मेरा नाम अन्या है। उम्र चौबीस साल।
शादी हुए सिर्फ़ सात महीने हुए थे। पति रोहन अच्छा था — जिम्मेदार, परिवार वाला, और मुझे प्यार करने वाला। लेकिन सेक्स में वह बहुत जल्दी में रहता था। दस-बारह मिनट, हल्के धक्के, हल्की हरकतें, और फिर मेरे गले लगकर सो जाता। मेरी चूत हर बार अधूरी रह जाती। कई रातें मैं जागकर छत को घूरती और सोचती कि क्या शादीशुदा जिंदगी में सिर्फ़ इतना ही होता है। शरीर तड़पता था, लेकिन मैं कुछ कह नहीं पाती थी।
रोहन का छोटा भाई — मेरा देवर — आदित्य, शहर से पढ़ाई खत्म करके घर लौटा था। उम्र बाईस साल। लंबा, गेहुँआ रंग, मजबूत बाँहें, और आँखों में एक ऐसी बात जो घर की दूसरी लड़कियों को भी घबरा देती थी। वह मुझे “भाभी” कहकर बुलाता, लेकिन उसकी नज़रें कभी-कभी मेरे शरीर पर टिक जातीं। साड़ी के पल्लू पर, ब्लाउज के उभार पर, कमर पर। मैं अनदेखा कर देती।
पहला बदलाव तब हुआ जब रोहन एक हफ्ते के टूर पर गया। घर में सिर्फ़ मैं, सास-ससुर और आदित्य थे। सास-ससुर जल्दी सो जाते। रात को हॉल में टीवी चलता रहता। एक रात मैं पानी लेने किचन गई तो आदित्य फ्रिज के पास खड़ा था।
“भाभी, नींद नहीं आ रही?” “नहीं… तुम भी जाग रहे हो?” वह हल्का मुस्कुराया। “आपके बिना घर सूना लग रहा है।”
मैंने पानी पिया और लौटने लगी कि उसने धीरे से कहा, “रोहन भैया आपको खुश रखते हैं न?”
सवाल अचानक था। मैंने मुड़कर देखा। उसकी आँखों में कुछ था — हिम्मत और भूख का मिश्रण। “यह तुम्हारे पूछने की बात नहीं है आदित्य।” “माफ करना भाभी। बस लगा… आप कभी-कभी उदास रहती हैं।”
उस रात नींद नहीं आई। शरीर में एक अजीब बेचैनी थी।
अगले दिन दोपहर में सास-ससुर रिश्तेदारों के यहाँ गए हुए थे। घर खाली था। आदित्य मेरे कमरे के पास से गुजरा। दरवाजा आधा खुला था। मैं साड़ी बदल रही थी। ब्लाउज अभी बाँधा नहीं था। उसने देखा। हमारी नज़रें मिलीं। मैंने जल्दी से पल्लू सँभाला, लेकिन वह हटा नहीं। कुछ पल तक बस देखता रहा। मेरे स्तन, मेरी कमर, मेरी नंगी पीठ। फिर धीरे से बोला, “माफ करना भाभी… दरवाजा खुला था।”
लेकिन उसकी आँखों में माफी नहीं थी। गहरी भूख थी।
शाम को जब सब सो गए तो वह मेरे कमरे के बाहर आया। हल्के से खटखटाया। “भाभी… बात करनी थी।”
मैंने दरवाजा खोला। वह अंदर आ गया। दरवाजा बंद करते ही उसने मुझे दीवार से लगा लिया और जोर से चूम लिया। मैंने धक्का देने की कोशिश की, लेकिन कमजोर। उसकी जीभ मेरे मुँह में घुस आई। हाथ मेरी कमर पर थे, फिर नीचे जाकर मेरी गाँड दबाई।
“आदित्य… यह गलत है… तुम मेरे देवर हो…” “खून के नहीं हैं भाभी। और आप तड़प रही हैं। मैं महसूस कर सकता हूँ।”
उसने मेरी साड़ी का पल्लू हटाया। ब्लाउज के हुक एक-एक करके खोले। मेरे स्तन बाहर आ गए। उसने दोनों को जोर से मसला और एक निप्पल मुँह में ले लिया। जोर से चूसने लगा। दाँतों से हल्के काटे। मैं कराह उठी। शरीर ने धोखा दे दिया। चूत में पानी आने लगा।
“रोहन भैया ऐसा करते हैं क्या?” “चुप रहो… आह्ह…”
वह मुझे बिस्तर पर ले गया। साड़ी और पेटीकोट खींचकर उतार दिए। मैं पूरी नंगी थी। उसने भी कपड़े उतारे। उसका मोटा लंड तना हुआ खड़ा था — रोहन से काफी बड़ा और मोटा। मैंने देखा और गला सूख गया।
उसने मेरी चूत सहलाई। दो उँगलियाँ अंदर डालकर तेजी से हिलाईं। मैं बहुत गीली थी। फिर अपना मोटा लंड मेरी चूत पर रखा और धीरे-धीरे अंदर धकेला।
“आह्ह… आदित्य… धीरे… बहुत बड़ा है…” “सालों से तड़प रही हो भाभी। आज पूरी तरह चोदूँगा। रोहन भैया जैसा नहीं।”
वह जोर-जोर से चोदने लगा। बिस्तर आवाज कर रहा था। मेरे स्तन उसके हर धक्के के साथ हिल रहे थे। उसने मेरी टाँगें कंधों पर रख लीं और और गहराई तक जाने लगा। हर धक्का मेरी चूत को फाड़ता हुआ लग रहा था।
