बीवी की सहेली लंड पर ले ली

मेरा नाम मनोज है। उम्र चौंतीस साल।

मेरी पत्नी पूजा तीस साल की है। हमारी शादी को सात साल हो चुके थे। रिश्ता सामान्य था। न कोई बड़ा झगड़ा, न कोई खास रोमांस। सेक्स हफ्ते में एक या दो बार हो जाता था, लेकिन उसमें वह पुरानी भूख और जिज्ञासा नहीं रही थी। दोनों अपने-अपने कामों में व्यस्त। मैं ऑफिस और मीटिंग्स में, पूजा घर और अपनी सहेलियों के ग्रुप में। जिंदगी एक स्थिर रूटीन में चल रही थी। कभी-कभी रात को जब पूजा सो जाती तो मैं छत की तरफ देखता रहता और सोचता कि क्या यही सब कुछ है।

पूजा की एक सहेली थी जिसका नाम मैंने कई बार सुना था — अपर्णा। पूजा जब भी उसकी बात करती तो आँखें थोड़ी चमक जातीं। “अपर्णा बहुत बोल्ड है यार। पार्टी में जाने दो तो माहौल ही बदल जाए। लड़के उसकी तरफ देखे बिना नहीं रहते।” मैं हँसकर टाल जाता, लेकिन दिमाग में एक हल्की सी जिज्ञासा जरूर पैदा हो जाती।

इस बार पूजा के एक रिश्तेदार की शादी की एनिवर्सरी पार्टी थी। फार्महाउस पर। शाम के सात बजे हम पहुँचे। लाइट्स, संगीत, लोग ग्रुप में खड़े ड्रिंक्स थामे बातें कर रहे थे। मैं एक कोने में खड़ा था कि पूजा मेरे पास आई और बोली,

“चल, आज तेरी मुलाकात अपर्णा से करा ही दूँ। बहुत दिनों से कह रही थी।”

मैं उसके पीछे चला। थोड़ी दूर एक छोटी सी भीड़ में खड़ी थी अपर्णा।

पहली नज़र ने ही ध्यान खींच लिया। उम्र करीब उनतीस-तीस की होगी। कद औसत से थोड़ा लंबा। शरीर ऐसा गठित और भरा-भरा था कि साड़ी में भी छुप नहीं पा रहा था। कमर पतली और दायरीदार, गाँड गोल और उभरी हुई, और ब्लाउज के अंदर स्तन भारी तथा सघन दिख रहे थे। साड़ी का पल्लू बार-बार खिसक रहा था और वह हँसते हुए उसे सँभाल रही थी। हँसी में एक खुलापन और शरारत दोनों थे। जब वह मुड़ी तो उसकी साइड प्रोफाइल ने और आकर्षित किया — सीधी नाक, भरे हुए होंठ, और गर्दन का लंबा चिकना हिस्सा। साड़ी के नीचे से उसके शरीर की बनावट साफ अंदाजा दे रही थी।

पूजा ने कहा, “अपर्णा, यह मनोज। मेरा हस्बैंड।”

अपर्णा ने मुस्कुराते हुए हाथ बढ़ाया। उसका हाथ नरम, चिकना और थोड़ा गरम था। “नमस्ते। पूजा तुम्हारी बहुत तारीफ करती रहती है।”

आवाज में एक हल्की कर्कश मिठास थी। मैंने हाथ मिलाया। बातें सामान्य हुईं — मौसम, पार्टी, आम जीवन। लेकिन बात करते समय उसकी नज़रें मेरे चेहरे पर थोड़ी देर ज्यादा टिकतीं। जब वह हँसती तो सिर थोड़ा पीछे करती और गर्दन की रेखा उभर आती। एक बार जब वह थोड़ा झुकी तो ब्लाउज के नेकलाइन से उसके स्तनों का ऊपरी गोल हिस्सा साफ दिख गया। मैंने जल्दी से नज़रें हटा लीं, लेकिन वह तस्वीर आँखों में रह गई।

