टीवी बंद करो,” प्रिया ने फुसफुसाया और उनके लंड को बाहर निकाल लिया। मोटा, नसों वाला लंड उसके हाथ में तन चुका था। उसने झुक कर अपनी जीभ से टोपी चाटी। फिर पूरा मुँह में ले लिया।
“उम्मम…”
राजेश की आँखें बंद हो गईं। प्रिया ने धीरे-धीरे चूसना शुरू किया। लार टपक रही थी। उसने एक हाथ से अंडे सहलाए और दूसरे से अपनी चूत में उंगली डाली।
राजेश ने अचानक उसके बाल पकड़ लिए और जोर से धक्का दिया। लंड गले तक चला गया। प्रिया ने गैग किया लेकिन रुकी नहीं। उसने और गहरा लिया।
“आह्ह… प्रिया… आज क्या हो गया तुम्हें…”
प्रिया ने लंड मुँह से निकाला। लार की लाइन टपक रही थी। उसने साड़ी ऊपर कर ली और राजेश की गोद में बैठ गई। चूत को लंड की टोपी पर रगड़ा।
“अंदर डालो… आज पूरी रात चोदो मुझे…”
राजेश ने उसकी कमर पकड़ी और एक झटके में पूरा लंड अंदर धकेल दिया।
“आह्ह्ह्ह!”
प्रिया की आँखें फटी की फटी रह गईं। इतने दिनों बाद पूरा लंड अंदर जाना… चूत की दीवारें फैल गईं। उसने अपनी बाँहें उनके गले में डाल लीं और कमर घुमाने लगी।
“जोर से… और जोर से… चोदो मेरी चूत…”
राजेश ने टीवी बंद किया और उसे बिस्तर पर लिटा दिया। पैरों को कंधों पर चढ़ाया और जोर-जोर से ठोकरें मारने लगे। हर ठोकर पर प्रिया की चूत से पानी की आवाज आ रही थी। स्तन उछल रहे थे। उसने अपने दोनों स्तन दबाए और निप्पल मरोड़े।
“हाँ… वहाँ… और गहरा… मेरी चूत फाड़ दो…”
राजेश ने गति बढ़ा दी। बिस्तर चरमरा रहा था। प्रिया चीख रही थी। अचानक उसकी कमर अकड़ गई और पानी की तेज धार निकली। राजेश के पेट पर छिड़क गई।
राजेश ने भी जोर से धक्का दिया और गर्म माल उसकी चूत के अंदर छोड़ दिया। दोनों हाँफ रहे थे।
प्रिया ने आँखें खोलीं। राजेश उसके ऊपर लेटे हुए थे। उसने उनके बाल सहलाए और धीरे से कहा, “आज तो मजा आया… लेकिन राजेश… मुझे और चाहिए… बहुत ज्यादा…”
राजेश मुस्कुराए। “कल… अभी सो जाओ। सुबह अर्ली है।”
वे करवट लेकर सो गए। लेकिन प्रिया की आँखों में नींद नहीं थी। उसकी चूत अभी भी धड़क रही थी। अंदर उनका माल टपक रहा था। उसने उंगली डाल कर उसे बाहर निकाला और चख लिया।
“इतना कम… मुझे पूरा भरना चाहिए…”
दूसरे दिन राजेश ऑफिस चले गए। प्रिया घर में अकेली थी। उसने बाथरूम में जाकर नहाया। शीशे के सामने खड़ी होकर अपने नंगे जिस्म को देखा। स्तन भारी थे। निप्पल गुलाबी। चूत के बाल उसने कल रात काट दिए थे। चिकनी, गुलाबी चूत। उसने उंगली से फैलाया और अंदर देखा।
“आज कुछ नया करना होगा…”
उसने फोन उठाया। पड़ोस के राकेश का नंबर था। राकेश तीस के आसपास था। पत्नी विदेश में नौकरी करती थी। अक्सर अकेला रहता था। कभी-कभी प्रिया से बातें करता था। नजरें थोड़ी देर तक ठहर जाती थीं।
प्रिया ने मैसेज किया:
“राकेश जी… आज दोपहर को कुछ काम था… अगर फ्री हो तो आ सकते हो?”
जवाब तुरंत आया। “हाँ… क्या काम है?”
प्रिया ने मुस्कुराया। “घर पर बताऊँगी।”
एक घंटे बाद घंटी बजी। प्रिया ने दरवाजा खोला। उसने सिर्फ एक ढीला सा नाइटी पहना था। नीचे कुछ नहीं। निप्पल साफ दिख रहे थे।
राकेश की नजरें सीधे उसके स्तनों पर गईं। फिर ऊपर।
“आ जाइए…”
राकेश अंदर आया। प्रिया ने दरवाजा बंद किया और पीछे से कुंडी लगा दी।
“चाय पिएँगे?”
