प्रतिक्षा की चुदाई Part 1 : चालीस साल के अमीर ने मोटा लंड डालकर कुँआरापन छीन लिया

मेरा नाम प्रतिक्षा है। उम्र उन्नीस साल।

मैं मध्य प्रदेश के एक छोटे से गरीब गाँव से आती हूँ। जहाँ सुबह चार बजे उठना आम बात थी। पानी के लिए लंबी कतार लगती थी। पिताजी दिन भर मजदूरी करते थे। माँ बीमार रहती थीं। दो छोटे भाई थे। घर में रोटी तो मिल जाती थी, लेकिन घी, दूध, अच्छे कपड़े साल में कभी-कभार ही नसीब होते थे। मैंने गाँव के स्कूल से बारहवीं अच्छे नंबरों से पास की। टीचर ने कहा था कि शहर जाकर आगे पढ़ाई करो तो जिंदगी बदल सकती है।

एक रिश्तेदार के कहने पर मैं इंदौर आ गई। दो हज़ार रुपये, दो-तीन पुराने कपड़े और ढेर सारा डर लेकर। पेइंग गेस्ट में रहना शुरू किया। कमरा छोटा, खाना बासी, पानी कम। फीस की किस्त और खर्च के लिए पार्ट-टाइम जॉब ढूँढती रही। कई जगहों से ठुकराई गई। कुछ जगहों पर मर्दों की गंदी नज़रें देखकर खुद भाग आई। रातें अकेली और डरी हुई बीततीं। माँ को हमेशा झूठ बोलती कि सब ठीक है।

इसी मजबूरी में मेरी मुलाकात हुई राजवीर सिंह से। चालीस साल के, लंबे, अमीर, और शांत दिखने वाले मर्द। पहली बार कैफे में मिले। उन्होंने चाय पिलाई। फिर धीरे-धीरे मिलना शुरू हुआ। वे मेरी फीस भरने लगे, खाना दिलवाने लगे। एक दिन मेरे पेइंग गेस्ट की जगह अपना खाली फ्लैट रहने को दे दिया। मैं पहले मना करती रही, लेकिन हालात ने मेरी हिम्मत तोड़ दी।

वे हफ्ते में दो-तीन बार आने लगे। बातें गहरी होती गईं। एक दिन उन्होंने मेरा हाथ पकड़ा। फिर एक दिन चूम लिया। मैं काँप गई, लेकिन शरीर ने विरोध नहीं किया। अंदर कुछ जाग रहा था। डर के साथ एक अजीब सी भूख भी।

फिर वो बारिश वाली रात आई।

वे शाम को आए। वाइन लाए थे। मैंने पहले कभी शराब नहीं पी थी। दो घूंट में सिर हल्का हो गया। शरीर गरम लगने लगा। चूत में हल्की सनसनाहट होने लगी। वे मेरे पास सोफे पर बैठे। बातें करते-करते उन्होंने मुझे अपनी तरफ खींच लिया। चुंबन इस बार भूखा और गहरा था। उनकी जीभ मेरे मुँह में घुस आई। उनके हाथ मेरी कुर्ती के अंदर चले गए। ब्रा के ऊपर से उन्होंने मेरे स्तन जोर से मसले। निप्पल को उँगली से घुमाया और दबाया। मैं सहम गई।

“राजवीर… यह गलत है…” “अगर सच में रोकना है तो अभी रोक दो। वरना आज मैं तुम्हारी चूत में अपना मोटा लंड डालने वाला हूँ। तुम्हारी सील तोड़ दूँगा।”

मैं चुप रही। शरीर काँप रहा था, लेकिन चूत गीली होती जा रही थी।

उन्होंने मेरी कुर्ती ऊपर उतार दी। ब्रा के हुक खोले। मेरे स्तन बाहर आ गए। उन्होंने दोनों को मसला, फिर एक निप्पल मुँह में ले लिया और जोर से चूसने लगे। दाँतों से हल्के-हल्के काटा। जीभ से गोल-गोल घुमाया। मैं कराह उठी। “आह्ह… धीरे… बहुत जोर से चूस रहे हो…” “तुम्हारे ये चुचे मैं बहुत दिनों से देख रहा हूँ। आज चूसूँगा जितना मन करे।”

वे दूसरा निप्पल भी उसी तरह चूसने लगे। मेरी साँसें तेज हो गईं। शरीर में गर्मी फैल गई। चूत में पानी आने लगा। उन्होंने मुझे गोद में उठाया और बेडरूम में ले जाकर बिस्तर पर फेंक दिया। मेरी जींस और पैंटी एक साथ खींचकर नीचे कर दी। मैं पूरी नंगी उनके सामने लेटी थी। उन्होंने मेरी चूत को घूरते हुए कहा, “कितनी प्यारी और मुंडी हुई चूत है। अभी तक कोई मर्द नहीं आया इसमें। आज मैं इसका पानी निकालूँगा। आज मैं तुम्हारी चूत फाड़ूँगा।”

