प्रतिक्षा की चुदाई Part 2: करोड़पति ने गाँड फाड़ दी और रंडी बना दिया

पार्ट 1 में राजवीर ने मेरी सील तोड़ दी थी। उसके मोटे लंड ने मेरी चूत फाड़ दी थी। दर्द के साथ-साथ एक अजीब सी भूख भी जगा दी थी। सुबह जाते समय उसने साफ कह दिया था कि शाम को मेरी गाँड लेगा।

मैं पूरे दिन फ्लैट में अकेली पड़ी रही। जाँघों के बीच दर्द और सूजन थी। चूत में अभी भी उसके मोटे लंड का अहसास बाकी था। बार-बार बाथरूम जाकर आईने में अपने नग्न शरीर को देखती। स्तनों पर उसके दाँतों के निशान, कमर पर नाखूनों के लाल निशान, और चूत के आसपास हल्की सूजन। शरीर बदल चुका था। और मन भी।

शाम के छह बजे दरवाजे की घंटी बजी। दिल जोरों से धधकने लगा। दरवाजा खोला तो राजवीर खड़ा था। हाथ में एक छोटा सा बैग था। उसने मुझे ऊपर से नीचे तक घूरा। मैंने सिर्फ़ एक ढीली सी नाइटी पहन रखी थी। उसके नीचे कुछ नहीं था।

“तैयार है?” उसने सीधे पूछा। मैंने सिर हिलाया। आवाज नहीं निकली।

वह अंदर आया। दरवाजा बंद किया। बैग सोफे पर रखा और मुझे पास खींच लिया। उसका चुंबन इस बार और भूखा था। एक हाथ से मेरी गाँड दबाई और बोला, “कल मैंने सिर्फ़ तुम्हारी चूत फाड़ी थी। आज गाँड भी फाड़ूँगा। दर्द होगा, लेकिन सहना पड़ेगा।”

मैं काँप गई। उसने मेरी नाइटी ऊपर उठाई और फेंक दी। मैं पूरी नंगी उसके सामने खड़ी थी। उसने मेरे स्तन मसले, निप्पल को जोर से दबाया और फिर मुझे बेडरूम में धकेल दिया।

“बिस्तर पर पेट के बल लेट जा।”

मैं लेट गई। वह मेरे पीछे आया। पहले उसने मेरी गाँड के दोनों लोथों को फैलाया और थूक लगाकर उँगली से सेंध को गीला करने लगा। उँगली अंदर घुसाई। दर्द हुआ। “आह्ह… धीरे…” “आज धीरे-धीरे पूरी गाँड लेनी है। सब्र रख।”

वह उँगली अंदर-बाहर करने लगा। फिर दो उँगलियाँ कर दीं। मैं तकिया दबाए लेटी रही। थोड़ी देर बाद उसने उँगलियाँ निकालीं और अपना मोटा लंड मेरी गाँड की सेंध पर रख दिया।

“अब ले… दर्द होगा लेकिन चीखना मत।”

उसने धीरे-धीरे दबाव दिया। गाँड की सेंध फैलने लगी। तेज दर्द हुआ। मैंने तकिया में मुँह दबा लिया। “आह्ह्ह… रुक जाओ… बहुत दर्द हो रहा है… लंड बहुत मोटा है…” “सह ले। आधा अंदर है।”

वह और अंदर धकेलता गया। मेरी गाँड फटने जैसी लग रही थी। आँसू बह निकले। आखिरकार उसका पूरा मोटा लंड मेरी गाँड में समा गया। वह कुछ देर तक रुका रहा।

“अब पूरा अंदर है। कितनी टाइट गाँड है तेरी।”

फिर वह धीमे-धीमे हिलेगा शुरू किया। हर धक्के पर दर्द होता। लेकिन धीरे-धीरे दर्द के बीच एक अजीब सा भारी अहसास भी होने लगा। वह रफ्तार बढ़ाने लगा।

“आह्ह… गाँड फट रही है… जोर से मत चोदो…” “चोदूँगा। आज तेरी गाँड को भी अपनी लंड की आदी बनाऊँगा।”

वह जोर-जोर से मेरी गाँड चोदने लगा। एक हाथ से मेरे बाल पकड़े हुए था, दूसरे से मेरी चूत में उँगली घुमा रहा था। दोनों जगह एक साथ सता रहा था। मैं चीख-चीखकर कराह रही थी।

“साले… बहुत जोर से… मेरी गाँड फाड़ दी तुमने…” “फाड़ दी है। अब रोज़ फाड़ूँगा। तेरी गाँड अब मेरी हो गई।”

वह लगभग बीस मिनट तक मेरी गाँड चोदता रहा। फिर लंड निकालकर मेरी चूत में डाल दी और जोर से चोदने लगा। चूत अभी भी कल वाली सूजन की वजह से संवेदनशील थी। दर्द और मजे का मिश्रण पागल कर रहा था।

“आज दोनों होल ले रहा हूँ। चूत भी, गाँड भी।”

वह बार-बार लंड निकाल-निकालकर कभी चूत में डालता, कभी गाँड में। मैं पसीने से तरबतर हो चुकी थी। आवाज बैठने लगी थी। आखिर में उसने मेरी गाँड में ही जोरदार धक्कों के साथ झड़ दिया। गर्म गाढ़ा पानी मेरी गाँड में भर गया। वह मेरे ऊपर गिर पड़ा।

“अब तेरी गाँड में भी मेरा पानी है। अब तू पूरी तरह मेरी रंडी बन गई है प्रतिक्षा।”

मैं रोते हुए लेटी रही। गाँड में तेज जलन और दर्द था। उसका पानी बाहर रिस रहा था।

थोड़ी देर बाद वह उठा और बैग से एक छोटी सी बोतल निकाली। “यह लूब्रिकेंट है। अब से जब भी गाँड चोदूँगा, लगाऊँगा। रोज सहना आसान हो जाएगा।”

मैंने उसकी तरफ देखा। “रोज़…?” “हाँ। जब तक मैं चाहूँगा, तब तक। तू अब मेरी है। तेरी चूत, तेरी गाँड, तेरे मुँह… सब कुछ मेरा है।”

उसने मुझे नहाने के लिए कहा। नहाते समय गाँड में तेज जलन हो रही थी। जब बाहर निकली तो वह बिस्तर पर नंगा लेटा था। उसका मोटा लंड फिर से आधा तना हुआ था।

“आ जा। अब मुँह से सेवा कर।”

मैं उसके पास गई। उसने मेरे बाल पकड़कर अपना लंड मेरे मुँह में ठूंस दिया। “चूस। गहराई तक ले। गले तक।”

मैंने चूसना शुरू किया। वह मेरे सिर को दबा-दबाकर धक्के दे रहा था। लंड गले तक जा रही थी। आँखों से पानी आने लगा। थोड़ी देर बाद उसने लंड निकाली और बोला, “अब ऊपर बैठ। खुद चूत में डाल।”

मैंने उसके मोटे लंड के ऊपर बैठकर धीरे-धीरे अंदर लिया। फिर खुद हिलेगा करने लगी। वह मेरे स्तन मसल रहा था और गालियाँ दे रहा था। “चोद खुद को। जोर से उठ-बैठ। तेरी चूत मेरे लंड को खा रही है।”

मैं थकने लगी तो उसने मुझे नीचे गिराया और खुद ऊपर से जोर-जोर से चोदने लगा। इस बार उसने मेरी दोनों टाँगें फैला रखी थीं और बहुत गहराई तक जा रहा था।

“बोल… किसकी रंडी है तू?” “आपकी… आपकी रंडी हूँ…” “जोर से बोल।” “मैं राजवीर सिंह की रंडी हूँ… मेरी चूत और गाँड दोनों आपकी हैं…”

वह हँसते हुए और तेज चोदने लगा। आखिर में उसने फिर से मेरी चूत में ही झड़ दिया।

रात भर वह मुझे बार-बार उठाता रहा। कभी चूत में, कभी गाँड में, कभी मुँह में। सुबह तक मेरा पूरा शरीर दर्द कर रहा था। चूत और गाँड दोनों जल रहे थे।

सुबह जाते समय उसने कहा, “आज से तू कॉलेज जाते समय भी मेरे बताए कपड़े पहना कर। छोटा टॉप, टाइट जींस। मैं जब चाहूँगा तुझे बीच में बुलाऊँगा। समझ गई?”

मैंने थके हुए स्वर में हाँ कहा।

वह चला गया।

मैं बिस्तर पर लेटी रही। शरीर में दर्द था, लेकिन अंदर एक अजीब सी खालीपन और भूख दोनों थी।

राजवीर ने सिर्फ़ मेरी सील नहीं तोड़ी थी। उसने मेरी इज्जत, मेरी शर्म और मेरी आजादी भी छीन ली थी।

और सबसे डरावनी बात यह थी… कि मुझे उसका मोटा लंड अब बुरा भी नहीं लग रहा था।

उसी हफ्ते राजवीर ने बताया कि उसकी पत्नी अगले महीने भारत आ रही है। और उसने साफ कह दिया — “जब तक वह यहाँ है, तू चुपचाप रहेगी। लेकिन उसके जाने के बाद मैं तुझे और भी गंदा बनाऊँगा। शायद अपने कुछ दोस्तों को भी दिखाऊँ।”

मेरा खून सूख गया।

प्रतिक्षा की चुदाई Part 1

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