आगरा में टूरिस्ट गाइड से मिटाई चूत की खुजली | 38 साल की उर्मिला भाभी की चुदाई कहानी

हैलो दोस्तो, मैं उर्मिला… आज आपको अपनी एक सच्ची आपबीती सुनाने जा रही हूँ। ये बात पिछले साल नवंबर की है जब मैं अपनी सहेलियों के साथ आगरा घूमने गई थी। मेरी उम्र 38 साल है और मैं जयपुर में रहती हूँ। मेरे पति एक बड़े बिजनेसमैन हैं, पैसे की कोई कमी नहीं। हमारा एक ही बेटा है जो बोर्डिंग स्कूल में पढ़ता है। घर में हमेशा मैं अकेली रहती हूँ। पति महीने में एक-दो बार ही घर आते हैं और वो भी सिर्फ सोने। उनका बिजनेस इतना बड़ा है कि मेरी ज़रूरतें… खासकर वो ज़रूरतें… पूरी करने का उनके पास वक़्त ही नहीं। मेरी सहेलियों ने एक लेडीज़ ओनली ट्रिप प्लान किया था आगरा का। मैंने सोचा कुछ दिन बाहर रहूँगी, मन बहल जाएगा।

हम चार सहेलियाँ थीं और हमने एक टूरिस्ट गाइड बुक किया था। उस दिन सुबह जब हम ताजमहल पहुँचे, तो एक नौजवान हमारी तरफ आया। उसने कहा, “मैडम, मैं सोहैल हूँ, आप लोगों का गाइड।” दोस्तो, जब मैंने उसे देखा तो मेरा दिल एक पल के लिए रुक सा गया। सोहैल… करीब 24 साल का, कद छह फुट, गेहुँआ रंग, चौड़ी छाती, और आँखें… ऐसी आँखें जैसे किसी शिकारी की हों। उसकी आवाज़ इतनी मीठी थी कि कानों में घुलने लगी। उसने काली टी-शर्ट पहनी थी जिसमें उसके बाइसेप्स फटने को तरस रहे थे। मैंने उस दिन सफ़ेद सलवार कमीज़ पहनी थी।

मेरे पति तो मुझे देखते भी नहीं, पर सोहैल की नज़रें जब मुझ पर पड़ीं तो मुझे महसूस हुआ कि वो मेरे शरीर को घूर रहा है। मैंने अपने आपको कभी इतना जवान और खूबसूरत नहीं महसूस किया जितना उस दिन किया। हम ताजमहल घूमने लगे। सोहैल इतिहास बता रहा था, पर मेरी नज़रें उसी पर टिकी थीं। जब वो आगे चलता, तो उसकी पीठ… उसकी कमर… उसकी जींस में उभरी हुई गांड… सब कुछ मुझे बेकाबू कर रहा था।

38 साल की भूखी औरत की वासना जाग उठी थी। दोपहर में जब हम ताजमहल के पिछवाड़े वाले बाग में पहुँचे, तो मेरी एक सहेली फोटो खिंचवाने लगी। सोहैल ने कहा, “मैडम, यहाँ से फोटो अच्छी आएगी।” और वो मेरे पास आकर खड़ा हो गया। उसकी बाँह मेरी बाँह से छू गई। इतना हल्का स्पर्श था, पर मेरी साँसें तेज़ हो गईं। मैंने देखा कि उसकी नज़रें मेरी छाती पर टिकी थीं। मेरी कमीज़ थोड़ी ढीली थी और गले से नीचे का हिस्सा खुला हुआ था। “मैडम, आप यहाँ खड़ी हों, पीछे मीनार अच्छी दिखेगी,” कहते हुए उसने हल्के से मेरी कमर पर हाथ रखा। ओह्ह्ह… वो हाथ… इतना गर्म… इतना मज़बूत।

मेरी कमर में एक करंट सा दौड़ गया। मैंने अपनी आँखें बंद कर लीं। जब मैंने आँखें खोलीं तो सोहैल मुझे घूर रहा था। उसकी आँखों में वो आग थी जो मैं अपने पति की आँखों में कभी नहीं देख पाई। शाम को जब हम आगरा फोर्ट घूम रहे थे, तो मेरी सहेलियाँ थककर एक जगह बैठ गईं। मैं और सोहैल आगे बढ़े। एक पुराने महल के कोने में हम अकेले थे। अँधेरा था, सिर्फ एक छोटी सी खिड़की से रोशनी आ रही थी। “मैडम, आप बहुत खूबसूरत हैं,

