plot Hindi sex story: Patni ki maut ke baad Ragini ek saath teen mote lund apni chut, gaand aur muh mein leti hai. Hardcore gangbang desi sex story.
मेरा नाम रागिनी है। पैंतीस साल की। विधवा। और अब मैं यह बात छुपाने की कोशिश भी नहीं करती कि पति की मौत के बाद मेरी चूत ने बाकी सब रिश्ते निगल लिए।
पति के जाते ही पहले कुछ महीने घर की चारदीवारी में गुजरे। रातें लंबी थीं। शरीर जलता था। मैंने पहले उंगलियों से काम चलाया, फिर देर रात नहाते समय शावर की धार से। लेकिन वह भूख और बढ़ती गई। फिर एक दिन दूध वाला लड़का अंदर तक आ गया। उसके बाद केबल वाला। फिर मोहल्ले का दुकानदार। धीरे-धीरे बात फैल गई। लोग जान गए कि रागिनी भाभी का दरवाजा उन पुरुषों के लिए खुला रहता है जो हिम्मत करके खटखटाएँ। कभी मैं पैसे लेती, कभी सिर्फ शरीर की गर्मी के बदले। दोनों ही स्थितियों में मेरी चूत संतुष्ट होती थी। अब वह किसी एक आदमी की नहीं रह गई थी। वह सबका स्वागत करने वाली हो चुकी थी। ये antarvasana gangbang sex story आप pranaykatha पर पढ़ रहें है।
उस दिन शनिवार था। सुबह से ही शरीर में एक अजीब बेचैनी थी। नहाते समय मैंने देर तक अपने नग्न शरीर को आईने में देखा। स्तन भारी और नरम, निप्पल गहरे रंग के। पेट पर हल्की रेखाएँ। और नीचे घनी काली झाँट के बीच मेरी चूत—मांसल, थोड़ी मोटी फाँकों वाली, जो छूने पर तुरंत गीली हो जाती थी। मैंने उंगली से बीच की लकीर सहलाई। अंदर पहले से नमी थी। आज कुछ ज्यादा चाहिए था। एक लंड काफी नहीं पड़ता था इन दिनों।
दोपहर के लगभग दो बजे घंटी बजी। दरवाजा खोला तो रवि खड़ा था। पिछले महीने वह दो बार आ चुका था। उसके पीछे दो और लड़के थे—एक थोड़ा लंबा और दुबला, दूसरा चौड़े कंधों वाला। तीनों की आँखों में वही भूख थी जो मुझे अच्छी लगती थी।
“भाभी, ये मेरे दोस्त हैं,” रवि ने कहा। “आपके बारे में सुन रखा था। कहाँ बिठाएँ?”
मैंने उन्हें अंदर आने दिया। दरवाजा बंद किया और आड़ लगा दी। तीनों मेरे शरीर को देख रहे थे। मैंने जानबूझकर साड़ी का पल्लू ढीला छोड़ रखा था। स्तनों की गोलाई साफ नजर आ रही थी। मैंने उनकी तरफ देखा और धीरे से बोली, “नहा लो पहले। पसीना चूत में नहीं अच्छा लगता।” ये antarvasana hindi group sex story आप pranaykatha पर पढ़ रहें है।
वे हँसे। लेकिन नहाने नहीं गए। रवि ने आगे बढ़कर मेरी साड़ी का पल्लू खींच लिया। दोनों स्तन बाहर आ गए। भारी, गरम। उसने एक निप्पल को अंगूठे से दबाया। मैंने उसकी कलाई पकड़ ली लेकिन हटने नहीं दिया। बाकी दो लड़के पास आ गए। एक ने पीछे से कमर में हाथ डाल दिया। दूसरे ने मेरा चेहरा पकड़कर होंठों पर अपना मुंह रख दिया। तीनों तरफ से शरीर छुआ जा रहा था। साड़ी धीरे-धीरे खुलती गई। जब वह फर्श पर गिरी तो मैं उनके सामने बिल्कुल नंगी थी।
मैंने खुद घुटनों के बल बैठने का फैसला किया। “निकालो सब,” मैंने कहा। आवाज में कोई संकोच नहीं था।
तीनों ने पेंट खोली। तीन लंड सामने आ गए। रवि का मोटा और थोड़ा टेढ़ा। दूसरे का लंबा और नसों वाला। तीसरे का मोटा और गहरा रंग वाला। मैंने पहले सबसे मोटे को हाथ में लिया। मुंह के करीब लाकर सूँघा। फिर जीभ निकाली और सिर के चारों तरफ घुमाया। नमकीन स्वाद। फिर मुंह खोलकर अंदर ले लिया। गाल फैल गए। मैंने गला ढीला किया और उसे और गहरा धकेला। आँखों में पानी आ गया लेकिन मैंने रोका नहीं। एक हाथ से दूसरे लंड को हिला रही थी और तीसरे को सहला रही थी। लार बहकर ठोड़ी से स्तनों पर गिर रही थी।
