मेरा नाम रोहन है। उम्र 28। शादी को आठ महीने हुए थे। बीवी प्रिया अपनी कज़िन की शादी में दूसरे शहर गई हुई थी। लगभग दस दिन की बात थी। सासू माँ कमला हमारे ही घर ठहरी हुई थीं क्योंकि अकेली रहना उन्हें पसंद नहीं था। ससुर जी अपने गाँव चले गए थे कुछ काम से।
घर में सिर्फ मैं और सासू माँ थीं।
कमला मैम की उम्र 47 थी, लेकिन शरीर किसी जवान औरत से कम नहीं था। गोरी चमकदार त्वचा, भारी और भरी हुई छातियाँ, पतली कमर और गोल मटमैली गांड। घर में वे ज्यादातर पतली नाइटी पहनती थीं। ब्रा अक्सर नहीं पहनती थीं। निप्पल की शक्ल कपड़े के ऊपर से साफ झलकती थी।
पहले दो दिन सामान्य रहे। तीसरे दिन शाम को मैं ऑफिस से थककर लौटा। कमला मैम रसोई में खड़ी थीं। हल्की गुलाबी नाइटी में। पीठ मेरी तरफ थी। नाइटी इतनी पतली थी कि उनके गांड की गोलाई और पैंटी की लाइन साफ दिख रही थी।
उन्होंने पीछे मुड़कर देखा। “रोहन, इतनी देर से देख रहे हो?” आवाज में हल्की हँसी थी। “नहीं… ऐसे ही,” मैंने कहा। “देखो तो सही। औरत हूँ मैं भी।” इतना कहकर वे मुस्कुरा दीं।
रात को खाना खाते समय वे मेरे सामने बैठीं। नाइटी का गला काफी खुला था। जब आगे झुकतीं तो भारी छातियों का गहरा गड्ढा साफ दिखता। मेरी नजर बार-बार वहाँ जा रही थी। उन्होंने नोटिस किया, लेकिन कोई आपत्ति नहीं जताई। उल्टे जानबूझकर फिर झुक गईं।
“प्रिया को गए तीन दिन हो गए… तड़प तो नहीं रहे हो?” उन्होंने अचानक पूछ लिया। मैं चुप रहा। “तड़पना बुरी बात नहीं है रोहन। तुम्हारी उम्र है। मैं भी तड़पती हूँ। तुम्हारे ससुर को गए पाँच साल हो गए। रातें बहुत लंबी हो जाती हैं।”
पाँचवें दिन सुबह की बात है। मैं बाथरूम की तरफ जा रहा था कि दरवाजा अंदर से आधा खुला मिला। कमला मैम नहा रही थीं। पानी की धार उनके शरीर पर गिर रही थी। नाइटी पूरी तरह गीली होकर चिपक गई थी। भारी छातियाँ, काले निप्पल और पेट के नीचे का उभार साफ दिख रहा था। मैं रुक गया। उन्होंने आँखें खोलकर मुझे देख लिया।
कुछ पल दोनों चुप रहे। फिर उन्होंने धीरे से कहा, “देख लिया है तो अंदर आ जाओ। पानी ठंडा हो रहा है।”
मैं अंदर चला गया। उन्होंने मेरी तरफ पीठ करके खड़ी रहीं। मैंने पीछे से उनकी कमर पकड़ ली। वे काँप गईं लेकिन हटी नहीं। मेरे हाथ ऊपर गए और गीली नाइटी के ऊपर से उनकी भारी छातियाँ मसलने लगा। निप्पल कड़े हो चुके थे।
“सासू माँ…” “चुपचाप करो जो करना है,” उन्होंने फुसफुसाया। “पाँच साल बाद किसी ने छुआ है।”
मैंने नाइटी ऊपर कर दी। दोनों छातियाँ मुक्त हो गईं। एक निप्पल मुँह में लिया और जोर से चूसा। कमला मैम ने मेरा सिर अपने सीने से दबा लिया। “हाँ… ऐसे ही… जोर से चूसो… अपनी सासू माँ की चूचियाँ चूस डालो…”
