गोरी चूत की प्यास: हबशी मजदूर का काला राक्षस (Part-2)

plot : Hindi sex story : Gori chut ki pyas Part-2: Biwi ne habshi mazdoor ko thappad mara aur poocha us ladki ki chut zyada pyari thi kya. Phir usne biwi ki chut kaale mote lund se faad di. Hardcore chudai.

गोरी चूत की प्यास: हबशी मजदूर का काला राक्षस (Part-1)

अगली सुबह मेरी आँखों में नींद नहीं थी। पूरी रात वही तस्वीर घूमती रही—उसका काला, मोटा, नसों वाला लंड उस मजदूरन की चूत में धँसता हुआ, फाड़ता हुआ, पानी निकालता हुआ। और वह मुस्कुराहट जो उसने आखिर में मुझे दी थी। जैसे कह रहा हो, “अगली तू है।”

गुस्सा भी था। बहुत गुस्सा।

“हरामी… किसी और की चूत फाड़ रहा था मेरे सामने!” ये antarvasana biwi ki chudai आप pranaykatha पर पढ़ रहें है।

मैंने आईने के सामने खड़े होकर अपने नंगे शरीर को देखा। स्तन भारी और गोल, निप्पल अभी भी सख्त। कमर पतली। और नीचे… मेरी गोरी, मुलायम चूत जो रात भर उंगलियों से फड़कती रही थी। मैंने दो उंगलियाँ अंदर डालीं। अभी भी गीली थी।

“आज तो तेरी बारी है हबशी…” मैंने फुसफुसाया।

साड़ी चुनी सबसे बोल्ड वाली—लाल रंग की, पतली सी, जिसमें शरीर की हर लकीर साफ दिखे। ब्लाउज इतना गहरा कि स्तनों की आधी गोलाई बाहर थी। पैंटी नहीं पहनी। सिर्फ साड़ी के नीचे नंगी चूत। बाल खुले छोड़ दिए। होंठ लाल किए।

ग्यारह बजे बालकनी में गई। वह वहीं था। अकेला। दीवार के किनारे खड़ा सिगरेट पी रहा था। मेरी नजर पड़ते ही उसने सिगरेट नीचे फेंक दी और सीधा मुझे देखने लगा।

मैंने हिम्मत जुटाई। दिल जोर-जोर से धड़क रहा था। सीढ़ियों से उतरकर बगल वाली बिल्डिंग की तरफ चली गई। गार्ड ने कुछ नहीं पूछा। तीसरी मंजिल पर पहुँची। वह कमरा जहाँ कल उसने उस औरत को चोदा था। दरवाजा आधा खुला था।

मैं अंदर घुसी।

वह मुड़ा। हमारी नजरें मिलीं। काली आँखों में हंसी थी।

“आ गई बेगम?” उसकी आवाज मोटी और भारी थी।

गुस्सा साँप की तरह फन उठाकर बैठ गया। मैंने तेजी से उसकी तरफ कदम बढ़ाए और जोर का थप्पड़ उसके चेहरे पर लगा दिया। थप्पड़ की आवाज कमरे में गूँज गई। उसके गाल पर मेरे हाथ का निशान लाल होकर उभर आया। ये antarvasana unsatisfied wife आप pranaykatha पर पढ़ रहें है।

“हरामी!” मैंने चीखकर कहा। “कल मेरे सामने किसी और की चूत फाड़ रहा था?! इतनी प्यारी थी उसकी चूत?! इतनी टाइट थी?! मेरी चूत में क्या कमी थी जो तूने मुझे छोड़कर उसे चुदा?!”

वह थप्पड़ खाकर भी नहीं हिला। बस मुस्कुराया। उसकी काली आँखों में एक जंगली सी चमक आ गई।

“तेरी चूत अभी तक चखी ही नहीं न बेगम…” उसने धीरे से कहा। “इसलिए उस रंडी को चोदा। अभ्यास के लिए। अब असली माल सामने है।”

“अभ्यास?!” मैंने फिर थप्पड़ मारा। इस बार दूसरी तरफ। “मेरी चूत को अभ्यास समझता है?! बता… उसकी चूत में क्या था जो मेरी में नहीं? इतनी ढीली थी क्या मेरी चूत कि तूने उसे चुना?!”

