विधवा आंटी ने युवा पड़ोसी से चुदवाया – गरम कहानी

अर्जुन की उम्र पच्चीस साल थी। छोटे शहर की एक पुरानी सोसाइटी में तीसरी मंजिल पर किराए के एक बीएचके फ्लैट में अकेला रहता था। सुबह दस बजे ऑफिस जाता, शाम सात बजे थका-हारा लौटता। खाना बनाता, टीवी देखता और सो जाता। जिंदगी में कोई रंग नहीं था। बगल वाले फ्लैट में सीमा रहती थी। उम्र चौंतीस साल। पति की मौत को ठीक दो साल हो चुके थे। बैंक में क्लर्क की नौकरी करती थी। गोरा चमकदार चेहरा, बड़ी-बड़ी काली आँखें, भारी गदराए स्तन, पतली कमर और गोल मटमैले कूल्हे। साड़ी पहनने पर उसका बदन और भी सेक्सी लगने लगता था। लंबे काले बाल अक्सर खुले रहते या हल्की सी बाँध लेती। अर्जुन रोज सुबह बालकनी में चाय की प्याली लेकर खड़ा हो जाता और सीमा को देखता। कभी वह कपड़े सुखा रही होती, कभी बाल धोकर सुखा रही होती, कभी सिर्फ खड़ी होकर मोबाइल में कुछ देख रही होती। साड़ी का पल्लू हवा में उड़ता तो उसकी चिकनी कमर और नाभि साफ दिख जाती। अर्जुन की लंड हर बार तन जाती। सीमा भी कभी-कभी उसकी तरफ देख लेती और हल्की सी मुस्कान दे देती। दोनों के बीच सिर्फ “नमस्ते” और दो-चार औपचारिक बातें होती थीं।

एक रविवार की दोपहर थी। गर्मी बहुत तेज थी। अर्जुन बालकनी में खड़ा चाय पी रहा था। अचानक हवा का एक तेज झोंका आया और सीमा की लाल रंग की साड़ी उड़कर सीधे अर्जुन की बालकनी में आ गिरी। साड़ी हल्की सी गीली थी। अर्जुन ने साड़ी उठाई और सीमा के दरवाजे की घंटी दबा दी।

सीमा ने दरवाजा खोला। बाल पूरी तरह खुले और गीले थे। सूती हल्का गुलाबी गाउन पहना हुआ था। गाउन का गला इतना नीचे था कि स्तनों की गहरी दरार साफ चमक रही थी। निप्पल गाउन के अंदर से उभर रहे थे। “अरे मेरी साड़ी… चलो अंदर आ जाओ। चाय पी लो।”

अर्जुन अंदर घुस गया। ड्रॉइंग रूम में बड़ा सोफा था। खिड़कियाँ बंद थीं, पंखा चल रहा था। सीमा चाय लेकर आई। चलते समय गाउन जाँघों के बीच से ऊपर उठ जाता था। उसकी मोटी मुलायम जाँघें और उसके बीच की काली रेखा साफ दिख रही थी। अर्जुन की निगाहें वहीं अटक गईं। सीमा ने चाय का कप देते हुए मुस्कुराया।

“अकेले रहते हो न बेटा? रात को कैसे कटती है?”
अर्जुन ने गला साफ किया, “कट जाती है।”
सीमा उसके बिल्कुल पास बैठ गई। सोफे पर उसकी जाँघ अर्जुन की जाँघ से सट गई। गर्मी दोनों को महसूस हो रही थी। “दो साल हो गए… किसी मर्द ने छुआ तक नहीं। रात को चूत में जलन होती है। उँगलियाँ डाल-डाल कर थक गई हूँ।”