” सोहैल ने अचानक कहा। मैं चौंक गई। “क्या… क्या कहा तुमने?” “सच कह रहा हूँ मैडम। आपकी तरह खूबसूरत औरत मैंने आज तक नहीं देखी।” मेरे पैरों तले ज़मीन खिसकने लगी। मैंने कहा, “सोहैल, ये सब ठीक नहीं… मैं शादीशुदा हूँ।” “जानता हूँ मैडम,” वो क़दम बढ़ाते हुए बोला, “पर आपकी आँखें कुछ और ही कह रही हैं। आपकी आँखें भूखी हैं… प्यासी हैं…” वो मेरे इतने करीब आ गया कि मैं उसकी साँसें महसूस कर सकती थी। मैंने पीछे हटने की कोशिश की, पर दीवार थी। वो मुझे घेर चुका था।

“सोहैल… प्लीज़…” मेरी आवाज़ काँप रही थी। “क्या प्लीज़ मैडम? क्या आप ये नहीं चाहतीं?” कहते हुए उसने अपना हाथ मेरे गाल पर रखा। मैं काँप उठी। उसके हाथ की गर्मी मेरे चेहरे से होते हुए मेरे पूरे शरीर में फैल गई। “आपका पति आपकी क़द्र नहीं करता… मैं देख सकता हूँ। आपकी आँखों में वो खुशी नहीं जो एक औरत को होनी चाहिए,” सोहैल ने धीरे से कहा। मेरी आँखों में आँसू आ गए। शायद वो सच कह रहा था।

38 साल की उम्र में मैं एक भूखी औरत थी जिसकी कोई परवाह नहीं करता था। सोहैल ने मेरे आँसू पोंछे। फिर धीरे से मेरे गाल पर किस किया। मैंने विरोध नहीं किया। मैं खुद को रोक नहीं पा रही थी। उसके होंठ मेरे गाल से होते हुए मेरे कान तक आए और उसने कान में फुसफुसाते हुए कहा, “आज रात… मैं आपको वो सब दूँगा जो आप deserve करती हैं।” मैंने अपनी आँखें बंद कर लीं। उसने मेरे होंठों पर हल्का सा किस किया।

मैंने अपने होंठों को खोल दिया। हमारी जीभें मिलीं। वो किस… इतना गहरा… इतना ज़बरदस्त… मैं साँस लेना भूल गई। उसने अपने हाथ मेरी कमर पर रखे और मुझे अपनी तरफ खींच लिया। मैंने महसूस किया कि उसका लंड… उसकी जींस में… मेरी जांघों से टकरा रहा था। इतना मोटा… इतना कड़ा… “ओह्ह्ह सोहैल…” मैंने सिसकी। “शhhh… अभी तो शुरुआत है मैडम,” वो मुस्कुराया। उसने अपना हाथ मेरी कमीज़ के अंदर डाला। मेरी पीठ सहलाते हुए उसने ब्रा का हुक खोल दिया। मेरे स्तन आज़ाद हो गए। उसने कमीज़ के ऊपर से ही मेरे दूध को दबाया। मैंने अपना सिर पीछे किया और आँखें बंद कर लीं।

उसने मेरी गर्दन पर किस करना शुरू किया। मेरी साँसें तेज़ होती जा रही थीं। “सोहैल… यहाँ नहीं… कोई आ जाएगा…” मैंने कहा। “तो चलिए मैडम… आपके होटल चलते हैं,” वो मुस्कुराया। मैंने कहा, “मेरी सहेलियाँ…” “मैं सब संभाल लूँगा। आप बस तैयार रहिए,” कहते हुए उसने मेरी कमीज़ ठीक की और मेरे होंठों पर एक और किस किया। शाम को जब हम होटल लौटे, तो सोहैल ने मेरी सहेलियों को बताया कि कल का प्रोग्राम जल्दी शुरू होगा इसलिए सब जल्दी सो जाएँ। मेरी सहेलियाँ थकी हुई थीं, वो जल्दी ही सो गईं। मैं अपने कमरे में थी। दिल धड़क रहा था। मैंने आईने में अपने आपको देखा। 38 साल की उर्मिला… गोरा शरीर, भरे हुए स्तन, मोटी जांघें… आज पहली बार किसी ने मेरी असली कीमत समझी थी।

