गरिमा भाभी पार्ट 8: विकास के सामने चुदाई और करण का कब्जा
पिछले पार्ट में मैंने विकास के बेडरूम में कैमरा लगा दिया था। करण ने लाइव देखा था। विकास को शक हो चुका था कि मैं किसी और से भी चुदवा रही हूँ, और करण ने कहा था कि वह सब…
पिछले पार्ट में मैंने विकास के बेडरूम में कैमरा लगा दिया था। करण ने लाइव देखा था। विकास को शक हो चुका था कि मैं किसी और से भी चुदवा रही हूँ, और करण ने कहा था कि वह सब…
पिछले पार्ट में करण ने मुझे गेस्ट हाउस में घंटों चोदा था और एक छोटी सी कैमरा वाली शीशी मेरे पर्स में रख दी थी। अब अगली बार विकास के यहाँ जाते समय वो कैमरा लगाना था रात भर नींद…
पिछले पार्ट में विकास ने मुझे बुरी तरह चोदा था जबकि करण दूर बैठकर हर आवाज़ सुन रहा था। रात को गाड़ी में करण ने मेरे मुँह में झड़कर एक नई शर्त रख दी थी – अब मैं दो मर्दों…
पिछले पार्ट में करण ने मेरी चूत और गाँड दोनों भर दी थीं और फिर बताया था कि वह विकास के बारे में सब जानता है। उसी रात मैंने करण को मैसेज कर दिया था कि विकास कल मुझे बुला…
पिछले पार्ट में विकास ने दोबारा मुझे बुलाकर मेरी चूत और गाँड दोनों भर दी थीं, और उसी शाम करण के दोबारा आने की खबर ने मेरे अंदर एक नई बेचैनी पैदा कर दी थी सुबह उठते ही शरीर में…
पिछले पार्ट में विकास ने धमकी देकर मेरी गाँड मारी थी और उसी रात करण नाम के एक नए मर्द ने अपनी शांत लेकिन गहरी नज़रों से मुझे उलट-पुलट कर दिया था। विकास के जाने के बाद मैं लगभग पैंतालीस…
पिछले पार्ट में मैंने अपने पति आकाश के घर में ही पड़ोसी विकास के मोटे लंड से अपनी चूत और गाँड दोनों फुदकवा ली थी। उस रात के बाद मैंने लगभग दो घंटे तक बाथरूम में पानी की धार के…
मेरा नाम गरिमा है। उम्र तीस साल पूरी हो चुकी है, लेकिन शरीर अभी भी वैसा ही है जैसा शादी के समय था। बल्कि और निखरा हुआ। लंबे, घने, काले बाल जो कमर से थोड़ा नीचे तक आते हैं। गोरा-गेहुँआ…
मेरा नाम स्वाति है। उम्र चौंतीस साल। दो साल पहले मेरा तलाक हो चुका था। पति का नाम राहुल था। शादी के सात साल बाद उसने एक दिन कहा, “तुम में वह बात नहीं रही जो पहले थी।” असल में बात यह थी कि उसे ऑफिस की एक लड़की से प्रेम हो गया था। वह लड़की मुझसे छोटी थी, ज्यादा हँसती थी और राहुल के अहंकार को ज्यादा सहलाती थी। अदालत में कागजात साइन करते समय मैंने सिर्फ इतना कहा था, “जाओ। आजाद हो जाओ।” अंदर से मैं पूरी तरह टूट चुकी थी, लेकिन आँसू नहीं दिखाए। घर लौटकर एक घंटे तक बाथरूम में सिर रखे रोई थी। फिर आईने के सामने खड़ी हुई और खुद से कहा, “अब तू अकेली है। और अकेली ही रहेगी।” तलाक के बाद मैंने शहर के एक शांत इलाके में छोटी-सी कैफे खोली। नाम रखा – “थोड़ी सी देर”। सुबह दस बजे खुलती, रात ग्यारह बजे बंद। दो वेटर, एक रसोइया और मैं। भीड़ कभी ज्यादा नहीं होती थी, लेकिन इतनी हो जाती थी कि किराया और घर का खर्च निकल जाए। मैं ज्यादातर काउंटर पर बैठती या किचन में ऑर्डर चेक करती। लोग मुझे “स्वाति मैडम” कहकर बुलाते। कुछ पुरुष ग्राहक जानबूझकर देर तक बैठे रहते और बातें करते, लेकिन मैंने सबको दूरी पर रखा। तलाक के बाद मैंने किसी मर्द को अपने करीब नहीं आने दिया। शरीर की जरूरतें थीं, बहुत थीं, लेकिन मैंने उन्हें दबाना सीख लिया था। रात को कभी-कभी उँगलियों से काम चला लेती, लेकिन उसके बाद और अकेलापन बढ़ जाता। मेरा शरीर अभी भी ठीक था। कद पाँच फुट छह इंच। चेहरा थोड़ा थका हुआ, लेकिन आँखें गहरी थीं। स्तन भारी और गोल थे। कमर पतली। गाँड भरी हुई। जब मैं कैफे में घूमती तो कई पुरुष मेरी चाल देखकर रह जाते। लेकिन मुझे इसकी आदत हो गई […]
मेरा नाम आदित्य है। उम्र तेईस। कोचिंग के लिए शहर आया था और किराए के कमरे में रहता था। मेरे कमरे के ठीक सामने वाली मंजिल पर प्रिया भाभी रहती थीं। उम्र लगभग बत्तीस। गोरी, गोल मटोल चेहरा, भारी स्तन…