अर्जुन की साँस तेज हो गई। सीमा ने धीरे से उसका हाथ पकड़ा और अपनी जाँघ पर रख दिया। फिर उसका हाथ और ऊपर सरका दिया। गाउन के अंदर कोई पैंटी नहीं थी। अर्जुन की उँगलियाँ सीधे उसकी गरम और गीली चूत पर पड़ गईं। चूत के बाल हल्के थे, फाँक पूरी तरह चिकनी और गीली। “छूओ… जैसे चाहो छूओ। मना नहीं करूँगी।”

अर्जुन ने दो उँगलियाँ अंदर डाल दीं। सीमा की चूत तंग, गरम और बहुत चिकनी थी। अंदर की दीवारें पानी से लबालब थीं। उँगलियाँ आसानी से अंदर तक चली गईं। सीमा ने सिर पीछे कर लिया और लंबी कराह निकाल दी। “आह्ह… हाँ… अंदर तक डाल…” अर्जुन ने उँगलियाँ जोर-जोर से अंदर-बाहर करनी शुरू कीं। अंगूठे से उसकी कठोर क्लिटोरिस को रगड़ने लगा। सीमा की जाँघें खुद-ब-खुद फैल गईं। गाउन पूरी तरह कमर तक उठ चुका था। उसके भारी स्तन गाउन के अंदर से बाहर आने को बेताब थे।

सीमा ने अचानक अर्जुन का हाथ हटाया, खुद खड़ी हो गई और गाउन एक झटके में उतार फेंका। पूरी नंगी खड़ी थी। बड़े-बड़े गदराए स्तन, निप्पल गहरे भूरे और पूरी तरह खड़े, पेट पर हल्की रेखाएँ, मोटी मुलायम जाँघें और बीच में गीली चमकती चूत। अर्जुन की लंड पैंट में तनकर दर्द करने लगी। सीमा ने अर्जुन की टी-शर्ट उतारी, फिर पैंट का बटन खोला और अंडरवियर नीचे सरका दिया। अर्जुन की मोटी, लंबी, नसों वाली लंड बाहर छलाँग लगाकर निकल आई। सिरे से पहले ही पानी टपक रहा था।

सीमा घुटनों के बल बैठ गई। उसने लंड को दोनों हाथों में पकड़ा, धीरे-धीरे ऊपर-नीचे हिलाया, फिर जीभ निकालकर सिरे को चाटा। “क्या मस्त मोटी लंड है तेरी…” उसने लंड का सिरा मुँह में लिया और जोर से चूसा। जीभ से गोल-गोल घुमाया, फिर धीरे-धीरे गहराई तक ले गई। गला तक। थूक की लार लंड पर टपकने लगी। सीमा लंड को मुँह से निकालती, पूरी लंबाई चाटती, गोलों को मुँह में लेकर चूसती, फिर फिर से गला तक निगल जाती। अर्जुन के हाथ सीमा के गीले बालों में थे। वह धीरे-धीरे कमर आगे की तरफ धकेल रहा था। सीमा ने करीब पंद्रह मिनट तक मुँह से पूरे जोर से चुसाई की। अर्जुन लगभग झड़ने ही वाला था तभी सीमा रुक गई और मुँह से लंड निकाली। लार से लंड पूरी चमक रही थी।

सीमा अर्जुन की गोद में बैठ गई। अपनी गीली चूत को लंड के सिरे पर रखा और धीरे-धीरे बैठती चली गई। मोटी लंड उसकी तंग चूत में घुसती चली गई। सीमा की आँखें बंद हो गईं, मुँह खुल गया। “आह्ह्ह… कितनी मोटी है साले… पूरी चूत फैल गई…” वह पूरी तरह बैठ गई। लंड जड़ तक अंदर थी। फिर वह ऊपर-नीचे होने लगी। पहले धीरे-धीरे, फिर जोर-जोर से। उसके भारी स्तन अर्जुन के चेहरे के सामने उछल-उछल कर मार रहे थे। अर्जुन ने दोनों स्तनों को मुँह में भर लिया, निप्पल को दाँतों से काटा, जोर से चूसा। सीमा की गति और तेज हो गई। कमर गोल-गोल घूम रही थी। चूत से पानी की रप-रप आवाज आ रही थी। “चोदो… जोर से चोदो मुझे…”