मेरा दूसरा हाथ नीचे गया। उनकी चूत पर। पहले से गीली थी। दो उँगलियाँ अंदर डाल दीं। वे दीवार के सहारे झुक गईं। “आह्ह… रोहन… और गहरा… पाँच साल बाद… उँगली भी स्वर्ग लग रही है…”
मैंने उँगलियाँ तेज कर दीं। उनकी कराहें बाथरूम में गूँजने लगीं। अचानक उन्होंने मेरा हाथ रोक लिया। “बस… अभी नहीं। दिन भर मुझे तड़पाते रहो। रात को पूरा लेना। आज रात मैं तुम्हारे कमरे में आऊँगी। और रोहन… आज रात तुम अपनी चुदक्कड़ सासू माँ का भोसड़ा इतना चोदना कि सुबह उठकर मैं चल भी न पाऊँ।”
वे नाइटी ठीक करके बाहर चली गईं।
दोपहर में वे फिर मेरे पास आईं। साड़ी में। पल्लू बहुत कम था। मेरे कान के पास आकर धीरे से बोलीं, “रात को दरवाजा खुला रखना। लाइट बंद रखना। मैं अँधेरे में आऊँगी। तुम सिर्फ अपना काम करना।”
रात के साढ़े दस बजे दरवाजा धीरे से खुला। कमला मैम अंदर आईं। साड़ी पहले ही खोल रखी थी। बिल्कुल नंगी। हल्की रोशनी में उनका शरीर चमक रहा था। भारी छातियाँ, चौड़ी कमर और घनी काली झाड़ी।
वे बिस्तर पर चढ़ गईं और मेरे ऊपर लेट गईं। गरम शरीर मेरे से चिपक गया। “रोहन… आज अपनी सासू माँ को मत छोड़ना। जितना जोर से चोद सकते हो, चोदो। मैं चुदक्कड़ औरत हूँ… पाँच साल से प्यासी हूँ।”
मैंने उन्हें पलटा। जाँघें फैलाईं। लंड उनके चूत के मुँह पर रखा। “डाल दो… एक झटके में पूरा डाल दो…”
मैंने जोर का धक्का मारा। पूरा लंड उनकी चूत में धँस गया। कमला मैम जोर से चीख पड़ीं। “आह्ह्ह… हरामी… कितना मोटा… पाँच साल बाद… पूरा भोसड़ा फट गया…”
मैंने हिलना शुरू किया। पहले धीरे, फिर तेज। उनकी छातियाँ जोर-जोर से उछल रही थीं। मैंने दोनों निप्पल मरोड़ते हुए चोदा। “बोल सासू माँ… कैसा लग रहा है?” “बहुत अच्छा… और जोर से चोदो… अपनी सासू माँ का भोसड़ा बना डालो… प्रिया की माँ को अपनी रंडी बना लो…”
मैंने उनकी टाँगें कंधों पर चढ़ा लीं और और गहराई तक ठोकने लगा। चूत से तेज आवाजें निकल रही थीं। कमला मैम की आँखें बंद थीं, मुँह से सिर्फ कराहें और गालियाँ निकल रही थीं।
“फाड़ दो… पूरा फाड़ दो… आज के बाद यह भोसड़ा सिर्फ तुम्हारा है…”
मैंने गति और बढ़ा दी। वे जोर से काँपीं। उनकी चूत ने मेरे लंड को जकड़ लिया। मैं भी खुद को नहीं रोक पाया। गर्म वीर्य की धार उनके अंदर छोड़ दी।
दोनों पसीने से लथपथ लेटे रहे। मेरा लंड अभी भी अंदर था। कमला मैम ने मेरा चेहरा अपने पास खींचा और होठों पर गहरे चुंबन लेते हुए बोलीं—