पार्टी आगे बढ़ी। अपर्णा बार-बार अलग-अलग ग्रुप में घूम रही थी। कभी जोर से हँस रही थी, कभी किसी के साथ हल्के से डांस कर रही थी। उसकी हरकतें में एक सहज physically आकर्षण था। नाजायज नहीं, लेकिन अनदेखा भी मुश्किल। जब वह बार की तरफ जा रही थी तो मेरी नज़र उसकी पीठ पर चली गई। साड़ी के नीचे गाँड का गोल और भारी उभार साफ नक्शे की तरह हिल रहा था। मैंने दृष्टि फेरी, लेकिन दिमाग ने नोट कर लिया।

रात को घर लौटते समय कार में पूजा बोली, “कैसी लगी अपर्णा?” “ठीक है… बहुत सोशियल है,” मैंने सामान्य स्वर में जवाब दिया। पूजा हँसी, “सब लड़के यही कहते हैं पहले। फिर उसकी चाल-ढाल की तारीफ शुरू कर देते हैं।”

मैं मुस्कुराकर चुप हो गया। लेकिन दिमाग में अपर्णा की हँसी, उसका खिसकता पल्लू और वह गोल गाँड घूमती रही।


अगली मुलाकात लगभग बारह दिन बाद हुई। मैं मार्केट गया था कुछ जरूरी सामान लेने। पूजा घर पर नहीं थी। वह अपनी मां के यहाँ गई हुई थी। मैं एक शर्ट की दुकान के बाहर खड़ा था कि अचानक सामने से अपर्णा आती दिखी। इस बार साड़ी में नहीं थी। डार्क ब्लू टाइट जींस और एक फिटेड ब्लैक टॉप में। टॉप उसके भारी स्तनों को अच्छे से शेप दे रहा था। जींस उसकी गाँड और जाँघों पर चिपक रही थी। बाल खुले थे और हल्की लिपस्टिक लगाई हुई थी।

“अरे मनोज? यहाँ?” वह मुस्कुराई। आँखों में पहचान की चमक थी। “हाँ, कुछ लेने आया था। आप?” “मैं भी। पूजा साथ में नहीं है?” “नहीं। वह घर पर नहीं है आज।”

हम दोनों एक ही दिशा में चलने लगे। बातें होने लगीं। वह बहुत सहज और खुली हुई लग रही थी। हँसते हुए बात कर रही थी। एक बार रास्ता पार करते समय उसका हाथ मेरे हाथ से छू गया। वह तुरंत नहीं हटी। कुछ सेकंड बाद धीरे से हटी। उसका स्पर्श थोड़ी देर तक महसूस होता रहा।

बाजार के आखिरी कोने पर वह रुकी और बोली, “नंबर दे दो अपना। कभी-कभी बात हो जाए। पूजा के थ्रू ही सही। अकेली बात करना गलत नहीं होता ना?”

मैंने नंबर दे दिया। उसने तुरंत अपना भी सेव करवाया। “बाय। अगली पार्टी में मिलते हैं,” कहकर वह मुस्कुराती हुई चली गई।

मैं खड़ा-खड़ा उसे जाता हुआ देखता रहा। जींस में उसकी गाँड का हिलना और पतली कमर का लचकीलापन दिमाग में साफ छप गया।


उस रात उसका पहला मैसेज आया। “हाय मनोज। यह अपर्णा।”

फिर धीरे-धीरे चैट का सिलसिला बना। पहले सामान्य बातें — पूजा कैसी है, पार्टी कैसी लगी, मौसम। फिर बातें थोड़ी निजी होने लगीं। वह खुद ही दिशा बदल रही थी। कभी पूछती, “तुम लोग कब से शादीशुदा हो?” कभी कहती, “पूजा कहती है तुम बहुत बिजी रहते हो। अकेलापन नहीं होता?”

एक रात उसने पूछा, “पूजा सो गई क्या?” “हाँ।” “तो तुम जाग क्यों रहे हो इतनी रात?” “नींद नहीं आ रही।” “अकेलापन होता होगा कभी-कभी शादी के बाद भी?”

