आओ जाओ चूत तुम्हारी | रंडी बीवी ने पति के सामने चुदवाया

मेरा नाम राशी है। उम्र बत्तीस साल। शादी को सात साल हो चुके हैं। पति का नाम मोहित। उम्र पैंतीस। देखने में साफ-सुथरा, शर्मीला किस्म का आदमी। बात करता है तो आँखें चुराता है। बेड पर तो और भी बुरा हाल है। पहले साल-दो साल तो चल रहा था। अब उसका लंड साला खड़ा ही नहीं होता। जब होता भी है तो दो मिनट में झड़ जाता है। मैं तड़पती रह जाती हूँ।

मैं वैसी औरत नहीं हूँ जो चुपचाप सह ले। मेरा शरीर बना ही चुदाई के लिए है। कद 5’6″। गोरी चमकदार त्वचा। चेहरा बोल्ड। आँखों में हमेशा एक गंदी चमक रहती है। सबसे ज्यादा आकर्षण मेरे शरीर में है। स्तन भारी और गोल—38डी। जब टाइट टॉप पहनती हूँ तो निप्पल साफ उभर आते हैं। कमर 28। गाँड पूरी गोल और उभरी हुई, 40। जाँघें मोटी और मुलायम। पेट सपाट। कुल मिलाकर ऐसी बॉडी कि मर्द देखकर लंड पर हाथ रख लें। लोग कहती हैं कि मैं रंडी जैसी लगती हूँ। मुझे फर्क नहीं पड़ता। रंडी जैसी दिखना और रंडी की तरह चुदना—दोनों मुझे पसंद हैं।

मोहित को मैंने कई बार जबरदस्ती चोदा है। रात को जब वो सोने का नाटक करता तो मैं उसकी पैंट खोल देती। लंड मुँह में ले लेती। चूसती। गालियाँ देती।

“साले खड़ा कर इस लंड को… मेरी चूत तड़प रही है… दो मिनट में झड़ने वाला लंड लेकर शादी क्यों की थी!”

कभी-कभी खड़ा हो जाता। तो मैं उसके ऊपर बैठ जाती और जोर-जोर से पटकती।

“ले… ले रंडी की तरह… तेरी बीवी रंडी है मोहित… चोद मुझे… नहीं तो और मर्द चोदेंगे!”

वो बस कराहता। आँखें बंद किए रहता। मजा उसे भी आता था लेकिन हिम्मत नहीं थी कि खुद पहल करे। अब तो हालत ये हो गई है कि लंड उठता ही नहीं। डॉक्टर के पास ले गई। नर्वसनेस बताई। दवाई चली। लेकिन फर्क कुछ नहीं पड़ा।

एक रात मैंने साफ कह दिया।

“मोहित, तेरा लंड अब मेरे काम का नहीं रहा। मैं तड़प-तड़प कर मर जाऊँगी। अब मैं बाहर से व्यवस्था करूँगी। तुझे कोई दिक्कत हो तो बोल दे। वरना चुपचाप देखता रह।”

वो लाल हो गया। कुछ नहीं बोला। बस सिर झुका लिया। मैं समझ गई—इजाजत मिल गई।

अगले दिन से मैंने अपने तरीके से सोचना शुरू किया। पहले तो पुराने नंबर्स निकाले। शादी से पहले के कुछ लड़के। फिर सोशल मीडिया पर कुछ ग्रुप्स जॉइन किए। स्विंगर कपल वाले। एक आदमी ने मैसेज किया। नाम था राज। उम्र चालीस के करीब। बदन ठीकठाक। लंड के फोटो भेजे—मोटा और काला। बातें गंदी होने लगीं।

“चूत कितनी इस्तेमाल हुई है तेरी?” उसने पूछा। “जितनी चाहिए उतनी,” मैंने जवाब दिया। “आ और खुद देख ले।”

