चाची ने दी चुदाई की ट्रेनिंग। चाची की चुदाई की कहानी।

plot : Family sex story – chachi ki chudai: शादी से पहले चाची ने आयुष को पूरी चुदाई की ट्रेनिंग दी। Full hot chachi ne chudai sikhai explicit story.

शादी की तारीख तय होते ही आयुष के अंदर एक अजीब सी बेचैनी घर कर गई थी। सत्ताईस साल का हो चुका था। नौकरी अच्छी थी, घर-परिवार सम्मानजनक था, लेकिन एक बात छुपी हुई थी जिसे वह किसी से कह नहीं पाया था। शरीर के मामले में वह बिल्कुल कच्चा था। दोस्त जब अपने किस्से सुनाते तो वह बस हँसकर टाल देता। सच यह था कि उसने आज तक किसी लड़की को नंगा नहीं देखा था, छूने की तो बात ही दूर। ये antarvasana family sex story आप pranaykatha पर पढ़ रहें है।

माँ ने एक सुबह कहा, “बेटा, चाची के घर चले जाओ। शादी के गहने और कुछ साड़ियों का काम बाकी है। मीनाक्षी तुम्हें अच्छी तरह समझा देंगी।”

मीनाक्षी चाची। पिता के छोटे भाई की पत्नी। उम्र बयालीस की। लेकिन हँसी-मजाक और बातों की तेज़ी में घर की कोई भी औरत उनका मुकाबला नहीं कर सकती थी। जब भी परिवार में कोई कार्यक्रम होता, चाची की मौजूदगी से माहौल हल्का हो जाता। आयुष बचपन से उन्हें देखता आ रहा था। कभी उनकी हँसी पर ध्यान जाता, कभी उनकी बातों के छुपे अर्थ पर। लेकिन आज तक उनके करीब इतनी देर अकेले में बिताने का मौका नहीं मिला था।

जब आयुष उनके घर पहुँचा, चाची आँगन में एक पुरानी कुर्सी पर बैठी हल्दी के पीले दाग हाथों से रगड़ रही थीं। उन्होंने सिर उठाया और खिलखिलाकर हँस पड़ीं।

“अरे देखो तो शहजादे आ गए! शादी का घबराया हुआ चेहरा लेकर। अंदर आओ, पहले पानी पियो, फिर बातें करेंगे।”

आयुष मुस्कुराया। अंदर का घर पुराना लेकिन साफ-सुथरा था। दीवारों पर पुरानी तस्वीरें, एक कोने में बड़ी सी लकड़ी की अलमारी। चाची ने खुद पानी का गिलास दिया और सामने बैठ गईं।

“माँ ने गहने और साड़ी का कहा था,” आयुष ने बात शुरू की।

“हाँ-हाँ, सब हो जाएगा। लेकिन पहले तुम्हारा हाल तो बताओ।” चाची ने आँखें तरेरते हुए कहा। “रात को नींद आ रही है या दुल्हन की फिक्र में कब से जाग रहे हो?”

आयुष ने सिर खुजलाया। “थोड़ा… घबराहट हो रही है चाची।” ये antarvasana chachi bhatija sex story आप pranaykatha पर पढ़ रहें है।

“घबराहट?” चाची ने जैसे कोई बड़ी खबर सुनी हो। “अरे बाबा, शादी है कोई बोर्ड परीक्षा नहीं। आओ, आज तुम्हारी चाची तुम्हारा बोरिया-बिस्तर संभालेगी। खाना खाओगे कि नहीं?”

दोपहर का खाना दोनों ने साथ बैठकर खाया। चाची लगातार बातें करती रहीं—पुरानी यादें, परिवार के किस्से, शादी के दिनों में कैसे लड़के घबराते थे। आयुष सुनता रहा। धीरे-धीरे उसकी घबराहट थोड़ी कम हुई। शाम तक गहने और साड़ियों का काम भी निपट गया। चाची ने कहा, “अब अँधेरा हो गया है। आज यहीं रुको। सुबह चले जाना।”

रात का खाना भी साथ हुआ। खाने के बाद दोनों आँगन में कुर्सियाँ डालकर बैठ गए। आसमान में तारे साफ दिख रहे थे। चाची ने अचानक पूछ लिया—

“आयुष, एक बात बताओ। कभी किसी लड़की के करीब गए हो?”

आयुष का चेहरा तुरंत बदल गया। उसने नजरें नीचे कर लीं। “नहीं चाची।”

चाची कुछ पल चुप रही। फिर धीरे से बोलीं, “सच-सच बताना। कभी हाथ तक पकड़ा है किसी का? चूमा है? या सिर्फ मन ही मन सपनों में सब कुछ होता है?”