उसने अचानक मेरा हाथ पकड़ लिया। पकड़ इतनी मजबूत थी कि मैं हिल भी नहीं पाई। दूसरे हाथ से मेरी साड़ी का पल्लू झटके से खींच लिया। ब्लाउज के बटन एक-एक करके खोल दिए। मेरे भारी स्तन बाहर आ गए। उसने एक निप्पल को अंगूठे और उंगली के बीच दबाया और मरोड़ा।

“आह्ह!” दर्द और मजे की सिसकारी निकल गई।

“तेरी चूत की कमी ये है कि अभी तक मेरे लंड से नहीं फटी,” उसने मेरे कान में गुर्राकर कहा। “उस रंडी की चूत मैंने सिर्फ गर्म करने के लिए फाड़ी थी। असली मजा तो गोरी, चमकदार, प्यासी चूत में है… जैसी तेरी है।”

उसने मुझे दीवार से सटा दिया। एक हाथ से मेरे दोनों हाथ ऊपर पकड़ रखे और दूसरे हाथ से मेरी साड़ी कमर तक ऊपर कर दी। मेरी नंगी चूत हवा में खुल गई। उसने दो उंगलियाँ जोर से अंदर घुसेड़ दीं। ये antarvasana desi biwi ki chudai आप pranaykatha पर पढ़ रहें है।

“आह्ह्ह… हरामी!”

“इतनी गीली…” उसने उंगलियाँ अंदर-बाहर करते हुए कहा। “कल से ही पानी बहा रही है न? मेरा लंड देखने के बाद। बोल, कितनी बार हिलाया रात को?”

“चार… पाँच बार…” मैंने हांफते हुए कहा। “लेकिन प्यास नहीं बुझी… तेरे काले लंड की प्यास!”

उसने उंगलियाँ निकालकर मेरी नाक के पास लाईं। चमक रही थीं। “सूंघ… तेरी ही खुशबू है। अब बता, अभी भी गुस्सा है?”

“हाँ! बहुत गुस्सा है!” मैंने उसके सीने पर मुक्का मारा। “तूने किसी और को चोदा मेरे सामने!”

“तो सजा दे,” उसने चुनौती दी। “जो सजा देना है दे। लेकिन याद रख… सजा के बाद मैं तेरी इस गोरी चूत को इस तरह फाड़ूँगा कि तू हफ्ते भर सीधी नहीं बैठ पाएगी।”

गुस्सा और कामुकता दोनों मिलकर पागल बना रहे थे। मैंने उसके टी-शर्ट को दोनों हाथों से पकड़कर फाड़ दिया। उसकी काली, चौड़ा सीना, कड़े पेट की मांसपेशियाँ सामने आ गईं। फिर उसका पजामा नीचे खींचा।

लंड बाहर निकला।

कल जो देखा था उससे भी बड़ा लग रहा था इतने पास से। लंबा… कम से कम नौ-दस इंच। मोटाई ऐसी कि मेरी कलाई जितनी। काला, चमकदार, नसें फूली हुईं। सिर का भाग बड़े अखरोट जितना मोटा और तना हुआ। नोक से पहले से ही लसलसाई चमक निकल रही थी।

मेरी चूत ने पानी की एक तेज धारा छोड़ दी जो जांघों से होते हुए फर्श पर गिरने लगी।

“इतना मोटा…” मेरी आवाज काँप गई। “ये… ये अंदर कैसे जाएगा?”

“ज integratorsएगा,” उसने गर्व से कहा। “फाड़कर जाएगा। तैयार है?”

मैंने जवाब में उसके लंड को दोनों हाथों से पकड़ लिया। इतना मोटा था कि उंगलियाँ पूरी नहीं मिल रही थीं। मैंने झुककर जीभ निकाली और उसके काले सिर को चाटा। नमकीन और तेज स्वाद। फिर मुंह खोलकर अंदर लेने की कोशिश की। मुश्किल से आधा सिर ही गया। जबड़ा दुखने लगा।

उसने मेरे बाल पकड़कर जोर से दबाया। “पूरा ले… रंडी। कल जिस तरह उस मजदूरन ने लिया था, उससे भी गहरा।”

