गरिमा भाभी पार्ट 7: कैमरे वाली चुदाई और विकास का शक

पिछले पार्ट में करण ने मुझे गेस्ट हाउस में घंटों चोदा था और एक छोटी सी कैमरा वाली शीशी मेरे पर्स में रख दी थी। अब अगली बार विकास के यहाँ जाते समय वो कैमरा लगाना था


रात भर नींद नहीं आई। करण का दिया हुआ छोटा सा कैमरा बार-बार याद आ रहा था। उँगली के नाखून जितना छोटा। काले रंग का। लगाने में एक सेकंड भी नहीं लगेगा, लेकिन पकड़े जाने का खतरा पूरा था। अगर विकास ने देख लिया तो? सिर्फ़ धमकी नहीं रहेगी। वह सच में आकाश को सब बता देगा। शायद मुझसे बदला भी ले। फिर भी… शरीर की भूख और करण का खेल दोनों मुझे रोक नहीं पा रहे थे।

सुबह आकाश के जाते ही फोन पर विकास का मैसेज आ गया।

“आज तीन बजे आना। घर खाली है। देर मत करना।”

मैंने तुरंत करण को फॉरवर्ड किया। जवाब दो मिनट में आया।

“जा। कैमरा बेडरूम में किसी ऊँची जगह लगा देना। टीवी के ऊपर या अलमारी के कोने में। ऑन करके रखना। मैं लाइव देखूँगा। और गरिमा… आज जोर से चिल्लाना। मुझे सब साफ सुनाई देना चाहिए।”

हाथ काँप रहे थे। मैंने कैमरा निकाला, बैटरी चेक की, फिर पर्स में वापस रख लिया। नहाया। आज लाल रंग की साड़ी पहनी। अंदर फिर से कुछ नहीं। शरीर पहले से तैयार था। चूत में हल्की सनसनाहट हो रही थी। डर और उत्तेजना एक साथ।

तीन बजते ही मैं विकास के फ्लैट पहुँची। उसने दरवाज़ा खोला और बिना कुछ बोले मुझे अंदर खींच लिया। शराब की गंध आ रही थी। आज वह पहले से ज्यादा नशे में लग रहा था।

“आज तो तू सज-धज के आई है रंडी। लाल साड़ी… आकाश को घर पर ऐसा नहीं दिखाती होगी।”

उसने मुझे दीवार से लगाकर जोर से चूमा। दाँत से मेरे निचले होंठ को काटा। दर्द हुआ। फिर उसने सीधे मेरे स्तनों पर हाथ रख दिया और ब्लाउज के हुक खोलने लगा। मैंने बहाने से कहा, “पानी पीने दे… प्यास लगी है।”

विकास हँसा। “पहले लंड चूस, फिर पानी।” लेकिन वह किचन की तरफ गया शराब लेने। मैंने उतनी देर में बेडरूम में झपट्टा मारा। अलमारी के ऊपर कोने में कैमरा रखा, छोटा सा स्विच दबाया और वापस आकर सोफे पर बैठ गई। दिल इतनी जोर से धधक रहा था कि मुझे खुद को सुनाई दे रहा था।

विकास वापस आया। हाथ में गिलास। उसने गिलास एक तरफ रखा और मुझे खड़ा करके साड़ी खोलने लगा। “आज कोई बात नहीं। सीधे काम।” उसने मुझे बेडरूम में धकेल दिया। बिस्तर पर गिराया और अपनी पेंट खोली। मोटा लंड बाहर निकल आया। पहले से तना हुआ, नसें फूली हुई।

“पकड़ इसे और चूस। गले तक।”

मैंने उसका मोटा लंड पकड़ा और मुँह में ले लिया। विकास ने मेरे बाल पकड़कर जोर-जोर से धक्के देने शुरू कर दिए। लंड बार-बार गले से टकरा रही थी। आँखों से पानी आ रहा था। मैंने जानबूझकर जोर की आवाज़ें निकालीं – गीली, गंदी आवाज़ें। करण सुन रहा होगा। शायद देख भी रहा होगा।

“हाँ… ऐसी चूस… आकाश की बीवी… मेरे लंड की प्यासी रंडी…”

कुछ देर बाद उसने मुझे लिटाया और बिना किसी चाट के सीधे चूत में लंड धकेल दी। एक झटके में पूरी। मैंने जोर से चीख मारी। विकास ने मेरी टाँगें कंधों पर रख लीं और जानवर की तरह चोदने लगा। बिस्तर जोर-जोर से आवाज़ कर रहा था।

“बोल… कैसी लग रही है?” “बहुत… मोटी लग रही है… जोर से… और जोर से फाड़…”

मैंने साफ-साफ गालियाँ निकालीं। “बहनचोद… चोद मुझे… मेरी चूत फाड़ दे… आकाश के रहते हुए पड़ोसी से चोदवा रही हूँ…”