आयुष की आवाज बहुत धीमी हो गई। “कुछ भी नहीं किया चाची। इसलिए… डर लग रहा है। शादी की रात अगर मैं… कुछ सही से न कर पाया तो…”

चाची की आँखों में पहले हैरानी थी, फिर धीरे-धीरे एक समझदार और शरारती मिश्रण फैल गया। उन्होंने कुर्सी पास खिसकाई।

“तो बात यह निकली। हमारे शहजादे बिल्कुल कच्चे हैं।” उन्होंने हल्के से मुस्कुराया। “कोई बात नहीं। आज रात यहीं रहो। चाची तुम्हें वो सब सिखा देगी जो किसी किताब में नहीं लिखा होता।”

आयुष की साँस अटक गई। “चाची… आप… क्या कह रही हैं?”

“जो तुम सुन रहे हो।” चाची ने उसका हाथ पकड़ लिया। उनकी हथेली गरम थी। “डरने की कोई बात नहीं। मैं तुम्हारी चाची हूँ। तुम्हें तैयार करके ही दुल्हन के पास भेजूंगी। वरना वो बेचारी क्या सोचेगी कि उसका पति कुछ करना ही नहीं जानता?”

आयुष कुछ बोल नहीं पाया। दिल जोर-जोर से धड़क रहा था। चाची ने उसका हाथ छोड़ते हुए कहा, “अंदर चलो। बातें कम, काम ज्यादा।”

कमरे में हल्की पीली रोशनी जल रही थी। चाची ने दरवाजा बंद किया। आयुष कुर्सी पर बैठ गया। उसके हाथ पसीने से गीले थे। चाची उसके सामने खड़ी हो गईं। साड़ी का पल्लू उन्होंने जानबूझकर ढीला छोड़ रखा था।

“सबसे पहले,” उन्होंने कहा, “आँखें मिलाकर बात करना सीखो। नजरें मत चुराओ। औरत जब तुम्हें देखती है तो तुम्हारी नजरों में ही सब कुछ पढ़ लेती है।”

आयुष ने सिर उठाया। चाची ने धीरे से अपना पल्लू गिराया। ब्लाउज के दो बटन पहले से खुले हुए थे। गोल स्तनों का ऊपरी हिस्सा साफ दिख रहा था। आयुष की निगाह वहीं अटक गई, फिर उसने जल्दी से नजरें हटा लीं। ये antarvasana chachi ki chudai आप pranaykatha पर पढ़ रहें है।

“देखो,” चाची ने धीरे से कहा। “डर के मारे आँखें मत फोड़ो। धीरे-धीरे देखो। स्तन सिर्फ मांस का टुकड़ा नहीं होता। इसे कैसे छूना है, कैसे सहलाना है, यह भी एक कला है। आओ।”

उन्होंने आयुष का हाथ पकड़कर अपने ब्लाउज पर रखा। “पहले ऊपर से। हल्के से। जैसे कोई नाजुक चीज छू रहे हो।”

आयुष की उंगलियाँ काँप रही थीं। उसने ब्लाउज के ऊपर से स्तनों की गोलाई महसूस की। नरम, गरम। चाची ने आँखें बंद कर लीं। “हाँ… ऐसे। अब थोड़ा दबाव दो। निप्पल के आसपास घुमाओ। वहाँ बहुत संवेदनशीलता होती है।”

आयुष ने वैसा ही किया। चाची की साँस थोड़ी तेज हुई। “बहुत अच्छा। अब ब्लाउज खोलो।”

आयुष के हाथ काँपते हुए बटन खोलने लगे। एक-एक करके। ब्लाउज धीरे से सरका। अंदर कोई ब्रा नहीं थी। दो बड़े, गोल स्तन सामने आ गए। हल्के भूरे रंग की नोकें पहले से ही तनी हुई थीं। चाची ने उसका हाथ फिर से पकड़ा और सीधे निप्पल पर रख दिया।

“इसे दो उंगलियों के बीच लो। हल्के से मरोड़ो। फिर छोड़ दो। फिर से मरोड़ो। दर्द नहीं देना, बस संकेत देना है कि तुम वहाँ हो।”

आयुष ने वैसा ही किया। चाची की हल्की कराह निकली। “अब मुँह लगाओ। जीभ से गोल-गोल चाटो। फिर पूरे निप्पल को मुँह में लेकर हल्के से चूसो। दाँत बिल्कुल मत लगाना पहले।”

आयुष झुका। पहली बार किसी औरत के स्तन का स्वाद उसके मुँह में गया। गरम, थोड़ा नमकीन, और बहुत नरम। उसने जीभ घुमाई। चाची का एक हाथ उसके सर पर आ गया। “हाँ… ऐसे… थोड़ा और जोर से… अब दूसरी तरफ भी उसी तरह…”