“बोलो… कैसा लग रहा है?” “बहुत… बहुत गहरा… जोर से चोदो…” “रोहन भैया ऐसा चोदते हैं क्या?” “नहीं… कभी नहीं… वे तो बच्चों जैसे हैं…”
वह और तेज हो गया। गालियाँ देने लगा। “शरीफ भाभी… देवर से चुदवा रही है… चूत कितनी गीली हो रही है… पानी छोड़ रही है…”
मैं भी बोलने लगी। “चोदो… जोर से चोदो… मेरी चूत फाड़ दो… सालों की भूख निकालो…”
उसने मुझे पलटा। पीछे से चोदा। गाँड पर जोर-जोर से थप्पड़ मारे। फिर लंड निकालकर गाँड की सेंध पर रखा।
“यहाँ भी लेगी भाभी?” “हाँ… डाल दो… दर्द होगा लेकिन डाल दो… पूरी रात निकालो मेरी तड़प…”
वह धीरे-धीरे गाँड में घुसा। मैं तकिया दबाए चीख रही थी। जब पूरा मोटा लंड अंदर गया तो उसने जोर के धक्के शुरू कर दिए।
“आह्ह… गाँड फट रही है… लेकिन मत रुकना… चोदते रहो…”
वह बारी-बारी से चूत और गाँड में लंड मारता रहा। कभी मुँह में ठूंसकर गला चोदता, कभी स्तनों के बीच रगड़ता। गालियाँ, थप्पड़, बाल खींचना… सब कुछ। मैं कई बार झड़ चुकी थी। आखिर में उसने मेरी चूत में ही जोरदार धक्कों के साथ झड़ दिया। गर्म गाढ़ा पानी की तेज धार महसूस हुई।
वह मेरे ऊपर गिर पड़ा। दोनों पसीने से तर थे।
“अब तुम सिर्फ़ भैया की नहीं रहीं भाभी। मेरी भी हो। तेरी चूत और गाँड दोनों मेरी हो गईं।”
मैं चुप थी। शरीर में दर्द था, लेकिन अंदर एक अजीब सुकून भी था। पहली बार किसी ने मेरी भूख को समझा था।
अगले तीन दिनों में हम कई बार मिले। कभी दोपहर में जब घर खाली होता, कभी रात को सबके सोने के बाद। हर बार वह और बेकाबू होता गया। और मैं… मैं हर बार और खुलती गई।
एक दोपहर उसने मुझे किचन में ही चोदा। दीवार से लगाकर। मेरी एक टाँग उठाकर। जोर-जोर से धक्के मारते हुए। गालियाँ देते हुए।
“दिन में भी चोद रहा हूँ भाभी… डर नहीं लगता?” “लगता है… लेकिन रुक नहीं पा रही…”
रात को उसने मुझे बाँधकर चोदा। हाथ चारपाई के खंभे से बाँधे। मुँह में लंड ठूंसकर गला चोदा। फिर चूत में, फिर गाँड में। बार-बार।
“बोलो… तुम किसकी हो?” “तुम्हारी… सिर्फ़ तुम्हारी…” “भैया की नहीं?” “नहीं… अब नहीं… मेरी चूत तुम्हारे मोटे लंड की हो गई है…”
एक रात रोहन अचानक ऑफिस से जल्दी लौट आया। आदित्य मेरे कमरे में था। हम दोनों नंगे थे। दरवाजा खुला था। रोहन ने सब देख लिया।
कमरे में सन्नाटा छा गया। रोहन का चेहरा सफेद पड़ गया। आदित्य ने जल्दी से कपड़े पहनने शुरू किए। मैंने चादर ओढ़ ली।
रोहन ने सिर्फ़ इतना कहा, “मैं सुबह बात करूँगा।”
वह चला गया।
सुबह रोहन ने मुझसे कहा, “तुम दोनों को एक हफ्ता दिया है। या तो आदित्य घर छोड़ दे… या तुम दोनों यहीं रहो, लेकिन मुझे मत दिखाओ। मैं अलग सोऊँगा।”
मेरी दुनिया रुक गई।
आदित्य ने मेरा हाथ पकड़ा और बोला, “मैं जाऊँगा भाभी। तुम इसकी कीमत मत चुकाओ।”
लेकिन मैंने सिर हिलाया। “नहीं। तुम रहो। मैं अब तुम्हारे बिना नहीं रह सकती।”
रोहन ने घर में एक अजीब सी व्यवस्था बना ली। वह अलग कमरे में सोने लगा। आदित्य और मैं रात को मिलते रहे। डर के साथ मजा और भी बढ़ गया था। कभी-कभी रोहन के कमरे के बिल्कुल बगल में चोदते। जानबूझकर आवाजें निकालते।
एक दिन रोहन ने कहा, “अगर तुम दोनों यही जारी रखना चाहते हो… तो कम से कम मुझे भी शामिल करो। वरना मैं घर छोड़ दूँगा।”
मेरा खून सूख गया। आदित्य ने मेरी तरफ देखा। मैंने धीरे से सिर हिलाया।
उस रात तीनों एक कमरे में थे।
रोहन ने पहले मुझे चोदा — अपने पुराने हल्के अंदाज में। फिर आदित्य ने मुझे उसके सामने जोर-जोर से चोदा। गाँड में भी। गालियाँ दीं। रोहन देखता रहा।
“देखो भैया… कैसे चोदता हूँ आपकी बीवी को… कैसे पानी छोड़ती है…”
रोहन कुछ नहीं बोला। सिर्फ़ देखता रहा।
उस रात के बाद घर में एक नया समझौता हो गया।