“यह तो सिर्फ शुरुआत है रोहन। रात लंबी है। आज तुम अपनी चुदक्कड़ सासू माँ का भोसड़ा पूरी तरह बनाकर ही सोना।”
कमला अभी भी मेरे नीचे लेटी हुई थीं। साँसें तेज चल रही थीं। मेरा लंड उनके अंदर था, धीरे-धीरे ढीला पड़ रहा था। उन्होंने मेरा चेहरा अपने पास खींचा और गहरे होठों वाले चुंबन लेने लगीं। उनकी जीभ मेरे मुँह में घुस आई।
“रोहन… अभी थक गए? पाँच साल बाद जो मिला है, उसे इतनी जल्दी खत्म मत करो,” उन्होंने फुसफुसाया।
मैंने अपना लंड बाहर निकाला। उनके चूत से वीर्य की सफेद धार बह निकली। उन्होंने खुद अपनी उँगली से उसे छुआ, फिर मुँह में ले लिया।
“अपना ही स्वाद… अब तुम्हारा स्वाद भी मिल गया।”
मैं बिस्तर पर बैठ गया। कमला मैम घुटनों के बल मेरे सामने आ गईं। उन्होंने मेरा आधा-सख्त लंड हाथ में लिया और चाटना शुरू कर दिया। धीरे-धीरे, पूरे ध्यान से। टोपा को मुँह में लिया, जीभ घुमाई, फिर गहराई तक ले गईं। गले तक। उनकी आँखों में आँसू आ गए लेकिन रुकीं नहीं।
“सासू माँ… इतनी गहराई से…” “चुप रहो। आज मैं तुम्हारे लंड की पूजा कर रही हूँ। पाँच साल से प्यासी चूत को आज पूरा पानी मिल रहा है।”
वे जोर-जोर से चूसने लगीं। थूक बह रहा था। मैंने उनके बाल पकड़कर हल्के धक्के देने शुरू कर दिए। कमला मैम ने गला और ढीला कर दिया। दस-बारह मिनट तक वे मेरे लंड को अपने मुँह में लेकर खेलती रहीं। जब लंड फिर से पूरी तरह तन गया, तब उन्होंने उसे छोड़ा।
“अब पीछे से ले मुझे,” उन्होंने कहा। “कुत्ते की तरह। आज मेरी गांड भी सहलाओ, चूत भी फाड़ो।”
मैंने उन्हें बिस्तर पर घुटनों के बल कर दिया। उनकी गोल गांड मेरे सामने थी। मैंने दोनों हाथों से लोथड़े फैलाए और अपना लंड उनकी गीली चूत में पीछे से धँसा दिया। एक ही झटके में पूरा। कमला मैम जोर से कराह उठीं।
“आह्ह्ह… हरामी… कितना गहरा… सासू माँ की चूत फाड़ रहा है तू…”
मैंने कमर पकड़ी और जोर-जोर से ठोकना शुरू कर दिया। हर धक्के के साथ उनकी गांड मेरे पेट से टकरा रही थी। चप-चप की तेज आवाजें पूरे कमरे में गूँज रही थीं। मैंने एक हाथ आगे बढ़ाकर उनकी क्लिट मसलनी शुरू कर दी। कमला मैम पागल हो गईं।
“हाँ… वहाँ… और मसल… चोद… अपनी सासू माँ को चोद… प्रिया की माँ को अपनी रंडी बना…”
मैंने उनके बाल पकड़कर सिर पीछे खींचा और और तेज कर दिया। उनकी भारी छातियाँ हवा में झूल रही थीं। मैंने एक हाथ से एक छाती पकड़कर मरोड़ी। निप्पल को उँगलियों से दबाया। कमला मैम की कराहें चीखों में बदल गईं।
“फाड़ दो… पूरा भोसड़ा फाड़ दो… आज के बाद यह चूत सिर्फ तुम्हारी है रोहन…”