मिलने का प्लान बन गया। मोहित को बता दिया।

“आज रात एक आदमी आ रहा है। तू दूसरे कमरे में रहियो। आवाजें आएंगी तो कान बंद कर लेना। या सुनना चाहे तो दरवाजा खुला छोड़ देना। तेरी मर्जी।”

मोहित ने सिर्फ इतना कहा, “जैसी तुझे ठीक लगे।”

शाम को मैंने तैयारियाँ कीं। काला नेट का गाउन पहना। अंदर सिर्फ ग-स्ट्रिंग। स्तन लगभग नंगे। बाल खोले। हल्की रेड लिपस्टिक। आईने में खुद को देखा तो लगा—हाँ, रंडी जैसी ही लग रही हूँ। और मुझे यही चाहिए था।

रात के नौ बजे घंटी बजी। राज था। लंबा। सांवला। आँखों में गंदी भूख। अंदर आते ही उसने मुझे ऊपर से नीचे तक स्कैन किया।

“बिल्कुल वैसी ही है जैसी सोची थी,” उसने कहा। “तो फिर देर किस बात की?” मैंने गाउन के फीते खोल दिए। गाउन फर्श पर गिर गया। सिर्फ ग-स्ट्रिंग में खड़ी थी।

राज ने झट से मुझे दीवार से लगा दिया। हाथ स्तनों पर चले गए। जोर से मसला। “कितने भारी हैं ये… साली रंडी।” “कम बातें कर और चोद,” मैंने कहा।

वो मुझे खींचकर सोफे पर ले गया। ग-स्ट्रिंग खींचकर फाड़ दी। उँगली चूत में डाली। “कितनी गीली है पहले से… पति चुदाई नहीं करता क्या?” “पति का लंड खड़ा नहीं होता साले। इसलिए तुझे बुलाया है। अब चुपचाप चोद।”

राज हँसा। उसने अपना लंड निकाला। मोटा। काला। नसें फूली हुईं। मैंने झुककर मुँह में ले लिया। जोर से चूसा। गला तक ले गई। राज ने बाल पकड़कर धक्के दिए।

“चूस रंडी… पति की बीवी होकर पराए लंड चूस…” “चूस रही हूँ… अब चूत में डाल…”

वो मुझे उल्टा कर दिया। गाँड उठाई और एक झटके में लंड अंदर पेला।

“आह्ह्ह… मादरचोद… कितना मोटा…”

राज ने जोर-जोर से पेलना शुरू किया। हर धक्के के साथ मेरे स्तन सोफे पर पटक रहे थे। मैं गालियाँ दे रही थी।

“और जोर से… फाड़ चूत को… पति के लंड से कहीं बेहतर है तेरा… चोद रंडी को…” “तेरी चूत कितनी गरम है साली… पति ने इसे यूँ ही बेकार छोड़ रखा था…”

वो मुझे खींचकर खड़ा कर दिया। एक पैर सोफे पर रखकर खड़े-खड़े चोदने लगा। हाथ से स्तन मसले जा रहे थे। मैं दीवार पकड़कर कराह रही थी।

“भर दे अंदर… आज कंडोम नहीं… पूरा पानी चूत में छोड़…”

राज ने गति और तेज कर दी। कुछ देर बाद उसके धक्के अनियंत्रित हो गए। गरम वीर्य की धार मेरे अंदर छूटने लगी। मैंने भी उसी समय झड़ गई। दोनों पसीने से तर थे।

राज लंड निकालकर बैठ गया। मैं सोफे पर फैली रही। चूत से उसका पानी बह रहा था। जाँघों तक लग गया।

“मजा आया?” उसने पूछा। “अबकी बार और जोर से चोदना,” मैंने कहा। “और अपने किसी दोस्त को भी लेते आना। एक से काम नहीं चलने वाला।”

राज मुस्कुराया। “ठीक है रंडी। व्यवस्था हो जाएगी।”

वो कपड़े पहनकर चला गया। मैं नंगी ही सोफे पर पड़ी रही। शरीर में दर्द और सुकून दोनों था। कमरे के दूसरे दरवाजे की तरफ देखा। मोहित वहाँ खड़ा था। उसने सब सुन लिया था। चेहरा लाल था। लंड पैंट में थोड़ा उभरा हुआ लग रहा था—शायद आधा तना था।