मैंने जवाब देने में कुछ सेकंड लगाए। फिर लिखा, “हाँ। कभी-कभी बहुत होता है।”

उसके बाद बातें और आगे बढ़ीं। वीडियो कॉल का प्रस्ताव उसने ही रखा। पहली वीडियो कॉल में वह हल्की नाइटी में थी। कैमरे का कोण ऐसा था कि उसके स्तनों का उभार और गले का हिस्सा साफ दिख रहा था। वह हँसती हुई बात कर रही थी, लेकिन आँखों में एक हल्की चुनौती थी।

अगली कॉल में वह और बोल्ड हो गई। “तुम पार्टी में मुझे घूर रहे थे। मैंने नोटिस किया था।” मैं चुप रहा। “बोलो ना सच्चाई। पसंद आई थी क्या मैं?”

मैंने हल्के से सिर हिलाया। वह धीरे से हँसी। “ईमानदार हो। अच्छा लगता है।”

फिर फोटोज का सिलसिला शुरू हुआ। पहले उसने साड़ी वाली एक फोटो भेजी जिसमें ब्लाउज काफी गहरा था। फिर नाइटी वाली। फिर एक दिन उसने साफ लिखा,

“अब तुम्हारा नंबर आया। दिखाना चाहोगे?”

मैंने काफी देर सोचा। फिर हिचकिचाते हुए अपना एक डिक पिक भेजा। उसने तुरंत जवाब दिया, “वाह। काफी अच्छा और मोटा लग रहा है। सोचा नहीं था।”

उसके बाद बातें पूरी तरह सेक्सुअल हो गईं। वह विस्तार से बताती कि उसे कैसे छुए जाने में मजा आता है। कैसे वह जोर से चोदे जाने को पसंद करती है। कैसे कभी-कभी वह खुद को छूती है सोच-सोचकर। मैं रात-रात भर उसके मैसेज पढ़ता और उत्तेजित होता। पूजा के बगल में लेटे-लेटे अपर्णा के बारे में सोचता।

लगभग साढ़े तीन हफ्ते बाद उसने लिखा, “पूजा को पता नहीं चलना चाहिए। मिलना है क्या असल में?”

मैंने पूछा, “कहाँ?” “लॉज में। एक दिन। दोपहर का समय। शांत जगह।”

तारीख और जगह तय हो गई।


उस दिन मैंने ऑफिस में आधा दिन का काम दिखाकर छुट्टी ली। दिल जोर-जोर से धधक रहा था। लॉज शहर के बाहर एक साधारण लेकिन साफ-सुथरी जगह पर था। मैंने पहले से कमरा बुक कर रखा था।

अपर्णा ठीक तीन बजे पहुँची। जींस और एक लूज लेकिन लो-नेक टॉप में। चेहरे पर हल्की मुस्कान और आँखों में स्पष्ट इच्छा। कमरे में घुसते ही उसने दरवाजा बंद किया और लॉक लगा दिया। फिर मेरी तरफ मुड़ी।

“डर लग रहा है?” उसने पूछा। “थोड़ा लग रहा है।” “मुझे भी। लेकिन मन ज्यादा कर रहा है।”

वह पास आई। इस बार कोई झिझक नहीं थी। उसने खुद अपनी बाँहें मेरे गले में डालकर मुझे चूम लिया। चुंबन गहरा, गीला और भूखा था। उसके भारी स्तन मेरे सीने से जोर से दब रहे थे। मेरे हाथ उसकी पीठ पर से होते हुए उसकी गाँड पर चले गए। जींस के ऊपर से मैंने दोनों हाथों से उसकी गाँड को जोर से दबाया। वह मेरे मुँह में ही कराह उठी।

“इतने दिन से सोच रही थी,” वह साँस लेते हुए बोली। “आज ले लेना मुझे। जोर से लेना।”

मैंने उसका टॉप ऊपर उठाया। ब्रा के ऊपर से उसके भारी स्तनों को मसला। फिर ब्रा के हुक खोल दिए। उसके स्तन बाहर आ गए — गोरे, भारी, और निप्पल सख्त तथा काले। मैंने एक निप्पल मुँह में ले लिया और जोर से चूसने लगा। दाँतों से हल्के काटे। वह मेरे बाल पकड़कर कराहने लगी।

