गरिमा भाभी पार्ट 1: शादीशुदा जिस्म की पहली भूख
मेरा नाम गरिमा है। उम्र तीस साल पूरी हो चुकी है, लेकिन शरीर अभी भी वैसा ही है जैसा शादी के समय था। बल्कि और निखरा हुआ। लंबे, घने, काले बाल जो कमर से थोड़ा नीचे तक आते हैं। गोरा-गेहुँआ…
मेरा नाम गरिमा है। उम्र तीस साल पूरी हो चुकी है, लेकिन शरीर अभी भी वैसा ही है जैसा शादी के समय था। बल्कि और निखरा हुआ। लंबे, घने, काले बाल जो कमर से थोड़ा नीचे तक आते हैं। गोरा-गेहुँआ…
मेरा नाम स्वाति है। उम्र चौंतीस साल। दो साल पहले मेरा तलाक हो चुका था। पति का नाम राहुल था। शादी के सात साल बाद उसने एक दिन कहा, “तुम में वह बात नहीं रही जो पहले थी।” असल में बात यह थी कि उसे ऑफिस की एक लड़की से प्रेम हो गया था। वह लड़की मुझसे छोटी थी, ज्यादा हँसती थी और राहुल के अहंकार को ज्यादा सहलाती थी। अदालत में कागजात साइन करते समय मैंने सिर्फ इतना कहा था, “जाओ। आजाद हो जाओ।” अंदर से मैं पूरी तरह टूट चुकी थी, लेकिन आँसू नहीं दिखाए। घर लौटकर एक घंटे तक बाथरूम में सिर रखे रोई थी। फिर आईने के सामने खड़ी हुई और खुद से कहा, “अब तू अकेली है। और अकेली ही रहेगी।” तलाक के बाद मैंने शहर के एक शांत इलाके में छोटी-सी कैफे खोली। नाम रखा – “थोड़ी सी देर”। सुबह दस बजे खुलती, रात ग्यारह बजे बंद। दो वेटर, एक रसोइया और मैं। भीड़ कभी ज्यादा नहीं होती थी, लेकिन इतनी हो जाती थी कि किराया और घर का खर्च निकल जाए। मैं ज्यादातर काउंटर पर बैठती या किचन में ऑर्डर चेक करती। लोग मुझे “स्वाति मैडम” कहकर बुलाते। कुछ पुरुष ग्राहक जानबूझकर देर तक बैठे रहते और बातें करते, लेकिन मैंने सबको दूरी पर रखा। तलाक के बाद मैंने किसी मर्द को अपने करीब नहीं आने दिया। शरीर की जरूरतें थीं, बहुत थीं, लेकिन मैंने उन्हें दबाना सीख लिया था। रात को कभी-कभी उँगलियों से काम चला लेती, लेकिन उसके बाद और अकेलापन बढ़ जाता। मेरा शरीर अभी भी ठीक था। कद पाँच फुट छह इंच। चेहरा थोड़ा थका हुआ, लेकिन आँखें गहरी थीं। स्तन भारी और गोल थे। कमर पतली। गाँड भरी हुई। जब मैं कैफे में घूमती तो कई पुरुष मेरी चाल देखकर रह जाते। लेकिन मुझे इसकी आदत हो गई […]
मेरा नाम आदित्य है। उम्र तेईस। कोचिंग के लिए शहर आया था और किराए के कमरे में रहता था। मेरे कमरे के ठीक सामने वाली मंजिल पर प्रिया भाभी रहती थीं। उम्र लगभग बत्तीस। गोरी, गोल मटोल चेहरा, भारी स्तन…
मेरा नाम मनीषा है। उम्र तैंतीस साल। विधवा। पति की मृत्यु हुए चार साल हो चुके थे। दुर्घटना में चला गया था। उसके बाद से मैं अकेली ही सब कुछ संभाल रही थी — घर, पैसे, और अपना छोटा बेटा।…
मैं रोहन। उम्र चौबीस। इंजीनियरिंग का आखिरी साल चल रहा था। कई साल बाद गाँव लौटा था। पिताजी का देहांत हो चुका था, माँ भी अब शहर में भाई के पास रहने लगी थीं। घर में सिर्फ बड़ा भाई अमित…