मैंने हँसते हुए कहा, “देखा? ऐसे चोदते हैं मर्द। तू सीख ले। नहीं तो ऐसे ही और मर्द आते रहेंगे।

राज के जाने के बाद मैं नहाने चली गई। पानी के नीचे खड़ी-खड़ी अपनी चूत को हाथ से सहलाया। अभी भी हल्की सूजन थी और उसके वीर्य की चिपचिपाहट बाकी थी। आईने में खुद को देखा। स्तनों पर उसके दांतों के निशान थे। गर्दन पर लाल निशान। मुझे अच्छा लग रहा था। शरीर इस्तेमाल हुआ लग रहा था।

मोहित दूसरे कमरे में लेटा हुआ था। मैं नंगी ही उसके कमरे में गई। बिस्तर पर चढ़कर उसके ऊपर बैठ गई।

“सुन लिया ना सब?” वो चुप रहा। आँखें बंद किए हुए था। “लंड तो थोड़ा तना था तेरा। मैंने देखा। सुन-सुनकर खड़ा हो गया था ना?” मैंने उसकी पैंट खोल दी। लंड निकाला। आधा सख्त था। मैंने उसे मुँह में ले लिया और जोर से चूसा। मोहित की साँसें तेज हो गईं। लेकिन पूरा खड़ा नहीं हुआ।

“साला… अभी भी पूरा नहीं उठता। जबकि मैं अभी-अभी चुदी हूँ। दूसरे मर्द का पानी मेरी चूत में भरा है और तू सूखा पड़ा है।”

मैंने लंड छोड़ दिया। उसके चेहरे के करीब जाकर बोली, “अब से तू सिर्फ देखेगा। कभी-कभी चूस भी लेना मेरी चूत। बाकी काम दूसरे करेंगे।”

मोहित ने आँखें खोलीं। उसमें शर्म थी, गुस्सा था, और थोड़ी सी उत्तेजना भी। लेकिन वो कुछ नहीं बोला। मैं हँसती हुई अपने कमरे में चली गई।

दो दिन बाद राज का मैसेज आया। “कल रात आ रहा हूँ। एक दोस्त भी है साथ में। नाम है विक्रम। बदन ठीक है। लंड भी अच्छा है। तैयार रह।”

मैंने सिर्फ एक रिप्लाई किया— “ दोनों का पानी चूत में चाहिए। कंडोम मत लगाना।”

अगली शाम मैंने फिर से तैयारियाँ कीं। इस बार लाल रंग का खुला गाउन। अंदर कुछ नहीं। सिर्फ एड़ी के सैंडल। बाल खोले। लिपस्टिक गहरी लाल। मोहित को साफ बता दिया,

“आज दो मर्द आ रहे हैं। तू चाहे तो उसी कमरे में बैठकर देख। या दरवाजा बंद करके कान बंद कर ले। तेरी मर्जी। लेकिन बीच में मत टोकना।”

मोहित ने सिर झुका लिया। मैं समझ गई वो देखेगा।

रात के साढ़े नौ बजे घंटी बजी। राज के साथ विक्रम था। उम्र लगभग अड़तीस-उनतालीस। लंबा। कंधे चौड़े। चेहरे पर हल्की दाढ़ी। आँखों में वही गंदी भूख। दोनों अंदर आए। मैंने गाउन के फीते खोल दिए। गाउन फर्श पर गिर गया। पूरी नंगी खड़ी थी।

विक्रम की निगाह मेरे स्तनों पर अटक गई। “क्या बॉडी है कमाल की…” “कम तारीफ कर और कपड़े उतार,” मैंने कहा। “चूत तड़प रही है।”