रवि ने मेरे बालों में उंगलियाँ फँसा लीं और अपना लंड मेरे मुंह में ठूसने लगा। वह गहराई तक जा रहा था। मेरा गला भर रहा था। जब वह निकाला तो लंबी लार की डोर उसके लंड से जुड़ी रह गई। मैंने तुरंत दूसरा लंड मुंह में ले लिया। अब मैं बारी-बारी तीनों को चूस रही थी। कभी एक को गले तक, कभी दो को एक साथ जीभ पर लेकर चाट रही थी। मेरी आँखें पानी से भरी थीं, साँसें तेज थीं, लेकिन मैं रुकना नहीं चाहती थी। तीनों लंड मेरे मुंह और हाथों में सख्त होते जा रहे थे।
“अब बिस्तर पर जाओ भाभी,” रवि ने कहा। आवाज भारी हो चुकी थी। ये antarvasana widow sex story आप pranaykatha पर पढ़ रहें है।
मैं उठकर बिस्तर पर चारों हाथ-पैरों के बल हो गई। गांड ऊँची की। मेरी चूत पहले से खुली और चमक रही थी। रवि ने पीछे से आकर अपने मोटे लंड का सिर मेरी चूत पर टिकाया। एक पल रुककर उसने जोर से धक्का मारा। पूरा आधा लंड एक साथ अंदर चला गया। मेरी आवाज निकल गई। इतनी मोटाई अभी भी मुझे फैला देती थी। वह रुका नहीं। बाकी का हिस्सा भी धकेल दिया। अब उसका पूरा लंड मेरी चूत में था। गर्म, धड़कता हुआ। वह हिलने लगा। लंबे-लंबे धक्के। हर बार जब वह बाहर खींचता तो मेरी चूत की दीवारें उसके लंड को छोड़ने से मना करतीं। आवाज आने लगी—गीली, शर्मनाक, तेज।
इसी दौरान दूसरा लड़का बिस्तर पर चढ़ आया और मेरे मुंह के सामने अपना लंड लाया। मैंने उसे मुंह में ले लिया। अब एक लंड मेरी चूत फाड़ रहा था और दूसरा मेरे गले में। तीसरा लड़का मेरे बगल में लेटकर मेरे स्तनों को मसल रहा था, निप्पल को दाँतों से काट रहा था, और कभी-कभी मेरा हाथ पकड़कर अपने लंड पर फिरवा रहा था। तीनों तरफ से शरीर इस्तेमाल हो रहा था। मुझे वह अहसास पसंद था।
रवि ने अचानक लंड बाहर निकाला। मैंने विरोध में गला करके आवाज निकाली। उसने मुझे पलटा और पीठ के बल लिटा दिया। मेरे पैर फैलाकर फिर से घुस गया। इस बार और गहरा। उसने मेरी दोनों टाँगें पकड़कर अपने कंधों पर रख लीं। अब हर धक्का गर्भ तक लग रहा था। मेरी चूत की आवाज बदल गई थी—और गीली, और तेज। दूसरा लड़का मेरे ऊपर आ गया और अपना लंड फिर से मेरे मुंह में ठूसने लगा। तीसरा लड़का मेरे हाथ से अपना लंड हिलवा रहा था। मैं तीनों को एक साथ संभाल रही थी।
थोड़ी देर बाद उन्होंने फिर से मेरी पोजीशन बदली। रवि नीचे लेट गया। मैं उसके लंड पर बैठ गई। पूरा लंड अंदर तक समा गया। मेरी चूत ने उसे जकड़ लिया। दूसरा लड़का मेरे पीछे आया। मैंने महसूस किया कि उसकी उंगलियाँ मेरी गांड के छेद पर घूम रही हैं। उसने थूक लगाकर पहले एक उंगली अंदर डाली, फिर दो। मैं सहम गई लेकिन रुकी नहीं। जब उसने अपना लंड मेरी गांड पर टिकाया तो मैंने साँस रोक ली। धीरे-धीरे दबाव बढ़ा। सिर अंदर गया। दर्द तेज था। आँखों से आँसू बह निकले। लेकिन मैंने खुद पीछे की तरफ जोर दिया। धीरे-धीरे उसका लंड मेरी गांड में सरकता गया। जब आधा अंदर पहुँचा तो दर्द के नीचे एक गहरी, अजीब गर्मी फैल गई। ये antarvasana desi gangbang sex story आप pranaykatha पर पढ़ रहें है।