उन्होंने कपड़े उतारे। उनका मोटा लंड पूरी तरह तना हुआ खड़ा था। लंबा, मोटा, नसों वाला और सिर चमक रहा था। मैंने देखा और आँखें बंद कर लीं। डर लग रहा था। इतना मोटा लंड पहली बार देख रही थी।

“डरो मत। दर्द होगा, लेकिन मैं धीरे डालूँगा। फिर चोदते-चोदते मजा भी आने लगेगा। तुम्हारी चूत मेरे मोटे लंड की आदी हो जाएगी।”

वे मेरे ऊपर चढ़ आए। पहले उन्होंने दो उँगलियाँ मेरी चूत में डाल दीं। अंदर-बाहर करने लगे। मैं बहुत गीली हो चुकी थी। उँगलियों पर मेरा पानी चमक रहा था। “देखो कितना पानी निकल रहा है। शरीर तो तैयार है चोदने के लिए। चूत खुद लंड माँग रही है।”

फिर उन्होंने अपना मोटा लंड मेरी चूत के मुँह पर रखा और धीरे-धीरे दबाव दिया। दर्द तेज हुआ। “आह्ह… रुक जाओ… बहुत दर्द हो रहा है… लंड बहुत मोटा है…” “सह लो। सील टूटने वाली है। आज तुम औरत बनोगी।”

उन्होंने और जोर से धक्का मारा। मेरी सील एक तेज जलन और दर्द के साथ टूट गई। मैं जोर से चिल्ला उठी। आँसू बह निकले। वे थोड़ा रुके। “आधा अंदर है। अब पूरा ले। अपनी चूत खोल।”

फिर धीरे-धीरे पूरा मोटा लंड मेरे अंदर धकेल दिया। मैं रो रही थी। शरीर अकड़ गया था। उनका लंड इतना मोटा था कि लग रहा था जैसे चूत फट जाएगी। वे कुछ देर तक अंदर रखकर रुके रहे। बस धड़कन महसूस हो रही थी।

फिर उन्होंने बहुत धीमे-धीमे हिलेगा शुरू किया। बाहर निकलते हुए दर्द होता, अंदर जाते हुए भी दर्द होता। लेकिन धीरे-धीरे दर्द के बीच एक गरम और भारी अहसास भी होने लगा। मैंने उनके कंधे में नाखून गाड़ दिए। “अब कैसा लग रहा है?” “दर्द… अभी भी दर्द है… लेकिन गरम लग रहा है अंदर… आपका मोटा लंड बहुत गहरा जा रहा है…” “मजा आने लगा न? बोल।”

मैंने सिर हिलाया। वे रफ्तार बढ़ाने लगे। धक्के गहरे होने लगे। उनका मोटा लंड हर बार जड़ तक जा रहा था। बिस्तर चरमरा रहा था। मेरे स्तन उनके सीने से दबकर फैल रहे थे। उन्होंने मेरा मुँह जोर से चूम लिया।

“थोड़ा और जोर से चोदो… मेरी चूत फाड़ दो…” मेरे मुँह से निकल गया।

राजवीर ने जोर बढ़ा दिया। अब वे अच्छी तरह चोद रहे थे। हर धक्के पर उनकी थैली मेरी गाँड से टकरा रही थी। “आह्ह… बहुत गहरा जा रहा है… मेरी चूत फट रही है… आपका मोटा लंड पूरी चूत भर रहा है…” “फाड़ दूँगा। आज तुम्हारी चूत को याद दिला दूँगा कि मर्द का मोटा लंड क्या होता है। आगे से पतला लंड देखोगी तो हँसी आएगी।”

वे एक टाँग उठाकर अपने कंधे पर रख दिए। इस पोजीशन में लंड और गहराई तक घुसने लगा। मैं चीख रही थी। उन्होंने मेरा स्तन मुँह में ले लिया और जोर से चूसने लगे। दाँतों से काटा। मैं पागल हो रही थी।

“और जोर से… मेरी चूत चोदो… फाड़ दो पूरी…”

थोड़ी देर बाद उन्होंने लंड बाहर निकाली। मैंने राहत की साँस ली। लेकिन वे रुके नहीं। उन्होंने मुझे पलटाकर कुत्ते की तरह कर दिया। पीछे से फिर से मोटा लंड मेरी चूत में एक झटके में डाल दिया। “आह्ह्ह… साले… बहुत जोर से डाला… मेरी चूत फट गई…” “चुपचाप ले। आज तो और भी लेना पड़ेगा। यह तो सिर्फ़ शुरुआत है।”

वे पीछे से जोर-जोर से चोदने लगे। एक हाथ से मेरे बाल पकड़े हुए थे, दूसरे से मेरी गाँड मसल रहे थे। थप्पड़ भी मार रहे थे। “कितनी गोल और मुलायम गाँड है। कल इसमें भी अपना मोटा लंड डालूँगा। तुम्हारी गाँड भी फाड़ूँगा।” “नहीं… अभी नहीं… आह्ह… बहुत जोर से चोद रहे हो…”

