गरिमा भाभी पार्ट 5: दो मर्दों की रंडी और गाड़ी वाली रात

पिछले पार्ट में करण ने मेरी चूत और गाँड दोनों भर दी थीं और फिर बताया था कि वह विकास के बारे में सब जानता है। उसी रात मैंने करण को मैसेज कर दिया था कि विकास कल मुझे बुला रहा है


सुबह उठते ही फोन पर विकास का मैसेज चमक रहा था।

“दो बजे आना। पत्नी नहीं है। देर की तो आकाश को सब स्क्रीनशॉट भेज दूँगा।”

मैंने मैसेज पढ़ा और तुरंत करण को फॉरवर्ड कर दिया। कुछ ही पल में जवाब आया।

“जा। लेकिन फोन साथ रखना। साइलेंट पर। मैं सुनूँगा। और गरिमा… आज वह जो भी करे, तू मज़े लेना। मैं तुझे बाद में और मज़े दूँगा।”

मैसेज पढ़कर शरीर में एक अजीब सी सिहरन दौड़ गई। पहले सिर्फ़ धमकी थी। अब एक और मर्द दूर बैठकर मेरी चुदाई सुनने वाला था। डर और उत्तेजना दोनों एक साथ बढ़ गए।

आकाश को मैंने सामान्य चेहरा दिखाया। नाश्ता कराया, उन्हें ऑफिस भेजा। घर खाली होते ही मैंने नहाया। आज जानबूझकर आसानी से खुलने वाली साड़ी पहनी। अंदर कुछ नहीं पहना। न ब्रा, न पैंटी। सिर्फ़ साड़ी और ब्लाउज। शरीर पहले से तैयार था। चूत हल्की-हल्की गीली हो चुकी थी।

दो बजकर पाँच मिनट पहले मैंने विकास के दरवाज़े पर दस्तक दी। उसने तुरंत खोला और अंदर खींच लिया। दरवाज़ा बंद होते ही उसने मुझे दीवार से लगा दिया और जोर से चूमा। उसके मुँह में शराब की हल्की गंध थी।

“आज तो तू जल्दी आ गई रंडी। तड़प रही थी क्या?”

मैंने कुछ नहीं कहा। बस उसकी आँखों में देखा। विकास ने मेरी साड़ी का पल्लू झटके से हटाया। ब्लाउज के हुक खोले। स्तन बाहर आते ही उसने दोनों को जोर से दबाया और एक निप्पल मुँह में ले लिया। दाँतों से काटा। दर्द हुआ।

“आज तेरी गाँड और चूत दोनों फाड़ूँगा। और तू चुपचाप लेगी। समझी?”

उसने मुझे बेडरूम में धकेल दिया। बिस्तर पर गिराया और साड़ी पूरी तरह खोल दी। जब उसने देखा कि मैंने अंदर कुछ नहीं पहना है तो उसकी आँखें लाल हो गईं।

“कमीनी… बिना पैंटी के आई है। इतनी बेशर्म हो गई है।”

उसने अपना मोटा लंड निकाला और मेरे मुँह के सामने पकड़ लिया। “चूस। आज गले तक ले।”

मैंने उसका मोटा लंड पकड़ा और मुँह में डाल लिया। विकास ने मेरे बाल पकड़कर जोर-जोर से धक्के देने शुरू कर दिए। लंड गले तक जा रही थी। आँखों से पानी आने लगा। मैंने जानबूझकर आवाज़ें निकालीं – गंदी, गीली आवाज़ें। ताकि करण सुन सके।

“हाँ… ऐसी चूस… आकाश की बीवी बनके मेरे लंड को चूस…”

विकास ने मुझे लिटाया और बिना चाटे सीधे चूत में लंड धकेल दी। एक ही झटके में पूरी। मैंने जोर से कराह निकाली। वह मेरी दोनों टाँगें फैलाकर जानवर की तरह चोदने लगा। बिस्तर जोर-जोर से चरमरा रहा था।

“बता… कैसी लग रही है मेरी मोटी लंड?” “बहुत… बहुत मोटी… जोर से चोद… फाड़ दे…”

मैं जानबूझकर जोर-जोर से बोल रही थी। गालियाँ निकाल रही थी। करण को हर शब्द सुनाई दे रहा होगा। यही सोचकर मेरी चूत और भी सिकुड़ रही थी। विकास पागल हो रहा था। वह मुझे पलटाकर पीछे से चोदने लगा। एक हाथ से मेरे बाल पकड़े हुए था, दूसरे से मेरी गाँड के लोथों को फैला रहा था।

“आज गाँड में भी दूँगा। और इस बार तू खुद माँगेगी।”

उसने लंड निकालकर थूक लगाया और गाँड की सेंध पर लगा दी। धीरे-धीरे धक्का दिया। दर्द हुआ, लेकिन मैंने खुद पीछे धक्का दे दिया। पूरी लंड अंदर चली गई। विकास हैरान रह गया।

“कमीनी… अब तो खुद गाँड में ले रही है। पूरी रंडी बन गई है तू।”

वह जोर-जोर से गाँड मारने लगा। हर धक्के के साथ मेरी चीखें निकल रही थीं। मैंने साफ-साफ कहा, “हाँ… मार… जोर से मार… मेरी गाँड फाड़ दे… आकाश के घर में मेरी गाँड मार…”

विकास और बेकाबू हो गया। वह लगभग आधे घंटे तक बारी-बारी से चूत और गाँड में डालता रहा। कभी मुँह में ठूंस देता, कभी स्तन दबा-दबा कर चोदता। आखिर में उसने मुझे लिटाया और चूत में जोरदार धक्कों के साथ अंदर ही झड़ गया। गर्म पानी की तेज़ धार महसूस हुई।

वह मेरे ऊपर गिरा और भारी साँसें लेते हुए बोला, “अब तू पूरी तरह मेरी हो गई। रोज़ आना। समझी?”

