plot : bhabhi ki chudai : Amir randwe se gaand marwayi: Pati school gaya toh padosi amir randwe ne Kusum bhabhi ki gaand faad di. Slow tension ke baad hardcore gaand chudai. Full padosi sex story.
कुसुम ने की खिड़की से साबुन का झाग हाथों पर लगाए मैंने बाहर देखा। नीचे पार्किंग में एक नया स्कॉर्पियो खड़ा था। काला रंग, चमकता हुआ। उसके पास एक आदमी खड़ा सामान उतार रहा था। लंबा, कंधे चौड़े, बालों में हल्की सफेदी, लेकिन चेहरा अभी भी आकर्षक। उम्र कहीं पैंतालीस के आसपास होगी। सफेद शर्ट में उसका सीना तना हुआ लग रहा था।
मैंने नजर हटा ली। साबुन लगाते हुए सोचा—नया पड़ोसी। ये antarvasana bhabhi ki chudai आप pranaykatha पर पढ़ रहें है।
शाम को जब मैं कचरा डालने गई तो गलियारे में वह मिला। उसने रास्ता दिया और हल्के से मुस्कुराया।
“नमस्ते। मैं राजवेर। फ्लैट नंबर 402 में शिफ्ट हुआ हूँ।”
आवाज भारी थी, लेकिन नरम। मैंने भी मुस्कुराकर जवाब दिया, “कुसुम। 401 में रहती हूँ।”
बस इतना ही। कोई ज्यादा बात नहीं हुई।
अगले तीन-चार दिन वह अक्सर गलियारे में या लिफ्ट में मिल जाता। कभी हल्की सी मुस्कान, कभी सिर हिलाकर नमस्ते। एक दिन उसने मेरी थैली पकड़ने की कोशिश की जब मैं सब्जी लेकर आ रही थी, लेकिन मैंने मना कर दिया। अंदर ही अंदर थोड़ा अजीब लगा। पति स्कूल से शाम को ही लौटते हैं। दिन लंबा होता है। और यह आदमी… अकेला दिखता था।
एक दोपहर की बात है। मैं छत पर कपड़े सुखाने गई थी। वह भी वहाँ खड़ा था, सिगरेट पीते हुए। दूर शहर की तरफ देख रहा था। मेरी आहट सुनकर मुड़ा।
“आपको भी यह शहर कभी-कभी भारी लगता है?” उसने अचानक पूछा।
सवाल अजीब था। मैंने कपड़े फैलाते हुए कहा, “कभी-कभी। खासकर जब घर में कोई न हो।”
वह चुप रहा। फिर बोला, “मेरी पत्नी का निधन हो गया था तीन साल पहले। तब से शहर बदल-बदल कर रह रहा हूँ। लगता है शोर से भाग रहा हूँ।”
मैं रुक गई। उसकी आँखों में एक थकावट थी, जो सिर्फ अकेलेपन से आती है। मैंने कोई जवाब नहीं दिया। बस कपड़े सुखाकर नीचे चली आई। लेकिन उसका चेहरा दिमाग में रह गया। ये antarvasana bhabhi sex story आप pranaykatha पर पढ़ रहें है।
दूसरी मुलाकात किचन में हुई। मेरी गैस लीक हो रही थी। मैं घबराई हुई थी। ठीक उसी समय वह गलियारे से गुजरा। दरवाजा खुला देखकर रुक गया।
“सब ठीक है?”
मैंने बताया। वह अंदर आया। गैस बंद की, खिड़कियाँ खोलीं, और एक घंटे तक खड़ा रहकर मिस्त्री के आने तक मदद करता रहा। जाते-जाते बोला, “अकेली हों तो किसी भी दिक्कत में बता देना। मैं घर पर ही काम करता हूँ ज्यादातर।”
उस दिन के बाद कुछ बदल गया था। मैं जब भी बालकनी में जाती, उसका ध्यान अपनी ओर खींचती हुई सी महसूस करती। वह जबरदस्ती नहीं देखता था, लेकिन जब हमारी नजरें मिलतीं तो हटाता भी नहीं था जल्दी से।
एक शाम पति देर से आने वाले थे। मीटिंग थी। मैंने हल्की सी साड़ी पहन रखी थी। बाल खुले थे। दरवाजे की घंटी बजी। राजवेर खड़ा था। हाथ में एक डिब्बा।
“आपकी गैस वाली समस्या याद आई तो सोचा यह लीक डिटेक्टर दे दूँ। बाजार से लेता था तो…”
मैंने लिया। हमारे हाथ छुए। उसकी उंगलियाँ लंबी और गर्म थीं। मैंने जल्दी से हाथ खींच लिया।
“आभारी हूँ,” मैंने कहा। आवाज में थोड़ी घबराहट थी।
वह मुस्कुराया। “कोई बात नहीं कुसुम जी।”
उसने मेरा नाम पूरे आदर के साथ लिया, लेकिन आँखों में कुछ और था। मैंने दरवाजा बंद किया और पीछे से लग गई। दिल तेज धड़क रहा था। समझ नहीं आ रहा था कि यह घबराहट डर की है या कुछ और की। ये antarvasana biwi ki chudai आप pranaykatha पर पढ़ रहें है।
रात को पति के सोने के बाद भी नींद नहीं आई। मैंने अपनी जांघों के बीच हाथ रखा। सिर्फ आदत से। लेकिन दिमाग में राजवेर का चेहरा आ गया। उसकी भारी आवाज। उसकी उंगलियाँ। मैंने हाथ हटा लिया। खुद को डांटा।
अगले दिन वह फिर मिला। लिफ्ट में। अकेले।
लिफ्ट बंद हुई तो अजीब सी चुप्पी छा गई। मैंने दीवार की तरफ देखा। वह बोला, “आपकी साड़ी बहुत सुंदर लग रही थी कल।”
मैंने सिर उठाया। हमारी नजरें मिलीं। इस बार उसने नजर नहीं हटाई। मैंने भी नहीं हटाई। लिफ्ट की घंटी बजी। दरवाजा खुला। मैं जल्दी से बाहर निकल गई। गाल जल रहे थे।
उस शाम मैं खुद को रोक नहीं पाई। पति घर पर नहीं थे। मैंने राजवेर के दरवाजे पर हाथ बढ़ाया। हटा लिया। फिर से बढ़ाया और घंटी दबा दी।
दरवाजा खुला। वह सिर्फ लुंगी में था। छाती नंगी। शरीर पर पानी के छींटे। नहाया हुआ लग रहा था।
“कुसुम जी?”
मैं अंदर घुस गई। दरवाजा बंद कर दिया। उसने कुछ कहा नहीं। बस देखता रहा। मैंने उसकी छाती पर हाथ रखा। गर्म थी। फिर आँखों में देखा और बोला, “मुझे नहीं पता मैं यहाँ क्यों हूँ।”
उसने मेरा हाथ पकड़ लिया। “तो चली जाओ।”
लेकिन उसने मेरा हाथ छोड़ा नहीं। बल्कि खींचकर अपने करीब कर लिया। मेरी छाती उसकी नंगी छाती से टकराई। साँसें मिल गईं।
फिर उसने मुझे चूमा। धीरे से नहीं। भूखे की तरह। उसके होंठ मोटे थे, जीभ गर्म। मैंने उसके बालों में हाथ डाल दिया। वह मुझे दीवार से सटा दिया। साड़ी का पल्लू खींचकर फर्श पर गिरा दिया। ब्लाउज के हुक खोले। मेरे स्तन बाहर आ गए। उसने एक निप्पल को मुंह में लिया और जोर से चूसा। दर्द हुआ, लेकिन मजा भी।
“आह…” मेरी सिसकारी निकली।
वह मुझे गोद में उठाकर बेडरूम में ले गया। बिस्तर पर लिटा दिया। साड़ी पूरी तरह खोल दी। मैं नंगी थी। उसने लुंगी खोली। उसका लंड पहले से तना हुआ था। मोटा, लंबा, नसों से भरा। मैंने हाथ बढ़ाकर पकड़ा। हाथ में भारी लगा।
उसने मेरे पैर फैलाए। पहले उसने मेरी चूत को देखा। उंगली से छुआ। गीली थी। लेकिन उसने अंदर नहीं डाला। बल्कि मुझे पलट दिया। घुटनों के बल कर दिया।
मैं समझ गई।
“धीरे…” मैंने कहा। आवाज काँप रही थी।
उसने जवाब नहीं दिया। थूक लगाकर अपनी उंगली मेरे गांड के छेद पर फेरने लगा। धीरे-धीरे दबाव दिया। उंगली अंदर गई। अजीब सा अहसास। फिर दो उंगलियाँ। वह फैला रहा था मुझे।
“दर्द हो रहा है,” मैंने दाँत पीसकर कहा।
“सह लो,” उसने बस इतना कहा।
फिर मुझे लगा उसका लंड मेरे पीछे टिका। गर्म और कठोर। उसने धीरे से दबाव दिया। सिर्फ सिर अंदर गया और मेरी साँस रुक गई। दर्द तेज था। जैसे कुछ फट रहा हो।
“निकालो… बहुत मोटा है…”
लेकिन वह रुका नहीं। धीरे-धीरे और अंदर धकेलता रहा। मेरी गांड फैल रही थी उसके लंड को जगह देने के लिए। आंसू आ गए। नाखून चादर में गड़ गए। जब उसका पूरा लंड अंदर तक चला गया तो दोनों रुक गए। मैं हांफ रही थी। अंदर एक अजीब भराव था। दर्द के साथ-साथ एक दबाव जो दिमाग को सुन्न कर रहा था।
फिर वह हिलने लगा।
पहले धीमे। लंबी-लंबी हरकतें। उसका लंड बाहर निकलता और फिर पूरे जोर से अंदर तक जाता। हर धक्के के साथ मेरी गांड की मांस कंपन करती। आवाज आने लगी—गिलगिल, चपचप। उसकी जांघें मेरी जांघों से टकरा रही थीं।
“इतनी टight गांड…” वह पहली बार बोला। आवाज भारी हो गई थी। “सालों से किसी ने नहीं मारी न?”
मैं जवाब नहीं दे पाई। बस तकिया दबाए हुए सह रही थी। दर्द अब बदल रहा था। एक गहरी गर्मी फैल रही थी पेट के नीचे। हर धक्के के साथ वह गर्मी बढ़ रही थी। ये antarvasana padosi sex story आप pranaykatha पर पढ़ रहें है।
वह रफ्तार बढ़ाने लगा। अब जोर से पेल रहा था। एक हाथ से मेरी कमर पकड़ी हुई थी और दूसरे से मेरे बाल। सिर पीछे खींच रखा था। मेरी गर्दन तनी हुई थी। स्तन हवा में झूल रहे थे।
“बोलो…” उसने झुककर मेरे कान में कहा। “कैसा लग रहा है अमीर आदमी का लंड अपनी गांड में?”
“आह्ह… जोर से… करो…” मेरी आवाज खुद को पहचान नहीं पा रही थी।
वह पागलों की तरह चोदने लगा। धक्के इतने जोर के थे कि बिस्तर खटखटा रहा था। मेरी गांड जल रही थी, लेकिन अंदर उसका लंड हर बार किसी ऐसे स्थान को छू रहा था जहाँ से बिजली सी दौड़ जाती। मैंने हाथ बढ़ाकर अपनी चूत पर रखा। उंगली घुमाने लगी। गांड में उसका मोटा लंड और चूत पर मेरी उंगली—दोनों मिलकर मुझे पागल कर रहे थे।
“मैं… मैं आने वाली हूँ…”
शरीर अकड़ गया। गांड की मांस ने उसके लंड को जोर से जकड़ लिया। पैर काँपने लगे। एक लंबी सिसकारी निकल गई। पानी मेरी चूत से बहकर जांघों पर लग गया।
वह रुका नहीं। मेरी ऑर्गेज्म के दौरान और तेज पेलता रहा। फिर अचानक गहराई तक धँस गया और गुर्राया। गर्म तरल की धार मुझे अंदर तक महसूस हुई। एक के बाद एक। इतना ज्यादा कि बाहर निकलकर मेरी जांघों पर बहने लगा।
वह मुझ पर गिर पड़ा। दोनों पसीने से तर थे। उसका लंड अभी भी मेरी गांड में धड़क रहा था।
बहुत देर तक कोई नहीं बोला। बस साँसें चल रही थीं।
आखिर में उसने लंड बाहर निकाला। खाली अहसास अजीब था। मैं करवट लेकर लेट गई। शरीर में दर्द था, लेकिन एक अजीब सुकून भी।
राजवेर मेरे पास लेटा रहा। हाथ से मेरे बाल हटाते हुए बोला, “अब पछतावा हो रहा है?”
मैंने आँखें बंद रखीं।
“नहीं,” मैंने धीरे से कहा। “लेकिन यह दोबारा नहीं होना चाहिए।” ये antarvasana hardcore gaand chudai आप pranaykatha पर पढ़ रहें है।
वह हल्का मुस्कुराया। “जैसा तुम कहो कुसुम।”
लेकिन हम दोनों जानते थे—यह वाक्य झूठा है।
मेरी गांड अभी भी सुन्न थी उसके लंड की याद से। और दिमाग में एक ही बात घूम रही थी—अगली बार कब?
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