पार्ट 2 के बाद मेरी जिंदगी एक अजीब से जेल में बदल चुकी थी।
राजवीर अब सिर्फ़ मेरा शरीर इस्तेमाल नहीं कर रहा था। वह मेरे हर दिन को कंट्रोल कर रहा था। सुबह कॉलेज जाने से पहले उसके मैसेज आ जाते — “आज ये टॉप पहन। जींस टाइट हो। बाल खुले रख। गाँड साफ दिखनी चाहिए।” मैं चुपचाप मान जाती। क्योंकि अब मेरे पास इनकार करने की कोई ताकत नहीं बची थी।
फ्लैट उसी का था। फ्रिज में रखे फल, दूध, खाना… सब उसके भेजे हुए होते। कॉलेज की फीस उसी ने भरी थी। घर गाँव में माँ की दवाई और छोटे भाइयों की पढ़ाई का खर्चा भी उसी के खाते से जा रहा था। मैं उसके पैसे के बिना साँस भी नहीं ले सकती थी। और सबसे खतरनाक बात यह थी कि मेरा शरीर भी उसके मोटे लंड की आदत डाल चुका था। बिना उसके अधूरापन महसूस होने लगा था।
एक शाम वह आया। चेहरे पर सामान्य से ज्यादा गंभीर भाव था। उसने सोफे पर बैठते हुए कहा, “मेरी पत्नी अगले सोमवार को आ रही है। तीन हफ्ते रुकेगी। उस दौरान तू इस फ्लैट में रहेगी। मुझसे कोई संपर्क नहीं रखेगी। कोई मैसेज, कोई फोन, कोई इंतजार नहीं। अगर किसी ने तुझे मेरे आसपास देखा या शक किया तो मैं तुझे उसी वक्त इस फ्लैट से निकाल दूँगा। तेरी माँ-बाप की मदद भी बंद हो जाएगी। समझ गई?”
मैंने गला सूखाते हुए सिर हिलाया। “और उसके जाने के बाद क्या होगा?” मेरी आवाज काँप रही थी। वह पास आया। मेरे बालों में उँगलियाँ फेरते हुए बोला, “उसके जाने के बाद मैं तुझे और गंदा बनाऊँगा। तेरी चूत और गाँड अब सिर्फ़ मेरी निजी संपत्ति नहीं रहेगी। मैं अपने दो खास दोस्तों को भी तेरा मजा चखाऊँगा। तू दोनों का मोटा लंड एक साथ लेगी। एक मुँह में, एक चूत में। फिर दोनों बारी-बारी से तेरी गाँड फाड़ेंगे। तैयार रहना मेरी रंडी।”
मेरा खून ठंडा पड़ गया। लेकिन मुँह से एक भी शब्द विरोध का नहीं निकला।
उस रात वह मुझे बेडरूम में ले गया। पहले उसने एक काली रेशमी पट्टी निकाली और मेरी आँखें बाँध दीं। दुनिया अँधेरी हो गई। “आज तू सिर्फ़ महसूस कर। कुछ देख नहीं पाएगी। सिर्फ़ मेरे लंड और हाथों को महसूस कर।”
उसने मेरे स्तनों को बहुत जोर से मसलना शुरू किया। निप्पल को दाँतों से काट-काटकर खींचा। फिर जीभ से गोल-गोल चाटा। आँखें बँधी होने की वजह से हर स्पर्श बहुत तेज लग रहा था। मैं कराहने लगी। उसने नीचे जाकर मेरी चूत पर जीभ फेरनी शुरू की। जीभ अंदर तक घुसा-घुसाकर चाट रहा था। कभी क्लिट को जोर से चूसता, कभी पूरे फड़के को मुँह में लेकर खींचता। मैं बिस्तर पर तड़प रही थी। उँगलियाँ चादर में गड़ गई थीं।
“आह्ह… जीभ और अंदर डालो… प्लीज…” “माँग। गंदी लड़की की तरह माँग।” “मेरी चूत चाटो… जोर से चाटो… चूस लो… फिर अपना मोटा लंड डालकर फाड़ दो…”
वह उठा। मुझे घुटनों के बल कर दिया। पीछे से उसका मोटा लंड मेरी चूत में एक झटके में पूरा घुस गया। “आह्ह्ह… बहुत जोर से डाला…” “तीन हफ्ते बाद तक तेरी यह चूत तड़पती रहेगी। आज अच्छी तरह याद रख ले कि मालिक का मोटा लंड कैसा होता है।”
