कुंवारी साली की सील तोड़ चुदाई | जीजा ने 19 साल की साली को औरत बनाया

Hello दोस्तों, मेरा नाम अर्नव है, मैं 29 साल का हूँ, जयपुर का रहने वाला हूँ। मेरी शादी को दो साल हो चुके हैं, मेरी बीवी का नाम प्रिया है, 27 साल की, अच्छी खासी। हमारी शादी अरेंज थी, पर अच्छी चल रही है। प्रिया के घर में उसकी मम्मी, पापा, और एक छोटी बहन है, राधिका, जो मेरी साली। राधिका की उम्र अभी सिर्फ 19 साल है, college में पढ़ती है, और कुंवारी है, बिल्कुल कुंवारी, किसी लड़के ने आज तक हाथ तक नहीं लगाया।

मैं राधिका को हमेशा से एक बच्ची की तरह देखता था। जब शादी हुई, वो 17 साल की थी, पतली, छोटी, कुछ खास नहीं। पर पिछले दो साल में… वो बदल गई। कॉलेज गई, दोस्त बनाए, और उसकी body… उसकी body ने जवानी पकड़ ली। अब वो 5’3″ है, गोरा रंग, चूचियाँ 32C जैसी उभरी हुई, कमर 26 की पतली, और गांड… वो गांड जो पहले सपाट थी, अब गोल हो गई, मोटी, जो jeans में से ऐसे उभरती है जैसे किसी ने दो सेब कपड़े में बाँध दिए हों।

मैंने notice किया, पर कभी कुछ नहीं सोचा। वो मेरी साली थी, मेरी बीवी की बहन। पर राधिका… राधिका ने कुछ सोचा।

प्रिया के मम्मी-पापा ने सोचा, बेटी और दामाद को अपने घर बुलाते हैं, कुछ दिन रहें, family time होगा। मैं और प्रिया गए, शुक्रवार शाम, दो दिन के लिए। घर में मम्मी-पापा, प्रिया, राधिका, और मैं। शाम को खाना, बातें, TV, और सोने का time।

रात को, मम्मी-पापा अपने कमरे में, प्रिया और मैं guest room में, और राधिका अपने कमरे में। guest room के सामने ही bathroom था, और राधिका का कमरा bathroom के बगल में।

सुबह, मैं जल्दी उठा, नहाने गया। bathroom में गया, कपड़े उतारे, shower चालू किया, और नहाने लगा। शैम्पू आँखों में गया, मैंने पानी से धोया, आँखें खोलीं, और देखा… bathroom का दरवाज़ा थोड़ा खुला था, और दरवाज़े के बीच से… एक आँख, राधिका की आँख, मुझे देख रही थी, नंगे, लंड हाथ में, साबुन लगाए हुए।

हम दोनों एक दूसरे को देखते रहे, कुछ पल, शायद सेकंड, शायद मिनट। फिर राधिका ने पलटकर देखा, शर्म से कान लाल, और भागी। मैंने सोचा, बस, अब क्या होगा, ये तो बच्ची है, डर जाएगी, बता देगी प्रिया को, मम्मी-पापा को, सब खत्म।

पर उसने नहीं बताया। सुबह नाश्ते में, वो मुझे अलग देख रही थी। आँखें नीचे, फिर ऊपर, फिर नीचे। मैंने सोचा, शायद शर्मा रही है, भूल जाएगी। भूली नहीं।

दिन में, मम्मी-पापा बाज़ार गए, प्रिया सो रही थी, अपने कमरे में। मैं बैठा TV देख रहा था, drawing room में। राधिका आई, नाइटी में, सफेद, पतली, और नीचे से कुछ भी नहीं, शायद। वो आई, मेरे बगल में बैठी, इतने पास कि उसकी जाँघ मेरी जाँघ से सटी।

“जीजू…” उसने कहा, आवाज़ में काँपाहट, “वो… सुबह… मैंने…”

“राधिका, वो…” मैंने कहा, “वो गलती थी, मैंने दरवाज़ा ठीक से बंद नहीं किया, तुम भूल जाओ…”