विकास और पागल हो गया। वह मुझे पलटाकर कुत्ते की पोजीशन में कर दिया। पीछे से और तेज़ धक्के लगाने लगा। एक हाथ से मेरे बाल पकड़े हुए था, दूसरे से मेरी गाँड पर जोर-जोर से थप्पड़ मार रहा था। हर थप्पड़ के साथ मेरी चीख निकल रही थी।

“आज गाँड में भी दूँगा। और तू खुद माँग…” “माँग रही हूँ… गाँड में डाल… फाड़ दे मेरी गाँड…”

उसने लंड निकाली, थूक लगाया और गाँड में धकेल दिया। इस बार दर्द कम लगा। शरीर अब उसकी मोटी लंड की आदत पकड़ चुका था। विकास ने जोर-जोर से गाँड मारी। मैं जानबूझकर और जोर से चिल्ला रही थी। नाम लेकर गालियाँ दे रही थी। करण को सब दिख रहा होगा – मेरा नंगा शरीर, विकास का मोटा लंड, मेरी फैलती गाँड, मेरा बेशर्म चेहरा।

लगभग पैंतालीस मिनट तक विकास ने मुझे बारी-बारी से चूत और गाँड में चोदा। आखिर में उसने मुझे लिटाया और चूत में जोरदार धक्कों के साथ अंदर झड़ गया। इतना ज्यादा कि पानी बाहर तक बहने लगा। वह मेरे ऊपर गिरा और भारी साँसें लेते हुए बोला, “अब तू मेरी स्थायी रंडी बन गई है। रोज़ आना। समझी?”

मैंने सिर हिलाया। शरीर काँप रहा था। विकास नहाई करने बाथरूम चला गया। मैंने उतनी देर में कैमरा निकालकर पर्स में रख लिया और जल्दी से साड़ी लपेट ली। ठीक समय पर। विकास बाहर आया तो मैं तैयार खड़ी थी।

“जा रही है?” “हाँ… आकाश जल्दी आ सकते हैं।” उसने मेरी गाँड पर थप्पड़ मारा। “कल दोबारा आ। आज की कमी रह गई है।”

मैं घर वापस आई। नहाया। लेकिन अंदर विकास का पानी अभी भी था। फोन पर करण का मैसेज पहले से पड़ा था।

“सब देखा। बहुत अच्छी थी। तेरी चीखें, तेरी गालियाँ, तेरी गाँड… सब। अब रात को मुझे भेज। रिकॉर्डिंग।”

रात को आकाश आए। उन्होंने मुझे गले लगाया, खाना खाया और सो गए। मैं बाथरूम में जाकर बैठ गई। कैमरा से फोन में वीडियो ट्रांसफर किया। हाथ काँप रहे थे। फिर करण को भेज दिया। कुछ ही मिनट में उसका जवाब आया।

“देख लिया। तू बहुत बेशर्म लग रही थी। अच्छा। अब सुन… अगले हफ्ते मैं तुझे एक दिन के लिए बाहर ले जाऊँगा। पूरी रात। आकाश को कोई अच्छा सा झूठ बोल देना। और हाँ… विकास को भी बुलाऊँगा। दूर से। वह देखेगा कि मैं तुझे कैसे चोदता हूँ।”

मैंने मैसेज पढ़ा और पीछे की दीवार से लग गई।

विकास मुझे धमका-धमका कर चोदता है। करण मुझे खेल-खेल में तोड़ रहा है। और अब वह चाहता है कि विकास देखे।

फोन पर नया मैसेज आया। इस बार विकास का।

“आज तू बहुत जोर से चिल्ला रही थी। पहले कभी इतनी बेशर्म नहीं थी। क्या बात है? किसी और से भी चुदवा रही है क्या?”

मेरा दिल एक पल के लिए रुक सा गया।

मैंने मैसेज को देखा। डिलीट नहीं किया। जवाब भी नहीं दिया। सिर्फ़ करण को फॉरवर्ड कर दिया।

करण का जवाब आया –

“शुरू हो गया। अब मज़े ले। मैं संभालूँगा।”

मैंने आईने में अपना चेहरा देखा। आकाश की पत्नी। विकास की धमकी वाली रंडी। करण की कैमरे वाली औरत।

तीनों चेहरे अब एक-दूसरे में मिल चुके थे। और सबसे बड़ा खतरा ये था कि मुझे इन तीनों में से किसी को भी छोड़ने का मन नहीं कर रहा था।

मैंने फोन रखा और बिस्तर पर जाकर आकाश के बगल में लेट गई। उनकी साँसें सुनते हुए मैंने सोचा –

अब ये खेल कब तक छुप पाएगा? और जब खुल जाएगा… तो सबसे पहले टूटेगी कौन?

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