वह बेकाबू होकर चोदने लगा। हर धक्के पर मेरी गाँड उसके पेट से जोर से टकरा रही थी। उसने एक हाथ से मेरे बाल पकड़ रखे थे और दूसरे हाथ से मेरी गाँड पर जोर-जोर से थप्पड़ मार रहा था। “बोल… तू क्या है?” “आपकी रंडी… आपकी चुदाई की रंडी…” “पूरा वाक्य बोल। जोर से।” “मैं राजवीर सिंह की रंडी हूँ… मेरी चूत, मेरी गाँड, मेरे चुचे… सब आपके मोटे लंड के लिए बने हैं… चोदो मुझे… फाड़ दो पूरी तरह…”
वह और पागल हो गया। उसने लंड निकालकर मेरी गाँड में डाल दी। लूब्रिकेंट के बावजूद उसका मोटा लंड गाँड को फैलाता हुआ अंदर जा रहा था। वह जोर-जोर से गाँड चोदने लगा। “आह्ह… गाँड फट रही है… बहुत मोटा लंड है… धीरे करो…” “नहीं। आज तेरी गाँड को तीन हफ्ते के लिए याद दिला दूँगा। रोज रात तड़पना।”
वह लगभग एक घंटे तक बारी-बारी से मेरी चूत और गाँड में अपना मोटा लंड मारता रहा। कभी मुँह में ठूंसकर गला चोदता, कभी स्तनों के बीच रखकर जोर-जोर से रगड़ता। मैं थककर बार-बार बिस्तर पर गिर जा रही थी। आखिर में उसने मेरी गाँड में ही बहुत जोरदार धक्कों के साथ झड़ दिया। गर्म गाढ़ा पानी की तेज धार महसूस हुई। उसने पट्टी खोली और मेरे चेहरे के बहुत करीब आकर बोला, “अब तीन हफ्ते बाद मिलेंगे। तब तक अपनी चूत और गाँड में मेरे लंड की याद रखना। रोज उँगलियों से हिलाती रहना। सूखी मत रखना मेरी रंडी।”
वह चला गया।
अगले तीन हफ्ते सच में नरक की तरह बीते।
राजवीर ने कोई संपर्क नहीं किया। सिर्फ़ एक बार उसके आदमी ने किराने का सामान और थोड़ी नकदी छोड़ दी। मैं कॉलेज जाती, वापस आती और अकेली फ्लैट में पड़ी रहती। शरीर आराम कर रहा था, लेकिन मन और मेरी चूत दोनों तड़प रहे थे। रात को नींद नहीं आती थी। बार-बार उसका मोटा लंड, उसकी गालियाँ, उसके थप्पड़, उसकी साँसें याद आतीं। कभी-कभी दो-दो उँगलियाँ अपनी चूत में डालकर रोते हुए हिलाती। शरीर उसकी आदत इतनी गहराई तक डाल चुका था कि बिना उसके अधूरापन और जलन महसूस होती।
तीन हफ्ते पूरे होने के अगले दिन शाम को दरवाजे की घंटी बजी। दिल इतनी जोर से धधका कि छाती दर्द करने लगी। दरवाजा खोला तो राजवीर खड़ा था। काली शर्ट में, आँखों में भूख और गुस्सा दोनों।
“तड़प गई थी मेरी रंडी?” मैंने जवाब नहीं दिया। वह अंदर घुसा और दरवाजा बंद करते ही मुझे दीवार से जोर से सटा दिया। उसका चुंबन बहुत क्रूर और भूखा था। उसने मेरी नाइटी के सामने से पकड़कर फाड़ दी।
“तीन हफ्ते से तेरी चूत और गाँड याद आ रही थी। आज दोनों को इतनी अच्छी तरह याद दिलाऊँगा कि तू हफ्तों तक चल न पाए।”
वह मुझे बेडरूम में घसीट ले गया। बिस्तर पर पटक दिया। पहले उसने जोर-जोर से मेरे स्तन चूसे। दाँतों से काट-काटकर लाल कर दिए। निप्पल को खींच-खींचकर चूसा। फिर नीचे जाकर मेरी चूत पर टूट पड़ा। जीभ इतनी तेज और गंदी चाल से चल रही थी कि मैं पागल हो रही थी।