“मैं भूल नहीं सकती…” उसने कहा, मेरी आँखों में देखते हुए, “मैंने… मैंने कभी नहीं देखा… किसी लड़के को… वैसे…”

“राधिका, तुम छोटी हो…” मैंने कहा।

“छोटी नहीं हूँ…” उसने कहा, और अचानक, उसने अपनी नाइटी के ऊपर लिया हुआ पल्लू सरकाया, कंधे से, और मैंने देखा, उसकी चूची, आधी बाहर, गोरी, नरम, निप्पल का किनारा। “मैं बड़ी हो गई हूँ जीजू… और मेरी चूत… वो भी बड़ी हो गई है… प्यासी हो गई है…”

मैंने सोचा, ये क्या बोल रही है, ये मेरी साली है, ये बच्ची है। पर मेरा लंड… वो खड़ा हो गया, shorts में उभार साफ दिख रहा था। राधिका ने देखा, मुस्कुराई, “वो… वो फिर से खड़ा हो गया?”

“राधिका, जाओ यहाँ से…” मैंने कहा, पर आवाज़ में कोई जोर नहीं था।

“नहीं जाऊँगी…” उसने कहा, और अचानक, उसने अपना हाथ shorts के नीचे डाला, मेरे लंड पर, और पकड़ लिया।

मैं काँप उठा, “राधिका… ये… ये गलत है…”

“गलत?” उसने कहा, हाथ हिलाते हुए, धीरे, “फिर ये क्यों मोटा हो रहा है? क्यों गर्म हो रहा है?”

मैंने कुछ नहीं कहा, बस बैठा रहा, उसका हाथ महसूस करता। वो हिलाती रही, धीरे, अनाड़ी, पर उत्तेजित। “जीजू…” उसने कहा, “मुझे सिखाओ… मुझे सिखाओ क्या करते हैं… मेरी सहेलियाँ बोलती हैं… पर मैंने कभी नहीं किया…”

“राधिका…” मैंने कहा, “तुम्हारी दीदी…”

“दीदी सो रही है ना…” उसने कहा, “और मम्मी-पापा भी बाहर हैं… आज… अभी… सिर्फ हम दोनों है…”

मैंने सोचा, नहीं, ये गलत है, ये बहुत गलत है। पर मेरा हाथ उठा, उसके कंधे पर गया, और नीचे, उसकी चूची पर, नाइटी के ऊपर से ही, दबाया।

“आह्ह…” राधिका ने साँस छोड़ी, “ये… अच्छा लग रहा है…”

“और अच्छा चाहिए?” मैंने पूछा, आवाज़ में अब वो प्यास थी जो मैंने कभी नहीं सोची थी।

“हाँ…” उसने कहा, “बहुत अच्छा… सिर्फ जीजू से…”

मैंने उसे पकड़ा, कसकर, और खींच लिया अपनी ओर। वो आ गई, मेरे ऊपर, उसकी चूचियाँ मेरी chest से सटीं, उसकी साँसें मेरे चेहरे पर। मैंने उसके होंठ चूमे, पहली बार, अपनी साली के होंठ, गुलाबी, नरम, और वो काँप उठी, मेरे बालों में हाथ डाला।

“जीजू…” उसने फुसफुसाया, मेरे होंठ छोड़कर, “मेरी चूत बहुत तड़प रही है… पता नहीं क्यों… जब से आपको देखा…”

“सबर करो…” मैंने कहा, उसके होंठ चूसते हुए, “आज… अभी… बहुत time है…”

दोपहर का वक्त था, घर में सन्नाटा। मम्मी-पापा बाज़ार से अभी तक नहीं आए थे, और प्रिया… वो अपने कमरे में गहरी नींद में सो रही थी। मैं और राधिका ड्रॉइंग रूम में थे, और जो शुरू हुआ, वो रुकने वाला नहीं था।

राधिका मेरे ऊपर थी, उसकी साँसें मेरे चेहरे पर गरम-गरम महसूस हो रही थीं। मैंने उसके होंठों को अपने होंठों में भर लिया, धीरे-धीरे चूमने लगा। वो पहली बार किसी से lip-lock कर रही थी, इसलिए थोड़ी अनाड़ी थी, पर उसकी जीभ मेरी जीभ से मिली तो मुझे लगा जैसे करंट सा लगा। उसने मेरे बालों में हाथ डाला, मुझे और पास खींच लिया, और मेरी chest से उसकी वो उभरी हुई चूचियाँ दबने लगीं।