वे हँसते हुए और तेज चोदने लगे। कमरे में सिर्फ़ शरीर की आवाज, मेरी कराहें और उनकी गालियाँ गूँज रही थीं। दर्द अब लगभग खत्म हो चुका था। सिर्फ़ गहरी, भारी चुदाई का मजा बाकी था। उनका मोटा लंड मेरी चूत को बार-बार फाड़ रहा था। मैं लगातार पानी छोड़ रही थी।

उन्होंने अचानक लंड निकाली और मुझे फिर से लिटा दिया। दोनों टाँगें कंधों पर रख लीं। और भी जोर से चोदने लगे। “अब बता… कैसा लग रहा है मेरा मोटा लंड?” “बहुत… बहुत गहरा… और मोटा… मेरी चूत पूरी भर गई है… फटने वाली है…” “आज के बाद तू किसी और का पतला लंड देखेगी तो हँसी आएगी। तू अब मेरी हो गई। तेरी चूत मेरी हो गई।”

वे लगातार चोदते रहे। मेरा शरीर काँप रहा था। एक तेज लहर नीचे से उठी और पूरे शरीर में फैल गई। मैं जोर से काँपते हुए झड़ गई। पहली बार ऐसा अहसास हुआ था। चूत जोर से सिकुड़ रही थी। वे रुके नहीं। वे और तेज चोदने लगे।

“मैं भी झड़ने वाला हूँ… अंदर डालूँ?” “हाँ… अंदर डाल दो… पूरी तरह भर दो… अपना पानी मेरी चूत में डाल दो…”

उन्होंने जोर के कई धक्के मारे और फिर रुक गए। उनका मोटा लंड मेरे अंदर धड़क रहा था। गर्म-गरम गाढ़ा पानी की तेज धार मुझे महसूस हुई। वे मेरे ऊपर गिर पड़े। दोनों की साँसें उखड़ी हुई थीं। पसीने से तरबतर।

बहुत देर तक कोई नहीं हिला। उनका लंड अभी भी अंदर था। उन्होंने मुझे अपनी तरफ खींच लिया। “अब तुम मेरी हो गई हो प्रतिक्षा। तुम्हारी चूत में मेरा पानी है। अब तुम किसी और की नहीं हो सकती। तुम्हारी सील मैंने तोड़ी है। अब तुम मेरी रंडी हो।”

मैं चुप थी। पैरों के बीच तेज दर्द, सूजन और उनका गर्म गाढ़ा पानी बह रहा था। आँसू अभी भी आ रहे थे। उन्नीस साल से जो चीज बचाकर रखी थी, वह हमेशा के लिए चली गई थी। चूत में उनके मोटे लंड का अहसास अभी भी बाकी था।

राजवीर ने मेरे बाल सहलाते हुए कहा, “अब से तुम्हें किसी चीज की कमी नहीं होगी। पढ़ाई, कपड़े, घर, पैसे… सब मैं देखूँगा। बदले में बस इतना चाहता हूँ कि तुम मेरे पास रहो। जब मैं कहूँ, अपनी चूत खोल देना। अपनी गाँड भी दे देना। समझ गई?”

मैंने उनकी तरफ देखा। “आपकी पत्नी…” “वह साल में दो-तीन बार आती है। बाकी समय तुम ही मेरी रंडी हो। तेरी चूत, तेरी गाँड, तेरे चुचे… सब मेरे हैं। समझ गई न?”

मैंने जवाब नहीं दिया। उनकी छाती पर सर रखकर लेटी रही। बाहर बारिश हो रही थी। अंदर मेरे शरीर में दर्द था और उनके पानी की नमी। चूत अभी भी धड़क रही थी।

उस रात वे मेरे साथ ही सोए। सुबह वे सामान्य चेहरे के साथ चाय बना रहे थे। उन्होंने कहा, “आज कॉलेज मत जाना। आराम करो। शाम को मैं फिर आऊँगा। और आज रात तुम्हारी गाँड भी लूँगा। अपना मोटा लंड तुम्हारी गाँड में डालूँगा। तैयार रहना।”

वे चले गए।

मैं बाथरूम के आईने के सामने नंगी खड़ी रही। जाँघों के बीच सूजन, उनके नाखूनों के निशान और बहता हुआ उनका गाढ़ा पानी। आँखें लाल। चूत में दर्द और जलन।

गाँव वाली गरीब प्रतिक्षा अब वापस नहीं जा सकती थी। उसकी सील टूट चुकी थी। और एक चालीस साल के करोड़पति का मोटा लंड उसकी चूत में समा चुका था।

लेकिन यह तो सिर्फ़ शुरुआत थी। आगे और गंदा होना बाकी था। गाँड की चुदाई बाकी थी। और राजवीर का मोटा लंड बार-बार उसकी चूत माँगने वाला था।

प्रतिक्षा की चुदाई Part 2

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