दोनों ने जल्दी-जल्दी कपड़े उतारे। राज का लंड तो मैं देख चुकी थी। विक्रम का थोड़ा लंबा था और आधार से मोटा। नसें साफ उभर रही थीं। मैं दोनों के सामने घुटनों के बल बैठ गई। पहले राज का लंड मुँह में लिया। जोर से चूसा। फिर विक्रम का। दोनों को बारी-बारी गला तक ले जाने लगी। थूक बह रहा था। दोनों मेरे बाल पकड़कर मुँह चोद रहे थे।

“साली कितनी गंदी है… दो-दो लंड एक साथ चूस रही है…” विक्रम बोला। “चूस रही हूँ… अब चूत में डालो दोनों…”

मैं चारों खाने चित लेट गई। टाँगें फैला दीं। राज पहले आया। एक झटके में अंदर तक पेला।

“आह्ह्ह… मादरचोद… जोर से…”

वो पेलने लगा। विक्रम मेरे मुँह के पास आ गया। मैंने उसका लंड फिर से मुँह में ले लिया। एक लंड चूत में, एक मुँह में। कमरे में सिर्फ गंदी आवाजें गूँज रही थीं। मोहित के कमरे का दरवाजा आधा खुला था। मुझे पता था वो देख रहा है।

राज ने मुझे पलटा। कुत्ते की पोजीशन में कर दिया। पीछे से जोर-जोर से ठोकरें मारने लगा। विक्रम मेरे नीचे आ गया। मैंने उसका लंड फिर से मुँह में ले लिया।

“फाड़ दे चूत को… आज दो-दो मर्दों से चुद रही हूँ… पति देख रहा है साले…” मैं गालियाँ निकाल रही थी।

राज ने एक तगड़ा धक्का मारा और अंदर ही झड़ गया। गरम पानी की धार महसूस हुई। उसने लंड निकाला तो वीर्य बाहर बहने लगा। विक्रम ने तुरंत जगह ले ली। उसका मोटा लंड एकदम अंदर तक घुस गया।

“कितनी गरम और गीली है… राज का पानी भी अंदर है और फिर भी लंड निगल रही है…”

विक्रम ने मेरी कमर पकड़कर पागलों की तरह पेलना शुरू किया। मेरे स्तन नीचे बिस्तर पर पटक रहे थे। मैं चीख-चीखकर गालियाँ दे रही थी।

“चोद… और तेज… रंडी बना दे मुझे… पति के सामने चोद…”

विक्रम ने मेरा बाल पकड़कर सिर पीछे खींचा और और गहराई तक मारने लगा। थोड़ी देर बाद वो भी अंदर झड़ गया। दोनों का वीर्य मिलकर मेरी जाँघों से होता हुआ बिस्तर पर गिर रहा था।

मैं हाँफते हुए लेटी रही। दोनों मेरे बगल में बैठ गए। राज ने मेरे स्तन को मसलते हुए कहा, “अगली बार तीन ले आएँ?” मैंने आँखें खोलीं। मुस्कुराई। “ले आ। जितने ले आएंगे सबकी चूत ले लूँगी। आओ-जाओ… चूत तुम्हारी।”

दोनों हँसे। कपड़े पहनने लगे। जाते-जाते विक्रम ने मेरी गाँड पर जोर का थप्पड़ मारा। “फोन पर रहियो रंडी।”

दरवाजा बंद होते ही मैंने मोहित के कमरे की तरफ देखा। वो दरवाजे के पीछे खड़ा था। पैंट में लंड इस बार साफ तना हुआ दिख रहा था। पहली बार इतना सख्त। मैंने हँसते हुए कहा,

“अब खड़ा हुआ? जब दो मर्द तेरी बीवी की चूत फाड़ रहे थे तब? आ जा। चूस ले। दोनों का पानी पिया जा सकता है।”

मोहित का चेहरा लाल हो गया। वो अंदर चला गया। दरवाजा बंद कर लिया।

मैं बिस्तर पर फैली रही। चूत में दो मर्दों का वीर्य भरा था। शरीर में दर्द था, लेकिन मन में एक अजीब सुकून था।