“जीजू…” वो मेरे मुँह से हटकर फुसफुसाई, “मुझे… मुझे कुछ हो रहा है… नीचे… बहुत गर्मी…”

मैंने कुछ नहीं कहा, बस उसे उठाया और बेडरूम की तरफ ले चला। हम guest room में गए, जहाँ प्रिया सो रही थी, पर हम चुपचाप बगल के कमरे में घुस गए, जो राधिका का था। दरवाज़ा बंद किया, चाबी लगाई, और पलटकर देखा। राधिका खड़ी थी, काँप रही थी, उसकी आँखों में डर और प्यास दोनों थे।

“डर लग रहा है?” मैंने पूछा, पास गया, उसके गाल पर हाथ फेरा।

“थोड़ा…” उसने कहा, “पर आपके साथ… अच्छा डर है…”

मैंने मुस्कुराया, उसकी नाइटी के पल्लू को धीरे से कंधे से सरकाया। वो नीचे गिरा, और राधिका सामने खड़ी थी, सिर्फ सफेद ब्रा और पैंटी में। उसकी skin इतनी गोरी, इतनी smooth, जैसे दूध से नहाई हो। कमर इतनी पतली, और ऊपर वो चूचियाँ… ब्रा से बाहर आने को तरस रही थीं, गोल, tight, और नीचे वो पैंटी, छोटी सी, जिसमें से उसकी चूत का shape साफ दिख रहा था, उभरी हुई, प्यासी।

“जीजू…” वो शर्माते हुए बोली, हाथों से अपने आप को ढ़ँकने की कोशिश की, “मैं… अच्छी नहीं लग रही…”

“बहुत अच्छी लग रही हो…” मैंने कहा, उसके हाथ हटाए, और पीछे से उसकी ब्रा की hook खोली।

वो एक झटके में खुली, और उसकी चूचियाँ बाहर आ गईं, गोरी, गोल, nipples गुलाबी, थोड़े से खड़े हुए। मैंने धीरे से एक हाथ उसकी चूची पर रखा, वो काँप उठी, “आह्ह… ठंडा लगा…”

“अभी गर्म हो जाएगा…” मैंने कहा, और अपने मुँह से उसकी चूची का वो गुलाबी हिस्सा अपने होठों में भर लिया।

“ऊउउह्ह…” राधिका का सिर पीछे हो गया, आँखें बंद, ” ये क्या कर रहे हो… मेरी माँ… इतना…”

मैंने चूमना जारी रखा, धीरे-धीरे, कभी tongue से चाटा, कभी हल्का सा काटा, और वो पागल होती जा रही थी। उसका हाथ मेरे सिर पर, मुझे और पास दबा रही थी, “और… और ज़ोर से… मेरी चूची पूरी मुँह में ले लो…”

मैंने दूसरी चूची पर हाथ रखा, दबाया, सहलाया, और पहली को चूमता रहा। वो नीचे से कमर हिलाने लगी, अपनी चूत मेरी जाँघ से रगड़ने लगी। मैं समझ गया, वो ready है, बहुत ज़्यादा ready।

मैंने नीचे बढ़ा, उसकी नाभि पर kiss किया, फिर और नीचे, उसकी पैंटी के किनारे पर। वो काँप उठी, “वहाँ… वहाँ मत… बहुत शर्म आती है…”

“आज कोई शर्म नहीं…” मैंने कहा, और उसकी पैंटी धीरे से नीचे की।

वो सामने थी, पूरी तरह नंगी, उसकी चूत, गोरी, थोड़े भूरे बालों से भरी, और बीच में वो line, जो कुंवारी लड़कियों में होती है, tight, बंद, प्यासी। मैंने उँगली से उसके चूत के होठों को सहलाया, वो काँप उठी, “आह्ह… वहाँ… वहीं…”