वह दोनों स्तनों के बीच अपना चेहरा घुमाता रहा। चाची कभी-कभी उसके बाल सहला देतीं और धीमी आवाज में निर्देश देतीं। “जीभ को सपाट रखो… अब निप्पल को दाँतों से बहुत हल्के से दबाओ… हाँ… बहुत अच्छा…”

कुछ देर बाद चाची ने उसे बिस्तर पर लिटा दिया। खुद उसके ऊपर झुकीं। “अब मेरी बारी। तुम सिर्फ महसूस करो। औरत कैसे छूती है, यह भी जानना जरूरी है।”

उन्होंने आयुष की शर्ट के बटन खोले। छाती पर हाथ फेरा। नाखूनों से हल्के से खुजलाया। फिर नीचे उतरती गईं। पैंट की डोरी खोली। लंड बाहर निकाला। आयुष शर्म से पूरा लाल हो चुका था। चाची मुस्कुराईं।

“अरे बाबा, यह तो बढ़िया हथियार है। अब इसे कैसे तैयार रखना है, कैसे नियंत्रण में रखना है, वह भी सिखाती हूँ।”

उन्होंने लंड को धीरे से मुँह में लिया। जीभ से नीचे तक लंबी चाट लगाई। फिर सिर को धीरे-धीरे अंदर-बाहर करने लगीं। आयुष की कमर अपने आप उठने लगी। चाची ने तुरंत रोक दिया। ये antarvasana aunt nephew sex story आप pranaykatha पर पढ़ रहें है।

“जल्दी मत करो। साँस पर काबू रखो। नहीं तो दुल्हन के पहले ही खेल खत्म हो जाएगा। गिनती गिनो मन ही मन। ध्यान बाँटो।”

वे उठीं। साड़ी और पेटीकोट एक साथ खोलकर एक तरफ रख दिए। अब वे पूरी तरह नंगी थीं। आयुष की निगाह उनकी चूत पर ठहर गई। हल्के बाल, गहरी सेंध, और पहले से ही हल्की चमक।

चाची बिस्तर पर लेट गईं। दोनों टाँगें थोड़ी फैलाईं। “आओ यहाँ। सबसे महत्वपूर्ण पाठ। चूत को कैसे खुश करें। बहुत से मर्द यहीं चूक जाते हैं।”

आयुष उनके पास घुटनों के बल बैठा। चाची ने उसका हाथ पकड़कर अपनी चूत पर रखा। “पहले दो उंगलियों से ऊपर-नीचे सहलाओ। जल्दी मत। क्लिट को ढूँढो। यहाँ… हाँ, इसी छोटी सी उभरी हुई जगह को। इसे गोल-गोल, बहुत हल्के से रगड़ो।”

आयुष ने वैसा ही किया। चाची की साँसें बदलने लगीं। “अब एक उंगली अंदर डालो। अंदर की दीवार को ऊपर की तरफ दबाओ। हाँ… वहीं… धीरे-धीरे अंदर-बाहर करो…”

उंगली अंदर गई। गरम, गीली, और सिकुड़ने वाली दीवारें। चाची ने आँखें बंद कर लीं। “दो उंगली करो। अब थोड़ा तेज… अब मुँह लगाओ। जीभ और उंगली साथ-साथ।”

आयुष झुका। पहली बार चूत का स्वाद। थोड़ा खट्टा, थोड़ा मीठा, और बहुत गरम। उसने जीभ क्लिट पर लगाई और उंगलियाँ अंदर चलाने लगा। चाची की कमर धीरे-धीरे उठने लगी। “हाँ… ऐसे… जीभ को सपाट करके रखो… अब थोड़ा और तेज… आह… आयुष… बहुत अच्छा कर रहे हो…”

वह चाटता रहा। चाची का एक हाथ उसके सर को और नीचे दबा रहा था। “अब उंगली निकालो। सिर्फ जीभ। अंदर तक डालने की कोशिश करो… हाँ… ऐसे… बहुत बढ़िया…”

कुछ देर बाद चाची का शरीर अकड़ने लगा। उन्होंने आयुष के बाल कसकर पकड़ लिए। “रुको मत… वहीं रहो… आह्ह्ह…”

उनका शरीर काँपा। एक लंबी साँस निकली। आयुष ने महसूस किया कि उसकी जीभ और ठोड़ी पर अचानक और नमी आ गई है। चाची कुछ पल हांफती रहीं। फिर मुस्कुराईं।

“बहुत अच्छा। पहला पाठ पास। अब असली पाठ। ऊपर आओ।”

आयुष उनके ऊपर लेटा। चाची ने खुद उसका लंड पकड़कर अपनी चूत के मुहाने पर रखा। “धीरे-धीरे अंदर डालो। एकदम जोर से मत धकेलो। पहले सिर्फ अगाड़ा हिस्सा… फिर धीरे-धीरे पूरा…”

लंड अंदर गया। आयुष की आँखें बंद हो गईं। इतनी गरम, इतनी टाइट भावना उसने कभी महसूस नहीं की थी। चाची ने उसके कूल्हे पकड़ लिए। “अब हिलो। धीमे। लंबी स्ट्रोक। पूरा बाहर निकालो, फिर पूरा अंदर तक ले जाओ। हाँ… ऐसे… साँस मत रोको…”

आयुष हिलने लगा। चाची उसके कान में धीमे-धीमे निर्देश देती रहीं। “अब थोड़ा तेज… स्तन पकड़ो एक हाथ से… मुँह में लो… हाँ… अब मेरी टाँगें अपने कंधों पर रखो… और गहराई तक जाओ… देखो कैसे पूरा अंदर जा रहा है…”

वे पोजीशन बदलते रहे। कभी चाची ऊपर बैठ गईं और खुद हिलने लगीं। “देखो, औरत जब ऊपर हो तो कैसे मूवमेंट करती है। तुम सिर्फ स्तन चूसो और कमर के साथ ताल मिलाओ।” ये antarvasana desi chachi sex story आप pranaykatha पर पढ़ रहें है।

फिर उन्होंने आयुष को पीछे से कराया। “कमर पकड़ो दोनों हाथों से। अपनी रफ्तार खुद तय करो। लेकिन साँस पर ध्यान रखना। जल्दी आने वाले हो तो रुक जाओ, गहरी साँस लो, फिर शुरू करो।”

आयुष अब पूरी तरह निर्देशों में खो चुका था। चाची की आवाज, उनका शरीर, उनकी गर्माहट—सब कुछ मिलकर एक अजीब नशा बन चुका था। चाची ने अचानक कहा, “अब रुक जाओ। निकालो।”

लंड बाहर निकला। चाची मुस्कुराईं। “बहुत जल्दी आने वाले थे। नियंत्रण बहुत जरूरी है। अब वापस मुँह में लो। अपनी ही चमक चाटो। स्वाद पहचानो।”

आयुष ने वैसा ही किया। चाची ने फिर उसे अंदर लिया। इस बार उन्होंने खुद रफ्तार बढ़ाई। “अब छोड़ो। अंदर ही छोड़ो…”

आयुष का शरीर अकड़ गया। पहली बार वह किसी के अंदर झड़ा। लंबी, काँपती हुई लहरें। चाची ने उसे अपने सीने से लगा लिया। दोनों की साँसें उखड़ी हुई थीं। कुछ देर तक सिर्फ साँस की आवाज कमरे में थी।

चाची ने उसके बाल सहलाते हुए कहा, “पाठ एक खत्म। लेकिन रात अभी बाकी है। गांड कैसे छूते हैं, कैसे तैयार करते हैं, कैसे धीरे-धीरे अंदर जाते हैं—यह भी सीखना बाकी है। और सुबह तक तुम्हें कम से कम दो बार और तैयार होना है।”

आयुष ने उनकी आँखों में देखा। थकान और एक नई तरह की शांति दोनों थी। “चाची… आपने…”

“शहजादे,” चाची मुस्कुराईं, “तुम्हारी दुल्हन को शिकायत का एक भी मौका नहीं मिलेगा। चाची गारंटी लेती है। अब थोड़ा आराम करो। आधा घंटा बाद फिर से शुरू करेंगे।”

उस रात उन्होंने दो बार और किया। हर बार चाची नया निर्देश देतीं—कभी खड़े होकर दीवार के सहारे, कभी कुर्सी पर बैठकर, कभी आयुष के मुँह पर बैठकर अपना स्वाद उसे फिर से चखातीं। सुबह के चार बज चुके थे जब दोनों थककर सो गए।

सुबह जब आयुष उठा तो चाची रसोई से चाय लेकर आईं। उन्होंने बिस्तर पर बैठते हुए कहा, “शादी के बाद अगर कोई नया सवाल हो, या दुल्हन कुछ नया माँगे, तो वापस आ जाना। ट्रेनिंग जारी रखेंगे।”

आयुष ने चाय का घूँट लिया। पहली बार उसकी घबराहट पूरी तरह गायब हो चुकी थी। वह मुस्कुराया। ये antarvasana chachi bhatija ki chudai आप pranaykatha पर पढ़ रहें है।

“धन्यवाद चाची।”

चाची खिलखिलाकर हँसीं। “अरे बाबा, धन्यवाद क्या। तुमने चाची का भी तो मन रख लिया।”

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