राज और विक्रम के जाने के बाद के दिनों में मेरा शरीर और बेकाबू होता जा रहा था। चूत में हमेशा हल्की सी जलन और मांग रहती। मोहित की तरफ देखती तो गुस्सा आता। साला लंड लेकर बैठा है लेकिन काम का नहीं। कई रातें मैंने उसे जगाया। पैंट खोली। मुँह में लिया। चूसा। गालियाँ दीं।

“उठ साले… खड़ा कर… मेरी चूत में डाल… नहीं तो फिर से मर्द बुलाऊँगी…”

कभी-कभी आधा खड़ा हो जाता। तो मैं तुरंत ऊपर चढ़ जाती और जोर-जोर से पटकती। लेकिन दो-चार धक्कों में ही वो झड़ जाता। मैं अधूरी रह जाती। फिर गुस्से में उसे धक्का देकर अलग हो जाती।

“बेकार का लंड है तेरा। सिर्फ नाम का मर्द है तू।”

एक हफ्ते बाद राज ने फिर मैसेज किया। “आज स्पेशल प्लान है। तीन आदमी। मैं, विक्रम और एक नया। नाम है सुरेश। बहुत मोटा रखता है। तैयार रह।”

मैंने तुरंत जवाब दिया— “ले आ। आज मेरी चूत तीनों की लेगी। मोहित भी देखेगा।”

शाम को मैंने मोहित को साफ बता दिया। “आज तीन मर्द आ रहे हैं। तू उसी कमरे में बैठ। कुर्सी लगा ले। आँखें फाड़-फाड़कर देख। शायद तेरे लंड को कुछ सीखने को मिले।”

मोहित ने इस बार सिर नहीं झुकाया। बस धीमे से कहा, “जैसी तुझे ठीक लगे।” आवाज में हार थी।

रात के नौ बजे तीनों आ गए। राज, विक्रम और सुरेश। सुरेश उम्र के करीब बयालीस-तैंतालीस। मोटा लेकिन बदन पर ताकत थी। लंड निकालते ही नजरें फटी रह गईं। मोटाई में बाकी दोनों से ज्यादा। नसें फूली हुईं।

मैंने गाउन गिरा दिया। पूरी नंगी। “आओ। आज चूत तुम्हारी। जितना चाहो इस्तेमाल करो।”

पहले मैंने तीनों के लंड बारी-बारी मुँह में लिए। गला तक। थूक से लबालब। तीनों मेरे बाल पकड़कर मुँह चोद रहे थे। गालियाँ चल रही थीं।

“साली कितनी गंदी रंडी है… तीन-तीन लंड एक साथ…” “चूस… पति के सामने पराए लंड चूस…”

मैंने खुद कहा, “अब चूत में डालो। एक-एक करके नहीं। आज जितना हो सके।”

राज पहले लेटा। मैं उसके लंड पर बैठ गई। पूरा अंदर ले लिया। फिर विक्रम मेरे मुँह के पास आ गया। मैंने उसका लंड मुँह में ले लिया। सुरेश पीछे आया। उसने मेरी गाँड के गाल फैलाए और अपने मोटे लंड को मेरी चूत के मुँह पर रगदा। राज का लंड पहले से अंदर था। सुरेश ने जोर लगाकर धक्का मारा।

“आह्ह्ह्ह… मादरचोद… दोनों एक साथ…”

मेरी चूत फैल गई। दो लंड एक साथ अंदर। दर्द और मजे का मिश्रण। सुरेश और राज दोनों धक्के मारने लगे। विक्रम मुँह चोद रहा था। मैं बस कराह रही थी और गालियाँ निकाल रही थी।

“फाड़ दो… तीनों मिलकर फाड़ दो… रंडी की चूत को बर्बाद कर दो…”

मोहित कुर्सी पर बैठा सब देख रहा था। उसकी पैंट में लंड इस बार पूरी तरह तना हुआ था। पहली बार। लेकिन वो कुछ नहीं कर रहा था। बस देख रहा था।