मैंने गति और बढ़ा दी। उनकी चूत बार-बार सिकुड़ रही थी। अचानक वे जोर से काँपीं। पूरा शरीर अकड़ गया। वे झड़ गईं। उनकी चूत ने मेरे लंड को इतनी जोर से निचोड़ा कि मुझे भी रोकना मुश्किल हो गया। लेकिन मैंने बाहर नहीं निकाला। उनके अंदर ही दूसरी बार वीर्य छोड़ दिया।
दोनों थककर बिस्तर पर गिर पड़े। कमला मैम मेरे सीने पर लेट गईं। उनकी छातियाँ मेरे मुँह के पास थीं। मैंने एक निप्पल मुँह में ले लिया और धीरे-धीरे चूसने लगा। वे हल्के से कराह रही थीं।
“रोहन… तुम बहुत अच्छे से चोदते हो। प्रिया को भी ऐसे ही चोदते हो क्या?” “प्रिया को इतनी गंदी गालियाँ नहीं देता,” मैंने कहा। वे हँसीं। “तो आज से मुझे दो। मैं गंदी गालियाँ सुनना चाहती हूँ। अपनी सासू माँ को रंडी, भोसड़ी, चुदक्कड़… जो चाहो बोलो।”
थोड़ी देर आराम के बाद मेरा लंड फिर उठ खड़ा हुआ। कमला मैम ने महसूस किया। वे मुस्कुराईं और खुद मेरे ऊपर चढ़ गईं। लंड पकड़कर अपनी चूत पर रखा और धीरे-धीरे बैठ गईं। पूरा अंदर जाते ही उनकी आँखें बंद हो गईं।
“आह्ह… अब मैं खुद चोदूँगी अपनी सासू माँ की चूत को…”
वे कमर हिलाने लगीं। पहले धीरे, फिर तेज। उनकी भारी छातियाँ मेरे चेहरे पर बार-बार गिर रही थीं। मैंने दोनों को पकड़कर मुँह में ले लिया और जोर से चूसा। कमला मैम की गति और तेज हो गई। वे खुद को मेरे लंड पर पटक-पटककर चोद रही थीं।
“ले… ले रंडी… अपनी सासू माँ की चूत चोद… पाँच साल से प्यासी भोसड़ी को पानी पिला…” मैंने गाली दी। “हाँ… और दो… गाली दो… मैं तुम्हारी रंडी सासू माँ हूँ… चोदो मुझे…”
मैंने उनकी कमर पकड़कर नीचे से धक्के मारने शुरू कर दिए। अब दोनों मिलकर पागलों की तरह हिल रहे थे। बिस्तर चरमरा रहा था। कमला मैम की कराहें बहुत तेज हो गईं। तीसरी बार वे झड़ गईं। उनकी चूत से पानी की तरह तरल बह निकला। मैंने भी उनके अंदर ही तीसरी बार वीर्य छोड़ दिया।
अब दोनों सच में थक चुके थे। कमला मैम मेरे ऊपर ही गिर गईं। साँसें फूल रही थीं। मैं उनके बाल सहला रहा था।
“रोहन… प्रिया जब तक नहीं आती, हर रात यही करना। मैं तुम्हारी चुदक्कड़ सासू माँ बन गई हूँ। मेरा भोसड़ा अब तुम्हारा है।”
मैंने उनके माथे पर चुंबन लिया। “जब तक प्रिया नहीं आती, हर रात तुम्हारा भोसड़ा बनाता रहूँगा सासू माँ।”
वे मुस्कुराईं और मेरे लंड को हाथ में लेकर धीरे-धीरे सहलाने लगीं। बाहर रात गहरी थी। अंदर कमला मैम मेरे शरीर से चिपककर लेटी थीं। उनकी चूत से अभी भी वीर्य धीरे-धीरे बह रहा था।
मैंने तय कर लिया था—अगले सात दिन तक इस चुदक्कड़ सासू माँ का भोसड़ा इतना चोदूँगा कि प्रिया के आने तक वे चलते समय भी मेरे लंड की याद करें।