“नहीं… बताइए क्या काम था?”
प्रिया ने उसके पास आकर खड़ी हो गई। इतनी करीब कि उसके स्तन राकेश की छाती से छू रहे थे।
“काम ये है… कि मेरी चूत बहुत जल रही है… और मेरे पति के पास समय नहीं है…”
राकेश की आँखें फैल गईं। प्रिया ने उसका हाथ पकड़ कर अपने स्तन पर रख दिया।
“छूकर देखो… कितने सख्त हैं…”
राकेश का हाथ काँपा। लेकिन उसने दबाया। प्रिया ने आह भरी। उसने अपना दूसरा हाथ नीचे ले जाकर राकेश की पैंट पर रखा। लंड पहले से ही तन चुका था।
“निकालो…”
राकेश ने जल्दी-जल्दी पैंट खोली। मोटा, लंबा लंड बाहर निकला। प्रिया ने घुटनों के बल बैठ कर उसे मुँह में ले लिया। गरम, नसों वाला लंड। उसने गहरा चूसा। लार टपक रही थी। राकेश के हाथ उसके बालों में थे।
“आह्ह… प्रिया जी… आप…”
प्रिया ने लंड निकाला। “आज से मुझे प्रिया कहो… और चोदो मुझे जैसे कोई कुतिया चोदी जाती है…”
उसने नाइटी उतार दी। पूरी नंगी खड़ी हो गई। राकेश ने उसे उठा कर सोफे पर लिटा दिया। पैर फैलाए। चूत चमक रही थी। उसने झुक कर जीभ अंदर डाल दी।
“आह्ह्ह्ह! जी हाँ… चाटो… जोर से चाटो मेरी चूत…”
राकेश ने दोनों होठों से चूसना शुरू किया। क्लिट को जीभ से मारा। प्रिया की कमर उछल रही थी। उसने उसके सिर को और जोर से दबाया।
“अंदर डालो… अब डालो…”
राकेश ने अपना लंड उसके मुँह पर रगड़ा। फिर एक जोरदार ठोकर में पूरा अंदर धकेल दिया।
“आआआह्ह्ह!”
प्रिया की आँखों में पानी आ गया। इतना मोटा लंड… राजेश से काफी बड़ा। राकेश ने उसके पैर कंधों पर चढ़ाए और जोर-जोर से ठोकरें मारने लगा। हर ठोकर पर प्रिया की चूत से पानी छलक रहा था। स्तन उछल रहे थे। उसने अपने दोनों स्तन पकड़ कर निप्पल मरोड़े।
“जोर से… और जोर से… मेरी चूत फाड़ दो… हाँ… वहाँ… और गहरा…”
राकेश ने उसे पलट दिया। कुतिया बना दिया। पीछे से पकड़ कर जोर से ठोकने लगा। एक हाथ से उसके बाल खींचे। दूसरे से स्तन दबाए।
“बोलो… किसकी चुदक्कड़ औरत हो?”
“आपकी… आपकी… चोदो मेरी गांड भी… आज दोनों छेद भर दो…”
राकेश ने लंड निकाला। थूक लगाया और धीरे-धीरे गांड के छेद पर लगाया। प्रिया ने कराहते हुए कहा, “धीरे… पहली बार…”
एक पोर अंदर गया। फिर और। प्रिया की मुट्ठियाँ भींच गईं। दर्द और मजे का मिश्रण। राकेश ने धीरे-धीरे पूरा अंदर कर दिया और फिर ठोकरें मारने लगा।
“आह्ह… हाँ… अब दोनों… बारी-बारी…”
उसने लंड निकाल कर फिर चूत में डाला। फिर गांड में। प्रिया पागल हो रही थी। उसकी चूत और गांड दोनों से पानी टपक रहा था। अचानक उसकी कमर अकड़ गई और जोरदार पानी निकला। राकेश ने भी जोर से धक्का दिया और गर्म माल उसकी गांड के अंदर छोड़ दिया।
दोनों गिर पड़े। हाँफ रहे थे।
प्रिया ने मुस्कुराते हुए कहा, “आज से रोज आना… राजेश जब भी लेट आए… तुम आ जाना…”
राकेश ने उसके स्तन को चूसते हुए कहा, “और कोई और भी बुलाऊँ क्या?”
प्रिया की आँखों में चमक आ गई। उसने उसके लंड को फिर से सहलाया।
“हाँ… लेकिन पहले मुझे और चोदो… आज रात तक…”
बाहर सड़क पर गाड़ियों की आवाज आ रही थी। कमरे में सिर्फ चुदाई की आवाजें गूंज रही थीं। प्रिया मिश्रा की नई जिंदगी की शुरुआत हो चुकी थी।
और ये तो सिर्फ शुरुआत थी…

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