plot: bhabhi ki chudai : Padosi ladke ne bhabhi ka kaam kiya aur badle mein bhabhi ne apni garam chut de di. Hardcore padosi bhabhi chudai ki kahani.
मेरा नाम रोहित है। उम्र तेईस साल। कॉलेज खत्म करके घर बैठे-बैठे फ्रीलांस काम कर रहा हूँ। पैसे कम हैं, समय ज्यादा। हमारे फ्लैट के बिल्कुल बगल वाले घर में भाभी रहती हैं। नाम है मेघा भाभी। उम्र तीस-इकतीस के बीच होगी। पति कोई प्राइवेट कंपनी में जॉब करते हैं और हफ्ते में चार-पाँच दिन बाहर ही रहते हैं। घर में ज्यादातर समय भाभी अकेली रहती हैं।
पहली नजर में भाभी सामान्य लगती थीं। लेकिन जब ध्यान से देखा तो शरीर उनका सामान्य नहीं था। कद पांच फुट पांच इंच के करीब। रंग गेहुँआ, लेकिन चमकदार। चेहरा गोल-मटोल। आँखें बड़ी और थोड़ी नम। बाल लंबे, काले, और हमेशा बाँधकर रखती थीं। लेकिन शरीर… शरीर उनका भारी था। स्तन बड़े और गोल, जो ब्लाउज के अंदर दबाए रखने पर भी अपना वजूद बताते थे। कमर अपेक्षाकृत पतली। और कूल्हे… कूल्हे इतने चौड़े और गोल कि साड़ी पहनने पर भी उनकी आकृति साफ नजर आती। चलते समय उनकी गांड में एक खास तरह का हिलना था जो अनजाने में ही नजर खींच लेता था। ये antarvasana bhabhi sex story आप pranaykatha पर पढ़ रहें है।
शुरुआत छोटी-छोटी मदद से हुई।
एक दिन भाभी का पानी का नल लीक कर रहा था। उन्होंने दरवाजा खटखटाया और कहा, “रोहित, थोड़ी मदद कर दोगे? प्लंबर को बुलाने में समय लगेगा।” मैं गया। नल ठीक करते समय वे मेरे बिल्कुल पास खड़ी रहीं। उनकी साड़ी का पल्लू बार-बार मेरे हाथ से छू जा रहा था। जब मैं झुककर नल कस रहा था तो उनकी जांघ मेरी बाजू से सट गई। उन्होंने हटाई नहीं। बल्कि बोलीं, “जोर से कसना। ढीला रह जाता है बार-बार।” उनकी आवाज मेरे कान के बिल्कुल पास थी। काम खत्म होने पर उन्होंने पानी का गिलास दिया। उंगलियाँ छू गईं। उन्होंने मुस्कुराकर कहा, “अब किसी काम का हो तो बताना।”
दूसरी घटना एक हफ्ते बाद हुई। भाभी का फर्नीचर शिफ्ट करना था। भारी डबल बेड। पति बाहर थे। उन्होंने फिर बुलाया। हम दोनों ने मिलकर बेड खिसकाया। गर्मी के कारण उनका ब्लाउज पसीने से गीला हो गया था। ब्लाउज के अंदर ब्रा की लकीरें साफ दिख रही थीं। जब हमने बेड को दीवार की तरफ धकेला तो उनकी छाती मेरे बाजू से जोर से दब गई। उन्होंने माफी माँगी, लेकिन हटने में देर लगाई। काम खत्म होने पर वे बोलीं, “तुम बिना पैसे के इतनी मदद कर देते हो। मैं तुम्हें क्या दूँ?” मैंने हँसकर कहा, “कुछ नहीं भाभी। पड़ोस का हक है।” उन्होंने मेरी आँखों में देखा और बोलीं, “हक तो बहुत कुछ होता है।”
तीसरी बार की मुलाकात और साफ थी। भाभी की रसोई की अलमारी टूट गई थी। भारी लकड़ी की। मैंने लगभग दो घंटे लगाकर ठीक की। पसीने से तर था। उन्होंने तौलिया दिया। फिर खुद ही मेरे माथे का पसीना पोंछने लगीं। उनकी उंगलियाँ मेरे चेहरे पर फिर रही थीं। अचानक उनका हाथ रुक गया। हमारी नजरें मिल गईं। कमरे में सिर्फ पंखे की आवाज थी। उन्होंने धीरे से कहा, “रोहित… तुम जो भी काम करते हो, अच्छे से करते हो।” मैं चुप रहा। उन्होंने मेरा हाथ पकड़ लिया। “कभी-कभी मुझे भी अच्छे से… काम करवाना होता है।”