“कैसा लग रहा है?” मैंने पूछा, उँगली को थोड़ा अंदर की तरफ बढ़ाते हुए।

“गुदगुदी… और… और अच्छा…” उसने कहा, आँखें बंद, “और अंदर… प्लीज़…”

मैंने धीरे से उँगली अंदर डाली, वो बहुत tight थी, बहुत गर्म, और गीली। “ऊह्ह…” उसने साँस छोड़ी, “दर्द… थोड़ा दर्द हो रहा है…”

“पहली बार होता है…” मैंने कहा, उँगली को अंदर-बाहर करते हुए, धीरे-धीरे, “थोड़ी देर में अच्छा लगने लगेगा…”

वो सहन करती रही, दाँत कटे, आँखें बंद, और मैंने उँगली को और अंदर किया, गहरा। एक झटके में, उसकी hymen टूटी, थोड़ा खून निकला, और वो चीखी, “आह्ह… मेरी चूत… मेरी कुंवारी चूत…”

“अब तुम औरत बन गई…” मैंने कहा, उँगली रोकी, उसके होठ चूमे, “अब असली मज़ा आएगा…”

मैंने अपने कपड़े उतारे, एक-एक करके, और जब मेरा लंड बाहर निकला, राधिका की आँखें बड़ी हो गईं। “ये… ये इतना बड़ा… मेरी चूत में… ये जाएगा?”

“जाएगा…” मैंने कहा, उसे बेड पर लिटाया, पैर फैलाए, “थोड़ा दर्द होगा, फिर मज़ा आएगा…”

मैंने अपने लंड को उसकी चूत के मुँह पर रखा, गीले, गर्म, और धीरे से आगे बढ़ाया। आधा अंदर गया, और वो चीखी, “आह्ह… मेरी माँ… फट रही हूँ… मेरी चूत फट रही है…”

“सहन करो…” मैंने कहा, और एक ज़ोर का धक्का दिया, पूरा अंदर, एक ही बार में।

वो रोने लगी, आँखों से आँसू, “दर्द… बहुत दर्द… निकालो… प्लीज़ निकालो…”

मैंने रुका, अंदर ही, उसके आँसू पोंछे, होठ चूमे, “थोड़ी देर… थोड़ी देर में ठीक हो जाएगा…”

कुछ पल बाद, वो शांत हुई, साँसें normal हुईं। मैंने धीरे-धीरे अंदर-बाहर करना शुरू किया, बहुत धीरे, बहुत हल्का। और फिर… वो काँपना बंद किया, आँखें खोलीं, “ये… ये अच्छा लग रहा है…”

“अब मज़ा आएगा…” मैंने कहा, और तेज़ हो गया, धक्के मज़बूत, गहरे, पूरा अंदर, पूरा बाहर।

“आह्ह… आह्ह… और तेज़…” राधिका चिल्लाने लगी, “मेरी चूत फाड़ दो… मुझे औरत बनाओ… मैं तुम्हारी हूँ… सिर्फ तुम्हारी…”

मैंने उसकी चूचियाँ हाथों में पकड़ीं, दबाईं, और चोदता रहा। वो नीचे से कमर उठाती, मेरा साथ देती, अनाड़ी, पर पूरी प्यास के साथ।

“जीजू…” उसने कहा, “मैं… मैं कुछ हो रहा है… पेट में… गर्मी… बहुत तेज़…”

“झड़ने वाली हो…” मैंने कहा, “झड़ो… मेरे साथ…”

और वो झड़ी, पहली बार किसी के लंड से, पूरी तरह काँपती हुई, चीखती हुई, “आह्ह… जीजू… मैं झड़ गई… मेरी चूत झड़ गई…”

मैंने भी झड़ दिया, उसकी चूत में ही, गरम, गाढ़ा, बहुत सारा, और वो लेती रही, मेरी बाहों में, थकी हुई, संतुष्ट, औरत बनी हुई।

“जीजू…” उसने फुसफुसाया, “थैंक यू… मुझे औरत बनाया…”

मैंने मुस्कुराया, उसके होठ चूमे, और सोचा, ये रात… ये रात बस शुरुआत थी।

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