दस-बारह मिनट बाद सीमा उतरी और चारपाई पर घुटनों के बल मुड़ गई। कूल्हे ऊपर उठा दिए, पीठ झुका दी। उसकी चमकती गीली चूत और उसके ऊपर की छोटी गांड अर्जुन के बिल्कुल सामने थी। अर्जुन ने लंड का सिरा चूत पर रखा और एक जोरदार धक्के में पूरा अंदर तक घुसा दिया। सीमा जोर से चिल्लाई। फिर अर्जुन ने कमर पकड़कर जोर-जोर से धक्के लगाने शुरू कर दिए। थप्पड़-थप्पड़ की आवाज पूरे कमरे में गूंज रही थी। सीमा की चूड़ियाँ खनक रही थीं। “और जोर से… फाड़ दो मेरी चूत… हरामी…” अर्जुन ने धक्के और तेज कर दिए। उसने एक उँगली सीमा की गांड के छेद पर रखी और हल्का दबाया। सीमा और जोर से कराह उठी। अर्जुन ने उँगली गांड में अंदर तक डाल दी। अब चूत में मोटी लंड और गांड में उँगली। दोनों साथ-साथ अंदर-बाहर हो रहे थे। सीमा का पूरा शरीर काँपने लगा। वह जोर-जोर से चिल्लाते हुए झड़ गई। चूत से पानी की धार छूट गई। अर्जुन ने भी चार-पाँच तेज धक्के मारकर अंदर ही पूरा वीर्य छोड़ दिया। गर्म वीर्य की धार सीमा की चूत में भर गई। दोनों पसीने से भीगे हुए बिस्तर पर गिर पड़े।

आधे घंटे बाद फिर से जोश चढ़ा। सीमा ने अर्जुन को बिस्तर पर चित लिटा दिया और खुद ऊपर सवार हो गई। इस बार पीठ अर्जुन की तरफ करके। उल्टी सवारी। उसने लंड को फिर से अपनी चूत में बैठाया और जोर-जोर से कूल्हे पटकने लगी। अर्जुन उसके मोटे कूल्हों को दोनों हाथों से मसल रहा था, थप्पड़ मार रहा था। सीमा ने खुद एक हाथ से अपनी क्लिटोरिस रगड़नी शुरू कर दी। दस मिनट में वह फिर से जोर से झड़ गई। पानी अर्जुन की जाँघों तक आ गया। अर्जुन ने उसे नीचे उतारा, फिर से कुत्ते की पोजीशन में किया और इस बार और भी बर्बर तरीके से चोदने लगा। उसने सीमा के लंबे बाल पकड़कर जोर से खींचे। सीमा की गर्दन पीछे की तरफ मुड़ गई। “और गहरा डाल… पूरी लंड चूत में ठोक… रंडी बना दे मुझे…” अर्जुन ने पूरे बल से धक्के मारे। सीमा की चूत से पानी टपक-टपक कर फर्श पर गिर रहा था। अर्जुन ने अचानक लंड निकाली, सीमा को घुमाया और उसके मुँह में लंड ठूंस दी। तीन-चार धक्के मुँह में मारकर पूरा वीर्य उसके गले में छोड़ दिया। सीमा ने गले तक निगल लिया। फिर जीभ निकालकर लंड को साफ चाटा।

शाम तक दोनों पाँच बार चुदाई कर चुके थे। रसोई की स्लैब पर सीमा को बैठाकर टाँगें फैलाकर चोदा। शॉवर में दीवार से लगाकर उठा-उठा कर चोदा। सोफे पर, फर्श पर, यहाँ तक कि बालकनी के दरवाजे के पीछे भी। शॉवर में अर्जुन ने सीमा को दीवार से सटाया, उसकी दोनों टाँगें अपनी कमर पर लपेट लीं और खड़े-खड़े जोरदार चुदाई की। पानी दोनों के शरीर पर गिर रहा था। सीमा के स्तन अर्जुन के चेहरे से चिपक रहे थे। अर्जुन निप्पल काट-काट कर धक्के मार रहा था। सीमा फिर से झड़ गई। पानी की धार उसके पैरों से होती हुई नाली में चली गई।