उस दिन के बाद हवा बदल गई थी।
एक शाम उन्होंने अचानक बुलाया। पति तीन दिन के लिए बाहर गए थे। दरवाजा खोला तो वे सिर्फ पेटीकोट और ब्लाउज में थीं। बाल खुले थे। ब्लाउज के दो बटन खुले हुए थे। स्तनों की ऊपरी गोलाई साफ दिख रही थी। वे बोलीं, “अंदर आओ। एक काम है।”
अंदर जाकर देखा कि बेडरूम में भारी सामान बिखरा पड़ा था। उन्होंने कहा, “यह सब ऊपर की अलमारी में रखना है। अकेली से नहीं हो रहा।” मैं काम में लग गया। वे मेरे बिल्कुल पास खड़ी रहीं। हर बार जब मैं कुछ उठाता, उनकी छाती मेरे हाथ से छू जाती। एक बार तो जानबूझकर मेरे लंड वाले हिस्से से उनका कूल्हा रगड़ गया। मैंने साँस रोकी। उन्होंने पीछे मुड़कर देखा और हल्के से मुस्कुराईं।
काम खत्म होने पर वे दरवाजे की तरफ गईं और आड़ लगा दी। फिर मेरी तरफ मुड़ीं।
“रोहित,” उन्होंने धीरे से कहा, “तुम इतने दिनों से मेरी मदद कर रहे हो। बिना कुछ लिए। आज मैं तुम्हें तुम्हारे काम का बदला देना चाहती हूँ।”
मैं कुछ बोल नहीं पाया। उन्होंने आगे बढ़कर मेरा हाथ पकड़ा और अपनी छाती पर रख दिया। भारी, गरम, और नरम। निप्पल मेरे हथेली में सख्त हो रहा था।
“ले लो,” उन्होंने कहा। आवाज में कोई संकोच नहीं था। “जितना चाहो। आज रात भर।” ये antarvasana neighbour sex story आप pranaykatha पर पढ़ रहें है।
मैंने उनका ब्लाउज नीचे किया। स्तन बाहर आ गए—बड़े, गोल, गहरे रंग के निप्पल वाले। मैंने एक निप्पल मुंह में लिया और जोर से चूसा। उन्होंने मेरे बाल पकड़ लिए। उनकी लंबी साँस निकली। मैंने दूसरे स्तन को हाथ से मसला। वे पीछे हटते हुए बिस्तर तक पहुँचीं और खुद पेटीकोट खोलकर फेंक दिया। अब वे सिर्फ पैंटी में थीं। पैंटी के बीच का हिस्सा पहले से गीला था।
मैंने पैंटी नीचे की। उनकी चूत घने बालों वाली थी। फाँके मोटी और गहरी रंग की। बीच में चमक रही थी। मैंने उंगली से छुआ तो उंगली गीली हो गई। उन्होंने मेरे कंधे दबाए और खुद बिस्तर पर लेट गईं। जांघें फैला दीं।
“चूसो पहले,” उन्होंने कहा। “फिर जितना जोर से चोदना है चोदो।”
मैं उनके पैरों के बीच बैठ गया। जीभ निकाली और उनकी चूत पर फेरा। स्वाद थोड़ा खट्टा और नमकीन था। मैंने पूरे सपाट जीभ से ऊपर से नीचे तक चाटा। फिर उनके ऊपर वाले छोटे दाने को मुंह में लेकर चूसने लगा। वे कमर उठा-उठाकर मेरी जीभ से रगड़ रही थीं। उनकी आवाजें अब रुक-रुक कर निकल रही थीं। मैंने दो उंगलियाँ अंदर डाल दीं। अंदर बहुत गर्म और चिकना था। उंगलियाँ अंदर-बाहर करते हुए मैं उनका दाना चूसता रहा। वे एक बार जोर से काँपीं और उनकी चूत ने मेरी उंगलियों को जकड़ लिया। पानी की एक हल्की धारा निकली।
