Category सच्ची कहानियाँ

प्रतिक्षा की चुदाई Part 4: दो मर्दों ने एक साथ चूत और गाँड फाड़ दी

पार्ट 3 के आखिर में राजवीर ने साफ कह दिया था — “अगली बार मैं अकेला नहीं आऊँगा। एक दोस्त को साथ लाऊँगा। तू दोनों की सेवा करेगी।” उस एक वाक्य ने मेरे अंदर एक अजीब सा डर बैठा दिया…

प्रतिक्षा की चुदाई Part 3: तीन हफ्ते बाद लौटकर गाँड और चूत दोनों फाड़ दी

पार्ट 2 के बाद मेरी जिंदगी एक अजीब से जेल में बदल चुकी थी। राजवीर अब सिर्फ़ मेरा शरीर इस्तेमाल नहीं कर रहा था। वह मेरे हर दिन को कंट्रोल कर रहा था। सुबह कॉलेज जाने से पहले उसके मैसेज…

प्रतिक्षा की चुदाई Part 2: करोड़पति ने गाँड फाड़ दी और रंडी बना दिया

पार्ट 1 में राजवीर ने मेरी सील तोड़ दी थी। उसके मोटे लंड ने मेरी चूत फाड़ दी थी। दर्द के साथ-साथ एक अजीब सी भूख भी जगा दी थी। सुबह जाते समय उसने साफ कह दिया था कि शाम…

प्रतिक्षा की चुदाई Part 1 : चालीस साल के अमीर ने मोटा लंड डालकर कुँआरापन छीन लिया

मेरा नाम प्रतिक्षा है। उम्र उन्नीस साल। मैं मध्य प्रदेश के एक छोटे से गरीब गाँव से आती हूँ। जहाँ सुबह चार बजे उठना आम बात थी। पानी के लिए लंबी कतार लगती थी। पिताजी दिन भर मजदूरी करते थे।…

तलाकशुदा स्वाति की चूत में फिर से लंड गया

मेरा नाम स्वाति है। उम्र चौंतीस साल। दो साल पहले मेरा तलाक हो चुका था। पति का नाम राहुल था। शादी के सात साल बाद उसने एक दिन कहा, “तुम में वह बात नहीं रही जो पहले थी।” असल में बात यह थी कि उसे ऑफिस की एक लड़की से प्रेम हो गया था। वह लड़की मुझसे छोटी थी, ज्यादा हँसती थी और राहुल के अहंकार को ज्यादा सहलाती थी। अदालत में कागजात साइन करते समय मैंने सिर्फ इतना कहा था, “जाओ। आजाद हो जाओ।” अंदर से मैं पूरी तरह टूट चुकी थी, लेकिन आँसू नहीं दिखाए। घर लौटकर एक घंटे तक बाथरूम में सिर रखे रोई थी। फिर आईने के सामने खड़ी हुई और खुद से कहा, “अब तू अकेली है। और अकेली ही रहेगी।” तलाक के बाद मैंने शहर के एक शांत इलाके में छोटी-सी कैफे खोली। नाम रखा – “थोड़ी सी देर”। सुबह दस बजे खुलती, रात ग्यारह बजे बंद। दो वेटर, एक रसोइया और मैं। भीड़ कभी ज्यादा नहीं होती थी, लेकिन इतनी हो जाती थी कि किराया और घर का खर्च निकल जाए। मैं ज्यादातर काउंटर पर बैठती या किचन में ऑर्डर चेक करती। लोग मुझे “स्वाति मैडम” कहकर बुलाते। कुछ पुरुष ग्राहक जानबूझकर देर तक बैठे रहते और बातें करते, लेकिन मैंने सबको दूरी पर रखा। तलाक के बाद मैंने किसी मर्द को अपने करीब नहीं आने दिया। शरीर की जरूरतें थीं, बहुत थीं, लेकिन मैंने उन्हें दबाना सीख लिया था। रात को कभी-कभी उँगलियों से काम चला लेती, लेकिन उसके बाद और अकेलापन बढ़ जाता। मेरा शरीर अभी भी ठीक था। कद पाँच फुट छह इंच। चेहरा थोड़ा थका हुआ, लेकिन आँखें गहरी थीं। स्तन भारी और गोल थे। कमर पतली। गाँड भरी हुई। जब मैं कैफे में घूमती तो कई पुरुष मेरी चाल देखकर रह जाते। लेकिन मुझे इसकी आदत हो गई […]

ऐसे बनी मैं रंडी

मेरा नाम मनीषा है। उम्र तैंतीस साल। विधवा। पति की मृत्यु हुए चार साल हो चुके थे। दुर्घटना में चला गया था। उसके बाद से मैं अकेली ही सब कुछ संभाल रही थी — घर, पैसे, और अपना छोटा बेटा।…