आंसू आ गए लेकिन मैंने और गहरा लिया। गले तक। उल्टी जैसी लगने लगी तो निकाला। लार से लथपथ लंड चमक रहा था।

“अब बिस्तर पर,” उसने आदेश दिया। ये antarvasana married woman sex story आप pranaykatha पर पढ़ रहें है।

कमरे में एक गंदा गद्दा पड़ा था। उसने मुझे उस पर पटक दिया। साड़ी पूरी तरह फाड़कर अलग फेंक दी। मैं बिल्कुल नंगी थी। उसने मेरे पैर फैलाए और उनके बीच बैठ गया। उसके लंड का काला सिर मेरी गोरी चूत के गुलाबी मुंह पर टिका।

“देख…” उसने कहा। “काली और गोरी। कितना फर्क है। अब फर्क मिटाता हूँ।”

उसने कमर का जोर लगाया।

“आअअह्ह्ह्ह!”

सिर्फ सिर अंदर गया था और लगा जैसे चूत फट गई। दर्द इतना तेज था कि मेरी आँखों से आंसू बहने लगे। नाखून उसके काले कंधों में गड़ गए।

“निकल… बहुत मोटा है… फट जाएगी!” मैं चीखी।

“फटेगी तो फटने दे,” उसने दांत पीसकर कहा और एक और जोरदार धक्का मारा।

आधा लंड अंदर घुस गया। मेरी चूत की दीवारें चीख रही थीं। ऐसा लग रहा था जैसे कोई लोहे का गरमागरम रॉड घुसेड़ रहा हो। दर्द के साथ एक अजीब मजा भी पैदा हो रहा था।

“आह्ह्ह… हबशी… धीरे… मर गई!”

“धीरे नहीं होगा बेगम,” उसने कहा और आखिरी धक्का मारा।

पूरा लंड जड़ तक अंदर चला गया। उसके अंडकोष मेरी गांड से टकराए। मेरी चूत पूरी तरह फैलकर उसके काले लंड को निगल चुकी थी। दर्द इतना था कि सांस रुक गई। लेकिन अंदर तक भरा हुआ अहसास… पागल कर रहा था।

वह रुका नहीं।

निकाला और फिर जोर से पूरी तरह अंदर पेला। फिर निकाला। फिर पेला। हर धक्का पहले से जोरदार। मेरी चूत की फटने की आवाज आने लगी—चपचप, थपथप। पानी और खून का हल्का मिश्रण उसके लंड पर लगकर चमक रहा था।

“देख… तेरी गोरी चूत कैसे काला लंड खा रही है,” वह गुर्राया। “इतनी टight थी… अब ढीली कर रहा हूँ!”

“आह्ह्ह… फाड़ दे… पूरी फाड़ दे हरामी!” मैंने पैर उसकी कमर पर लपेट लिए। “जोर से चोद… उस रंडी से भी जोर से!”

उसने मेरी दोनों टाँगें पकड़कर कंधों तक मोड़ दीं। इस पोजीशन में लंड और गहरा जा रहा था। हर धक्के के साथ मेरी गर्दन पीछे हट जाती और मुंह से बेकाबू आवाजें निकलतीं। ये antarvasana hindi sex story आप pranaykatha पर पढ़ रहें है।

“तेरी चूत कितनी प्यारी है बेगम… गरमागरम… गीली… और इतनी टight कि मेरा लंड दब रहा है!” वह हांफते हुए बोल रहा था। “उस रंडी की चूत तो जैसे मरी हुई थी। तेरी जिंदा है… साँस ले रही है मेरे लंड पर!”

वह और तेज हो गया। कमरा धक्कों की आवाज से गूँज रहा था। मेरी स्तन उसकी हर हरकत के साथ उछल रहे थे। उसने झुककर एक निप्पल मुंह में ले लिया और जोर से चूसने लगा। दांत लगाकर काटा भी।

“आह्ह्ह… काट… काट हबशी!”