थोड़ी देर बाद पोजीशन बदली। मैं चारों खाने चित हो गई। सुरेश ने पीछे से अपना मोटा लंड अंदर पेला और पागलों की तरह पेलने लगा। राज मेरे नीचे आ गया। मैंने उसका लंड मुँह में ले लिया। विक्रम साइड में खड़ा स्तन मसल रहा था और कभी-कभी थप्पड़ मार रहा था।

“कितनी गरम चूत है साली… तीनों का लंड ले रही है और माँग रही है और…” “ले रही हूँ… भर दो सब… आज कंडोम नहीं… तीनों का पानी अंदर चाहिए…”

सुरेश ने जोर लगाया और अंदर ही झड़ गया। गरम धार। उसने लंड निकाला तो वीर्य बाहर बहने लगा। तुरंत विक्रम ने जगह ले ली। उसका लंड भी अंदर तक घुस गया और तेज धक्के शुरू हो गए। मैं चीख रही थी।

“और… और जोर से… पति देख रहा है… दिखा दे उसे कैसे चोदते हैं मर्द…”

विक्रम भी अंदर झड़ गया। आखिर में राज। उसने मुझे उल्टा किया। टाँगें कंधों पर रखीं और बहुत तेज गति से चोदने लगा।

“अब मेरा ले… रंडी… तीनों का पानी पी चुकी है तेरी चूत… अब मेरा भी ले…”

कुछ देर बाद वो भी अंदर छोड़ दिया। तीनों का वीर्य मिलकर मेरी चूत से बाहर बह रहा था। जाँघें, गाँड, बिस्तर सब गीला था। मैं हाँफते हुए फैली पड़ी थी। शरीर काँप रहा था।

तीनों कपड़े पहनने लगे। राज ने मेरी तरफ देखा। “अब नियमित चलाना है क्या?” मैंने आँखें खोलीं। मुस्कुराई। “हफ्ते में दो बार। कभी दो, कभी तीन। आओ-जाओ… चूत तुम्हारी।”

वे चले गए। कमरे में सिर्फ मैं और मोहित रह गए। वो अभी भी कुर्सी पर बैठा था। पैंट में लंड तना हुआ। मैंने धीरे से कहा,

“अब बोल। कुछ सीखा?”

मोहित उठा। मेरे पास आया। पहली बार उसने खुद मेरी चूत पर हाथ रखा। तीनों का वीर्य उसकी उँगलियों से चिपक गया। उसने उँगली अंदर डाली। फिर निकाली और अपनी ही उँगली चूस ली।

मैं हैरान रह गई।

फिर उसने अपनी पैंट पूरी तरह उतार दी। लंड इस बार पूरा सख्त था। उसने मेरे पैर फैलाए और अंदर घुसने की कोशिश की। आसानी से घुस गया। तीनों के बाद मेरी चूत खुली हुई थी। वो धीरे-धीरे हिलने लगा। आँखों में आँसू थे।

“राशी… मैं… मैं देख नहीं सकता था… लेकिन…” “चुप रह और चोद,” मैंने कहा। “आज तू भी इस्तेमाल कर ले। कल से फिर से दूसरे आएंगे।”

मोहित ने जोर लगाया। पहली बार इतनी देर चला। मैंने उसके बाल पकड़कर कहा, “आज तू भी मर्द बन। कल से फिर से रंडी बनकर रहूँगी।”

वो अंदर ही झड़ गया। दोनों पसीने से तर थे।

मैंने उसके माथे से पसीना पोंछा और हँसते हुए बोली,

“अब समझ गया ना? आओ-जाओ… चूत तुम्हारी। कभी तेरी, कभी दूसरों की। लेकिन खाली कभी नहीं रहेगी।”

मोहित ने कुछ नहीं कहा। बस मेरे सीने पर सिर रख लिया।

उस रात के बाद हमारा रिश्ता हमेशा के लिए बदल गया। मैं स्विंगर बन चुकी थी। और मोहित… मेरा चुपचाप देखने वाला पति।

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