मैंने सोचा कि आज रात क्या होने वाला है… और मेरी चूत में एक अजीब सी खुजली होने लगी। वो खुजली जो सिर्फ एक मर्द के लंड से ही मिट सकती थी। रात के करीब ग्यारह बजे मेरे फोन पर एक मैसेज आया: “मैडम, होटल के पिछवाड़े वाले गेट पर आ जाइए। मैं इंतज़ार कर रहा हूँ। – सोहैल” मैंने सोचा… जाऊँ या न जाऊँ? पर मेरी चूत ने मेरे लिए फैसला कर लिया था। मैंने हल्की सी साड़ी पहनी… बिना ब्लाउज के… सिर्फ एक पतली सी ब्रा। ऊपर से दुपट्टा लिया और चुपचाप कमरे से निकल गई। पिछवाड़े के गेट पर सोहैल एक बाइक पर बैठा था। उसने मुझे देखा और मुस्कुराया।

“आइए मैडम… आज रात आपकी हर ख्वाहिश पूरी होगी।” मैं बाइक पर बैठ गई। उसने मुझे हेलमेट दिया। जब मैंने हाथ आगे किया तो मेरे स्तन उसकी पीठ से लग गए। वो मुस्कुराया और बाइक चलाने लगा। हम आगरा के बाहरी इलाके में एक छोटे से कॉटेज पर पहुँचे। वहाँ कोई नहीं था। सिर्फ चाँदनी रात और हम दोनों… सोहैल ने मुझे अंदर ले गया। एक कमरा था… बीच में बिस्तर… और मोमबत्तियाँ जल रही थीं। “ये… ये क्या है सोहैल?” मैंने पूछा।

“आपके लिए मैडम… आज रात सिर्फ आपकी है,” कहते हुए उसने मेरा दुपट्टा खींचा। मेरे स्तन उसकी नज़रों के सामने थे। उसने मुझे अपनी बाहों में भर लिया और मेरे होंठों पर किस करने लगा

सोहैल का किस इस बार जल्दबाजी वाला नहीं था। वो मेरे निचले होंठ को धीरे से चबा रहा था, मानो समय उसके पास बहुत हो। उसकी एक हथेली मेरी कमर पर थी और दूसरी ने मेरी साड़ी का पल्लू पूरी तरह खींच लिया। साड़ी फर्श पर गिरते ही कमरे में सिर्फ मोमबत्तियों की हल्की आवाज़ रह गई।

मैंने उसकी टी-शर्ट के अंदर हाथ डाले। उसकी पीठ गर्म थी और पसीने की हल्की सी नमी। जब मेरी उंगलियाँ उसकी रीढ़ की हड्डी पर फिसलीं तो उसने मेरी गर्दन के पास साँस छोड़ते हुए कहा, “मैडम… आपके हाथ काँप रहे हैं।”

“तुम्हारे भी,” मैंने जवाब दिया।

वो मुस्कुराया और मेरी ब्रा के हुक खोल दिए। स्तन बाहर आते ही उसने उन्हें दोनों हाथों में ले लिया, पर मुँह नहीं लगाया। बस वजन संभालते हुए अंगूठे से निप्पल घुमाता रहा। मेरी साँसें बिखरने लगीं। मैंने आँखें बंद कर लीं। इतने साल बाद किसी ने इतनी देर तक सिर्फ छूकर महसूस किया था।

सोहैल ने मुझे बिस्तर तक धकेला। मैं लेट गई तो उसने मेरा पेटीकोट नीचे सरकाया। अब मेरे और उसके बीच कुछ नहीं था। वो मेरे घुटनों के बीच बैठ गया। मैंने शर्म से टाँगें सिकोड़नी चाहीं, पर उसने हल्के हाथ से रोक लिया।

उसने झुककर मेरी जाँघ के अंदरूनी हिस्से पर होंठ रखे। चुम्बन नहीं, बस साँस छोड़ते हुए रुक गया। फिर जीभ निकाली और धीरे-धीरे ऊपर की तरफ बढ़ाई। जब उसकी जीभ ने मुझे छुआ तो मेरी कमर अपने आप उठ गई। मैंने तकिया दबा लिया।

वो जल्दबाजी नहीं कर रहा था। कभी हल्के से चाटता, कभी होंठों से दबाता, कभी सिर्फ साँस छोड़कर रुका रहता। मेरी उंगलियाँ उसके बालों में उलझ गईं। मुझे खुद पर हैरानी हो रही थी कि मैं इतनी आवाज़ निकाल रही हूँ।