अब मेरी दोनों छेद भरे हुए थे। आगे रवि और पीछे वह। दोनों एक साथ हिलने लगे। कभी एक जैसा, कभी उल्टा। मेरी चूत और गांड एक साथ फैल रही थीं और सिकुड़ रही थीं। तीसरा लड़का मेरे मुंह में अपना लंड डाले हुए था। मैं तीनों लंडों को एक साथ निगल रही थी—एक मुंह में, एक चूत में, एक गांड में। शरीर काँप रहा था। दिमाग में सिर्फ तीन जगहों का दबाव बच गया था। आवाजें अब बेकाबू हो चुकी थीं। लार मुंह से बहकर स्तनों पर गिर रही थी। चूत से पानी की धारा रवि के पेट पर लग रही थी।
वे गति बढ़ाने लगे। मेरे शरीर की हर हरकत शर्मनाक आवाजें पैदा कर रही थी। अचानक मेरी चूत ने जोरदार धड़कन शुरू की। पूरे शरीर में लहर दौड़ गई। मैंने लंड मुंह में होने के बावजूद चीख निकाली। चूत और गांड दोनों ने लंडों को जकड़ लिया। पैर काँपने लगे। आँखें बंद हो गईं। बहुत देर तक कंपन चलता रहा। मेरी देह ने तीनों लंडों को एक साथ अपने अंदर महसूस करते हुए पानी छोड़ा।
मेरे ढीले पड़ते ही उन्होंने गति नहीं रोकी। वे अपने मजे के लिए पेलते रहे। कुछ देर बाद रवि बोला, “अब बाहर निकालो भाभी।”
वे तीनों खड़े हो गए। मैं बिस्तर पर घुटनों के बल बैठी रही। चेहरा ऊपर किया। तीनों लंड मेरे चेहरे के सामने थे। मैंने बारी-बारी से उन्हें मुंह में लिया, लेकिन उन्होंने खुद हिला-हिलाकर निकाला। पहला लंड मेरे मुंह में ही फट पड़ा। गर्म वीर्य की धार गले तक चली गई। मैंने निगल लिया। दूसरा लंड मेरे स्तनों पर निकला—गाढ़ा सफेद तरल निप्पल पर चिपक गया। तीसरा लंड मेरे चेहरे पर। माथे, गाल, होठों, ठोड़ी पर। मैंने आँखें बंद रखीं और उनका वीर्य अपने चेहरे पर लगने दिया। कुछ बूंदें आँखों तक पहुँच गईं।
जब सब खत्म हुआ तो मैं वैसी ही घुटनों के बल बैठी रही। चेहरे पर, स्तनों पर, चूत और गांड से बहता हुआ उनका मिश्रित वीर्य। तीनों लंड मेरे सामने धीरे-धीरे मुलायम हो रहे थे। कमरे में सिर्फ भारी साँसें चल रही थीं।
रवि हँसते हुए बोला, “भाभी, आज तो तीन लंड एक साथ निगल गईं।”
मैंने आँखें खोलीं। चेहरे पर उनकी कामुकता का सबूत लगाए हुए धीरे से मुस्कुराई। ये antarvasana family sex story आप pranaykatha पर पढ़ रहें है।
“निगला तो सही,” मैंने कहा। आवाज लार और वीर्य से कर्कश हो चुकी थी। “लेकिन पेट अभी भी खाली लग रहा है। अगली बार चार लेकर आना।”
वे कपड़े पहनने लगे। जाते-जाते रवि ने मेरी नंगी गांड पर जोर का थप्पड़ मारा। दर्द हुआ, लेकिन उसके नीचे मजा भी छुपा था। दरवाजा बंद होते ही मैं बिस्तर पर गिर पड़ी। पैर अभी भी काँप रहे थे। चूत और गांड दोनों धड़क रहे थे। चेहरे पर सूखता हुआ वीर्य मुझे याद दिला रहा था कि आज की दोपहर कितनी भरपूर थी।
मैंने उंगली से अपने गाल से थोड़ा वीर्य लिया और जीभ पर रखा। नमकीन। फिर मुस्कुराई।
पति की मौत के बाद मैंने बहुत कुछ खोया था। लेकिन आज जैसी भरी हुई दोपहर मैंने शादीशुदा जिंदगी में कभी नहीं जिया थी। मेरी चूत अब एक की नहीं रह गई थी। वह तीन-तीन लंडों को एक साथ जगह देने वाली हो चुकी थी। और मुझे इसमें कोई शर्म नहीं थी।
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