मैंने सिर्फ़ सिर हिलाया। शरीर काँप रहा था। अंदर उसका पानी भरा हुआ था। विकास नहाई करने चला गया। मैंने जल्दी से साड़ी लपटी और फोन चेक किया। करण का मैसेज आया था।

“बहुत अच्छी आवाज़ें थीं। अब घर जा। रात को मैं तुझे मैसेज करूँगा।”

मैं घर वापस आई। नहाया। लेकिन शरीर से विकास की गंध पूरी तरह नहीं गई थी। शाम को आकाश आए। उन्होंने मुझे गले लगाया और कहा, “आज तुम थकी हुई लग रही हो।” मैंने मुस्कुराकर जवाब दिया, “हाँ, थोड़ी सफाई कर रही थी।”

रात को खाना खाकर आकाश जल्दी सो गए। मैं बाथरूम में बैठी फोन देख रही थी कि करण का मैसेज आया।

“बाहर आ। गाड़ी में हूँ। सोसायटी गेट के बाहर।”

दिल ज़ोर से धधकने लगा। मैंने हल्के कपड़े पहने और चुपके से बाहर निकली। करण की काली गाड़ी खड़ी थी। मैं अंदर बैठते ही उसने गाड़ी स्टार्ट की और थोड़ी दूर एक अंधेरे कोने में ले जाकर रोकी।

उसने मेरी तरफ देखा। “आज उसने तुझे कितना चोदा?” “बहुत…” मेरी आवाज़ काँप रही थी। “बता विस्तार से। कैसे चोदा, कहाँ झेड़ा, क्या-क्या कहा।”

मैंने बताया। हर डिटेल। करण सुनते हुए मेरा हाथ अपनी पेंट पर रख रहा था। उसका लंड पूरी तरह तन चुका था। जब मैंने गाँड वाली बात बताई तो उसने मेरा हाथ और जोर से दबाया।

“अब मेरी बारी,” उसने कहा और अपनी पेंट खोली। “चूस। आज सिर्फ़ मुँह से। और याद रखना – विकास तुझे धमका कर चोदता है। मैं तुझे अपनी मर्जी से चोदूँगा।”

मैंने उसका लंबा लंड पकड़ा और मुँह में ले लिया। करण ने मेरे बाल पकड़कर धीरे-धीरे धक्के दिए। गाड़ी के अंदर सिर्फ़ चूसने की गीली आवाज़ें गूँज रही थीं। कुछ देर बाद उसने मुझे सीट पर लिटाया, मेरी लेगिंग्स नीचे की और दो उँगलियाँ चूत में डाल दीं।

“आज वह अंदर झेड़ गया ना? अभी भी उसका पानी है अंदर?” “हाँ…” “अच्छा लगा? किसी और मर्द का पानी लेकर मेरे पास आना?”

मैंने आँखें बंद करके कहा, “हाँ… लगा…”

करण ने उँगलियाँ और तेज़ कीं। “अब से जब भी वह तुझे चोदे, तू मेरे पास आकर बताएगी। और कभी-कभी… मैं तुझे उसी हालत में चोदूँगा। उसके पानी के साथ।”

उसकी बात सुनकर मेरी चूत जोर से सिकुड़ गई। करण समझ गया। उसने उँगलियाँ निकालकर अपना लंड चूत पर टिकाया और एक झटके में अंदर डाल दिया। गाड़ी की सीट पर वह मुझे चोदने लगा। तेज़, गहरे धक्के। एक हाथ से मेरे गले को हल्का सा दबाए हुए था।

“तू अब दो मर्दों की रंडी बन गई है गरिमा। एक धमकी से चोदता है, दूसरा सुन-सुन कर।” “हाँ… बन गई हूँ… चोद मुझे…”

करण ने और जोर लगाया। गाड़ी हिल रही थी। मैं कराह रही थी। अचानक उसने लंड निकालकर मेरे मुँह में ठूंस दी और झड़ गया। गर्म पानी मुँह में भर गया। उसने कहा, “निगल। पूरा।”

मैंने निगल लिया। करण ने मेरा चेहरा सहलाते हुए कहा, “अब घर जा। आकाश को कुछ शक नहीं होना चाहिए। और हाँ… अगले हफ्ते मैं तुझे कहीं और ले जाऊँगा। जहाँ विकास जैसी जल्दबाजी नहीं होगी। जहाँ मैं तुझे घंटों चोदूँगा।”

वह मुझे सोसायटी के पास छोड़ गया। मैं चुपके से घर में दाखिल हुई। आकाश अभी भी सो रहे थे। मैं उनके बगल में लेट गई। शरीर में दो मर्दों का अहसास बाकी था। एक का पानी अंदर, दूसरे का स्वाद मुँह में।

आँखें बंद करते ही एहसास हुआ – अब मैं सिर्फ़ आकाश की पत्नी नहीं रही। अब मैं एक खेल का हिस्सा बन चुकी हूँ। जिसमें दो मर्द मुझे अपने-अपने तरीके से काबू में रखना चाहते हैं।

और सबसे बड़ा सच ये था… कि मुझे ये खेल पसंद आने लगा था।

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