अब मैंने अपने कपड़े उतारे। मेरा लंड पूरी तरह तन चुका था—मोटा और नसों से भरा। मैं उनके ऊपर चढ़ गया। लंड का सिर उनकी चूत पर टिकाया। उन्होंने खुद अपनी जांघें और फैलाईं। मैंने धीरे से दबाव दिया। सिर अंदर गया। फिर पूरा लंड एक ही धक्के में धँस गया। उनकी आँखें बंद हो गईं और मुंह से लंबी आवाज निकली।
“आह्ह… मोटा है… पूरा अंदर तक…”
मैं हिलने लगा। लंबे-लंबे धक्के। उनकी चूत गीली होने के कारण आवाज तेज आ रही थी। हर बार जब मैं बाहर खींचता तो उनकी चूत का मांस मेरे लंड को पकड़े रहता। मैंने गति तेज कर दी। बिस्तर खटखटाने लगा। उनके भारी स्तन हर धक्के के साथ उछल रहे थे। मैंने झुककर एक निप्पल मुंह में ले लिया और जोर से चूसते हुए पेलता रहा।
थोड़ी देर बाद मैंने उन्हें पलटा। चारों हाथ-पैरों पर कर दिया। गांड ऊँची की। पीछे से फिर से घुस गया। इस कोण से और गहरा जा रहा था। मैंने उनकी कमर पकड़ी और जोर-जोर से ठोकरें मारने लगा। उनकी गांड की मांस हर धक्के के साथ काँप रही थी। आवाज अब और शर्मनाक हो गई थी—थप-थप, चपचप। उन्होंने तकिया दबा लिया था लेकिन आवाजें दब नहीं रही थीं।
“जोर से… और जोर से चोदो… काम का बदला पूरा दो…” वे बोल रही थीं।
मैं पागलों की तरह पेल रहा था। पसीने से दोनों के शरीर चमक रहे थे। उनकी चूत से पानी बहकर जांघों पर लग रहा था। अचानक उनके शरीर में कंपन दौड़ा। चूत ने मेरे लंड को जोर से जकड़ लिया। वे काँपने लगीं। मैंने रुकने के बजाय और तेज कर दिया। उनकी ऑर्गेज्म के दौरान मैं उन्हें ठोकता रहा। जब वे ढीली पड़ीं तो मैंने लंड बाहर निकाला।
उन्होंने खुद मुंह खोल लिया। मैं उनके चेहरे के पास गया। लंड उनके मुंह में डाल दिया। वे उसे चूसने लगीं—अपनी ही चूत के रस से लथपथ। मैं उनके मुंह में ही आने वाला था तभी उन्होंने लंड निकाला और अपनी जीभ पर रखा। मैंने छोड़ दिया। गाढ़ा वीर्य उनकी जीभ, होठों और ठोड़ी पर छूटने लगा। कुछ बूंदें स्तनों पर गिर गईं। उन्होंने सब निगल लिया और बाकी को उंगली से साफ करके चाट लिया।
बहुत देर तक दोनों हांफते रहे। कमरे में सिर्फ पंखे की आवाज और हमारी भारी साँसें थीं। ये antarvasana padosi bhabhi sex story आप pranaykatha पर पढ़ रहें है।
आखिर में वे बोलीं, “अब से जब भी कोई भारी काम हो… तुम करना। बदले में यह चूत तुम्हारी।”
मैंने उनकी जांघ पर हाथ रखा। अभी भी गीली और गर्म थी।
“कब तक?” मैंने पूछा।
वे मुस्कुराईं। “जब तक पति बाहर रहते हैं… और जब तक तुम्हारा लंड खड़ा होता है।”
उस रात मैं तीन बार और चुदा। कभी उनकी चूत में, कभी मुंह में, और आखिरी बार उनकी गांड में—जब उन्होंने खुद कहा, “अब पीछे वाली भी दे देती हूँ। काम ज्यादा किया है तुमने।”
सुबह होते-होते उनकी चाल बदल चुकी थी। और मेरे लंड में अभी भी उनकी चूत की गर्मी बाकी थी।
अगर ये pranaykatha सेक्स स्टोरी आपको अच्छी लगी तो हमे कमेंट मैं जरूर बताएं। और अगर आप अपनी कोई सेक्स स्टोरी हमसे भेजना चाहो तो जरूर भेजें हम आपकी hindi chudai story शेयर करेंगे।