जब वो उठा तो उसका चेहरा चमक रहा था। उसने अपनी जींस खोली। लंड बाहर आया तो मैंने निगाहें हटा लीं, फिर वापस देख लिया। मोटा था, नसों वाली और पूरी तरह तैयार।

सोहैल मेरे ऊपर आ गया। उसने अपने लंड को मेरे खिलाफ रगड़ा, पर अंदर नहीं डाला। सिर्फ गीला हिस्सा उसके सिरे पर महसूस हो रहा था। मैंने उसके कूल्हे पकड़ लिए।

“अब और मत सताओ,” मेरी आवाज़ में झुंझलाहट थी।

वो हँसा और धीरे से धकेला। अंदर जाते समय दर्द नहीं हुआ, बस एक भारी भराव का अहसास हुआ। उसने पूरा अंदर लेने के बाद रुका रहा। माथे को मेरे माथे से सटाए हुए बोला, “साँस लो मैडम।”

फिर हिलना शुरू किया। पहले लंबे और धीमे। हर बार लगभग बाहर तक जाता और फिर धीरे-धीरे पूरा भर देता। मेरी टाँगें उसकी कमर पर लिपट गईं। मैं उसकी पीठ पर नाखून रगड़ रही थी बिना जाने।

सोहैल ने गति बढ़ाई। बिस्तर की आवाज़ तेज हो गई। उसकी साँसें मेरे कान में पड़ रही थीं। अचानक उसने मेरी एक टाँग अपने कंधे पर चढ़ा ली और कोण बदल दिया। अब हर धक्का कहीं और गहरा जा रहा था। मैंने उसके कंधे में मुँह छुपा लिया।

मुझे नहीं पता कितनी देर बाद मेरे अंदर की गर्मी फूट पड़ी। शरीर ऐंठ गया। मैंने उसे और जोर से जकड़ लिया। सोहैल ने भी कुछ ही पल बाद जोर से धक्का मारा और मेरे अंदर ही रुक गया। उसकी कमर अभी भी हल्के-हल्के काँप रही थी।

हम दोनों पसीने से भीगे हुए थे। वो मेरे ऊपर से हटा तो ठंडी हवा लगने लगी। उसने मुझे अपनी तरफ खींच लिया। मेरा सिर उसकी छाती पर था। उसके दिल की धड़कनें साफ सुनाई दे रही थीं।

रात में हमने एक बार और किया। इस बार मैं ऊपर थी। उसके लंड पर बैठकर मैंने खुद रफ्तार तय की। नीचे से वो मेरी कमर थामे हुए था और ऊपर देख रहा था। जब मैं झड़ी तो उसके सीने पर गिर पड़ी। उसने मेरे बाल पीछे किए और माथे पर किस किया।

सुबह चार बजे के आसपास मैं उठी। सोहैल गहरी नींद में था। मैंने चुपचाप कपड़े पहने। जाने से पहले उसके माथे पर हाथ रखा। वो हिला नहीं।

बाहर आसमान में अभी अँधेरा था। मैंने ऑटो लिया और होटल पहुँची। कमरे में जाकर नहाया। आईने में अपना चेहरा देखा तो आँखें थोड़ी सूजी हुई थीं, पर चेहरे पर एक अजीब सी शांति थी।

सहेलियाँ जब जागीं तो मैं सामान्य लग रही थी। नाश्ते में मैंने ज्यादा बात नहीं की। दोपहर को हम ताजमहल दोबारा गए। सोहैल वहाँ नहीं था। दूसरे गाइड ने हमें घुमाया।

मैंने उसका नंबर नहीं माँगा। न ही कभी वापस उस कॉटेज का रास्ता पूछा।

पर कभी-कभी जयपुर वापस आने के बाद, जब रात को पति के बगल में लेटी होती हूँ और वो पहले ही सो चुके होते हैं, तो मेरे हाथ अपने आप अपनी जाँघों के बीच चले जाते हैं। और याद आ जाती है वो मोमबत्तियाँ, वो बिस्तर की आवाज़, और सोहैल की वो आवाज़ जब उसने कहा था — “साँस लो मैडम।”

उस रात मेरी चूत की खुजली मिट गई थी।

पर कुछ और चीजें… शायद हमेशा के लिए जाग गई थीं।

2 Comments

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *