जवान बहन की चढ़ती जवानी और चूत चुदाई।भाई बहन सेक्स स्टोरी

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घर के उस कोने वाले कमरे में जब रात का सन्नाटा गहराता था, तो दीवारें भी जैसे साँस रोक लेतीं। समीर को यह बात अच्छी तरह याद थी। तीस साल का आदमी, शादीशुदा, जिम्मेदार। पत्नी मेघा पिछले बीस दिनों से अपनी बीमार माँ के पास नासिक गई हुई थी। घर में सिर्फ वह और उसकी बहन तन्वी रह गए थे। तन्वी तेईस की हुई थी। सरकारी नौकरी की तैयारी में जुटी हुई। ये antarvasana family sex story आप प्रणयकथा pranaykatha पर पढ़ रहें है। सुबह छह बजे उठना, किताबों के ढेर में दबना, लाइब्रेरी से रात के दस बजे लौटना—यही उसका रोज़ का चक्र था।

समीर ने तन्वी को हमेशा छोटी बहन की तरह ही देखा था। बचपन में उसके बालों में तेल लगाता था, स्कूल की शिकायत सुनता था। लेकिन पिछले दो सालों में तन्वी का शरीर जैसे अचानक जाग उठा था। पहले पतली-दुबली लड़की थी, अब उसकी जीन्स में जांघें भरी-भरी लगने लगी थीं। टॉप के अंदर स्तनों का उभार छुप नहीं पाता था। कभी-कभी जब वह पढ़ाई करते हुए बाल खुले छोड़ देती, तो समीर को अपनी नजरें जल्दी से हटा लेनी पड़तीं। वह खुद को डांटता—ये तन्वी है, तेरी बहन।

मेघा के जाने के बाद घर की खामोशी और बढ़ गई थी। एक मंगलवार की रात समीर बालकनी में खड़ा सिगरेट के आखिरी कश ले रहा था। नीचे गली में एक बाइक की आवाज आई। हेडलाइट की रोशनी में उसने देखा—तन्वी बाइक से उतर रही है। लड़का हेलमेट उतार रहा था। दोनों की बात हुई। फिर तन्वी ने अचानक आगे बढ़कर उस लड़के के होठों पर अपने होठ रख दिए। कितनी देर तक, समीर गिन नहीं पाया। बस इतना याद रहा कि जब तन्वी ने अपना चेहरा अलग किया, तो उसकी उँगलियाँ लड़के की शर्ट की कॉलर पर अभी भी टिकी हुई थीं।

समीर का सिगरेट का हाथ हवा में थम गया। सीने में कोई अजीब सा वजन पड़ गया। गुस्सा था, लेकिन उसके नीचे कोई और भावना भी सरक रही थी जिसे वह नाम नहीं देना चाहता था।

तन्वी जब अंदर आई तो चेहरा बिल्कुल सामान्य था। “भैया, खाना गरम करूँ?”

समीर ने सिर्फ सिर हिलाया। उस रात वह देर तक छत पर बैठा रहा। दिमाग में वही दृश्य बार-बार घूम रहा था—बहन के होठ, किसी अजनबी लड़के के होठों पर।

अगले दो दिन वह चुपचाप देखता रहा। तन्वी के फोन पर नजर रखना अब उसकी आदत बन गई थी। गुरुवार की दोपहर जब तन्वी नहाने गई, तो फोन सोफे पर पड़ा था। व्हाट्सएप खुला हुआ। तीन अलग-अलग चैट। तीन अलग नाम। बातें पढ़ते हुए समीर के हाथ काँपने लगे— ये antarvasana bhai behen sex story आप pranaykatha पर पढ़ रहें है।

“कल तुम्हारी उँगलियाँ कितनी गहराई तक गई थीं…” “मेरे दोस्त को भी शामिल कर लें क्या? तुम्हें तो मजा आएगा…” “गांड वाली फोटो भेज, वरना बात खत्म।”

समीर ने फोन वापस रख दिया। सीने में गुस्सा था, लेकिन उसके साथ एक गहरी जलन भी थी। तन्वी… उसकी छोटी तन्वी… इतनी आसानी से अपने शरीर की बातें कर रही थी तीन-तीन मर्दों से।

शुक्रवार की दोपहर याद रहेगी उसे जिंदगी भर। तन्वी अपने कमरे में थी। दरवाजा पूरी तरह बंद नहीं था। समीर पानी की बोतल लेने गया था। पास से गुजरते हुए हल्की सी आवाज सुनाई दी—जैसे कोई साँस रोककर कराह रहा हो। उसने रुककर झाँका।

तन्वी बिस्तर पर पीठ के बल लेटी थी। जीन्स उसके घुटनों तक खिसकी हुई। एक हाथ उसकी चूत के अंदर था। उंगलियाँ तेज गति से अंदर-बाहर हो रही थीं। दूसरे हाथ से उसने अपना टॉप ऊपर कर रखा था और स्तन की नोक को मसल रही थी। आँखें बंद थीं। होठों के बीच से टूटे-फूटे शब्द निकल रहे थे—

“और तेज… हां… वहाँ दबा… चुदो ना…”

समीर वहीं खड़ा रह गया। साँस रुक गई थी। तन्वी की चूत की चमक, उसकी उंगलियों पर लगी चमकदार नमी, उसके स्तनों की हलचल—सब कुछ उसकी आँखों में समाता जा रहा था। कुछ पल बाद तन्वी का शरीर अकड़ गया। उसकी कमर बिस्तर से उठ गई और एक लंबी, दबी हुई आवाज निकली। पानी की बूंदें उसकी उंगलियों से चादर पर गिरती दिखीं। ये antarvasana family sex story आप प्रणयकथा pranaykatha पर पढ़ रहें है।

समीर ने धीरे से कदम पीछे खींचे। अपने कमरे में जाकर दरवाजा बंद कर लिया। हाथ काँप रहे थे। लंड इतना तन चुका था कि पैंट में दर्द हो रहा था। उसने खुद को रोका। “ये तन्वी है… तेरी बहन है…” लेकिन शरीर नहीं मान रहा था।

शाम को तन्वी हॉल में टीवी के सामने बैठी थी। पुराने गाने चल रहे थे। इमरान की आवाज में कोई रोमांटिक गाना। वह छोटे टॉप और शॉर्ट्स में थी। टॉप की पतली पट्टी उसके कंधे से बार-बार सरक रही थी। समीर ने धीरे से जाकर उसके पास बैठ गए। कुछ देर दोनों गाना सुनते रहे। फिर समीर ने धीमी आवाज में कहा—

“तन्वी।”

“हाँ भैया?”

“लाइब्रेरी से जो लड़का छोड़ने आता है… वह सिर्फ दोस्त है?”

तन्वी का चेहरा एक पल के लिए कड़ा हो गया। फिर उसने मुस्कुराने की कोशिश की। “हाँ भैया। पढ़ाई में हेल्प करता है।”

“किस भी करता है क्या?”

अब वह मुस्कुराई नहीं। समीर ने आगे कहा, “और फोन पर तीन अलग-अलग लड़कों से अपनी चूत और गांड की बातें? आज दोपहर को कमरे में उंगलियाँ डालकर जो कर रही थी… वह भी पढ़ाई का हिस्सा है?”

तन्वी की आँखें फैल गईं। उसका चेहरा पहले सफेद पड़ा, फिर गहरा लाल हो गया। वह उठने लगी। समीर ने उसका कलाई पकड़ ली। ये antarvasana behen ki chudai आप pranaykatha पर पढ़ रहें है।

“बैठ।”

“भैया… आपने… आपने देखा…”

“हाँ। सब देखा। सब पढ़ा।” समीर की आवाज में गुस्सा था, लेकिन उसके नीचे कोई और परत भी थी। “नेहा नहीं है घर में। कोई नहीं है। तुम इतनी आसानी से अपना शरीर बाँट रही हो और मुझे लगता है कि मेरी छोटी बहन अभी भी किताबों में खोई हुई है?”

तन्वी की आँखों में आँसू आ गए। “भैया… ये गलत बात है… आप छोड़ो…”

समीर ने उसका हाथ पकड़कर अपनी पैंट पर रख दिया। अंदर लंड पूरी तरह सख्त हो चुका था। तन्वी का हाथ काँपा, लेकिन उसने झटका नहीं। समीर ने धीरे से कहा—

“तुम्हारी चूत को भाई-बहन का फर्क नहीं पता। अभी भी गीली है ना?”

उसने तन्वी का हाथ उसकी शॉर्ट्स के अंदर सरका दिया। उंगलियाँ सीधे उसकी चूत पर जा लगीं। नमी साफ महसूस हुई। तन्वी की साँस अटक गई। “भैया… कृपया… मत करो… हम…”

“खुद हिला।” समीर ने उसकी उंगलियों को उसकी खुद की चूत के अंदर धकेल दिया। “जैसे दोपहर को हिला रही थी। ठीक वैसे।”

तन्वी की आँखों से आँसू बहने लगे, लेकिन उसकी उंगलियाँ हिलनी शुरू हो गईं। समीर ने उसका टॉप धीरे से ऊपर उठाया। ब्रा के हुक खोले। गोल, तनाव भरे स्तन बाहर आ गए। हल्के गुलाबी रंग की नोकें। उसने एक नोक को मुँह में लिया और जीभ से धीरे-धीरे घुमाया। दाँतों से हल्के से दबाया। तन्वी की कराह दबी हुई निकली।

“आह… भैया… छोड़ो… ये… हम भाई-बहन…”

समीर ने जवाब नहीं दिया। उसने उसके शॉर्ट्स और पैंटी एक साथ नीचे खींच दिए। तन्वी की चूत अब पूरी तरह खुली थी—चुस्त, कम बालों वाली, और चमक से भरी हुई। उसने उसे सोफे पर लिटाया। दोनों टाँगें फैलाईं। फिर मुँह लगाया।

मौखिक लंबा था। बहुत लंबा।

पहले उसने सिर्फ अपने होठों से चूत के बाहरी होंठों को धीरे-धीरे चूसा। फिर जीभ की नोक से बीच की सेंध में लंबी, धीमी चाट लगाई—ऊपर से नीचे तक। क्लिट पर पहुँचकर जीभ को गोल-गोल घुमाने लगा। तन्वी की कमर अपने आप उठने लगी। उसके हाथ समीर के बालों में उलझ गए।

“भैया… वहाँ… हाँ… धीरे… आह…”

समीर ने दोनों हाथों से उसकी गांड के गोलाकार हिस्सों को दबाया और जीभ को और गहराई तक धकेल दिया। अंदर की गर्माहट और स्वाद ने उसके दिमाग को सुन्न कर दिया। दो उंगलियाँ अंदर डालीं। उंगलियों को ऊपर की तरफ मोड़कर उस जगह पर दबाव डाला जहाँ से लड़की की साँसें तेज हो जाती हैं। जीभ क्लिट पर लगातार काम करती रही—कभी तेज, कभी धीमी, कभी सिर्फ दबाकर रखी हुई। ये antarvasana jawan behen ki chudai आप pranaykatha पर पढ़ रहें है।

तन्वी की टाँगें काँप रही थीं। “भैया… मैं… मैं आ… आ रही हूँ… रुको…”

समीर नहीं रुका। उसने उंगलियों की गति बढ़ा दी और जीभ को और सपाट करके क्लिट पर रगड़ने लगा। तन्वी का शरीर अचानक तन गया। उसकी कमर सोफे से उठ गई। एक लंबी, काँपती हुई आवाज निकली और उसके अंदर से पानी की एक तेज धार समीर के मुँह और ठोड़ी पर लग गई। वह हांफ रही थी। आँखें बंद थीं। पूरे शरीर में सिहरन दौड़ रही थी।

समीर उठा। अपनी पैंट खोली। लंड बाहर आया—सख्त, नसों से भरा हुआ। तन्वी ने आँखें खोलीं। उसके चेहरे पर अभी भी आँसू थे, लेकिन नजर लंड पर अटक गई। समीर ने आगे बढ़कर लंड उसके होठों के पास ले गया।

“मुँह खोल।”

तन्वी ने हिचकिचाते हुए होठ खोले। समीर ने धीरे से अंदर धकेला। तन्वी की जीभ पहले तो झिझक रही थी, लेकिन फिर उसने लंड के निचले हिस्से को चाटना शुरू कर दिया। अनुभव साफ झलक रहा था। उसने सिर को सही कोण पर रखा, होठों को गोल किया और धीरे-धीरे गहराई तक ले जाने लगी। गले तक। आँखों से पानी आने लगा, लेकिन वह रुकी नहीं। थूक की चमक लंड पर फैल गई। कभी-कभी वह लंड को बाहर निकालती, सिर को चाटती, फिर वापस गहराई तक ले जाती।

समीर ने उसके बालों में उंगलियाँ फँसा लीं। “इतना अच्छा… कहाँ सीखा तन्वी?”

तन्वी ने जवाब में सिर्फ और गहरा ले लिया। गले की मांसपेशियाँ लंड के चारों ओर सिकुड़ रही थीं। समीर की साँसें तेज हो गईं। वह और गहराई तक धकेलने लगा। तन्वी की आँखों से आँसू बह रहे थे, लेकिन वह बर्दाश्त कर रही थी। कभी-कभी वह लंड को बाहर निकालकर साँस लेती, फिर वापस ले लेती।

कुछ देर बाद समीर ने लंड निकाला। तन्वी हांफ रही थी। उसने उसे घुटनों के बल कर दिया। पीछे से उसकी चूत की सेंध में लंड का सिरा रखा। धीरे-धीरे दबाव दिया। तन्वी की चूत पहले तो मुश्किल से खुल रही थी, फिर अंदर की नमी ने रास्ता दे दिया। समीर ने धीरे-धीरे पूरा अंदर तक धकेल दिया।

“आह्ह्ह… भैया… बहुत… बहुत बड़ा…”

समीर रुका नहीं। उसने दोनों हाथों से तन्वी की कमर पकड़ी और धक्के लगाने शुरू कर दिए। पहले धीमे, फिर तेज। हर धक्के के साथ तन्वी की गांड उसके पेट से टकराती। चूत की आवाज—गीली, चिपचिपी—पूरे हॉल में गूँजने लगी। तन्वी के स्तन हवा में झूल रहे थे। समीर ने एक हाथ आगे बढ़ाकर उसके स्तन को मसलना शुरू कर दिया। ये antarvasana jawan behen ki chudai आप pranaykatha पर पढ़ रहें है।

“इतनी चुलबुली चूत… तीन-तीन लड़कों से बातें… अब बता, कैसा लग रहा है अपनी भैया का लंड अंदर?”

तन्वी जवाब में सिर्फ कराह रही थी। “आह… अह… जोर से… भैया… और जोर से चोदो…”

समीर ने रफ्तार बढ़ा दी। अब धक्के इतने तेज थे कि तन्वी का पूरा शरीर आगे की तरफ झुक रहा था। उसने तन्वी के बाल पकड़कर उसके सिर को पीछे खींचा। कमर और भी गहरी झुक गई। लंड हर बार जड़ तक जा रहा था। तन्वी की चूत से पानी की आवाज आ रही थी। थप-थप।

समीर ने उसे पलट दिया। अब तन्वी की पीठ सोफे पर थी। उसने दोनों टाँगें अपने कंधों पर रख लीं। फिर से अंदर घुसा। इस कोण से और गहराई तक जा रहा था। तन्वी की आँखें पीछे पलटने लगीं। “भैया… इतना… इतना गहरा… मैं… मैं फिर से…”

समीर ने उसकी क्लिट पर अंगूठा रखा और तेज रगड़ने लगा। साथ में धक्के लगातार। तन्वी का दूसरा ऑर्गेज्म आया। इस बार और जोर से। उसकी चूत ने लंड को जकड़ लिया। अंदर की मांसपेशियाँ बार-बार सिकुड़ रही थीं। समीर ने रुककर नहीं। वह चोदता रहा। तन्वी की आवाज अब बैठने लगी थी। सिर्फ टूटी-फूटी कराहें निकल रही थीं।

फिर उसने तन्वी को साइड में कर दिया। एक टाँग ऊपर उठाई। लंड चूत में ही रखा और साइड से धक्के लगाने लगा। इस पोजीशन में तन्वी का एक स्तन उसके मुँह के पास था। उसने नोक को दाँतों से दबाया और चूसने लगा। तन्वी के नाखून उसकी पीठ में गड़ गए।

“भैया… अब… अब गांड में… डालो…”

समीर रुका। “क्या कहा?”

तन्वी की आँखें शर्म और वासना से भरी थीं। “गांड में… डाल दो… आज… आज सब कुछ…”

समीर ने लंड बाहर निकाला। थूक से गीला किया। तन्वी की गांड की सेंध पर रखा। धीरे-धीरे दबाव दिया। तन्वी की गांड बहुत टाइट थी। आधा अंदर जाने पर तन्वी ने तकिया दबा लिया। “आह्ह्ह… दर्द… धीरे…” ये antarvasana brother sister sex story आप pranaykatha पर पढ़ रहें है।

समीर रुका। फिर धीरे-धीरे और अंदर गया। पूरा। तन्वी की साँस रुक गई। समीर ने कुछ पल बिना हिले रुका रहा। फिर बहुत धीमे धक्के शुरू किए। गांड की गर्माहट और सिकुड़न पागल कर देने वाली थी। तन्वी की आवाजें अब दर्द और मजे दोनों की मिल चुकी थीं।

“आह… अह… भैया… पूरा… पूरा अंदर है… हिलो… धीरे-धीरे हिलो…”

समीर ने रफ्तार धीरे-धीरे बढ़ाई। एक हाथ से तन्वी की चूत में उंगलियाँ डाल दीं। चूत और गांड दोनों साथ। तन्वी पागलों की तरह कराहने लगी। उसका शरीर काँप रहा था। समीर की अपनी साँसें भी उखड़ने लगी थीं। वह और तेज होने लगा। हर धक्के के साथ तन्वी की गांड के गोलाकार हिस्से काँप रहे थे।

अंत में जब समीर आने वाला था, तो उसने लंड बाहर निकाला। तन्वी ने खुद मुँह खोल दिया। समीर ने उसके मुँह में और जीभ पर वीर्य की धार छोड़ दी। तन्वी ने निगल लिया। कुछ हिस्सा उसके होठों और ठोड़ी पर बह गया। वह हांफ रही थी। आँखें बंद थीं। पूरे शरीर पर पसीने की चमक थी।

समीर उसके पास लेट गया। दोनों की साँसें अभी भी तेज थीं। तन्वी ने धीरे से अपना चेहरा उसके सीने पर रख दिया। कुछ देर तक कोई नहीं बोला। फिर तन्वी ने बहुत धीमी आवाज में कहा—

“भैया… आज के बाद…”

समीर ने उसके बालों में उंगलियाँ फेरीं। “आज के बाद घर में जब भी अकेले होंगे… तेरी चूत और गांड दोनों मेरी रहेंगी। कोई और लड़का नहीं। समझी?”

तन्वी ने हल्के से सिर हिलाया। उसकी उंगलियाँ समीर के लंड पर वापस चली गईं। अभी भी आधा सख्त था। “फिर से… करोगे?”

समीर मुस्कुराया। “पूरी रात पड़ी है।”

उस रात उन्होंने तीन बार और किया। एक बार चूत में खड़े होकर, एक बार फिर गांड में, और आखिरी बार तन्वी ने खुद ऊपर बैठकर अपना काम पूरा किया। सुबह होते-होते तन्वी की चलने में हल्की तकलीफ हो रही थी। लेकिन जब समीर की नजर उससे मिलती, तो वह नजर झुका लेती और हल्के से मुस्कुरा देती।

मेघा के लौटने में अभी पंद्रह दिन बाकी थे। और हर रात, तन्वी की चढ़ती जवानी समीर के इंतजार में अपने कमरे का दरवाजा आधा खुला छोड़ देती।

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