“आह्ह… तीन हफ्ते बाद… जीभ बहुत अच्छी लग रही है… और अंदर डालो… चूसो…” “माँग। और गंदी होकर माँग।” “मेरी चूत चाटो… चूस लो पूरी… फिर अपना मोटा लंड डालकर फाड़ दो… प्लीज…”
वह उठा। अपना मोटा लंड निकाला और मेरे मुँह के सामने पकड़ लिया। “पहले चूस। गहराई तक। गले तक ले जा।”
मैंने मुँह खोला। उसने बाल पकड़कर लंड गले तक ठूंस दी। आँखों से पानी आने लगा। वह धक्के देता रहा। थोड़ी देर बाद लंड निकाली और मेरी चूत पर रख दी। “माँग।” “डाल दो… अपनी मोटा लंड मेरी तड़पती चूत में डाल दो… प्लीज चोदो…”
उसने एक ही झटके में पूरा लंड अंदर तक धकेल दिया। मैं चीख पड़ी। वह बिना किसी रहम के जोर-जोर से चोदने लगा। “आह्ह… बहुत गहरा… तीन हफ्ते बाद और भी टाइट लग रही है तेरी चूत…” “जोर से चोदो… मेरी चूत फाड़ दो… अपना मोटा लंड पूरा अंदर तक मारो… गाली दो…”
वह लंबे समय तक ऊपर से चोदता रहा। फिर मुझे पलटाकर कुत्ते की पोजीशन में कर दिया। पीछे से फिर से मोटा लंड चूत में डालकर जानवर की तरह धक्के मारने लगा। एक हाथ से मेरे बाल पकड़े हुए था, दूसरे से मेरी गाँड पर जोर-जोर के थप्पड़ मार रहा था। “बोल… तू क्या है?” “आपकी रंडी… आपकी चुदाई की प्यासी रंडी…” “और क्या?” “मेरी चूत आपके मोटे लंड की गुलाम है… मेरी गाँड भी आपकी है… चोदो… फाड़ दो दोनों होल…”
वह और बेकाबू हो गया। उसने लंड निकालकर मेरी गाँड में डाल दी। इस बार उसने खूब लूब्रिकेंट लगाया, फिर भी उसका मोटा लंड गाँड को फाड़ता हुआ अंदर गया। वह गाँड में बहुत जोर से चोदने लगा। “आह्ह… गाँड फट रही है… बहुत मोटा लंड है… धीरे…” “नहीं। आज तेरी गाँड से पानी निकालूँगा। तीन हफ्ते की सारी तड़प निकालूँगा।”
वह लगभग डेढ़ घंटे तक बारी-बारी से मेरी चूत और गाँड में लंड मारता रहा। कभी मुँह में ठूंसकर गला फाड़ता, कभी स्तनों के बीच रखकर जोर-जोर से रगड़ता। मैं कई बार झड़ चुकी थी। शरीर में कोई ताकत नहीं बची थी। आखिर में उसने मेरी गाँड में ही बहुत जोरदार धक्कों के साथ झड़ दिया। इतना गाढ़ा पानी था कि मेरी जाँघों और बिस्तर तक बहने लगा।
वह मेरे ऊपर गिरा और भारी साँसें लेते हुए मेरे कान में बोला, “अगली बार मैं अकेला नहीं आने वाला। एक दोस्त को साथ लाऊँगा। तू दोनों की सेवा करेगी। एक का लंड मुँह में लेगी, दूसरे का चूत में। फिर दोनों बारी-बारी से तेरी गाँड फाड़ेंगे। समझ गई मेरी रंडी?”
मैं आँखें बंद किए पड़ी रही। शरीर में दर्द था। गाँड जल रही थी। चूत सूजी हुई थी। लेकिन सबसे ज्यादा दर्द इस बात का था कि मेरे मुँह से एक बार भी “ना” शब्द नहीं निकला।
राजवीर ने मेरी जिंदगी के सारे रास्ते बंद कर दिए थे। अब वह मुझे सिर्फ़ अपनी निजी रंडी नहीं रखना चाहता था। वह मुझे और मर्दों के साथ बाँटने की ठान चुका था।
और मैं… मैं चुपचाप उसकी बात मानने के लिए तैयार होती जा रही थी। क्योंकि अब मेरे पास हारने के लिए कुछ बचा ही नहीं था। सिर्फ़ उसका मोटा लंड और उसकी गालियाँ बची थीं।

[…] पार्ट 3 के आखिर में राजवीर ने साफ कह दिय… […]