मैं पागल हो चुकी थी। दर्द अब मजे में बदल चुका था। मेरी चूत खुद उसके लंड को निगल-निगल रही थी। पानी इतना बह रहा था कि गद्दे पर धब्बा फैल गया था।

उसने अचानक लंड बाहर निकाला। मेरी चूत खुली की खुली रह गई—लाल, सूजी हुई, फड़कती हुई, अंदर तक दिख रही थी।

“नहीं… अंदर डाल!” मैंने लंड पकड़ने की कोशिश की।

उसने मुझे पलट दिया। घुटनों के बल कर दिया। गांड ऊँची की। फिर पीछे से एक ही झटके में पूरा लंड अंदर पेला।

“आअअह्ह्ह्ह!”

इस कोण से और भी गहरा लग रहा था। उसने मेरे बाल पकड़कर सिर पीछे खींचा और जोर-जोर से हिसकाने लगा। हर धक्के के साथ मेरी गांड उसकी मजबूत जांघों से टकराती। आवाज गूँजती—थप थप थप थप।

“बोल… किसकी चूत बेहतर है?” उसने बाल खींचते हुए पूछा।
“मेरी… मेरी चूत बेहतर है… आह्ह्ह!”
“बोल जोर से!”
“मेरी गोरी चूत बेहतर है हबशी! फाड़ दे इसे! अपनी काली लंड से फाड़ दे!”

वह जानवर की तरह चोद रहा था। पसीने से दोनों के शरीर चमक रहे थे। उसकी काली त्वचा और मेरी गोरी त्वचा का मेल पागल कर रहा था। मैंने पीछे हाथ बढ़ाकर अपनी गांड के दोनों लोथें फैलाईं ताकि वह और गहरा जा सके।

“इतनी रंडी निकली गोरी बेगम,” वह हँसते हुए बोला। “कल तक शर्म से मर रही थी… आज गांड फैलाकर लंड माँग रही है!”

“माँग रही हूँ… और जोर से माँग रही हूँ!” मैंने चीखकर कहा। “मेरी चूत फाड़ दे पूरी… उस रंडी से भी ज्यादा फाड़!”

उसने दोनों हाथों से मेरी कमर पकड़ी और इतनी तेज गति से धक्के मारने लगा कि मेरी आँखों के आगे अंधेरा छा गया। चूत जल रही थी, फट रही थी, लेकिन मजा इतना था कि मैं रुकने को तैयार नहीं थी।

अचानक मेरा शरीर अकड़ गया। पैर काँपने लगे। चूत ने उसके लंड को जोर से जकड़ लिया।

“आअअह्ह्ह… निकल रही हूँ… हबशी… तेरे काले लंड पर निकल रही हूँ!”

पानी की तेज धारा छोटी। मेरे शरीर में कंपकपी दौड़ गई। वह रुका नहीं। मेरी ऑर्गेज्म के दौरान और जोर से चोदता रहा। मेरी चूत की दीवारें धड़क-धड़क कर उसके लंड को दूध निकालने की कोशिश कर रही थीं।

“अब मेरी बारी,” उसने गुर्राया।

कुछ और जोरदार धक्कों के बाद वह गहराई तक धँस गया और रुक गया। मैंने महसूस किया—गर्म, गाढ़ा वीर्य की धार मेरी चूत के सबसे अंदर तक छूट रही है। एक… दो… तीन… चार… इतना ज्यादा कि बाहर निकलकर जांघों पर बहने लगा।

वह लंड अंदर रखे हुए ही मुझ पर गिर पड़ा। दोनों हांफ रहे थे। उसका काला शरीर मेरे गोरे शरीर पर भारी पड़ रहा था। लंड अभी भी अंदर धड़क रहा था।

थोड़ी देर बाद उसने सिर उठाया और मेरे कान में बोला, “अब बता… गुस्सा निकला?”

मैं मुस्कुराई। चूत अभी भी उसके आधे कड़े लंड को पकड़े हुए थी।

“निकल तो गया… लेकिन प्यास नहीं बुझी,” मैंने हांफते हुए कहा। “थोड़ी देर बाद फिर से फाड़ना… इस बार और जोर से।”

उसने मेरी गांड पर जोर का थप्पड़ मारा। ये antarvasana chudai kahani आप pranaykatha पर पढ़ रहें है।

“पूरी दोपहर पड़ी है बेगम। आज तेरी गोरी चूत को काला राक्षस पूरा निगल जाएगा।”

और फिर उसने फिर से कमर उठानी शुरू कर दी…

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