“आह्ह… हल्के से मत… जोर से चूसो… काटो भी…”

मैंने उसे बिस्तर की तरफ धकेला। वह बिस्तर पर गिर गई। मैंने उसकी जींस का बटन खोला और जींस तथा पैंटी एक साथ नीचे खींच दी। वह पूरी नंगी हो गई। उसकी चूत पर हल्के मुलायम बाल थे और वह पहले से चमक रही थी। मैंने भी जल्दी-जल्दी कपड़े उतारे। मेरा मोटा लंड पूरी तरह तना हुआ खड़ा था। उसने उसे हाथ में लिया और धीरे-धीरे ऊपर-नीचे करने लगी।

“काफी मोटा और भारी है… आज इसमें मजा आएगा…”

वह बिस्तर पर लेट गई और दोनों पैर फैला दिए। मैं उसके ऊपर चढ़ गया। अपना मोटा लंड उसकी गीली चूत पर रगदा और धीरे-धीरे अंदर धकेलने लगा।

“आह्ह… मनोज… धीरे… बहुत दिन बाद अंदर जा रहा है…”

मैंने अपना मोटा लंड अपर्णा की गीली चूत पर रखा और धीरे-धीरे अंदर धकेलना शुरू किया। वह बहुत गीली थी, फिर भी काफी टाइट महसूस हो रही थी। आधा अंदर जाते ही वह जोर से कराह उठी और मेरे दोनों कंधों में नाखून गाड़ दिए।

“आह्ह… साले… कितना मोटा लंड है तेरा… धीरे… पूरी अंदर जा रही है… फटने वाली है…”

मैंने धीरे-धीरे पूरा लंड अंदर तक धकेल दिया। उसकी चूत मेरे लंड को चारों तरफ से कसकर जकड़ रही थी। मैं कुछ पल रुका रहा ताकि उसे आदत हो। फिर बहुत धीमे लंबे धक्के लगाने लगा। हर धक्के पर उसके भारी स्तन जोर से ऊपर-नीचे हो रहे थे। मैंने दोनों स्तनों को हाथों में लेकर जोर से मसला और निप्पल को उँगलियों से मरोड़ा।

“पूजा को इतना मोटा लंड रोज मिलता है क्या?” अपर्णा ने आँखें बंद करके पूछा। “पूजा तो बस निभाने के लिए लेती है,” मैंने जवाब दिया। “पाँच-सात मिनट में काम खत्म। तू तो जैसे कई हफ्तों से भूखी हो।” “भूखी हूँ साली… घर वाला तो पाँच मिनट में हिलता-हिलता निपट जाता है… हल्के-फुल्के धक्के मारकर रुक जाता है… कभी गहराई तक जाता ही नहीं… तू फाड़ दे आज मेरी चूत… पूरी फाड़ दे…”

मैंने रफ्तार धीरे-धीरे बढ़ा दी। बिस्तर जोर-जोर से चरमरा रहा था। उसकी चूत से शर्मनाक गीली आवाजें आ रही थीं। मैंने उसकी दोनों टाँगें अपने कंधों पर रख लीं और और गहराई तक मारने लगा। हर धक्का उसकी चूत की गहराई में जा रहा था।

“आह्ह… चुदाई का असली मजा ही कुछ और है… पूजा को इतना गहरा और जोर से कभी चोदा है क्या?” “पूजा को तो इतना सहन भी नहीं होता… दर्द का बहाना बना देती है… तू बता… कैसा लग रहा है मेरा मोटा लंड?” “बहुत मोटा… और बहुत गहरा जा रहा है… मेरी चूत फट रही है… और जोर से मार… फाड़ दे अपनी बीवी की सहेली की चूत… रंडी बना दे मुझे…”

मैंने उसे एक झटके में पलटा और कुत्ते की पोजीशन में कर दिया। पीछे से एक ही जोरदार धक्के में मोटा लंड फिर से उसकी चूत में डाल दिया। एक हाथ से उसके बाल कसकर पकड़े और दूसरे हाथ से उसकी गोल गाँड पर जोर-जोर से थप्पड़ मारने लगा। थप्पड़ की आवाज कमरे में गूँज रही थी।

“साली… बीवी की सहेली होकर लंड पे चढ़ गई… कितनी रंडी जैसी मजे ले रही है… चूत पानी छोड़ रही है…” “हाँ… रंडी हूँ आज… चोद मुझे… जोर से चोद… मेरी चूत फाड़ दे… थप्पड़ मार गाँड पर… और जोर से मार…” “तेरा पति इतना जोर से चोदता है क्या कभी?” “नहीं… वह तो बस ऊपर लेट जाता है… हिलता भी मुश्किल से है… कभी गाँड पर थप्पड़ नहीं मारा… तू मार रहा है सच में… आahh… और जोर से… गाँड लाल कर दे…”

मैं उसकी गाँड पर बार-बार थप्पड़ मारते हुए बहुत जोर से चोद रहा था। उसकी चूत से पानी टपक रहा था। फिर मैंने लंड निकाली और उसकी गाँड की सेंध पर रख दिया।

“यहाँ भी डालूँ साली?” “डाल… दर्द होगा लेकिन डाल… आज दोनों होल ले ले… पूरी रंडी बना दे अपनी बीवी की सहेली को… बाद में याद आए…”

मैंने थूक लगाकर धीरे-धीरे अपना मोटा लंड उसकी गाँड में धकेला। वह तकिया में मुँह दबाकर जोर-जोर से चीख रही थी। आधा अंदर जाते ही वह बोली, “रुक… थोड़ा रुक… बहुत मोटा है…” फिर खुद ही पीछे की तरफ धक्का दिया। धीरे-धीरे पूरा लंड उसकी गाँड में समा गया। मैंने जोर के धक्के शुरू कर दिए।

“आह्ह… गाँड फट रही है… साले… कितना मोटा लंड है… लेकिन मत निकालना… चोदते रह… फाड़ दे मेरी गाँड…” “बीवी की सहेली की गाँड फाड़ रहा हूँ… कितना मजा आ रहा है साले को… कितनी टाइट गाँड है तेरी…” “हाँ… फाड़ दे… मेरी गाँड और चूत दोनों फाड़ दे… घर वाला तो पीछे से छूता तक नहीं… तूने बिगाड़ दिया मुझे… अब पतला लंड से मजा नहीं आएगा…”

मैं बारी-बारी से उसकी चूत और गाँड में लंड मारता रहा। कभी चूत में बीस-बीस जोरदार धक्के, फिर निकालकर गाँड में। गालियाँ और गंदी बातें लगातार चल रही थीं। उसकी आवाज बैठने लगी थी।

“चोद मुझे… पूजा की सहेली को चोद… रंडी बना दे… अपनी बीवी से ज्यादा मजे ले इस चूत और गाँड से…” “पूजा तो सूखी और ठंडी रहती है… तू तो पानी छोड़ रही है जैसे असली रंडी… दोनों होल इस्तेमाल करवा रही है…” “हाँ… रंडी हूँ तेरी… आज की रात पूरी रंडी… और जोर से मार… दोनों होल फाड़ दे… सालों तक याद रहे…”

मैंने आखिर में उसे फिर से सीधा लिटाया। उसकी दोनों टाँगें फैलाकर बहुत जोर से चूत में धक्के मारते हुए झड़ गया। गर्म गाढ़ा पानी उसकी चूत में भर गया। वह भी जोर से काँपते हुए झड़ गई। दोनों पसीने से तरबतर थे। साँसें उखड़ी हुई थीं।

थोड़ी देर दोनों बिना हिले पड़े रहे। फिर वह हँसते हुए बोली, “अब तेरी बीवी की सहेली सच में लंड पे ले ली गई।”


लगभग दस दिन बाद अपर्णा का मैसेज आया। “पति हैदराबाद गया है तीन दिन के लिए। आज रात आ जा। घर पूरा खाली है। आज समय बहुत है।”

रात के नौ बजे मैं उसके फ्लैट पहुँचा। दरवाजा खुलते ही उसने मुझे अंदर खींच लिया और दरवाजा लॉक कर दिया। इस बार वह सिर्फ़ एक बहुत छोटी पतली नाइटी में थी। नीचे कुछ नहीं पहना था। निप्पल नाइटी से साफ झलक रहे थे।

“आज समय बहुत है,” वह मेरे कान में गरम साँस छोड़ते हुए बोली। “आज आराम से और बहुत गंदा चोदना। दोनों होल लेना।”

हमने जल्दी से कपड़े उतारे। इस बार वह खुद मुझे बिस्तर पर धकेलकर मेरे मोटे लंड पर बैठ गई। अपनी चूत में पूरा लंड धीरे-धीरे लेते हुए जोर से कराहने लगी। फिर खुद जोर-जोर से उठ-बैठकर चोदने लगी। उसके भारी स्तन मेरे चेहरे के सामने उछल-उछल रहे थे। मैंने दोनों स्तनों को मुँह में लेकर चूसना शुरू कर दिया।

“देख… कैसे ले रही हूँ तेरा पूरा मोटा लंड… पूजा कभी ऐसे बैठकर चोदती है क्या?” “नहीं… वह तो लेटी रहती है और जल्दी खत्म करने को कहती है… कभी खुद मूव नहीं करती…” “तो आज मुझे और रंडी बना… गाली दे… जोर से मार नीचे से… स्तन काट…”

मैंने उसे नीचे गिराया और खुद ऊपर से बहुत जोर से चोदने लगा। एक हाथ से उसके बाल कसकर पकड़े और गालियाँ देने लगा।

“साली रंडी… बीवी की सहेली… लंड की प्यासी… चूत फाड़ दूँगा तेरी आज… याद रखेगी…” “फाड़ दे… फाड़ दे… घर वाला लौटने तक चलते समय दर्द रहे… आahh… और जोर से… गाली दे…”

मैंने उसकी टाँगें फैलाकर बहुत गहराई तक मारना शुरू कर दिया। फिर उसे पलटा और कुत्ते की पोजीशन में कर दिया। इस बार मैंने सीधे उसकी गाँड में लंड डाल दी। वह खुद पीछे की तरफ जोर-जोर से धक्के दे रही थी।

“गाँड में भी पूरा ले रही हूँ देख… तूने बिगाड़ दिया मुझे… अब घर वाले के पतले लंड से मजा नहीं आएगा… सिर्फ़ तेरा मोटा लंड याद आएगा…” “तो फिर जब भी बुलाएगी… दोनों होल तैयार रखना मेरे मोटे लंड के लिए… चूत और गाँड दोनों…” “रखूँगी… चूत और गाँड दोनों… जब चाहे आ जाना… बीवी की सहेली हमेशा तैयार रहेगी तेरे लंड के लिए…”

मैंने उसकी गाँड में बहुत देर तक जोर-जोर से चोदा। फिर लंड निकालकर फिर से चूत में डाल दी। गालियाँ और गंदी बातें लगातार चलती रहीं। उसने खुद मुँह खोलकर मेरा लंड माँगा। मैंने उसके मुँह में लंड ठूंस दी और गला चोदने लगा।

“चूस… बीवी की सहेली होकर लंड चूस… गला तक ले…” “उम्मम्म…” वह आँखों में पानी लिए चूस रही थी।

उस रात हमने तीन लंबे और गंदे राउंड किए। आखिरी राउंड में मैंने उसके मुँह में जोर से झड़ दिया। उसने सब निगल लिया और जीभ से लंड साफ कर दी।

जाने से पहले वह दरवाजे पर पूरी नग्न खड़ी रही। मैंने उसकी गाँड पर एक जोर का थप्पड़ मारा।

“बीवी की सहेली लंड पे ले ली… अब जब मन करे, बोल देना। दोनों होल तैयार रहेंगी।”

मैं रात के अँधेरे में उसके फ्लैट से निकल गया। शरीर में थकान थी, लेकिन दिमाग में उसकी कराहें और गालियाँ गूँज रही थीं।

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