अगले रविवार सीमा खुद अर्जुन के फ्लैट में चाबी लेकर आ गई। दोपहर बारह बजे। अंदर आते ही साड़ी खोली। उसके नीचे कुछ नहीं था। पूरी नंगी। अर्जुन ने उसे सीधे बिस्तर पर धक्का देकर लिटा दिया। पहले उसकी चूत को घंटे भर चाटा। जीभ अंदर तक घुसा-घुसा कर, क्लिटोरिस को दाँतों से हल्का काट-काट कर, उँगलियाँ डाल-डाल कर। सीमा दो बार झड़ चुकी थी तभी अर्जुन ने अपनी लंड अंदर डाली। मिशनरी पोजीशन में टाँगें कंधों पर रखकर इतनी जोर से चोदा कि बिस्तर चरमरा गया। फिर साइड से चोदा। फिर सीमा को ऊपर बैठाकर चोदा। आखिर में अर्जुन ने सीमा को घुटनों के बल बैठाया और उसकी गांड में लंड डालने की कोशिश की। पहले एक उँगली, फिर दो उँगलियाँ, थूक लगाकर धीरे-धीरे लंड का सिरा गांड में धकेला। सीमा दर्द से जोर-जोर से कराह रही थी लेकिन “रोको” नहीं बोली। “धीरे… अंदर तक डाल दो… गांड फाड़ दो…” अर्जुन ने धीरे-धीरे पूरी लंड गांड में डाल दी। गांड बहुत तंग थी। वह धीरे-धीरे धक्के मारने लगा। साथ में सीमा की चूत में तीन उँगलियाँ डाल रखी थीं। दोनों छेद साथ-साथ भरे हुए थे। सीमा पागलों की तरह चिल्लाते हुए झड़ गई। अर्जुन ने भी गांड में ही पूरा वीर्य छोड़ दिया।

तीसरे रविवार सीमा ने अर्जुन को अपने फ्लैट में बुलाया। इस बार वह दो सेक्स टॉयज भी लाई थी। एक मोटी काली डिल्डो और एक वाइब्रेटर। पहले अर्जुन ने डिल्डो सीमा की चूत में पूरा अंदर तक घुसाया और खुद मुँह से उसकी क्लिटोरिस चूसता रहा। फिर वाइब्रेटर क्लिटोरिस पर लगाकर डिल्डो से इतनी जोर से चुदाई की कि सीमा बिस्तर पर छटपटाने लगी। वह लगातार तीन बार झड़ गई। फिर अर्जुन ने खुद अपनी लंड से चोदा। सीमा ने अर्जुन की लंड को इतनी गहराई तक मुँह में लिया कि आँखों से आँसू आ गए, फिर भी निगलती रही। आखिर में अर्जुन ने उसके मुँह में, स्तनों पर और चूत में तीन अलग-अलग बार वीर्य छोड़ा।

हर रविवार यही सिलसिला चलने लगा। कभी अर्जुन के फ्लैट में, कभी सीमा के फ्लैट में। कभी सिर्फ मुँह से घंटों चुसाई, कभी सिर्फ उँगलियों और जीभ से, कभी पूरी रात भर हर छेद में चुदाई। सीमा अक्सर कहती, “तुमने दो साल बाद मेरी चूत को फिर से जिंदा कर दिया। अब हर हफ्ते मेरी गांड और चूत दोनों तेरी हैं।” अर्जुन कुछ नहीं बोलता, बस और गहराई तक लंड ठोकता रहता।

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